सुप्रास्पाइनेटस टेंडिनाइटिस: कारण और संपूर्ण उपचार गाइड
कंधे का दर्द (Shoulder Pain) आज के समय में पीठ दर्द के बाद सबसे आम मस्कुलोस्केलेटल (musculoskeletal) समस्याओं में से एक है। अक्सर हम कंधे के हर दर्द को सामान्य खिंचाव समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन कई बार यह एक विशिष्ट स्थिति होती है जिसे सुप्रास्पाइनेटस टेंडिनाइटिस (Supraspinatus Tendinitis) कहा जाता है। यह स्थिति न केवल आपकी दिनचर्या को बाधित कर सकती है, बल्कि अगर इसका समय पर इलाज न किया जाए, तो यह गंभीर जटिलताओं का रूप ले सकती है।
यह लेख आपको सुप्रास्पाइनेटस टेंडिनाइटिस के बारे में वह सब कुछ बताएगा जो आपको जानना आवश्यक है—इसकी शारीरिक रचना (anatomy) से लेकर इसके कारण, लक्षण, सटीक निदान और सबसे प्रभावी उपचार विधियों तक।
सुप्रास्पाइनेटस टेंडिनाइटिस क्या है? (What is Supraspinatus Tendinitis?)
इस स्थिति को समझने के लिए, पहले हमें अपने कंधे की बनावट को थोड़ा समझना होगा। हमारा कंधा शरीर का सबसे अधिक मोबाइल (गतिशील) जोड़ है। इसे स्थिरता प्रदान करने के लिए चार मांसपेशियों का एक समूह काम करता है, जिसे रोटर कफ (Rotator Cuff) कहा जाता है। ये चार मांसपेशियां हैं:
- सुप्रास्पाइनेटस (Supraspinatus)
- इन्फ्रास्पाइनेटस (Infraspinatus)
- टेरेस माइनर (Teres Minor)
- सबस्कैपुलरिस (Subscapularis)
इनमें से सुप्रास्पाइनेटस सबसे महत्वपूर्ण और सबसे अधिक घायल होने वाली मांसपेशी है। यह कंधे के ब्लेड (Scapula) के ऊपर स्थित होती है और इसका टेंडन (कंडरा) ह्युमरस (हाथ की ऊपरी हड्डी) से जुड़ा होता है। इसका मुख्य कार्य हाथ को शरीर से दूर (side) में ऊपर उठाने में मदद करना और कंधे के जोड़ को सॉकेट में स्थिर रखना है।
सुप्रास्पाइनेटस टेंडिनाइटिस तब होता है जब इस विशिष्ट मांसपेशी के टेंडन में सूजन (inflammation), जलन या सूक्ष्म दरारें (microtears) आ जाती हैं। यह आमतौर पर तब होता है जब टेंडन कंधे की हड्डियों के बीच दब जाता है या घिस जाता है।
सुप्रास्पाइनेटस टेंडिनाइटिस के कारण (Causes)
सुप्रास्पाइनेटस टेंडिनाइटिस रातों-रात विकसित नहीं होता। यह अक्सर कई कारकों का परिणाम होता है:
1. दोहरावदार गतिविधियां (Repetitive Overhead Activities)
यह सबसे आम कारण है। कोई भी गतिविधि जिसमें आपको अपने हाथ को बार-बार सिर के ऊपर ले जाना पड़ता है, टेंडन पर अत्यधिक दबाव डालती है।
- खेल: तैराकी (Swimming), टेनिस, वॉलीबॉल, बेसबॉल (पिचिंग), और क्रिकेट (गेंदबाजी)।
- व्यवसाय: पेंटिंग करना, बढ़ईगीरी, भारी सामान उठाना, या निर्माण कार्य।
2. शोल्डर इम्पिंजमेंट सिंड्रोम (Shoulder Impingement Syndrome)
हमारे कंधे में एक हड्डी होती है जिसे एक्रोमियन (Acromion) कहते हैं। सुप्रास्पाइनेटस टेंडन इस हड्डी के नीचे से गुजरता है। कुछ लोगों में, यह स्थान स्वाभाविक रूप से संकरा होता है या हड्डी के बढ़ने (Bone Spur) के कारण संकरा हो जाता है। जब आप हाथ उठाते हैं, तो टेंडन इस हड्डी से रगड़ खाता है, जिससे सूजन होती है।
3. खराब शारीरिक मुद्रा (Poor Posture)
आधुनिक जीवनशैली में यह एक बड़ा योगदानकर्ता है।
- गोल कंधे (Rounded Shoulders): जब आप कंप्यूटर या फोन पर झुककर बैठते हैं, तो आपके कंधे आगे की ओर झुक जाते हैं। यह स्थिति कंधे के जोड़ में जगह कम कर देती है, जिससे टेंडन पर दबाव बढ़ता है।
- फॉरवर्ड हेड पोस्चर: गर्दन को आगे रखने से भी कंधे की बायोमैकेनिक्स बिगड़ जाती है।
4. उम्र और अधोपतन (Age-Related Degeneration)
जैसे-जैसे हमारी उम्र बढ़ती है (विशेषकर 40 के बाद), हमारे टेंडन्स में रक्त की आपूर्ति (Blood Supply) कम हो जाती है। कम रक्त प्रवाह का मतलब है कि छोटी-मोटी चोटें या ‘वियर एंड टियर’ जल्दी ठीक नहीं होते, जिससे टेंडिनाइटिस और अंततः टेंडन टूटने (Tear) का खतरा बढ़ जाता है।
5. अचानक आघात (Trauma)
कंधे के बल गिरना, हाथ के बल गिरना, या जिम में अचानक भारी वजन उठाने से भी टेंडन में तीव्र सूजन या चोट लग सकती है।
लक्षण: सुप्रास्पाइनेटस टेंडिनाइटिस इसे कैसे पहचानें? (Common Symptoms)
सुप्रास्पाइनेटस टेंडिनाइटिस का दर्द आमतौर पर धीरे-धीरे शुरू होता है और समय के साथ बढ़ता है। इसके मुख्य लक्षण निम्नलिखित हैं:
- विशिष्ट दर्द: दर्द आमतौर पर कंधे के सामने और बाहरी हिस्से (deltoid area) में महसूस होता है। कई बार दर्द हाथ के नीचे कोहनी तक फैल सकता है।
- गति के दौरान दर्द (Painful Arc): जब आप अपने हाथ को बगल से ऊपर उठाते हैं, तो आमतौर पर 60 डिग्री से 120 डिग्री के बीच तेज दर्द होता है। हाथ को पूरी तरह ऊपर ले जाने पर दर्द कम हो सकता है।
- रात में दर्द: प्रभावित करवट लेकर सोना लगभग असंभव हो जाता है। यह नींद में खलल डालने वाला एक प्रमुख लक्षण है।
- दैनिक कार्यों में कठिनाई: साधारण काम जैसे बालों में कंघी करना, शर्ट पहनना, पीछे की जेब से बटुआ निकालना, या महिलाओं के लिए ब्रा बांधना बेहद दर्दनाक हो जाता है।
- कमजोरी: हाथ में ताकत की कमी महसूस होना, विशेष रूप से हाथ को ऊपर उठाते समय।
- क्लिकिंग साउंड: कंधे को घुमाते समय ‘कट-कट’ की आवाज या कुछ अटकने (catching) का अहसास होना।
निदान (Diagnosis)
सही इलाज के लिए सही निदान बहुत जरूरी है। एक फिजियोथेरेपिस्ट या ऑर्थोपेडिक डॉक्टर निम्नलिखित विधियों का उपयोग करते हैं:
1. शारीरिक परीक्षण (Physical Examination)
डॉक्टर आपके कंधे को अलग-अलग दिशाओं में घुमाकर देखेंगे और टेंडन वाले स्थान को दबाकर दर्द की जांच करेंगे। वे कुछ विशेष टेस्ट कर सकते हैं:
- एम्प्टी कैन टेस्ट (Empty Can Test): इसमें आप अपने हाथ को कंधे की ऊंचाई तक उठाते हैं और अंगूठे को जमीन की तरफ (जैसे कैन खाली कर रहे हों) करते हैं। डॉक्टर हाथ को नीचे दबाते हैं और आप विरोध करते हैं। यदि दर्द हो, तो यह सुप्रास्पाइनेटस की समस्या का संकेत है।
- नीयर्स टेस्ट (Neer’s Test): यह इम्पिंजमेंट (दबाव) की जांच के लिए किया जाता है।
2. इमेजिंग टेस्ट (Imaging)
- एक्स-रे (X-ray): हालांकि एक्स-रे टेंडन को नहीं दिखाता, लेकिन यह हड्डियों के बढ़ने (Bone spurs) या गठिया को देखने में मदद करता है जो टेंडन को नुकसान पहुंचा रहे हो सकते हैं।
- अल्ट्रासाउंड (Ultrasound): यह टेंडन की सूजन और गतिशीलता को देखने का एक अच्छा तरीका है।
- एमआरआई (MRI): यह सबसे सटीक जांच है। यह सूजन की गंभीरता, टेंडन में किसी भी प्रकार की दरार (Tear), और आसपास की मांसपेशियों की स्थिति को स्पष्ट रूप से दिखाता है।
उपचार और पुनर्वास (Treatment and Rehabilitation)
सुप्रास्पाइनेटस टेंडिनाइटिस का इलाज 90% मामलों में बिना सर्जरी के संभव है। उपचार का लक्ष्य दर्द कम करना, सूजन घटाना और कंधे की कार्यक्षमता को बहाल करना है।
संरक्षण और दर्द निवारण (Protection & Pain Relief)
- आराम (Rest): उन गतिविधियों को तुरंत रोक दें जिनसे दर्द बढ़ता है (जैसे भारी वजन उठाना या बार-बार हाथ ऊपर करना)। लेकिन कंधे को पूरी तरह स्थिर न रखें, अन्यथा ‘फ्रोजन शोल्डर’ हो सकता है।
- बर्फ की सिकाई (Ice Therapy): दिन में 3-4 बार, 15-20 मिनट के लिए प्रभावित क्षेत्र पर आइस पैक लगाएं। यह सूजन और दर्द को कम करने में बहुत प्रभावी है।
- दवाएं (Medication): नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स (NSAIDs) जैसे इबुप्रोफेन या नेप्रोक्सन दर्द और सूजन को कम करने में मदद कर सकती हैं (डॉक्टर की सलाह पर ही लें)।
सुप्रास्पाइनेटस टेंडिनाइटिस फिजियोथेरेपी (Physiotherapy – The Core Treatment)
फिजियोथेरेपी इस स्थिति के लिए सबसे महत्वपूर्ण उपचार है। एक अच्छा फिजियोथेरेपिस्ट आपके लिए एक कस्टमाइज्ड एक्सरसाइज प्लान बनाएगा।
महत्वपूर्ण व्यायाम:
- पेंडुलम एक्सरसाइज (Pendulum Exercise): थोड़ा आगे झुकें और एक हाथ से मेज का सहारा लें। प्रभावित हाथ को नीचे ढीला छोड़ दें और गुरुत्वाकर्षण की मदद से उसे धीरे-धीरे गोल-गोल घुमाएं। यह जोड़ को खोलने और दर्द कम करने के लिए है।

आइसोमेट्रिक एक्सरसाइज (Isometric Exercises): दीवार के पास खड़े हों। अपनी कोहनी को 90 डिग्री पर मोड़ें और दीवार को बाहर की ओर धकेलें (बिना हाथ हिलाए)। 5 सेकंड तक रोकें। यह मांसपेशियों को बिना हिलाए मजबूत करता है।

स्कैपुलर रिट्रेक्शन (Scapular Retraction): सीधे बैठें और अपने कंधे के ब्लेड (पीछे की हड्डियों) को एक साथ पीछे की ओर खींचें, जैसे आप उनके बीच कोई पेन पकड़ने की कोशिश कर रहे हों। यह आपके पोस्चर को सुधारता है।

एक्सटर्नल रोटेशन (External Rotation): एक रेजिस्टेंस बैंड (इलास्टिक बैंड) का उपयोग करके, कोहनी को शरीर से सटाकर रखें और हाथ को बाहर की ओर खोलें। यह रोटेटर कफ को मजबूत करने का सबसे अच्छा व्यायाम है।

स्ट्रेचिंग (Stretching): छाती (Pectoralis muscles) और कंधे के पिछले हिस्से की स्ट्रेचिंग करने से जकड़न कम होती है और टेंडन पर दबाव घटता है।

उन्नत चिकित्सा (Advanced Therapies)
यदि व्यायाम और आराम से आराम नहीं मिलता है, तो डॉक्टर इन विकल्पों पर विचार कर सकते हैं:
- कॉर्टिकोस्टेरॉइड इंजेक्शन (Steroid Injections): यह शक्तिशाली सूजन-रोधी दवा सीधे टेंडन के पास इंजेक्ट की जाती है। यह अल्पकालिक राहत के लिए बहुत प्रभावी है, लेकिन इसका बार-बार उपयोग टेंडन को कमजोर कर सकता है।
- शॉकवेव थेरेपी (Shockwave Therapy): यह एक गैर-इनवेसिव प्रक्रिया है जो ध्वनि तरंगों का उपयोग करके टेंडन में रक्त प्रवाह को बढ़ाती है और हीलिंग को तेज करती है।
- पीआरपी (PRP) थेरेपी: इसमें आपके ही रक्त से प्लाज्मा निकालकर चोटिल टेंडन में इंजेक्ट किया जाता है, जो प्राकृतिक हीलिंग को बढ़ावा देता है।
सर्जरी (Surgery)
सर्जरी की आवश्यकता बहुत कम पड़ती है। यह केवल तब ही सुझाई जाती है जब:
- 6 महीने तक फिजियोथेरेपी और अन्य उपचारों का कोई असर न हो।
- टेंडन पूरी तरह से फट गया हो (Full-thickness tear)।
- हड्डी का बढ़ा हुआ हिस्सा (Bone spur) टेंडन को बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचा रहा हो।
- सर्जरी आमतौर पर आर्थ्रोस्कोपिक (दूरबीन विधि) द्वारा की जाती है, जो सुरक्षित और प्रभावी है।
रोकथाम और जीवनशैली में बदलाव (Prevention Tips)
इलाज से बेहतर बचाव है। यदि आप अपने कंधों को स्वस्थ रखना चाहते हैं, तो इन बातों का ध्यान रखें:
- वार्म-अप (Warm-up): जिम में वर्कआउट शुरू करने से पहले या कोई खेल खेलने से पहले कंधे का वार्म-अप जरूर करें।
- सही तकनीक: जिम में ‘अपराइट रोज़’ (Upright rows) या गर्दन के पीछे से बारबेल प्रेस (Behind-the-neck press) जैसे व्यायाम करने से बचें, क्योंकि ये सुप्रास्पाइनेटस पर बहुत दबाव डालते हैं।
- पोस्चर सुधरें: कंप्यूटर पर काम करते समय अपनी स्क्रीन को आंखों के स्तर पर रखें और कंधों को पीछे रखें। हर घंटे थोड़ा स्ट्रेच करें।
- संतुलित व्यायाम: केवल छाती (Chest) और बाइसेप्स के व्यायाम न करें। पीठ (Back) और रोटेटर कफ की मांसपेशियों को मजबूत करना कंधे के संतुलन के लिए जरूरी है।
- धीरे-धीरे बढ़ाएं: अपनी कसरत की तीव्रता या वजन को अचानक न बढ़ाएं।
निष्कर्ष (Conclusion)
सुप्रास्पाइनेटस टेंडिनाइटिस कंधे के दर्द का एक प्रमुख कारण है, लेकिन यह कोई स्थायी विकलांगता नहीं है। दर्द को नजरअंदाज करना सबसे बड़ी गलती हो सकती है, क्योंकि यह साधारण सूजन से ‘टेंडन टियर’ (फटने) की ओर बढ़ सकता है।
यदि आपको हाथ उठाने में दर्द हो रहा है या रात में सोने में परेशानी हो रही है, तो आज ही किसी विशेषज्ञ से सलाह लें। सही समय पर किया गया निदान, अनुशासित फिजियोथेरेपी और थोड़ी सी सावधानी से आप अपने कंधे को फिर से पूर्णतः स्वस्थ और मजबूत बना सकते हैं।
याद रखें, आपका शरीर आपको संकेत देता है—उसे सुनें और समय रहते देखभाल करें।
