लेटरल रेजेस (Lateral Raises - हाथ बगल में फैलाकर उठाना)
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लेटरल रेजेस (Lateral Raises): कंधों को चौड़ा और मजबूत बनाने की संपूर्ण गाइड

कंधे (Shoulders) शरीर के ऊपरी हिस्से के सबसे आकर्षक और महत्वपूर्ण अंगों में से एक हैं। एक चौड़ा और सुडौल कंधा न केवल आपकी शारीरिक सुंदरता को बढ़ाता है, बल्कि यह आपके शरीर के ऊपरी हिस्से (Upper Body) को एक ‘V-टेपर’ (V-taper) लुक देने में भी मदद करता है। जब कंधों की ट्रेनिंग की बात आती है, तो लेटरल रेजेस (Lateral Raises) को सबसे प्रभावी आइसोलेशन एक्सरसाइज (Isolation Exercise) माना जाता है।

यह लेख आपको लेटरल रेजेस के बारे में हर छोटी-बड़ी जानकारी प्रदान करेगा—इसे करने का सही तरीका, इसके फायदे, इसमें होने वाली सामान्य गलतियां और इसे अपने वर्कआउट रूटीन में शामिल करने के बेहतरीन तरीके।


Table of Contents

लेटरल रेजेस क्या है? (What is Lateral Raises?)

लेटरल रेजेस एक वेट ट्रेनिंग एक्सरसाइज है जो मुख्य रूप से आपके कंधों की मांसपेशियों, विशेष रूप से मिडल डेल्टोइड्स (Middle Deltoids) या लेटरल डेल्टोइड्स को लक्षित करती है। “लेटरल” का अर्थ है “बगल में” और “रेजेस” का अर्थ है “उठाना”। जैसा कि नाम से पता चलता है, इस व्यायाम में आप वजन (आमतौर पर डंबल) को अपने शरीर की बगल से ऊपर की ओर उठाते हैं।

यह एक्सरसाइज ओवरहेड प्रेस (Overhead Press) जैसी कंपाउंड एक्सरसाइज से अलग है, क्योंकि यह एक ही जोड़ (Joint)

लक्षित मांसपेशियां (Targeted Muscles)इस एक्सरसाइज को सही ढंग से समझने के लिए, यह जानना जरूरी है कि यह किन मांसपेशियों पर काम करती है:
  • लेटरल डेल्टोइड (Lateral/Middle Deltoid): यह इस व्यायाम की प्राथमिक मांसपेशी है। यह कंधे के बाहरी हिस्से में स्थित होती है। जब यह मांसपेशी विकसित होती है, तो यह कंधों को चौड़ाई और गोलाई प्रदान करती है।एंटरियरी डेल्टोइड (Anterior Deltoid): कंधे का अगला हिस्सा। हालांकि लेटरल रेजेस में इसका उपयोग कम होता है, लेकिन यह सहायक मांसपेशी के रूप में कार्य करता है।पोस्टीरियर डेल्टोइड (Posterior Deltoid): कंधे का पिछला हिस्सा। यह स्थिरता प्रदान करने में मदद करता है।ट्रैपेज़ियस (Trapezius): यह गर्दन और पीठ के ऊपरी हिस्से की मांसपेशी है। यदि आप वजन को बहुत ऊपर उठाते हैं या गलत फॉर्म का उपयोग करते हैं, तो ‘ट्रैप्स’ (Traps) ज्यादा सक्रिय हो जाते हैं, जो कि इस एक्सरसाइज का मुख्य उद्देश्य नहीं है।सुप्रास्पिनेटस (Supraspinatus): रोटेटर कफ की एक छोटी मांसपेशी जो हाथ को शुरूआती 15-30 डिग्री तक उठाने में मदद करती है।


  • लेटरल रेजेस करने के फायदे (Benefits of Lateral Raises)
  • कंधों की चौड़ाई बढ़ाता है: यदि आप चौड़े कंधे चाहते हैं, तो यह एक्सरसाइज अनिवार्य है। यह विशेष रूप से साइड डेल्ट्स को टारगेट करती है, जिससे कंधे बाहर की ओर निकलते हुए दिखते हैं।मसल्स आइसोलेशन (Muscle Isolation): कंपाउंड मूवमेंट्स (जैसे शोल्डर प्रेस) में ट्राइसेप्स भी शामिल हो जाते हैं, लेकिन लेटरल रेजेस में पूरा तनाव केवल कंधों पर आता है।कंधों की स्थिरता और गतिशीलता: यह रोटेटर कफ (Rotator Cuff) को मजबूत करने और कंधे के जोड़ की गतिशीलता (Mobility) में सुधार करने में मदद करता है।असममितता को ठीक करना (Correcting Asymmetry): चूंकि आप डंबल का उपयोग करते हैं, आप दोनों हाथों को स्वतंत्र रूप से काम कराते हैं। यदि आपका एक कंधा दूसरे से कमजोर है, तो यह एक्सरसाइज उस असंतुलन को ठीक करने में मदद कर सकती है।बेहतर पोश्चर (Better Posture): मजबूत कंधे आपकी मुद्रा (Posture) को सुधारने और ऊपरी पीठ को सीधा रखने में मदद करते हैं।


  • लेटरल रेजेस करने का सही तरीका (Step-by-Step Guide)लेटरल रेजेस देखने में आसान लग सकता है, लेकिन इसे गलत तरीके से करना बहुत आम है। सही फॉर्म के लिए इन चरणों का पालन करें:चरण 1: शुरुआती स्थिति (Starting Position)
  • दोनों हाथों में एक-एक डंबल लें। ऐसा वजन चुनें जिसे आप आसानी से नियंत्रित कर सकें (शुरुआत में हल्का वजन लें)।अपने पैरों को कंधों की चौड़ाई के बराबर खोलकर सीधे खड़े हो जाएं।अपनी पीठ को सीधा रखें, छाती को बाहर निकालें और कोर (पेट की मांसपेशियों) को टाइट रखें।डंबल को अपनी जांघों के पास बगल में पकड़ें। हथेलियां शरीर की ओर होनी चाहिए।महत्वपूर्ण: अपनी कोहनियों (Elbows) को पूरी तरह से लॉक न करें। उन्हें 10-15 डिग्री तक हल्का सा मोड़कर रखें।

  • चरण 2: वजन उठाना (The Execution)
  • सांस छोड़ते हुए (Exhale), धीरे-धीरे दोनों हाथों को बगल से ऊपर उठाएं।आंदोलन केवल कंधों से होना चाहिए। अपनी पीठ को झुलाएं नहीं और न ही शरीर का वेग (Momentum) इस्तेमाल करें।हाथों को तब तक उठाएं जब तक कि वे फर्श के समानांतर (कंधे की ऊंचाई तक) न आ जाएं।कोहनियों को कलाइयों से थोड़ा ऊपर या उनके बराबर रखने की कोशिश करें। कल्पना करें कि आप एक जग से पानी डाल रहे हैं (हल्का सा अंगूठा नीचे और छोटी उंगली ऊपर की ओर घुमाएं), हालांकि यह पूरी तरह जरूरी नहीं है और कुछ लोगों के लिए दर्दनाक हो सकता है।

  • चरण 3: शीर्ष स्थिति (Top Position)
  • जब हाथ कंधे की ऊंचाई पर हों, तो एक सेकंड के लिए रुकें (Hold)।इस बिंदु पर अपने डेल्टोइड्स में संकुचन (Contraction) महसूस करें।ध्यान दें: हाथों को कंधे के स्तर से बहुत ऊपर न ले जाएं, क्योंकि इससे तनाव डेल्टोइड्स से हटकर ट्रैपेज़ियस (Traps) पर चला जाता है।

  • चरण 4: नीचे लाना (Lowering)
  • सांस लेते हुए (Inhale), धीरे-धीरे और नियंत्रित तरीके से डंबल को वापस शुरुआती स्थिति में लाएं।वजन को गुरुत्वाकर्षण (Gravity) के भरोसे एकदम से नीचे न गिरने दें। नीचे लाते समय मांसपेशियों पर तनाव बनाए रखें।हाथों को पूरी तरह से शरीर से सटाकर आराम न दें; मांसपेशियों में तनाव बनाए रखने के लिए जांघों से थोड़ा दूर रोकें और फिर अगली रेप शुरू करें।


  • सामान्य गलतियां और उनसे कैसे बचें (Common Mistakes)जिम में लेटरल रेजेस करते समय लोग अक्सर ये गलतियां करते हैं, जिससे चोट लगने का खतरा बढ़ता है और परिणाम कम मिलते हैं:
  • बहुत भारी वजन उठाना (Ego Lifting):

  • गलती: बहुत से लोग भारी डंबल उठाते हैं और उन्हें ऊपर लाने के लिए शरीर को झुलाते (Swing) हैं।सुधार: लेटरल रेजेस एक ‘आइसोलेशन’ एक्सरसाइज है, न कि ‘पावर’ लिफ्ट। हल्का वजन लें और फॉर्म पर ध्यान दें। अगर आपको शरीर हिलाना पड़ रहा है, तो वजन कम करें।

  • कोहनियों को बहुत ज्यादा मोड़ना:
  • गलती: कोहनियों को 90 डिग्री तक मोड़ लेना।नुकसान: इससे लिवर आर्म (Lever Arm) छोटा हो जाता है और एक्सरसाइज आसान हो जाती है, जिससे साइड डेल्ट्स पर पूरा असर नहीं पड़ता।सुधार: कोहनियों को केवल हल्का सा (10-15 डिग्री) मोड़ें और पूरे मूवमेंट के दौरान उसे वैसे ही रखें।

  • हाथों को बहुत ऊपर उठाना:
  • गलती: हाथों को सिर के स्तर तक ले जाना।नुकसान: कंधे के जोड़ (Shoulder Impingement) में दर्द हो सकता है और तनाव डेल्ट्स से हटकर ट्रैप्स पर चला जाता है।सुधार: केवल फर्श के समानांतर (Parallel to floor) तक ही उठाएं।

  • गर्दन को तनाव देना:
  • गलती: वजन उठाते समय गर्दन को आगे झुकाना या सिकोड़ना।सुधार: गर्दन को न्यूट्रल रखें और सामने देखें।


  • विविधताएं (Variations of Lateral Raises)अपने वर्कआउट में बदलाव लाने और मांसपेशियों को अलग-अलग कोणों से हिट करने के लिए आप इन विविधताओं को आजमा सकते हैं:
  • सीटेड लेटरल रेजेस (Seated Lateral Raises):

  • बेंच पर बैठकर करने से आप शरीर के निचले हिस्से (पैरों और कूल्हों) से कोई भी मदद नहीं ले पाते। यह चीटिंग (Cheating) को रोकता है और फॉर्म को सख्त बनाता है।

  • केबल लेटरल रेजेस (Cable Lateral Raises):
  • केबल मशीन का उपयोग करने से मांसपेशियों पर लगातार तनाव (Constant Tension) बना रहता है, जो डंबल में अक्सर नीचे आते समय खत्म हो जाता है।इसे एक हाथ से (Unilateral) करना सबसे अच्छा होता है। केबल को अपने शरीर के पीछे या आगे से क्रॉस करके खींचें।

  • लीनिंग अवे लेटरल रेजेस (Leaning Away Lateral Raises):
  • एक पोल या मशीन को पकड़कर शरीर को एक तरफ झुकाएं और दूसरे हाथ से डंबल उठाएं।यह गति की सीमा (Range of Motion) को बढ़ाता है और डेल्टोइड्स के ऊपरी हिस्से पर अधिक जोर डालता है।

  • मशीन लेटरल रेजेस (Machine Lateral Raises):
  • कई जिम में इसके लिए विशेष मशीन होती है। यह शुरुआती लोगों के लिए बहुत अच्छी है क्योंकि यह आपको एक निश्चित पथ (Fixed Path) में गति करने के लिए मजबूर करती है, जिससे फॉर्म गलत होने की संभावना कम हो जाती है।


  • वर्कआउट में कैसे शामिल करें? (Programming & Tips)लेटरल रेजेस को अपने शोल्डर वर्कआउट या पुश डे (Push Day) रूटीन में शामिल करें।
  • कब करें: इसे आमतौर पर कंपाउंड एक्सरसाइज (जैसे ओवरहेड प्रेस) के बाद करना चाहिए। कंपाउंड एक्सरसाइज में भारी वजन उठाया जाता है, इसलिए उन्हें पहले करें जब आप ताज़ा हों। लेटरल रेजेस को वर्कआउट के अंत में ‘फिनिशर’ के रूप में करें।सेट्स और रेप्स (Sets & Reps):

  • चूंकि यह छोटी मांसपेशियों का व्यायाम है, इसलिए इसमें ‘हाई रेप्स’ (High Reps) ज्यादा फायदेमंद होते हैं।सेट्स: 3 से 4रेप्स: 12 से 20 (हल्के वजन के साथ)

  • प्रोग्रेसिव ओवरलोड (Progressive Overload):
  • हर हफ्ते वजन बढ़ाने की जल्दी न करें। 5 किलो से 7.5 किलो पर जाने में भी बहुत बड़ा अंतर आ सकता है।वजन बढ़ाने के बजाय, रेप्स बढ़ाएं, आराम का समय कम करें, या ‘टेम्पो’ (Tempo) को धीमा करें (जैसे: 1 सेकंड ऊपर, 3 सेकंड नीचे)।

  • एक प्रभावी शोल्डर रूटीन का उदाहरण:
  • ओवरहेड डंबल/बारबेल प्रेस: 3 सेट x 8-10 रेप्सलेटरल रेजेस (डंबल): 4 सेट x 12-15 रेप्सफ्रंट रेजेस (वैकल्पिक): 3 सेट x 12 रेप्सफेस पुल्स (Face Pulls) / रिवर्स पेक डेक: 3 सेट x 15 रेप्स (रियर डेल्ट्स के लिए)


  • क्या दर्द होना सामान्य है? (Safety Precautions)कंधे का जोड़ (Shoulder Joint) शरीर का सबसे जटिल और नाजुक जोड़ है।
  • इम्पिंजमेंट (Impingement): यदि आपको हाथ उठाते समय कंधे के अंदर चुभने वाला दर्द महसूस होता है, तो इसका मतलब है कि टेंडन हड्डी से टकरा रहा है।

  • समाधान: अपने हाथों को बिल्कुल साइड (90 डिग्री) में उठाने के बजाय, थोड़ा सा आगे की ओर (लगभग 30 डिग्री कोण पर – जिसे Scapular Plane कहते हैं) उठाएं। यह कंधे के जोड़ के लिए ज्यादा सुरक्षित है।

  • वार्म-अप: लेटरल रेजेस शुरू करने से पहले रोटेटर कफ की वार्म-अप एक्सरसाइज जरूर करें।

    निष्कर्ष (Conclusion)लेटरल रेजेस चौड़े, गोलाकार और शक्तिशाली कंधे बनाने की कुंजी है। यह एक ऐसी एक्सरसाइज है जिसमें “ताकत” से ज्यादा “तकनीक” मायने रखती है। अपने अहंकार (Ego) को दरवाजे पर छोड़ दें, हल्का वजन चुनें, और अपनी मांसपेशियों को जलता हुआ महसूस करें (Feel the Burn)।नियमित रूप से और सही फॉर्म के साथ इस व्यायाम को करने से न केवल आपकी शर्ट की फिटिंग बेहतर होगी, बल्कि आपके ऊपरी शरीर की ताकत और स्थिरता में भी जबरदस्त सुधार आएगा।

    पर काम करती है और मांसपेशियों को अलग-थलग (Isolate) करके उन पर तनाव डालती है।

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