हाई नीज़ (High Knees): दौड़ते हुए घुटने छाती तक लाने की इस बेहतरीन एक्सरसाइज की पूरी जानकारी
आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में खुद को फिट रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है। जिम जाने का समय न मिलना या महंगे उपकरणों का खर्च, कई लोगों को फिटनेस के लक्ष्य से दूर कर देता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक ऐसी बेहतरीन एक्सरसाइज है जिसे आप बिना किसी उपकरण के, अपने घर के किसी भी कोने में कर सकते हैं और पूरे शरीर का फैट तेजी से बर्न कर सकते हैं? जी हां, इस एक्सरसाइज का नाम है ‘हाई नीज़’ (High Knees), जिसे सरल भाषा में ‘दौड़ते हुए घुटने छाती तक लाना’ भी कहा जाता है।
हाई नीज़ एक उच्च तीव्रता वाली कार्डियो (Cardio) और प्लियोमेट्रिक (Plyometric) एक्सरसाइज है। यह न केवल आपके हृदय स्वास्थ्य (Cardiovascular health) को बेहतर बनाती है, बल्कि आपके पैरों, कोर (Core) और कूल्हों की मांसपेशियों को भी मजबूत करती है। इस लेख में हम हाई नीज़ एक्सरसाइज के फायदे, इसे करने का सही तरीका, इसमें काम करने वाली मांसपेशियां और सावधानियों के बारे में विस्तार से जानेंगे।
हाई नीज़ (High Knees) क्या है?
हाई नीज़ मूल रूप से एक ही जगह पर खड़े होकर दौड़ने (Running in place) का एक उन्नत रूप है। इसमें मुख्य अंतर यह है कि आपको अपने घुटनों को जितना हो सके उतना ऊपर (कमर या छाती के स्तर तक) उठाना होता है। यह एक डायनामिक मूवमेंट है जो आपके शरीर की गति, चपलता और सहनशक्ति को एक साथ चुनौती देता है। चूंकि इसमें आपके शरीर का वजन ही प्रतिरोध (Resistance) का काम करता है, इसलिए यह बॉडीवेट वर्कआउट का एक शानदार हिस्सा है।
हाई नीज़ करने का सही तरीका (How to Perform High Knees)
किसी भी एक्सरसाइज का पूरा फायदा तभी मिलता है जब उसे सही फॉर्म और तकनीक के साथ किया जाए। हाई नीज़ करने के लिए नीचे दिए गए स्टेप्स को ध्यान से फॉलो करें:
- शुरुआती मुद्रा: सबसे पहले एक समतल और साफ जगह पर सीधे खड़े हो जाएं। अपने पैरों के बीच कूल्हों के बराबर की दूरी (Hip-width apart) रखें।
- नज़र और शरीर का संतुलन: अपनी नजरें बिल्कुल सामने रखें। अपने सीने को बाहर की तरफ तान कर रखें और कंधों को रिलैक्स छोड़ दें। अपनी पीठ को बिल्कुल सीधा रखें।
- कोर को टाइट करें: अपने पेट की मांसपेशियों (Core) को अंदर की तरफ खींचें और टाइट रखें। इससे आपके शरीर को संतुलन मिलेगा और पीठ के निचले हिस्से पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ेगा।
- घुटने उठाना शुरू करें: अब अपने दाहिने घुटने को ऊपर की तरफ उठाएं। कोशिश करें कि घुटना आपकी कमर (Waist) के स्तर तक या उससे थोड़ा ऊपर छाती की तरफ आए।
- हाथों का मूवमेंट: जब आप दाहिना घुटना उठाएं, तो अपने बाएं हाथ को आगे की तरफ स्विंग करें (जैसे दौड़ते समय करते हैं)।
- पैर बदलना: दाहिने पैर को वापस जमीन पर लाएं और तुरंत बाएं घुटने को उसी तरह ऊपर उठाएं। इस बार दाहिना हाथ आगे की तरफ आएगा।
- गति बढ़ाएं: जब आप इस मूवमेंट के साथ सहज हो जाएं, तो अपनी गति (Speed) बढ़ा दें। आपको ऐसा महसूस होना चाहिए जैसे आप एक ही जगह पर बहुत तेजी से दौड़ रहे हैं और हर कदम पर घुटनों को ऊपर उछाल रहे हैं।
- सांस लेने की प्रक्रिया: जब घुटना ऊपर आए तो सांस बाहर छोड़ें (Exhale) और जब पैर नीचे जाए तो सांस अंदर लें (Inhale)। अपनी सांसों को सामान्य और लयबद्ध रखें।
हाई नीज़ में शामिल प्रमुख मांसपेशियां (Targeted Muscles)
हाई नीज़ एक फुल-बॉडी वर्कआउट की तरह काम करता है, लेकिन यह मुख्य रूप से शरीर के निचले हिस्से और कोर पर प्रहार करता है।
| मांसपेशी समूह (Muscle Group) | कार्य और प्रभाव |
| क्वाड्रिसेप्स (जांघों के सामने) | पैरों को ऊपर उठाने और गति प्रदान करने में मुख्य भूमिका निभाते हैं। |
| हैमस्ट्रिंग्स (जांघों के पीछे) | घुटनों को मोड़ने और पैरों को वापस जमीन पर लाने में मदद करते हैं। |
| ग्लूट्स (कूल्हे) | शरीर को संतुलन देने और उछाल (Power) पैदा करने का काम करते हैं। |
| काव्स (पिंडलियां) | जमीन से पैर उठाते समय और पंजों के बल उतरते समय ये सक्रिय रहती हैं। |
| कोर (पेट की मांसपेशियां) | शरीर को सीधा रखने और घुटनों को छाती तक खींचने में कोर की अहम भूमिका होती है। |
हाई नीज़ एक्सरसाइज के जबरदस्त फायदे (Benefits of High Knees)
इस आसान सी दिखने वाली एक्सरसाइज के शरीर पर चमत्कारी फायदे होते हैं। आइए इन्हें विस्तार से समझते हैं:
1. तेजी से कैलोरी और फैट बर्न करना हाई नीज़ एक हाई-इंटेंसिटी इंटरवल ट्रेनिंग (HIIT) का हिस्सा है। जब आप इसे तेजी से करते हैं, तो आपके दिल की धड़कन (Heart rate) तुरंत बढ़ जाती है। इससे शरीर का मेटाबॉलिज्म तेज होता है और आप कम समय में बहुत अधिक कैलोरी जलाते हैं। यह पेट की जिद्दी चर्बी (Belly fat) को कम करने में भी बहुत मददगार है।
2. हृदय स्वास्थ्य (Cardiovascular Health) में सुधार चूंकि यह एक बेहतरीन एरोबिक एक्सरसाइज है, यह आपके फेफड़ों और हृदय की कार्यक्षमता को बढ़ाती है। नियमित रूप से हाई नीज़ करने से शरीर में रक्त संचार (Blood circulation) बेहतर होता है और हृदय रोगों का खतरा कम होता है।
3. कोर की मजबूती (Core Strength) घुटनों को बार-बार कमर के स्तर से ऊपर उठाने के लिए आपके पेट की मांसपेशियों (Abs) को बहुत मेहनत करनी पड़ती है। अगर आप क्रंचेस (Crunches) करके थक गए हैं, तो कोर को मजबूत करने और एब्स बनाने के लिए हाई नीज़ एक शानदार विकल्प है।
4. निचले शरीर (Lower Body) की ताकत यह एक्सरसाइज आपके पैरों की हर एक मांसपेशी को चुनौती देती है। पिंडलियों से लेकर जांघों और कूल्हों तक, सब कुछ एक साथ काम करता है। इससे पैरों में न केवल ताकत आती है बल्कि उनका आकार (Toning) भी बेहतर होता है।
5. संतुलन और चपलता (Agility & Balance) जब आप एक पैर पर खड़े होकर दूसरे पैर को हवा में उछालते हैं, तो आपके शरीर का न्यूरोमस्कुलर संतुलन बेहतर होता है। यह एथलीट्स और रनर्स के लिए बहुत फायदेमंद है क्योंकि इससे दौड़ने की गति और स्ट्राइड (Stride) में सुधार होता है।
हाई नीज़ करते समय होने वाली सामान्य गलतियां (Common Mistakes to Avoid)
चोट से बचने और एक्सरसाइज का पूरा लाभ उठाने के लिए निम्नलिखित गलतियों से बचना चाहिए:
- पीछे की तरफ झुकना: कई लोग घुटने को ऊपर उठाने के चक्कर में अपने शरीर को पीछे की तरफ झुका लेते हैं। इससे पीठ के निचले हिस्से (Lower back) पर हानिकारक दबाव पड़ता है। हमेशा अपनी रीढ़ को सीधा रखें।
- घुटनों को कम उठाना: अगर आप घुटनों को केवल थोड़ा सा ही उठा रहे हैं, तो यह हाई नीज़ नहीं बल्कि सिर्फ एक ही जगह पर जॉगिंग करना (Jogging in place) है। पूरा फायदा पाने के लिए घुटनों को कमर के स्तर तक लाएं।
- एड़ियों पर उतरना: जमीन पर वापस आते समय कभी भी अपनी एड़ियों (Heels) के बल न उतरें। इससे आपके घुटनों और टखनों (Ankles) के जोड़ों पर जोर का झटका लगता है। हमेशा अपने पंजों (Balls of the feet) पर हल्के से लैंड करें।
- हाथों का उपयोग न करना: हाथों को शरीर के बगल में स्थिर रखने से गति और संतुलन बिगड़ता है। पैरों के साथ-साथ हाथों को भी एक्टिव रूप से स्विंग करें।
हाई नीज़ के विभिन्न प्रकार (Variations of High Knees)
अगर आप एक ही तरह की एक्सरसाइज से बोर हो गए हैं या आप बिगिनर हैं, तो आप इन वेरिएशन्स को ट्राई कर सकते हैं:
- वॉक हाई नीज़ (Walk High Knees): यह शुरुआती लोगों के लिए है। इसमें दौड़ने के बजाय खड़े होकर धीरे-धीरे एक-एक घुटने को छाती तक लाना होता है। यह जोड़ों पर बिल्कुल दबाव नहीं डालता।
- हाई नीज़ विद ट्विस्ट (High Knees with Twist): इसमें जब आप दाहिना घुटना उठाते हैं, तो अपने बाएं धड़ (Torso) को उसकी तरफ मोड़ते हैं (जैसे क्रॉस-क्रंच)। इससे साइड की चर्बी (Obliques) कम करने में मदद मिलती है।
- डंबल हाई नीज़ (Dumbbell High Knees): एडवांस लोग इसे करते समय अपने दोनों हाथों में हल्के डंबल (1-2 किलो) पकड़ सकते हैं। इससे हाथों और कंधों की मांसपेशियों पर अतिरिक्त काम होता है।
अपने वर्कआउट रूटीन में इसे कैसे शामिल करें?
हाई नीज़ को आप कई तरीकों से अपने फिटनेस शेड्यूल का हिस्सा बना सकते हैं:
- वार्म-अप के रूप में: मुख्य वर्कआउट शुरू करने से पहले शरीर को गर्म करने (Warm-up) के लिए 30 से 60 सेकंड तक हाई नीज़ करें।
- HIIT सर्किट में: 30 सेकंड बहुत तेजी से हाई नीज़ करें, फिर 15 सेकंड का आराम लें। ऐसा 4 से 5 बार दोहराएं। यह एक बेहतरीन फैट बर्निंग सेशन बन जाएगा।
- कार्डियो फिनिशर: वेट लिफ्टिंग या जिम सेशन के अंत में अपनी बची हुई ऊर्जा को इस्तेमाल करने के लिए 1 मिनट के हाई नीज़ के 3 सेट करें।
आवश्यक सावधानियां (Safety Precautions)
हालांकि हाई नीज़ एक बेहतरीन एक्सरसाइज है, लेकिन कुछ स्थितियों में सावधानी बरतना जरूरी है:
- जोड़ों का दर्द: यदि आपके घुटनों, टखनों या कूल्हों में चोट है या गठिया (Arthritis) जैसी समस्या है, तो यह एक्सरसाइज न करें। इसके बजाय आप ‘वॉक हाई नीज़’ कर सकते हैं या डॉक्टर से सलाह लें।
- सही जूते: नंगे पैर सख्त फर्श पर इसे करने से बचें। अच्छी कुशनिंग वाले स्पोर्ट्स शूज पहनकर ही हाई नीज़ करें ताकि लैंडिंग के झटके को सोखा जा सके।
- सतह का चुनाव: कंक्रीट या बहुत सख्त फर्श के बजाय इसे योगा मैट, घास या लकड़ी के फर्श पर करना ज्यादा सुरक्षित होता है।
- गर्भवती महिलाएं: गर्भावस्था के दौरान इस तरह की हाई-इम्पैक्ट और जंपिंग एक्सरसाइज से पूरी तरह बचना चाहिए।
निष्कर्ष (Conclusion)
‘हाई नीज़’ एक संपूर्ण, नो-इक्विपमेंट एक्सरसाइज है जो आपकी फिटनेस यात्रा में एक गेम-चेंजर साबित हो सकती है। यह न केवल आपका स्टैमिना बढ़ाती है बल्कि आपके पैरों और कोर को फौलाद की तरह मजबूत बनाती है। शुरुआत में भले ही आपको इसे 20 सेकंड करने में भी थकान महसूस हो, लेकिन नियमित अभ्यास से आप अपनी सहनशक्ति में जबरदस्त सुधार देखेंगे। बस अपनी फॉर्म का ध्यान रखें, सही डाइट लें और शरीर को पर्याप्त आराम दें।
