सेवर रोग (Sever’s Disease): फुटबॉल या क्रिकेट खेलने वाले बच्चों की एड़ी में दर्द का कारण और संपूर्ण इलाज
बचपन ऊर्जा, खेल-कूद और शारीरिक विकास का समय होता है। जब बच्चे मैदान पर फुटबॉल को किक मारते हैं या क्रिकेट की पिच पर दौड़ लगाते हैं, तो माता-पिता के रूप में उन्हें देखना बहुत सुखद होता है। लेकिन, यह खुशी तब चिंता में बदल जाती है जब आपका बच्चा खेल के बाद या सुबह उठते ही एड़ी में तेज दर्द की शिकायत करता है। कई बार वे दर्द के कारण लंगड़ा कर भी चलने लगते हैं।
यदि आपका बच्चा 8 से 14 वर्ष की आयु का है और वह फुटबॉल, क्रिकेट, बास्केटबॉल या दौड़ने वाले किसी भी खेल में सक्रिय है, तो एड़ी का यह दर्द ‘सेवर रोग’ (Sever’s Disease) हो सकता है। नाम सुनने में भले ही यह कोई गंभीर ‘बीमारी’ लगे, लेकिन वास्तव में यह बढ़ते बच्चों में होने वाली एक बहुत ही आम और पूरी तरह से ठीक होने वाली समस्या है।
इस विस्तृत लेख में हम जानेंगे कि सेवर रोग क्या है, यह युवा एथलीटों (विशेषकर फुटबॉल और क्रिकेट खेलने वालों) को क्यों प्रभावित करता है, और इसका सही इलाज व बचाव कैसे किया जा सकता है।
सेवर रोग (Sever’s Disease) क्या है?
चिकित्सीय भाषा में सेवर रोग को कैल्केनियल एपोफिसाइटिस (Calcaneal Apophysitis) कहा जाता है। यह कोई बीमारी नहीं है, बल्कि एड़ी की हड्डी (कैल्केनियस) की ग्रोथ प्लेट (Growth Plate) में होने वाली सूजन है।
ग्रोथ प्लेट क्या होती है? बच्चों और किशोरों की हड्डियां सिरों से बढ़ती हैं, जहां नरम कार्टिलेज का एक हिस्सा होता है जिसे ग्रोथ प्लेट कहा जाता है। जब बच्चा अपनी पूरी लंबाई प्राप्त कर लेता है, तो यह ग्रोथ प्लेट ठोस हड्डी में बदल जाती है।
एड़ी के पिछले हिस्से में एक प्रमुख ग्रोथ प्लेट होती है। पैर की पिंडली (Calf) की मांसपेशियां एक मजबूत बैंड के जरिए एड़ी से जुड़ी होती हैं, जिसे अकिलीज़ टेंडन (Achilles Tendon) कहते हैं। जब बच्चे तेजी से बढ़ते हैं (Growth Spurt), तो उनकी हड्डियां मांसपेशियों और टेंडन की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ती हैं। इससे अकिलीज़ टेंडन टाइट हो जाता है और एड़ी की नरम ग्रोथ प्लेट पर लगातार खिंचाव डालता है। खेल-कूद के दौरान बार-बार पड़ने वाले दबाव के कारण इस ग्रोथ प्लेट में सूजन और दर्द होने लगता है।
फुटबॉल और क्रिकेट खेलने वाले बच्चों में यह अधिक क्यों होता है?
सेवर रोग उन बच्चों में सबसे ज्यादा देखा जाता है जो ऐसे खेल खेलते हैं जिनमें बहुत अधिक दौड़ना, कूदना या कठोर सतह पर खेलना शामिल होता है।
- फुटबॉल (Football): फुटबॉल में लगातार दौड़ना, अचानक रुकना, दिशा बदलना और गेंद को किक मारना शामिल है। इसके अलावा, फुटबॉल खेलने के लिए इस्तेमाल होने वाले जूतों (Cleats/Studs) में अक्सर एड़ी को सपोर्ट देने वाला कुशन (Cushion) कम होता है। स्टड्स के कारण सारा दबाव सीधे एड़ी की ग्रोथ प्लेट पर पड़ता है, जिससे सूजन का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
- क्रिकेट (Cricket): क्रिकेट में तेज गेंदबाजी करने वाले (Fast Bowlers) बच्चों को रन-अप लेते समय और क्रीज पर पैर पटकते समय एड़ी पर जबरदस्त झटके का सामना करना पड़ता है। फील्डिंग के दौरान अचानक स्प्रिंट लगाना या बल्लेबाजों का विकेटों के बीच दौड़ना भी अकिलीज़ टेंडन पर अत्यधिक दबाव डालता है। इसके अलावा, भारत में कई बार बच्चे कड़क मिट्टी या सीमेंट की पिचों पर खेलते हैं, जो एड़ी के लिए झटके सोखने (Shock Absorption) का काम नहीं कर पातीं।
सेवर रोग के प्रमुख लक्षण (Symptoms)
यदि आपका बच्चा निम्नलिखित लक्षणों की शिकायत कर रहा है, तो यह सेवर रोग का संकेत हो सकता है:
- एड़ी के पीछे या नीचे दर्द: यह दर्द एक या दोनों पैरों में हो सकता है। दर्द अक्सर एड़ी के पिछले हिस्से में महसूस होता है।
- खेलने के बाद दर्द बढ़ना: आराम करते समय बच्चा ठीक महसूस कर सकता है, लेकिन जैसे ही वह फुटबॉल या क्रिकेट खेलकर लौटता है, दर्द तेज हो जाता है।
- लंगड़ा कर चलना: दर्द से बचने के लिए बच्चा एड़ी पर वजन डालने से कतराता है और पंजों के बल (Tiptoe) चलने की कोशिश करता है।
- दबाने पर दर्द (Squeeze Test): अगर आप बच्चे की एड़ी को पीछे से दोनों तरफ से अपनी उंगलियों से हल्का सा दबाएंगे, तो उसे तेज दर्द महसूस होगा। डॉक्टर इसी ‘स्क्वीज टेस्ट’ से इस समस्या की पहचान करते हैं।
- सुबह उठने पर जकड़न: सुबह सोकर उठने के बाद पहले कुछ कदम चलने में एड़ी में भारीपन और जकड़न महसूस होना।
- हल्की सूजन और लालिमा: एड़ी के आसपास हल्का सा सूजा हुआ या लाल हिस्सा दिखाई दे सकता है, हालांकि यह हमेशा नहीं होता।
सेवर रोग के मुख्य कारण और जोखिम कारक (Causes & Risk Factors)
- तेजी से शारीरिक विकास (Growth Spurts): यह सबसे बड़ा कारण है। 8 से 14 वर्ष की आयु में बच्चों की लंबाई अचानक बढ़ती है, जिससे टेंडन और मांसपेशियों में जकड़न आ जाती है।
- सपाट पैर (Flat Feet) या ऊंचे आर्च (High Arches): जिन बच्चों के पैर पूरी तरह से सपाट होते हैं या जिनके पैरों का आर्च बहुत ऊंचा होता है, उनके पैरों की बनावट के कारण एड़ी पर असमान दबाव पड़ता है।
- खराब या घिसे हुए जूते: ऐसे जूते पहनकर खेलना जिनमें सही आर्च सपोर्ट या शॉक-एब्जॉर्बिंग कुशन न हो।
- कठोर सतह पर खेलना: सीमेंट, कंक्रीट या बहुत सख्त मैदान पर लगातार दौड़ना।
- ओवरट्रेनिंग (Overtraining): बिना पर्याप्त आराम किए बहुत अधिक खेल खेलना या एक साथ कई खेलों में भाग लेना।
डॉक्टर से कब मिलें और निदान कैसे होता है?
अगर बच्चे के एड़ी का दर्द कुछ दिनों के आराम के बाद भी ठीक नहीं हो रहा है, तो ऑर्थोपेडिक डॉक्टर (हड्डियों के डॉक्टर) या पीडियाट्रिशियन को दिखाना जरूरी है।
निदान (Diagnosis): डॉक्टर आमतौर पर बच्चे के लक्षणों के बारे में पूछकर और एड़ी की शारीरिक जांच (Physical Examination) करके सेवर रोग का निदान कर लेते हैं। ‘स्क्वीज टेस्ट’ इसमें अहम भूमिका निभाता है। हालांकि सेवर रोग एक्स-रे (X-ray) में दिखाई नहीं देता, लेकिन डॉक्टर कभी-कभी एक्स-रे करवाने की सलाह देते हैं ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि एड़ी में कोई फ्रैक्चर (हड्डी का टूटना) या कोई अन्य गंभीर समस्या तो नहीं है।
सेवर रोग का संपूर्ण इलाज और प्रबंधन (Treatment)
माता-पिता के लिए सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि सेवर रोग के लिए किसी सर्जरी की आवश्यकता नहीं होती है। यह सही देखभाल और कुछ समय के आराम से पूरी तरह ठीक हो जाता है। इसके इलाज को हम कई चरणों में बांट सकते हैं:
1. R.I.C.E. फॉर्मूला अपनाएं
यह किसी भी खेल की चोट के लिए सबसे प्राथमिक और प्रभावी इलाज है:
- R – Rest (आराम): बच्चे को उन सभी गतिविधियों से कुछ समय के लिए रोक दें जो दर्द को बढ़ाती हैं (जैसे फुटबॉल खेलना, दौड़ना या कूदना)। एड़ी को आराम देना सबसे जरूरी है।
- I – Ice (बर्फ की सिकाई): दर्द और सूजन को कम करने के लिए दिन में 3-4 बार एड़ी पर 15-20 मिनट के लिए बर्फ की सिकाई करें। बर्फ को सीधे त्वचा पर न लगाएं, इसे तौलिये में लपेट कर उपयोग करें।
- C – Compression (दबाव): आप हल्की कम्प्रेशन बैंडेज (क्रेप बैंडेज) का उपयोग कर सकते हैं, लेकिन यह बहुत ज्यादा टाइट नहीं होनी चाहिए।
- E – Elevation (ऊंचाई): जब बच्चा लेटा हो, तो उसके पैर के नीचे एक या दो तकिए रखकर पैर को दिल के स्तर से ऊपर रखें। इससे सूजन कम होती है।
2. जूतों में बदलाव और ऑर्थोटिक्स (Footwear & Orthotics)
- हील कप्स या कुशन (Heel Cups): बाजार में सिलिकॉन या जेल से बने हील कप्स मिलते हैं जिन्हें बच्चे के जूतों के अंदर रखा जा सकता है। यह एड़ी को थोड़ा ऊंचा उठाते हैं, जिससे अकिलीज़ टेंडन पर खिंचाव कम होता है और यह जमीन से लगने वाले झटके को सोख लेते हैं।
- सही खेल के जूते: सुनिश्चित करें कि बच्चा अच्छी क्वालिटी के खेल के जूते पहन रहा हो। फुटबॉल के स्टड्स ऐसे लें जिनमें थोड़ा कुशन हो। कभी भी बच्चों को नंगे पैर या घिसे हुए जूतों में कठोर सतह पर खेलने न दें।
3. दवाइयां (Medications)
यदि दर्द बहुत अधिक है, तो डॉक्टर इबुप्रोफेन (Ibuprofen) या एसिटामिनोफेन (Acetaminophen) जैसी नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाएं (NSAIDs) लिख सकते हैं। ये दवाएं दर्द और सूजन को कम करने में मदद करती हैं। नोट: हमेशा डॉक्टर की सलाह पर ही बच्चों को दवा दें।
4. फिजियोथेरेपी और स्ट्रेचिंग व्यायाम (Stretching Exercises)
मांसपेशियों का लचीलापन बढ़ाना सेवर रोग के इलाज का मुख्य हिस्सा है। जब दर्द कुछ कम हो जाए, तो बच्चे को नियमित रूप से स्ट्रेचिंग करनी चाहिए:
- काफ स्ट्रेच (Calf Stretch): दीवार की ओर मुंह करके खड़े हों। दोनों हाथों को दीवार पर रखें। जिस पैर में दर्द है उसे पीछे रखें और दूसरे पैर को आगे घुटने से मोड़ें। पीछे वाले पैर की एड़ी जमीन पर टिकी होनी चाहिए। अब धीरे-धीरे दीवार की तरफ झुकें जब तक कि पीछे वाले पैर की पिंडली में खिंचाव महसूस न हो। इसे 20-30 सेकंड तक रोकें और 3 बार दोहराएं।
- प्लांटर फैशिया स्ट्रेच (Plantar Fascia Stretch): कुर्सी पर बैठकर दर्द वाले पैर को दूसरे घुटने पर रखें। अपने हाथों से पैर के पंजों और उंगलियों को अपनी पिंडली की तरफ खींचे। इससे पैर के निचले हिस्से और एड़ी के बैंड में खिंचाव आएगा।
5. गंभीर मामलों में इलाज
बहुत ही दुर्लभ मामलों में, जहां दर्द असहनीय होता है और बच्चा बिल्कुल पैर नहीं रख पाता, डॉक्टर कुछ हफ्तों के लिए वॉकिंग बूट (Walking Boot) या कास्ट (प्लास्टर) लगाने की सलाह दे सकते हैं ताकि एड़ी को पूरी तरह से आराम मिल सके।
खेल में वापसी (Return to Play)
माता-पिता और बच्चे का सबसे आम सवाल होता है- “मैं दोबारा कब खेल पाऊंगा?” खेल में वापसी धीरे-धीरे होनी चाहिए। जब बच्चा बिना दर्द के चल सके, सामान्य रूप से रोजमर्रा के काम कर सके और एड़ी दबाने पर दर्द न हो, तब वह हल्की रनिंग शुरू कर सकता है। सीधा मैच खेलने के बजाय, पहले हल्की जॉगिंग करें, फिर तेज दौड़ना शुरू करें और अंत में खेल की पूरी प्रैक्टिस में उतरें। यदि वापसी के बाद दर्द फिर से लौटता है, तो एक कदम पीछे हटें और कुछ दिन और आराम करें।
बचाव के तरीके (Prevention)
एक बार ठीक होने के बाद या बच्चों को सेवर रोग से बचाने के लिए निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:
- वार्म-अप और कूल-डाउन: फुटबॉल या क्रिकेट शुरू करने से पहले 10-15 मिनट का वार्म-अप (विशेषकर पिंडलियों की स्ट्रेचिंग) और खेल खत्म होने के बाद कूल-डाउन बहुत जरूरी है।
- वजन का नियंत्रण: अधिक वजन (Obesity) होने से एड़ी पर ज्यादा दबाव पड़ता है। बच्चे को संतुलित आहार देकर उसका वजन नियंत्रित रखें।
- विभिन्न खेलों में हिस्सा लेना (Avoid Early Specialization): साल भर केवल एक ही खेल (जैसे सिर्फ फुटबॉल) खेलने से एक ही मांसपेशी पर लगातार दबाव पड़ता है। बच्चों को अलग-अलग खेल खेलने के लिए प्रोत्साहित करें (जैसे स्विमिंग या साइकिलिंग), जिनसे एड़ी पर दबाव कम पड़ता हो।
- नरम सतह का चुनाव: जहां तक संभव हो, बच्चों को घास वाले मैदानों में खेलने दें। कंक्रीट या डामर की सड़कों पर दौड़ने से बचें।
निष्कर्ष
सेवर रोग (Sever’s Disease) भले ही बच्चे और माता-पिता दोनों के लिए निराशाजनक और दर्दनाक अनुभव हो सकता है, लेकिन यह समझना महत्वपूर्ण है कि यह कोई स्थायी विकलांगता या गठिया जैसी बीमारी नहीं है।
यह केवल विकास के चरण का एक हिस्सा है। जैसे ही बच्चे की उम्र 14-15 वर्ष के आसपास पहुंचेगी और उसकी एड़ी की ग्रोथ प्लेट पूरी तरह से ठोस हड्डी में बदल जाएगी, यह समस्या अपने आप हमेशा के लिए खत्म हो जाएगी। तब तक, सही जूतों का चुनाव, बर्फ की सिकाई, स्ट्रेचिंग और जरूरत पड़ने पर उचित आराम आपके नन्हे एथलीट को मैदान पर दोबारा चमकने में मदद करेगा। बच्चे के दर्द को कभी नजरअंदाज न करें, सही समय पर उठाया गया कदम उसे उसके पसंदीदा खेल का आनंद बिना किसी रुकावट के लेने में मदद करेगा।
