सेवर डिजीज' (Sever's Disease): 8 से 14 साल के बच्चों की एड़ी का दर्द, जो हड्डी के विकास के दौरान होता है
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सेवर डिजीज (Sever’s Disease): 8 से 14 साल के बच्चों की एड़ी का दर्द, जो हड्डी के विकास के दौरान होता है

अक्सर माता-पिता यह शिकायत लेकर आते हैं कि उनका बच्चा जो दिन भर खेलता-कूदता रहता था, अचानक एड़ी में दर्द की शिकायत कर रहा है। शुरुआत में इसे मामूली चोट या थकान मानकर नजरअंदाज कर दिया जाता है, लेकिन जब बच्चा लंगड़ा कर चलने लगे या सुबह उठते ही एड़ी जमीन पर रखने में तकलीफ महसूस करे, तो चिंता बढ़ जाती है। अगर आपके बच्चे की उम्र 8 से 14 वर्ष के बीच है और वह इस तरह के दर्द से गुजर रहा है, तो बहुत संभव है कि उसे सेवर डिजीज (Sever’s Disease) हो।

चिकित्सीय भाषा में इसे कैल्केनियल एपोफिसाइटिस (Calcaneal Apophysitis) कहा जाता है। यह कोई गंभीर बीमारी नहीं है, बल्कि बढ़ते बच्चों में हड्डी के विकास (Growth Spurt) के दौरान होने वाली एक आम समस्या है। आइए, इस लेख में विस्तार से समझते हैं कि सेवर डिजीज क्या है, इसके क्या कारण हैं, और सही फिजियोथेरेपी के जरिए इसका निवारण कैसे किया जा सकता है।

सेवर डिजीज (Sever’s Disease) क्या है?

सेवर डिजीज बच्चों की एड़ी की हड्डी (Calcaneus) के निचले और पिछले हिस्से में होने वाली सूजन और दर्द की स्थिति है। बच्चों में हड्डियां पूरी तरह से कठोर नहीं होती हैं; उनके सिरों पर नरम कार्टिलेज का एक हिस्सा होता है जिसे ‘ग्रोथ प्लेट’ (Growth Plate) कहा जाता है। यहीं से हड्डी की लंबाई और आकार बढ़ता है।

8 से 14 साल की उम्र में बच्चों का शरीर तेजी से विकास कर रहा होता है (Growth Spurt)। इस दौरान अक्सर हड्डियां, मांसपेशियों और टेंडन्स (मांसपेशियों को हड्डी से जोड़ने वाले ऊतक) की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ती हैं। पैर के पिछले हिस्से में मौजूद मजबूत ‘एच्लीस टेंडन’ (Achilles tendon) एड़ी की इसी ग्रोथ प्लेट से जुड़ा होता है। जब हड्डी तेजी से बढ़ती है, तो एच्लीस टेंडन तन जाता है और छोटा महसूस होता है।

खेलने, दौड़ने या कूदने जैसी शारीरिक गतिविधियों के दौरान, यह कसा हुआ टेंडन एड़ी की नरम ग्रोथ प्लेट पर बार-बार खिंचाव (Traction) डालता है। इस लगातार खिंचाव और दबाव के कारण ग्रोथ प्लेट में सूजन आ जाती है, जिसे सेवर डिजीज कहा जाता है।

सेवर डिजीज के मुख्य कारण (Causes of Sever’s Disease)

यह समस्या उन बच्चों में अधिक देखी जाती है जो शारीरिक रूप से बहुत अधिक सक्रिय होते हैं। इसके कुछ प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:

  1. शारीरिक गतिविधियों की अधिकता (Overuse): फुटबॉल, बास्केटबॉल, जिम्नास्टिक या एथलेटिक्स जैसे खेलों में भाग लेने वाले बच्चों में, जहाँ बार-बार दौड़ना और कूदना शामिल होता है, एड़ी पर बहुत अधिक दबाव पड़ता है।
  2. हड्डी का तेजी से विकास (Growth Spurts): यह समस्या आमतौर पर लड़कियों में 8-13 वर्ष और लड़कों में 10-15 वर्ष की आयु में अधिक होती है, क्योंकि इसी दौरान वे तेजी से लंबाई पकड़ते हैं।
  3. गलत फुटवियर (Improper Footwear): ऐसे जूते पहनना जिनमें एड़ी को सही कुशनिंग (Cushioning) या सपोर्ट न मिले। विशेष रूप से क्लीट्स (Cleats – फुटबॉल वाले जूते) पहनने से एड़ी पर सीधा दबाव पड़ता है।
  4. बायोमैकेनिकल कारण (Biomechanical Factors): फ्लैट फीट (Flat feet) या बहुत अधिक आर्च (High Arches) वाले पैरों में वजन का वितरण सही से नहीं हो पाता, जिससे एड़ी पर अतिरिक्त तनाव पड़ता है।
  5. मोटापा (Obesity): शरीर का अतिरिक्त वजन भी बच्चों की एड़ी की नरम ग्रोथ प्लेट पर भारी दबाव डालता है।

सेवर डिजीज के लक्षण (Symptoms)

एक माता-पिता या कोच के रूप में, आपको निम्नलिखित लक्षणों पर ध्यान देना चाहिए:

  • एड़ी के पिछले या निचले हिस्से में दर्द: यह दर्द एक या दोनों पैरों में हो सकता है।
  • गतिविधि के बाद दर्द बढ़ना: दौड़ने, कूदने या खेल खेलने के दौरान या तुरंत बाद दर्द का बढ़ जाना। आराम करने पर दर्द में कमी आना।
  • लंगड़ा कर चलना: दर्द से बचने के लिए बच्चा अपनी एड़ी जमीन पर रखने से कतराता है और पंजों के बल (Tip-toe) चलने लगता है।
  • दबाने पर दर्द (Squeeze Test): अगर आप बच्चे की एड़ी को दोनों तरफ से हल्का सा दबाते हैं, तो उसे तेज दर्द महसूस होता है।
  • सुबह के समय जकड़न: सुबह सोकर उठने पर पैर जमीन पर रखने में दर्द और जकड़न महसूस होना।
  • सूजन और लालिमा: कुछ मामलों में एड़ी के आसपास हल्की सूजन भी देखी जा सकती है।

सेवर डिजीज का निदान (Diagnosis)

इसका निदान मुख्य रूप से एक योग्य फिजियोथेरेपिस्ट या ऑर्थोपेडिक डॉक्टर द्वारा शारीरिक परीक्षण के आधार पर किया जाता है। डॉक्टर बच्चे की एड़ी को दबाकर (Squeeze Test) देखते हैं और टेंडन के लचीलेपन की जांच करते हैं।

आमतौर पर सेवर डिजीज का पता लगाने के लिए एक्स-रे (X-ray) की आवश्यकता नहीं होती है, क्योंकि ग्रोथ प्लेट कार्टिलेज से बनी होती है जो एक्स-रे में स्पष्ट नहीं दिखती। हालांकि, किसी फ्रैक्चर या हड्डी से जुड़ी अन्य समस्याओं को खारिज करने के लिए एक्स-रे करवाया जा सकता है।

सेवर डिजीज का इलाज और फिजियोथेरेपी प्रबंधन (Treatment & Physiotherapy)

सेवर डिजीज एक “Self-Limiting” समस्या है, जिसका अर्थ है कि जैसे ही बच्चे की ग्रोथ प्लेट पूरी तरह से हड्डी में बदल कर सख्त हो जाती है (आमतौर पर 15-16 वर्ष की आयु तक), यह समस्या अपने आप हमेशा के लिए खत्म हो जाती है। लेकिन तब तक दर्द को प्रबंधित करने और बच्चे को उसकी सामान्य गतिविधियों में वापस लाने के लिए फिजियोथेरेपी और सही देखभाल अत्यंत आवश्यक है।

1. R.I.C.E. प्रोटोकॉल (प्रारंभिक देखभाल):

  • Rest (आराम): दर्द पैदा करने वाली गतिविधियों (दौड़ना, कूदना) को कुछ समय के लिए रोक दें। बच्चों को स्विमिंग या साइकिलिंग जैसी लो-इम्पैक्ट एक्टिविटीज के लिए प्रेरित करें।
  • Ice (बर्फ की सिकाई): दिन में 2-3 बार, विशेष रूप से खेलने के बाद, 15-20 मिनट के लिए एड़ी पर बर्फ की सिकाई करें। इससे सूजन और दर्द में तुरंत राहत मिलती है।
  • Compression & Elevation: पैर को थोड़ा ऊपर उठाकर रखने से सूजन कम होती है।

2. फुटवियर और ऑर्थोटिक्स (Footwear Modifications):

  • हील कप (Heel Cups/Cushions): जूतों के अंदर सिलिकॉन के हील कप या कुशन डालने से एड़ी पर पड़ने वाला दबाव कम होता है। यह एड़ी को थोड़ा ऊंचा उठा देता है, जिससे एच्लीस टेंडन पर खिंचाव कम हो जाता है।
  • सपोर्टिव जूते: नंगे पैर चलने से बचें। घर के अंदर भी सॉफ्ट स्लिपर का इस्तेमाल करें।

3. प्रभावी फिजियोथेरेपी व्यायाम (Physiotherapy Exercises): फिजियोथेरेपी इस समस्या के जड़ तक पहुँच कर उसे ठीक करने में सबसे अहम भूमिका निभाती है। मुख्य फोकस पिंडली की मांसपेशियों (Calf Muscles) और एच्लीस टेंडन के लचीलेपन को बढ़ाने पर होता है।

  • काफ स्ट्रेच (Calf Stretch / Wall Stretch): दीवार की ओर मुंह करके खड़े हों। जिस पैर में दर्द है, उसे पीछे रखें और दूसरे पैर को आगे मोड़ें। दोनों एड़ियों को जमीन पर सटाकर रखें और दीवार की ओर झुकें जब तक कि पीछे वाले पैर की पिंडली में खिंचाव महसूस न हो। इसे 30 सेकंड तक रोकें और 3-4 बार दोहराएं।
  • तौलिया स्ट्रेच (Towel Stretch): जमीन पर पैर सीधे करके बैठ जाएं। एक तौलिये को पैर के पंजे के ऊपरी हिस्से में फंसाएं और अपनी ओर खींचें। इस खिंचाव को 30 सेकंड तक बनाए रखें।
  • प्लांटर फेशिया मसाज (Plantar Fascia Massage): एक ठंडी पानी की बोतल या टेनिस बॉल को पैर के तलवे के नीचे रखकर आगे-पीछे घुमाएं (रोल करें)। यह तलवे की मांसपेशियों को आराम देता है।
  • स्ट्रेंथनिंग (Strengthening): जब दर्द कम हो जाए, तो शिन (पैर के आगे की हड्डी) और एंकल की मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए थेराबैंड (Theraband) के साथ एक्सरसाइज करवाई जाती हैं।

4. टेपिंग तकनीक (Kinesiology Taping): एक प्रशिक्षित फिजियोथेरेपिस्ट काइन्सियोलॉजी टेप (K-Tape) का उपयोग करके एड़ी और आर्च को सपोर्ट दे सकता है, जिससे खेलने के दौरान एड़ी पर तनाव काफी कम हो जाता है और बच्चा बेहतर महसूस करता है।

बचाव और माता-पिता के लिए सुझाव (Prevention & Tips)

चूंकि यह विकास से जुड़ी प्रक्रिया है, इसलिए इसे पूरी तरह रोका नहीं जा सकता, लेकिन इसकी गंभीरता को कम जरूर किया जा सकता है:

  • सही जूते चुनें: बच्चों के जूते उनके पैर के आर्च और एड़ी को सपोर्ट करने वाले होने चाहिए। जब जूतों का सोल घिस जाए, तो उन्हें तुरंत बदल दें।
  • वार्म-अप और स्ट्रेचिंग: किसी भी खेल को शुरू करने से पहले और खत्म करने के बाद पिंडलियों की स्ट्रेचिंग को बच्चे की रूटीन का हिस्सा बनाएं।
  • ओवरट्रेनिंग से बचें: बच्चों को साल भर एक ही खेल खेलने के बजाय अलग-अलग खेल खेलने के लिए प्रोत्साहित करें ताकि एक ही मांसपेशी पर लगातार दबाव न पड़े।
  • वजन पर नियंत्रण: संतुलित आहार के माध्यम से बच्चे का वजन नियंत्रित रखें ताकि पैरों पर अतिरिक्त भार न पड़े।

निष्कर्ष (Conclusion)

सेवर डिजीज (Sever’s Disease) बच्चों और माता-पिता के लिए तनावपूर्ण हो सकता है, विशेषकर तब जब बच्चा खेलों में बहुत रुचि रखता हो। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि यह एक अस्थायी स्थिति है। दर्द को नजरअंदाज करके खेलते रहने से समस्या बढ़ सकती है। सही समय पर आराम, बर्फ की सिकाई, और नियमित फिजियोथेरेपी की मदद से आपका बच्चा कुछ ही हफ्तों में बिना दर्द के अपनी मनपसंद गतिविधियों में वापस लौट सकता है।

अगर आपके बच्चे की एड़ी का दर्द कुछ दिनों के आराम के बाद भी कम नहीं हो रहा है, तो बिना देरी किए विशेषज्ञ से सलाह लें। सही मार्गदर्शन और उपचार के लिए आप Samarpan Physiotherapy Clinic से संपर्क कर सकते हैं, जहाँ हम बच्चों की मस्कुलोस्केलेटल (हड्डियों और मांसपेशियों) से जुड़ी समस्याओं का सटीक और वैज्ञानिक ढंग से मूल्यांकन कर बेहतरीन फिजियोथेरेपी इलाज प्रदान करते हैं।

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