मिथक या सच: क्या उंगलियां चटकाने (Knuckle Cracking) से गठिया होता है?
हम में से कई लोगों की आदत होती है कि जब वे तनाव में होते हैं, बहुत देर तक टाइपिंग कर रहे होते हैं, या बस यूं ही बैठे होते हैं, तो वे अपनी उंगलियां चटकाते हैं। उंगलियों के जोड़ों से आने वाली वह ‘कटक’ या ‘पॉप’ की आवाज कुछ लोगों को बहुत सुकून देती है, जबकि आस-पास बैठे अन्य लोगों को यह काफी परेशान करने वाली लग सकती है।
बचपन से ही हमें हमारे माता-पिता, दादा-दादी या शिक्षकों द्वारा अक्सर यह चेतावनी दी जाती रही है: “उंगलियां मत चटकाओ, वरना बुढ़ापे में गठिया (Arthritis) हो जाएगा!” यह चेतावनी इतनी बार दोहराई जाती है कि अधिकांश लोग इसे एक स्थापित चिकित्सा तथ्य मान लेते हैं।
लेकिन क्या इस बात में कोई वैज्ञानिक सच्चाई है? क्या सचमुच उंगलियां या हड्डियां चटकाने से हमारे जोड़ों को ऐसा नुकसान पहुंचता है जो भविष्य में गठिया का रूप ले लेता है? आइए, विज्ञान और चिकित्सा अनुसंधानों के चश्मे से इस लोकप्रिय धारणा की पड़ताल करें और जानें कि यह एक मिथक है या सच।
उंगलियां चटकाने पर आवाज क्यों आती है? (The Science of the ‘Pop’)
इस सवाल का जवाब देने से पहले कि क्या इससे गठिया होता है, यह समझना जरूरी है कि जब हम उंगलियां चटकाते हैं तो वास्तव में हमारे जोड़ों के अंदर क्या होता है और वह आवाज कहाँ से आती है।
हमारे शरीर के जिन जोड़ों में सबसे ज्यादा हलचल होती है—जैसे उंगलियों के पोर (Knuckles), घुटने, और कोहनियां—उन्हें साइनोवियल जॉइंट्स (Synovial Joints) कहा जाता है। इन जोड़ों की खासियत यह है कि दो हड्डियों के बीच एक खाली जगह (Joint Cavity) होती है।
- साइनोवियल फ्लूइड (Synovial Fluid): हड्डियों के सिरों को आपस में रगड़ने से बचाने के लिए इस खाली जगह में एक गाढ़ा, चिकना तरल पदार्थ भरा होता है जिसे साइनोवियल फ्लूइड कहते हैं। यह मशीन में डाले जाने वाले तेल (लुब्रिकेंट) की तरह काम करता है।
- गैसों का मिश्रण: इस तरल पदार्थ में ऑक्सीजन (Oxygen), नाइट्रोजन (Nitrogen), और कार्बन डाइऑक्साइड (Carbon Dioxide) जैसी गैसें घुली होती हैं।
- आवाज का कारण (Cavitation): जब आप अपनी उंगलियों को चटकाने के लिए उन्हें खींचते हैं या मोड़ते हैं, तो आप वास्तव में जॉइंट के बीच की जगह को बढ़ा रहे होते हैं। जगह बढ़ने से अंदर का दबाव (Pressure) अचानक कम हो जाता है। दबाव कम होने के कारण, तरल पदार्थ में घुली हुई गैसें अचानक बुलबुले (Bubbles) का रूप ले लेती हैं और फूट जाती हैं।
गैस के इन बुलबुलों के फूटने की इसी प्रक्रिया को वैज्ञानिक भाषा में कैविटेशन (Cavitation) या ट्राइबोन्यूक्लियेशन (Tribonucleation) कहा जाता है। यही वह प्रक्रिया है जो वह ‘पॉप’ या ‘कटक’ की आवाज पैदा करती है।
यही कारण है कि आप एक ही उंगली को तुरंत दोबारा नहीं चटका सकते। गैसों को वापस साइनोवियल तरल पदार्थ में घुलने में लगभग 15 से 20 मिनट का समय लगता है। इसे ‘रिफ्रैक्टरी पीरियड’ कहा जाता है।
मिथक या सच: क्या इससे गठिया होता है?
सीधे शब्दों में इसका उत्तर है: यह पूरी तरह से एक मिथक (Myth) है।
चिकित्सा विज्ञान और कई शोधों ने यह स्पष्ट रूप से साबित कर दिया है कि उंगलियां चटकाने और गठिया (विशेष रूप से ऑस्टियोआर्थराइटिस) होने के बीच कोई सीधा संबंध नहीं है। गैस के बुलबुलों का फूटना एक प्राकृतिक और हानिरहित प्रक्रिया है। यह हड्डियों या कार्टिलेज (उपास्थि) को नहीं घिसता है।
डॉ. डोनाल्ड अंगर का ऐतिहासिक प्रयोग
इस मिथक को तोड़ने का सबसे दिलचस्प और प्रसिद्ध श्रेय कैलिफोर्निया के एक डॉक्टर, डॉ. डोनाल्ड अंगर (Dr. Donald Unger) को जाता है।
बचपन में जब उनकी माँ और चाची ने उन्हें उंगलियां चटकाने से गठिया होने का डर दिखाया, तो उन्होंने इसे परखने का फैसला किया। उन्होंने एक अनूठा और लंबा प्रयोग किया:
- उन्होंने लगातार 60 वर्षों तक केवल अपने बाएं हाथ (Left Hand) की उंगलियों को दिन में कम से कम दो बार चटकाया।
- तुलना करने के लिए, उन्होंने अपने दाएं हाथ (Right Hand) की उंगलियों को कभी नहीं चटकाया।
60 साल बाद, जब उनके दोनों हाथों के एक्स-रे (X-Rays) किए गए और उनका चिकित्सकीय परीक्षण हुआ, तो परिणाम हैरान करने वाले थे। उनके दोनों हाथों में गठिया का कोई नामोनिशान नहीं था, और दोनों हाथों के जोड़ों का स्वास्थ्य बिल्कुल एक जैसा था। इस असाधारण और धैर्यपूर्ण शोध के लिए डॉ. अंगर को 2009 में इग नोबेल पुरस्कार (Ig Nobel Prize) से सम्मानित किया गया, जो अजीब लेकिन विचारोत्तेजक शोधों के लिए दिया जाता है।
अन्य वैज्ञानिक अध्ययन
डॉ. अंगर के अलावा भी कई बड़े वैज्ञानिक अध्ययन हुए हैं। 2011 में ‘जर्नल ऑफ द अमेरिकन बोर्ड ऑफ फैमिली मेडिसिन’ में एक अध्ययन प्रकाशित हुआ जिसमें 215 लोगों के हाथों का एक्स-रे किया गया। इनमें से कुछ लोग उंगलियां चटकाते थे और कुछ नहीं। शोधकर्ताओं ने पाया कि दोनों समूहों में ऑस्टियोआर्थराइटिस होने की दर लगभग समान थी। उंगलियां चटकाने वालों में गठिया का कोई अतिरिक्त खतरा नहीं देखा गया।
गठिया (Arthritis) वास्तव में क्या है और क्यों होता है?
अगर उंगलियां चटकाने से गठिया नहीं होता, तो फिर यह होता क्यों है? गठिया मुख्य रूप से जोड़ों की सूजन और दर्द की बीमारी है। इसके कई प्रकार होते हैं, लेकिन सबसे आम दो प्रकार निम्नलिखित हैं:
- ऑस्टियोआर्थराइटिस (Osteoarthritis): यह ‘वियर एंड टियर’ (Wear and Tear) यानी उम्र के साथ जोड़ों के घिसने वाली बीमारी है। इसमें हड्डियों के सिरों पर चढ़ा कार्टिलेज (कुशन) घिस जाता है, जिससे हड्डियां आपस में रगड़ खाने लगती हैं। इसके मुख्य कारण हैं:
- बढ़ती उम्र
- आनुवंशिकी (Genetics / Family History)
- जोड़ों पर पहले लगी कोई चोट (Joint Injury)
- मोटापा (मोटापे से घुटनों और कूल्हों पर ज्यादा दबाव पड़ता है)
- रुमेटॉइड आर्थराइटिस (Rheumatoid Arthritis): यह एक ऑटोइम्यून बीमारी (Autoimmune Disease) है। इसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) गलती से अपने ही जोड़ों के स्वस्थ ऊतकों पर हमला कर देती है, जिससे गंभीर सूजन और दर्द होता है।
जैसा कि स्पष्ट है, इन दोनों ही प्रकार के गठिया का उंगलियों के जोड़ों में गैस के बुलबुले फूटने (उंगलियां चटकाने) से कोई लेना-देना नहीं है।
क्या उंगलियां चटकाने का कोई भी नुकसान नहीं है?
यद्यपि यह गठिया का कारण नहीं बनता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आपको दिन भर अंधाधुंध उंगलियां चटकाते रहना चाहिए। कुछ चिकित्सा विशेषज्ञों का मानना है कि बहुत अधिक और बहुत जोर से उंगलियां चटकाने के कुछ अन्य नकारात्मक प्रभाव हो सकते हैं:
- पकड़ की ताकत में कमी (Decreased Grip Strength): 1990 के एक पुराने अध्ययन में पाया गया था कि जो लोग बहुत अधिक उंगलियां चटकाते थे, उनके हाथों की पकड़ (Grip Strength) उन लोगों की तुलना में थोड़ी कमजोर थी जो ऐसा नहीं करते थे। हालांकि, बाद के कई अध्ययनों ने इस बात की पूरी तरह से पुष्टि नहीं की है, फिर भी इसे एक संभावित नुकसान माना जाता है।
- सॉफ्ट टिश्यू में सूजन (Soft Tissue Swelling): लगातार और जोर लगाकर उंगलियों को खींचने से जोड़ों के आसपास के लिगामेंट्स (Ligaments) और टेंडन्स (Tendons) में हल्की सूजन आ सकती है।
- सामाजिक झुंझलाहट: यह स्वास्थ्य से जुड़ा नुकसान नहीं है, लेकिन सार्वजनिक स्थानों, ऑफिस या शांतिपूर्ण माहौल में उंगलियां चटकाने की आवाज दूसरों को काफी चिड़चिड़ा कर सकती है।
नोट: यदि उंगलियां चटकाते समय आपको दर्द महसूस होता है, तो यह चिंता का विषय है। दर्द रहित ‘पॉप’ सामान्य है, लेकिन अगर दर्द हो रहा है, तो इसका मतलब है कि जॉइंट में कोई समस्या है और आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
लोग उंगलियां क्यों चटकाते हैं?
अगर इसके कोई विशेष शारीरिक लाभ नहीं हैं, तो लोग ऐसा क्यों करते हैं? इसके पीछे कई शारीरिक और मनोवैज्ञानिक कारण हैं:
- तनाव से राहत (Stress Relief): कई लोगों के लिए यह एक ‘नर्वस हैबिट’ (Nervous Habit) है। जैसे कुछ लोग तनाव में नाखून चबाते हैं या पैर हिलाते हैं, वैसे ही कुछ लोग उंगलियां चटकाते हैं।
- जोड़ों का ढीलापन महसूस होना: उंगलियां चटकाने के बाद लोगों को अक्सर ऐसा लगता है कि उनके जॉइंट्स में लचीलापन आ गया है और भारीपन कम हो गया है। यह आंशिक रूप से सच भी है क्योंकि जॉइंट को स्ट्रेच करने से राहत मिलती है।
- आदत (Habit): समय के साथ यह एक अचेतन आदत बन जाती है। व्यक्ति टीवी देखते हुए या पढ़ते हुए बिना सोचे-समझे उंगलियां चटकाने लगता है।
- आवाज से संतुष्टि: कुछ लोगों को ‘कटक’ की आवाज सुनकर एक अजीब सी मानसिक संतुष्टि (Placebo effect) मिलती है।
इस आदत को कैसे छोड़ें?
यदि आप अपनी इस आदत से परेशान हैं या आपके आस-पास के लोग इससे चिढ़ते हैं, तो आप इसे छोड़ने के लिए कुछ सरल उपाय अपना सकते हैं:
- ट्रिगर को पहचानें: ध्यान दें कि आप किस समय उंगलियां चटकाते हैं। क्या आप तनाव में होते हैं? क्या आप बोर हो रहे होते हैं? कारण को पहचानने से आदत पर नियंत्रण पाना आसान हो जाता है।
- हाथों को व्यस्त रखें: जब भी उंगलियां चटकाने का मन करे, तो अपने हाथों में एक स्ट्रेस बॉल (Stress Ball), रूबिक्स क्यूब (Rubik’s Cube), या फिजेट स्पिनर (Fidget Spinner) ले लें।
- माइंडफुलनेस (Mindfulness): सचेत रहें। हर बार जब आपका हाथ उंगली चटकाने के लिए उठे, तो खुद को रोकें और गहरी सांस लें।
- स्ट्रेचिंग करें: उंगलियां चटकाने के बजाय, अपने हाथों की उंगलियों और कलाई को धीरे-धीरे स्ट्रेच (Stretch) करें। इससे बिना किसी आवाज के मांसपेशियों को आराम मिलेगा।
निष्कर्ष (Conclusion)
निष्कर्ष के तौर पर यह स्पष्ट रूप से कहा जा सकता है कि “उंगलियां चटकाने से गठिया होता है” — यह महज एक पुराना मिथक है। विज्ञान और दशकों के शोध ने यह साबित कर दिया है कि उंगलियों से आने वाली वह ‘पॉप’ की आवाज केवल जोड़ों के तरल पदार्थ में मौजूद गैस के बुलबुलों के फूटने की आवाज है।
इससे आपके जोड़ों की हड्डियां घिसती नहीं हैं और न ही भविष्य में गठिया का खतरा बढ़ता है। हालांकि, किसी भी चीज की अति बुरी होती है। बहुत अधिक बल लगाकर ऐसा करने से आपके लिगामेंट्स को नुकसान पहुंच सकता है।
इसलिए, यदि आप कभी-कभार काम करते हुए थकान मिटाने के लिए अपनी उंगलियां चटका लेते हैं, तो घबराने की कोई बात नहीं है। अगली बार जब कोई आपको यह कहकर टोके कि “उंगलियां मत चटकाओ, गठिया हो जाएगा!”, तो आप मुस्कुराकर उन्हें कैविटेशन (Cavitation) और डॉ. डोनाल्ड अंगर के 60 साल लंबे दिलचस्प प्रयोग की कहानी सुना सकते हैं!
