पेट की सर्जरी हर्निया या एब्डोमिनल सर्जरी से पहले सांस लेने के व्यायाम (Spirometry) क्यों सीखें
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हर्निया या एब्डोमिनल सर्जरी से पहले सांस लेने के व्यायाम (Spirometry) क्यों सीखें?

जब किसी व्यक्ति को हर्निया (Hernia) या पेट की कोई बड़ी सर्जरी (Abdominal Surgery) करवानी होती है, तो उसका पूरा ध्यान सिर्फ ऑपरेशन और उसके बाद के आराम पर होता है। अक्सर लोग यह भूल जाते हैं कि सर्जरी की सफलता और उसके बाद की तेज रिकवरी में ‘प्री-हैबिलिटेशन’ (Pre-habilitation) यानी सर्जरी से पहले की जाने वाली तैयारी का बहुत बड़ा योगदान होता है। इसी तैयारी का एक सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है— स्पाइरोमेट्री (Spirometry) या फेफड़ों के व्यायाम।

डॉ. नितेश पटेल के नैदानिक मार्गदर्शन में तैयार किए गए इस लेख में, हम विस्तार से समझेंगे कि सर्जरी से पहले स्पाइरोमेट्री का अभ्यास करना क्यों आवश्यक है, इसके क्या वैज्ञानिक लाभ हैं, और यह कैसे आपकी रिकवरी को तेज कर सकता है।

पेट की सर्जरी और हर्निया का शरीर पर प्रभाव

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी, लगातार बैठकर काम करने की आदत, या फिर औद्योगिक क्षेत्रों (जैसे कारखानों या भारी वजन उठाने वाले व्यवसायों) में काम करने वाले लोगों में हर्निया की समस्या आम होती जा रही है। जब पेट की मांसपेशियों की दीवार कमजोर हो जाती है और अंदरूनी अंग बाहर की तरफ उभरने लगते हैं, तो इसे हर्निया कहते हैं। इसे ठीक करने के लिए सर्जरी ही सबसे कारगर उपाय है।

चाहे हर्निया का ऑपरेशन हो या पेट की कोई अन्य सर्जरी (जैसे गॉलब्लैडर, अपेंडिक्स, या आंतों की सर्जरी), इन सभी में मरीज को जनरल एनेस्थीसिया (General Anesthesia) दिया जाता है। इसके अलावा, पेट पर चीरा (Incision) लगाया जाता है। इन दोनों ही चीजों का सीधा असर हमारी श्वसन प्रणाली (Respiratory System) पर पड़ता है।

एनेस्थीसिया और फेफड़ों का कनेक्शन

जब मरीज को सर्जरी के लिए बेहोश किया जाता है, तो एनेस्थीसिया के कारण शरीर की सभी मांसपेशियां शिथिल (Relax) हो जाती हैं। इसका असर फेफड़ों और श्वास नली पर भी पड़ता है।

  1. म्यूकस का जमाव: फेफड़ों के अंदर छोटे-छोटे बालों जैसी संरचनाएं (Cilia) होती हैं, जो बलगम (Mucus) को बाहर धकेलने का काम करती हैं। एनेस्थीसिया के कारण ये सिलिया कुछ समय के लिए सुन्न हो जाते हैं, जिससे फेफड़ों में बलगम जमा होने लगता है।
  2. फेफड़ों का सिकुड़ना (Atelectasis): मशीन द्वारा सांस लेने और मांसपेशियों के शिथिल होने के कारण फेफड़ों के निचले हिस्से की छोटी थैलियां (Alveoli) सिकुड़ सकती हैं या पिचक सकती हैं।

दर्द के कारण उथली सांसें (Shallow Breathing)

सर्जरी के बाद जब मरीज होश में आता है, तो पेट पर टांके या चीरे के कारण दर्द होता है। इस दर्द के डर से मरीज स्वाभाविक रूप से गहरी सांस लेना बंद कर देता है। वह छोटी और उथली सांसें (Shallow breaths) लेने लगता है।

जब हम गहरी सांस नहीं लेते हैं, तो फेफड़ों के निचले हिस्से तक हवा नहीं पहुंच पाती। इसके कारण:

  • जमा हुआ बलगम बाहर नहीं निकल पाता।
  • निमोनिया (Post-operative Pneumonia) या छाती में संक्रमण (Chest Infection) का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
  • शरीर में ऑक्सीजन का स्तर कम होने लगता है, जिससे घाव भरने की प्रक्रिया (Wound Healing) धीमी हो जाती है।

यही कारण है कि समर्पण फिजियोथेरेपी क्लिनिक और दुनिया भर के विशेषज्ञ सर्जरी से पहले ही सांस के व्यायाम सीखने की सलाह देते हैं।


सर्जरी से पहले स्पाइरोमेट्री (Spirometry) सीखने के मुख्य कारण

इंसेंटिव स्पाइरोमीटर (Incentive Spirometer) एक छोटा सा प्लास्टिक का उपकरण होता है, जिसमें 3 चैंबर (हिस्से) होते हैं और हर चैंबर में एक रंगीन गेंद होती है। इसमें एक पाइप (Mouthpiece) लगा होता है, जिसके माध्यम से हवा अंदर खींचनी होती है।

सर्जरी के बाद की बजाय, सर्जरी से पहले इसका अभ्यास शुरू करने के निम्नलिखित वैज्ञानिक और व्यावहारिक कारण हैं:

1. मांसपेशियों की मेमोरी (Muscle Memory) का निर्माण

जब आप सर्जरी के बाद दर्द में होते हैं, तब किसी नई मशीन या तकनीक को सीखना बहुत मुश्किल होता है। दर्द निवारक दवाओं (Painkillers) के प्रभाव में ध्यान केंद्रित करना कठिन होता है। यदि आपने सर्जरी से पहले ही स्पाइरोमीटर का उपयोग करना सीख लिया है, तो आपके शरीर और मस्तिष्क को इसकी आदत हो जाती है। इसे ‘मसल मेमोरी’ कहते हैं। सर्जरी के बाद आप बिना ज्यादा सोचे, सही तकनीक के साथ इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।

2. सांस लेने वाली मांसपेशियों की मजबूती

हमारे शरीर में सांस लेने के लिए डायाफ्राम (Diaphragm) और पसलियों के बीच की मांसपेशियां (Intercostal muscles) मुख्य रूप से काम करती हैं। सर्जरी से पहले स्पाइरोमेट्री का अभ्यास करने से ये मांसपेशियां मजबूत होती हैं। मजबूत मांसपेशियां एनेस्थीसिया के प्रभाव से जल्दी उबरती हैं और सर्जरी के बाद गहरी सांस लेना आसान बनाती हैं।

3. फेफड़ों की क्षमता (Lung Capacity) में वृद्धि

सर्जरी से पहले ही फेफड़ों को पूरी तरह से फुलाने का अभ्यास करने से आपकी वाइटल कैपेसिटी (Vital Capacity) बढ़ती है। इसका मतलब है कि आपके फेफड़े अधिक ऑक्सीजन ग्रहण करने के लिए तैयार हो जाते हैं।

4. घाव का जल्दी भरना (Faster Wound Healing)

ऑपरेशन के बाद टांकों और अंदरूनी घावों को भरने के लिए शरीर के हर ऊतक (Tissue) को भरपूर ऑक्सीजन की जरूरत होती है। स्पाइरोमेट्री के जरिए जब शरीर में ऑक्सीजन का प्रवाह बढ़ता है, तो रक्त संचार (Blood circulation) में सुधार होता है। इससे घाव तेजी से भरते हैं और इंफेक्शन का खतरा कम होता है।

5. अस्पताल में रुकने की अवधि में कमी

जो मरीज प्री-ऑपरेटिव फिजियोथेरेपी (Pre-operative Physiotherapy) और स्पाइरोमेट्री का पालन करते हैं, उन्हें सर्जरी के बाद छाती की जटिलताएं कम होती हैं। नतीजतन, उन्हें अस्पताल से जल्दी छुट्टी मिल जाती है और वे अपनी सामान्य दिनचर्या में जल्दी लौट पाते हैं।


इंसेंटिव स्पाइरोमीटर का सही उपयोग कैसे करें?

अधिकतर लोग स्पाइरोमीटर का गलत इस्तेमाल करते हैं। वे हवा को अंदर खींचने की बजाय उसमें फूंक मारते हैं। सही तकनीक जानना बहुत जरूरी है:

कदम-दर-कदम प्रक्रिया (Step-by-Step Guide):

  1. सही मुद्रा (Posture): बिस्तर पर सीधे बैठें या कुर्सी का सहारा लें। पीठ सीधी होनी चाहिए।
  2. सांस छोड़ना: स्पाइरोमीटर को मुंह में लगाने से पहले, अपने फेफड़ों की सारी हवा सामान्य रूप से बाहर निकाल दें (Exhale)।
  3. माउथपीस का उपयोग: स्पाइरोमीटर के पाइप (Mouthpiece) को अपने होंठों के बीच कसकर दबाएं ताकि हवा बाहर से लीक न हो।
  4. गहरी सांस लेना (Inhale): अब पाइप के जरिए धीरे-धीरे और गहराई से हवा को अपने फेफड़ों के अंदर खींचें। (जैसे आप स्ट्रॉ से जूस पीते हैं)।
  5. गेंदों को उठाना: आपके हवा खींचने से स्पाइरोमीटर के अंदर की गेंदें ऊपर उठने लगेंगी। कोशिश करें कि तीनों गेंदें ऊपर उठ जाएं। (शुरुआत में सिर्फ एक या दो गेंदें ही उठ सकती हैं, जो बिल्कुल सामान्य है)।
  6. सांस रोकना (Hold Breath): जब गेंदें ऊपर उठ जाएं, तो अपनी सांस को 3 से 5 सेकंड तक रोक कर रखें। यह सबसे महत्वपूर्ण कदम है क्योंकि इससे फेफड़ों की छोटी थैलियां (Alveoli) पूरी तरह खुल जाती हैं।
  7. आराम: माउथपीस मुंह से निकालें और धीरे-धीरे सांस छोड़ दें। कुछ सेकंड आराम करें और फिर से यही प्रक्रिया दोहराएं।

कितनी बार करें? सर्जरी से पहले, दिन में 3 से 4 बार, हर बार 10-15 बार यह अभ्यास करें। सर्जरी के बाद, आपका डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट आपको हर घंटे में 10 बार इसका उपयोग करने की सलाह दे सकता है।


स्पाइरोमेट्री के साथ अन्य महत्वपूर्ण ब्रीदिंग एक्सरसाइज

स्पाइरोमीटर के अलावा, कुछ और तकनीकी व्यायाम हैं जो आपकी रिकवरी को बेहतर बनाते हैं:

1. डायाफ्रामिक ब्रीदिंग (Diaphragmatic Breathing / Belly Breathing):

  • सीधे लेटें या बैठें। एक हाथ अपने सीने पर और दूसरा पेट पर रखें।
  • नाक से गहरी सांस लें। महसूस करें कि आपका पेट बाहर की तरफ आ रहा है (सीना स्थिर रहना चाहिए)।
  • होठों को गोल करके (जैसे सीटी बजाते हैं) धीरे-धीरे मुंह से सांस छोड़ें और पेट को अंदर की तरफ जाने दें।
  • यह व्यायाम पेट की मांसपेशियों को आराम देता है और फेफड़ों के निचले हिस्से तक ऑक्सीजन पहुंचाता है।

2. हफिंग और कफिंग तकनीक (Huffing and Coughing Technique): सर्जरी के बाद खांसी आना सामान्य है, लेकिन टांकों की वजह से खांसने में तेज दर्द होता है।

  • खांसने से पहले एक मुलायम तकिया (Pillow) अपने पेट (जहां चीरा लगा है) पर रखें और उसे दोनों हाथों से कसकर पकड़ लें।
  • इसे “स्प्लिंटिंग” (Splinting) कहते हैं। यह टांकों पर पड़ने वाले दबाव को रोकता है।
  • गहरी सांस लें और मुंह से तेजी से हवा बाहर निकालें (जैसे कांच पर भाप छोड़ते हैं – ‘हफ’ की आवाज के साथ)। यह फेफड़ों में जमे बलगम को बिना ज्यादा दबाव डाले बाहर निकालने में मदद करता है।

टेली-रिहैबिलिटेशन (Tele-rehabilitation) और आधुनिक फिजियोथेरेपी

आज के डिजिटल युग में, आपको सर्जरी से पहले मार्गदर्शन के लिए हमेशा क्लिनिक जाने की जरूरत नहीं है। आधुनिक तकनीक की मदद से डिजिटल पोस्चर एनालिसिस और टेली-रिहैबिलिटेशन के जरिए आप घर बैठे ही विशेषज्ञ फिजियोथेरेपिस्ट से जुड़ सकते हैं।

यदि आप सर्जरी की योजना बना रहे हैं, तो आप ऑनलाइन परामर्श के माध्यम से अपनी शारीरिक स्थिति का आकलन करवा सकते हैं और अपनी जरूरत के अनुसार कस्टमाइज्ड एक्सरसाइज प्रोग्राम प्राप्त कर सकते हैं।

निष्कर्ष

पेट की सर्जरी या हर्निया का ऑपरेशन शरीर के लिए एक बड़ा बदलाव होता है। सफल सर्जरी सर्जन की जिम्मेदारी होती है, लेकिन सफल और तेज रिकवरी काफी हद तक मरीज की अपनी तैयारी पर निर्भर करती है। स्पाइरोमेट्री (Spirometry) सिर्फ एक प्लास्टिक का उपकरण नहीं है; यह आपके फेफड़ों को सुरक्षित रखने, निमोनिया से बचाने और आपके शरीर को ऑक्सीजन से भरपूर रखने का सबसे प्रभावी तरीका है।

सर्जरी से पहले कुछ दिन निकालकर इन व्यायामों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। यह छोटी सी तैयारी आपकी रिकवरी के सफर को बेहद आसान और दर्द-मुक्त बना सकती है।

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