कैंसर मरीजों में रेडिएशन के कारण जबड़े के जाम होने (Radiation Trismus) का फिजियो इलाज
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कैंसर मरीजों में रेडिएशन के कारण जबड़े के जाम होने (Radiation Trismus) का फिजियोथेरेपी इलाज

सिर और गर्दन (Head and Neck) के कैंसर के इलाज में रेडिएशन थेरेपी (Radiation Therapy) एक बहुत ही महत्वपूर्ण और जीवन रक्षक प्रक्रिया है। लेकिन, इसके कुछ दीर्घकालिक दुष्प्रभाव (Side effects) भी हो सकते हैं। इनमें से एक सबसे गंभीर और आम समस्या है— रेडिएशन ट्रिस्मस (Radiation Trismus), जिसे आम भाषा में ‘जबड़े का जाम होना’ या ‘मुंह का कम खुलना’ कहा जाता है।

समर्पण फिजियोथेरेपी क्लिनिक में हम अक्सर ऐसे मरीजों को देखते हैं जो कैंसर से तो जीत जाते हैं, लेकिन रेडिएशन के बाद मुंह न खोल पाने के कारण उनका जीवन काफी कष्टदायी हो जाता है। डॉ. नितेश पटेल के मार्गदर्शन में, आज हम इस लेख के माध्यम से रेडिएशन ट्रिस्मस के कारण, इसके लक्षण और इसे ठीक करने के लिए सबसे प्रभावी फिजियोथेरेपी (Physiotherapy) तकनीक व एक्सरसाइज के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे।

ट्रिस्मस (Trismus) क्या है?

सामान्य तौर पर, एक स्वस्थ व्यक्ति का मुंह लगभग 35 से 45 मिलीमीटर (mm) या तीन उंगलियों (Three fingers) की चौड़ाई के बराबर खुलता है। जबड़े की मांसपेशियां, जिन्हें चबाने वाली मांसपेशियां (Masticatory Muscles) कहा जाता है, और टेम्पोरोमैंडिबुलर जॉइंट (TMJ) मुंह को खोलने और बंद करने में मदद करते हैं।

जब किसी कारण से मुंह 35 mm से कम खुलने लगे या मुंह खोलने में तेज दर्द और जकड़न महसूस हो, तो इस स्थिति को मेडिकल भाषा में ट्रिस्मस कहा जाता है। कैंसर के मरीजों में, विशेषकर जिन्हें मुंह, गले या गाल का कैंसर होता है, रेडिएशन के बाद यह समस्या बहुत तेजी से पनपती है।

रेडिएशन के कारण जबड़ा क्यों जाम होता है? (Causes of Radiation Trismus)

रेडिएशन थेरेपी कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने का काम करती है, लेकिन इसके प्रभाव से आसपास के स्वस्थ ऊतक (Tissues) भी प्रभावित होते हैं।

  1. फाइब्रोसिस (Radiation-Induced Fibrosis): रेडिएशन के कारण जबड़े की मांसपेशियों और लिगामेंट्स में खून का प्रवाह कम हो जाता है। इससे मांसपेशियां अपनी लोच (Elasticity) खो देती हैं और सख्त हो जाती हैं। इस प्रक्रिया को फाइब्रोसिस कहते हैं।
  2. TMJ जॉइंट में अकड़न: जबड़े का जोड़ (Temporomandibular Joint) रेडिएशन क्षेत्र में आने से सिकुड़ सकता है और इसके अंदर मौजूद चिकनाई कम हो सकती है।
  3. मांसपेशियों का सिकुड़ना (Muscle Spasm): दर्द के कारण मरीज अनजाने में अपने जबड़े को भींच कर रखता है, जिससे मांसपेशियों में ऐंठन आ जाती है।
  4. स्कार टिशू (Scar Tissue): सर्जरी और रेडिएशन के बाद घाव भरने की प्रक्रिया में स्कार टिशू बनते हैं, जो बहुत कड़े होते हैं और मुंह को पूरा खुलने नहीं देते।

यह समस्या रेडिएशन खत्म होने के तुरंत बाद या फिर 3 से 6 महीने (कभी-कभी सालों) बाद भी शुरू हो सकती है। इसलिए, रेडिएशन शुरू होने के साथ ही फिजियोथेरेपी शुरू कर देना सबसे बेहतर बचाव है।

ट्रिस्मस के लक्षण और जटिलताएं (Symptoms and Complications)

जबड़े के जाम होने से मरीज के दैनिक जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। इसके मुख्य लक्षण और नुकसान निम्नलिखित हैं:

  • मुंह खोलने में असमर्थता: खाना खाने, चबाने और निगलने में भारी परेशानी।
  • कुपोषण (Malnutrition): ठोस आहार न खा पाने के कारण मरीज केवल तरल पदार्थों पर निर्भर हो जाता है, जिससे वजन तेजी से गिरता है।
  • बोलने में कठिनाई: स्पष्ट रूप से शब्दों का उच्चारण न कर पाना।
  • ओरल हाइजीन (Oral Hygiene) में कमी: ब्रश करने या कुल्ला करने में दिक्कत होती है, जिससे दांतों में सड़न, मसूड़ों की बीमारी और मुंह से बदबू आने लगती है।
  • डॉक्टरी जांच में बाधा: मुंह न खुलने के कारण डेंटिस्ट या ऑन्कोलॉजिस्ट को गले के अंदर की जांच करने में मुश्किल होती है।

फिजियोथेरेपी द्वारा रेडिएशन ट्रिस्मस का इलाज (Physiotherapy Management)

डॉ. नितेश पटेल के अनुसार, फाइब्रोसिस एक बार जब पूरी तरह से सेट हो जाता है, तो उसे रिवर्स करना बहुत मुश्किल होता है। इसलिए “Prevention is better than cure” (बचाव ही इलाज है) का नियम यहाँ लागू होता है। फिजियोथेरेपी में मुख्य रूप से स्ट्रेचिंग, स्ट्रेंथनिंग और मैनुअल थेरेपी (Manual Therapy) का उपयोग किया जाता है।

नीचे कुछ विशेष फिजियोथेरेपी एक्सरसाइज बताई गई हैं, जिन्हें नियमित रूप से करने पर जबड़े की जकड़न को कम किया जा सकता है:

1. एक्टिव रेंज ऑफ मोशन एक्सरसाइज (Active ROM Exercises)

यह एक्सरसाइज मांसपेशियों को गर्म करने और जोड़ों में गतिशीलता बढ़ाने के लिए की जाती है।

  • मुंह खोलना और बंद करना (Mouth Opening): आईने के सामने बैठें। धीरे-धीरे मुंह को जितना हो सके उतना बड़ा खोलें। 5 सेकंड तक इसी स्थिति में रुकें और फिर धीरे-धीरे बंद करें। इसे 10 बार दोहराएं।
  • जबड़े को दाएं-बाएं ले जाना (Lateral Deviation): मुंह को हल्का सा खोलें। अब निचले जबड़े को पहले दाईं ओर ले जाएं, 5 सेकंड रुकें, फिर बाईं ओर ले जाएं और 5 सेकंड रुकें।
  • जबड़े को आगे निकालना (Protrusion): निचले जबड़े (ठुड्डी) को आगे की ओर धकेलें (जैसे नीचे के दांत ऊपर के दांतों से आगे निकल जाएं)। कुछ सेकंड होल्ड करें और वापस लाएं।

2. पैसिव स्ट्रेचिंग (Passive Stretching)

मांसपेशियों के फाइब्रोसिस को तोड़ने के लिए स्ट्रेचिंग बहुत जरूरी है।

  • उंगलियों का उपयोग (Finger Stretch): अपने दाएं हाथ के अंगूठे को ऊपरी दांतों पर और तर्जनी (Index finger) को निचले दांतों पर रखें। कैंची की तरह उंगलियों को फैलाते हुए मुंह को खोलने की कोशिश करें। जहां खिंचाव महसूस हो, वहां 15-30 सेकंड तक रुकें। इसे दिन में 4-5 बार करें।
  • आइसक्रीम स्टिक्स (Tongue Depressors) का उपयोग: 5-6 लकड़ी की आइसक्रीम स्टिक्स (Tongue depressors) को एक साथ पकड़ें और उन्हें मुंह के दोनों तरफ (दाढ़ के बीच) रखें। जब यह आसानी से जाने लगे, तो बीच में एक और स्टिक फंसाकर मोटाई बढ़ाएं। यह एक बहुत ही प्रभावी और सस्ता तरीका है। इसे दिन में 3 बार 10-15 मिनट के लिए करें।

3. मैनुअल थेरेपी और मसाज (Myofascial Release)

चेहरे और जबड़े की मांसपेशियों (Masseter और Temporalis) की मालिश करने से रक्त संचार (Blood circulation) बढ़ता है और स्पाज्म कम होता है।

  • अपनी उंगलियों के पोरों (Fingertips) को गालों के पिछले हिस्से (कान के ठीक आगे) पर रखें।
  • हल्के दबाव के साथ गोल-गोल (Circular) मोशन में मालिश करें।
  • यह मालिश दिन में 2-3 बार, 5 मिनट के लिए करें। हल्का गर्म सेंक (Warm compress) मालिश से पहले लगाने पर ज्यादा फायदा होता है। (ध्यान रहे, अगर रेडिएशन के कारण त्वचा जली हुई या संवेदनशील है, तो गर्म सेंक का प्रयोग डॉक्टर की सलाह के बिना न करें)।

4. आइसोमेट्रिक स्ट्रेंथनिंग (Isometric Strengthening)

यह जबड़े की मांसपेशियों को मजबूत बनाने के लिए है।

  • अपनी मुट्ठी या हथेली को ठुड्डी (Chin) के नीचे रखें।
  • अब मुंह खोलने की कोशिश करें, लेकिन अपने हाथ से ठुड्डी को ऊपर की तरफ धकेल कर प्रतिरोध (Resistance) दें।
  • 5 सेकंड होल्ड करें और छोड़ दें। ऐसा 10 बार करें।

5. उपकरणों का उपयोग (Use of Mechanical Devices)

एडवांस फिजियोथेरेपी में कुछ विशेष उपकरणों का उपयोग किया जाता है, जो ट्रिस्मस के इलाज में रामबाण साबित होते हैं:

  • TheraBite® Jaw Motion Rehabilitation System: यह एक उपकरण है जिसे मुंह में फंसाकर जबड़े को स्ट्रेच किया जाता है। यह फाइब्रोसिस को कम करने और इंटरइंसिसल (Interincisal) दूरी को बढ़ाने में वैज्ञानिक रूप से बहुत प्रभावी माना गया है।
  • Dynasplint System: यह एक स्प्रिंग-लोडेड उपकरण है जो लंबे समय तक जबड़े पर हल्का स्ट्रेच (Low-load, prolonged stretch) बनाए रखता है।

मरीजों के लिए जरूरी सावधानियां और टिप्स (Important Tips for Patients)

  • निरंतरता (Consistency): फिजियोथेरेपी कोई जादू नहीं है। फाइब्रोसिस को हराने के लिए आपको हर दिन, दिन में कम से कम 3-4 बार (Rule of 5x5x5: 5 एक्सरसाइज, 5 बार दिन में, 5 सेकंड होल्ड) इन कसरतों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना होगा।
  • दर्द का प्रबंधन (Pain Management): शुरुआत में एक्सरसाइज करने पर दर्द हो सकता है। यह सामान्य है। एक्सरसाइज से पहले दर्द निवारक दवा या मांसपेशियों को आराम देने वाली दवा (Muscle Relaxants) लेने के लिए अपने डॉक्टर से बात करें।
  • नरम भोजन (Soft Diet): जबड़े पर ज्यादा जोर न डालें। बहुत ज्यादा चबाने वाली चीजें (जैसे चुइंगम, कड़क मांस, सुपारी) खाने से बचें। पौष्टिक सूप, दलिया, खिचड़ी और स्मूदी का सेवन करें।
  • ओरल हाइजीन: मुंह की सफाई का खास ख्याल रखें। बेबी टूथब्रश का इस्तेमाल करें क्योंकि इसका साइज छोटा होता है और यह कम खुले मुंह में भी आसानी से चला जाता है।
  • जल्दी शुरुआत: रेडिएशन थेरेपी शुरू होने से पहले या उसके पहले हफ्ते में ही फिजियोथेरेपिस्ट से मिलकर प्रिवेंटिव (Preventive) एक्सरसाइज शुरू कर दें।

निष्कर्ष (Conclusion)

कैंसर से जंग जीतना एक बहुत बड़ी उपलब्धि है, लेकिन रेडिएशन ट्रिस्मस जैसी समस्याएं इस जीत के जश्न को फीका कर सकती हैं। सही समय पर फिजियोथेरेपी शुरू करके और डॉ. नितेश पटेल जैसे विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में बताई गई एक्सरसाइज का नियमित अभ्यास करके, आप अपने जबड़े की गतिशीलता (Jaw mobility) को वापस पा सकते हैं। समर्पण फिजियोथेरेपी क्लिनिक इस पूरी यात्रा में आपके साथ है, ताकि आप फिर से अपने पसंदीदा भोजन का स्वाद ले सकें और खुलकर मुस्कुरा सकें।

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