पेसमेकर (Pacemaker) वाले मरीजों के लिए कौन सी फिजियोथेरेपी मशीनें (TENS, IFT, SWD) पूरी तरह वर्जित हैं?
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पेसमेकर (Pacemaker) वाले मरीजों के लिए कौन सी फिजियोथेरेपी मशीनें (TENS, IFT, SWD) पूरी तरह वर्जित हैं?

हृदय संबंधी समस्याओं (Cardiac Issues) के लगातार बढ़ने के कारण, आज के समय में पेसमेकर (Pacemaker) वाले मरीजों का फिजियोथेरेपी क्लीनिक में आना एक आम बात हो गई है। अक्सर मरीजों को जोड़ों के दर्द, कमर दर्द या किसी चोट के कारण फिजियोथेरेपी की आवश्यकता होती है। लेकिन, एक फिजियोथेरेपिस्ट और मरीज, दोनों के लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि पेसमेकर वाले मरीजों पर हर प्रकार की इलेक्ट्रोथेरेपी (Electrotherapy) मशीन का इस्तेमाल सुरक्षित नहीं है।

कुछ मशीनें पेसमेकर की कार्यप्रणाली को गंभीर रूप से बाधित कर सकती हैं, जिससे मरीज की जान को खतरा हो सकता है। इस विस्तृत लेख में हम वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझेंगे कि कौन सी मशीनें पूरी तरह वर्जित (Strictly Contraindicated) हैं, किनका उपयोग अत्यधिक सावधानी से किया जाना चाहिए, और पेसमेकर वाले मरीजों के लिए सबसे सुरक्षित विकल्प कौन से हैं।

पेसमेकर (Pacemaker) और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंटरफेरेंस (EMI) क्या है?

पेसमेकर एक छोटा सा इलेक्ट्रॉनिक उपकरण होता है जिसे सर्जरी के माध्यम से मरीज की छाती (कॉलरबोन के ठीक नीचे) में प्रत्यारोपित किया जाता है। इसका मुख्य काम हृदय गति (Heart Rate) को नियंत्रित करना है। यह हृदय की असामान्य धड़कन (Arrhythmia) को भांपकर हल्के इलेक्ट्रिकल सिग्नल भेजता है, जिससे हृदय सुचारू रूप से धड़कता रहे।

इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंटरफेरेंस (EMI) का खतरा:

जब पेसमेकर किसी शक्तिशाली बाहरी इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड (Electromagnetic Field) के संपर्क में आता है, तो उसमें इलेक्ट्रोमैग्नेटिक इंटरफेरेंस (EMI) उत्पन्न हो सकता है। इस इंटरफेरेंस के कारण पेसमेकर के सेंसर भ्रमित हो सकते हैं।

  1. यह मशीन को यह सोचने पर मजबूर कर सकता है कि हृदय सही धड़क रहा है (जिससे वह सिग्नल भेजना बंद कर देता है)।
  2. या फिर यह पेसमेकर की प्रोग्रामिंग को रीसेट कर सकता है।यही कारण है कि फिजियोथेरेपी में इस्तेमाल होने वाली इलेक्ट्रोथेरेपी मशीनों का चुनाव बेहद सावधानी से करना पड़ता है।

पूरी तरह वर्जित मशीनें (Strictly Contraindicated Machines)

नीचे दी गई मशीनों का इस्तेमाल पेसमेकर वाले मरीज के आसपास या उस पर कभी नहीं किया जाना चाहिए। इन मशीनों से निकलने वाली तरंगें पेसमेकर के लिए सबसे बड़ा खतरा होती हैं।

1. शॉर्ट वेव डायथर्मी (Short Wave Diathermy – SWD)

SWD मशीन का उपयोग शरीर के गहरे ऊतकों (Deep tissues) को गर्म करने और दर्द निवारण के लिए किया जाता है। यह मशीन 27.12 MHz की फ्रीक्वेंसी पर रेडियो फ्रीक्वेंसी (Radio Frequency) इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगें उत्पन्न करती है।

  • खतरा क्यों है? SWD का इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड बहुत मजबूत होता है और यह हवा में काफी दूर तक फैलता है। यह पेसमेकर के जनरेटर को गर्म कर सकता है, उसकी सर्किट्री को नुकसान पहुंचा सकता है, या उसकी प्रोग्रामिंग को पूरी तरह से बदल सकता है।
  • नियम: पेसमेकर वाले मरीज के किसी भी अंग पर SWD का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। यहाँ तक कि मरीज को उस कमरे में भी नहीं बैठना चाहिए जहाँ किसी अन्य मरीज पर SWD मशीन चल रही हो। सुरक्षित दूरी कम से कम 3 से 5 मीटर (10-15 फीट) मानी जाती है।

2. माइक्रोवेव डायथर्मी (Microwave Diathermy – MWD)

MWD भी SWD के समान ही काम करती है लेकिन यह माइक्रोवेव फ्रीक्वेंसी (आमतौर पर 2450 MHz) का उपयोग करती है। यह मांसपेशियों को गर्म करने के लिए इस्तेमाल होती है।

  • खतरा क्यों है? SWD की तरह, MWD भी उच्च ऊर्जा वाले इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड उत्पन्न करती है जो पेसमेकर की कार्यप्रणाली में सीधा हस्तक्षेप (Interference) करते हैं। इसका इस्तेमाल पूरी तरह वर्जित है।

3. पल्स्ड इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड थेरेपी (PEMF / Magnetic Therapy)

मैग्नेटिक थेरेपी या PEMF का इस्तेमाल हड्डियों के जुड़ने (Bone healing) और दर्द निवारण के लिए किया जाता है।

  • खतरा क्यों है? पेसमेकर में एक ‘मैग्नेट मोड’ या ‘रीड स्विच’ (Reed Switch) होता है। जब कोई मजबूत चुंबक पेसमेकर के करीब आता है, तो यह पेसमेकर को डिफ़ॉल्ट या ‘असिंक्रोनस’ मोड में डाल देता है, जिससे हृदय गति अनियंत्रित हो सकती है। इसलिए, किसी भी प्रकार की मैग्नेटिक थेरेपी पेसमेकर वाले मरीजों के लिए वर्जित है।

अत्यधिक सावधानी वाली मशीनें (Machines with Extreme Caution / High Risk)

निम्नलिखित मशीनों का इस्तेमाल आम तौर पर वर्जित (Contraindicated) माना जाता है, खासकर छाती, गर्दन या कंधों के आसपास। हालांकि, कुछ विशेष परिस्थितियों में हृदय रोग विशेषज्ञ (Cardiologist) की लिखित अनुमति के बाद इन्हें शरीर के निचले हिस्सों (जैसे पैर या घुटने) पर इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन इसमें बहुत अधिक जोखिम होता है।

1. TENS (Transcutaneous Electrical Nerve Stimulation)

TENS एक बहुत ही आम दर्द निवारक मशीन है। यह त्वचा के माध्यम से नसों को हल्के इलेक्ट्रिकल सिग्नल भेजकर दर्द के संदेशों को दिमाग तक पहुँचने से रोकती है।

  • खतरा: यदि TENS के पैड (Electrodes) छाती, पीठ के ऊपरी हिस्से, या गर्दन के आसपास लगाए जाएं, तो इसके इलेक्ट्रिकल पल्स को पेसमेकर हृदय की प्राकृतिक धड़कन समझ सकता है और अपना काम करना बंद कर सकता है।
  • निर्देश: पेसमेकर मरीज के धड़ (Trunk) या छाती के पास TENS कभी न लगाएं। हाथ या पैर पर इसके इस्तेमाल से पहले डॉक्टर (Cardiologist) की मंजूरी अनिवार्य है।

2. IFT (Interferential Therapy)

IFT दर्द और सूजन को कम करने के लिए मध्यम आवृत्ति (Medium Frequency) की विद्युत धाराओं का उपयोग करती है।

  • खतरा: IFT की धाराएं TENS की तुलना में शरीर के ऊतकों में अधिक गहराई तक प्रवेश करती हैं। यह पेसमेकर के इलेक्ट्रिकल सिग्नल्स में गंभीर इंटरफेरेंस पैदा कर सकती है।
  • निर्देश: इसे भी छाती, रीढ़ की हड्डी और कंधों के पास पूरी तरह वर्जित माना जाता है। क्लीनिक में बिना कार्डियोलॉजिस्ट की सलाह के इसे पेसमेकर वाले मरीज पर इस्तेमाल करने से बचना चाहिए।

3. EMS (Electrical Muscle Stimulation / Faradic/Galvanic)

EMS का उपयोग कमजोर या लकवाग्रस्त मांसपेशियों को उत्तेजित करने के लिए किया जाता है।

  • खतरा: यह मशीन भी शरीर में सीधे विद्युत धारा प्रवाहित करती है। मांसपेशियों का मजबूत संकुचन (Contraction) और इलेक्ट्रिकल सिग्नल पेसमेकर की सेंसिंग प्रणाली को धोखा दे सकते हैं।

महत्वपूर्ण नैदानिक टिप (Clinical Tip): मेडिको-लीगल (Medico-legal) दृष्टिकोण से, डॉ. नितेश पटेल की सलाह है कि पेसमेकर वाले किसी भी मरीज पर TENS, IFT या EMS का प्रयोग करने से पूरी तरह बचना ही सबसे सुरक्षित विकल्प है। इसके बजाय गैर-विद्युत (Non-electrical) विकल्पों का चुनाव करें।

पेसमेकर वाले मरीजों के लिए 100% सुरक्षित विकल्प (Safe Alternatives)

यदि पेसमेकर वाले मरीज को दर्द या सूजन है, तो इलेक्ट्रोथेरेपी की जगह निम्नलिखित सुरक्षित तरीकों (Modalities) का उपयोग किया जा सकता है:

थेरेपी का नामकार्यप्रणालीसुरक्षा स्थिति
Ultrasound Therapy (US)उच्च आवृत्ति वाली ध्वनि तरंगें (Sound waves)सुरक्षित (लेकिन पेसमेकर के ठीक ऊपर या छाती पर इस्तेमाल न करें)
Hydrocollator Packs (Moist Heat)गर्म पानी के पैक द्वारा सिकाई100% सुरक्षित
Cryotherapy (Ice Packs)बर्फ के पैक से सूजन कम करना100% सुरक्षित
Wax Bath Therapyगर्म मोम से दर्द निवारण (खासकर हाथों/पैरों के लिए)100% सुरक्षित
Manual Therapyहाथों से की जाने वाली मोबिलाइजेशन और स्ट्रेचिंग100% सुरक्षित (सबसे बेहतरीन विकल्प)
Exercise Therapyस्ट्रेचिंग और स्ट्रेंथनिंग व्यायामसुरक्षित (मरीज की हृदय क्षमता के अनुसार)

नोट: अल्ट्रासाउंड मशीन (Ultrasound) विद्युत धारा या इलेक्ट्रोमैग्नेटिक फील्ड के बजाय ध्वनि तरंगों (Sound waves) पर काम करती है, इसलिए यह सुरक्षित है। हालांकि, एहतियात के तौर पर इसे पेसमेकर के जनरेटर के ठीक ऊपर इस्तेमाल नहीं किया जाता।

एक फिजियोथेरेपिस्ट के लिए आवश्यक सावधानियां (Protocol)

पेसमेकर वाले मरीज का इलाज करते समय किसी भी चूक की गुंजाइश नहीं होती। समर्पण फिजियोथेरेपी क्लीनिक में हम निम्नलिखित प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करते हैं:

1.संपूर्ण चिकित्सा इतिहास (Medical History) लें:सबसे महत्वपूर्ण कदम.

मरीज के क्लीनिक में आते ही सबसे पहले पूछें कि क्या उन्हें पेसमेकर, स्टेंट (Stent), या कोई अन्य मेटालिक इम्प्लांट लगा है। मरीज के मेडिकल रिकॉर्ड्स की जांच करें।

2.इलेक्ट्रोथेरेपी मशीनों को दूर रखें:SWD और MWD के लिए.

यदि मरीज क्लीनिक में व्यायाम कर रहा है, तो सुनिश्चित करें कि वह SWD या MWD मशीन से कम से कम 5 मीटर की सुरक्षित दूरी पर हो।

3.कार्डियोलॉजिस्ट की सहमति (Cardiologist Consent) प्राप्त करें:यदि इलेक्ट्रोथेरेपी अनिवार्य हो.

यदि किसी विशेष परिस्थिति में पैरों या दूर के अंगों पर TENS या IFT का उपयोग करना आवश्यक हो, तो हमेशा मरीज के कार्डियोलॉजिस्ट से लिखित अनुमति (Written clearance) लें।

4.मैनुअल और व्यायाम थेरेपी को प्राथमिकता दें:

मशीनों पर निर्भर रहने के बजाय, दर्द से राहत के लिए ड्राई नीडलिंग (Dry Needling – बिना करंट वाली), टेपिंग (Kinesio Taping), और मैनुअल मोबिलाइजेशन का प्रयोग करें।

5.मरीज की हृदय गति पर नज़र रखें:सतत निगरानी.

व्यायाम कराते समय मरीज की पल्स रेट और सांस की गति पर ध्यान दें। यदि मरीज को चक्कर आता है, छाती में भारीपन लगता है, या सांस फूलती है, तो तुरंत थेरेपी रोक दें।

निष्कर्ष (Conclusion)

एक फिजियोथेरेपिस्ट का प्राथमिक उद्देश्य दर्द को कम करना और कार्यक्षमता को बढ़ाना है, लेकिन “सबसे पहले नुकसान न पहुंचाना” (First, Do No Harm) चिकित्सा का मूल नियम है। पेसमेकर वाले मरीजों के लिए SWD, MWD और PEMF पूरी तरह से वर्जित हैं। वहीं TENS और IFT जैसी मशीनें भी छाती और धड़ के आस-पास इस्तेमाल नहीं की जानी चाहिए। सुरक्षित इलाज के लिए हीट थेरेपी, आइस थेरेपी, और फिजियोथेरेपिस्ट द्वारा कराई जाने वाली एक्सरसाइज सबसे बेहतरीन विकल्प हैं।

अधिक जानकारी या व्यक्तिगत परामर्श के लिए:

अगर आपको भी पेसमेकर लगा है और आप सुरक्षित फिजियोथेरेपी उपचार की तलाश में हैं, तो आज ही समर्पण फिजियोथेरेपी क्लीनिक (Samarpan Physiotherapy Clinic) में संपर्क करें। डॉ. नितेश पटेल और उनकी विशेषज्ञ टीम आपको सुरक्षित और प्रभावी टेली-रिहैबिलिटेशन (Tele-rehabilitation) और क्लिनिकल सेवाएं प्रदान करने के लिए हमेशा तत्पर है।

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