डबल जॉइंटेड (Double Jointed) उंगलियों या कोहनी को उल्टा मोड़ने वाले लोगों का रहस्य (Hypermobility)।
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डबल जॉइंटेड (Double Jointed) उंगलियों या कोहनी को उल्टा मोड़ने वाले लोगों का रहस्य (Hypermobility)।

क्या आपने कभी किसी ऐसे व्यक्ति को देखा है जो अपने अंगूठे को मोड़कर अपनी कलाई से छुआ लेता है, या जिनकी कोहनी और घुटने पीछे की तरफ (उल्टे) बहुत आसानी से मुड़ जाते हैं? ऐसे लोगों को अक्सर आम बोलचाल में ‘डबल जॉइंटेड’ (Double Jointed) कहा जाता है। यह देखने में किसी जादू या रबर की तरह लचीले शरीर वाले करतब जैसा लग सकता है, लेकिन इसके पीछे एक गहरा मेडिकल और बायोमैकेनिकल विज्ञान छिपा है। चिकित्सा जगत में इस स्थिति को हाइपरमोबिलिटी (Hypermobility) या जॉइंट हाइपरमोबिलिटी सिंड्रोम (JHS) कहा जाता है।

आज के इस लेख में, हम इस रहस्य से पर्दा उठाएंगे कि शरीर के जोड़ सामान्य से ज्यादा क्यों मुड़ते हैं, क्या यह शरीर के लिए फायदेमंद है या नुकसानदायक, और समर्पण फिजियोथेरेपी क्लिनिक के अनुभव के आधार पर इसका सही प्रबंधन कैसे किया जा सकता है।

Table of Contents

‘डबल जॉइंटेड’ का सबसे बड़ा मिथक और सच्चाई

सबसे पहले इस बात को स्पष्ट करना बहुत ज़रूरी है कि ‘डबल जॉइंटेड’ शब्द तकनीकी रूप से पूरी तरह गलत है। दुनिया में किसी भी इंसान के एक ही स्थान पर दो जोड़ (Joints) नहीं होते हैं।

सच्चाई यह है कि जिन लोगों को हम डबल जॉइंटेड कहते हैं, उनके शरीर में भी सामान्य लोगों की तरह ही एक ही जोड़ होता है, लेकिन उनके जोड़ों को बांधकर रखने वाले लिगामेंट्स (Ligaments) और कैप्सूल (Capsule) सामान्य से कहीं अधिक ढीले या लचीले होते हैं। इस अत्यधिक लचीलेपन के कारण उनका जोड़ अपनी सामान्य रेंज (Range of Motion) से बहुत आगे तक मुड़ जाता है। इसे हाइपरमोबिलिटी कहते हैं।

हाइपरमोबिलिटी (Hypermobility) के मुख्य कारण क्या हैं?

जोड़ों के इस असाधारण लचीलेपन के पीछे कई शारीरिक और आनुवंशिक (Genetic) कारण होते हैं। आइए इन्हें विस्तार से समझते हैं:

1. कोलेजन (Collagen) प्रोटीन की बनावट में बदलाव

हमारे शरीर में हड्डियों, लिगामेंट्स, टेंडन और त्वचा को मजबूती प्रदान करने का काम ‘कोलेजन’ नाम का प्रोटीन करता है। आप इसे शरीर का ‘गोंद’ समझ सकते हैं। हाइपरमोबिलिटी वाले लोगों में अनुवांशिक रूप से कोलेजन के तंतु (Fibers) सामान्य से ज्यादा खिंचने वाले और कम सख्त होते हैं। इस कारण जोड़ को सहारा देने वाले लिगामेंट्स रबर बैंड की तरह बहुत ज्यादा खिंच जाते हैं।

2. हड्डियों और जॉइंट सॉकेट (Joint Socket) का आकार

हर इंसान की हड्डियों की बनावट थोड़ी अलग होती है। कंधे या कूल्हे जैसे जोड़ों में एक हड्डी का सिरा (Ball) दूसरी हड्डी के गड्ढे (Socket) में फिट होता है। यदि किसी व्यक्ति का जॉइंट सॉकेट जन्म से ही उथला (Shallow) है, तो उसकी हड्डी का सिरा ज्यादा आसानी से घूम सकता है, जिससे जोड़ की रेंज बढ़ जाती है।

3. जेनेटिक्स और सिंड्रोम (Genetics and Syndromes)

ज्यादातर मामलों में हाइपरमोबिलिटी माता-पिता से बच्चों में आती है। कुछ विशेष आनुवंशिक बीमारियां भी इसका कारण होती हैं, जैसे:

  • एहलर्स-डैनलोस सिंड्रोम (Ehlers-Danlos Syndrome – EDS): यह कनेक्टिव टिश्यू का एक विकार है जिसमें त्वचा बहुत ज्यादा खिंचने वाली हो जाती है और जोड़ बार-बार खिसक (Dislocate) जाते हैं।
  • मार्फन सिंड्रोम (Marfan Syndrome): इसमें व्यक्ति की उंगलियां बहुत लंबी और पतली होती हैं और जोड़ अत्यधिक लचीले होते हैं।

यह समझने के लिए कि लिगामेंट्स और कार्टिलेज जोड़ों को कैसे स्थिर रखते हैं और समय के साथ इनमें कैसे घर्षण होता है, नीचे दिए गए इंटरैक्टिव विजिट का उपयोग करें:

https://2s5v3yrj3kw87pn4z2sz0x7rypcrg4y8s94k2f40c7bmvvagdg-h917864466.scf.usercontent.goog/gemini-code-immersive/shim.html?origin=https%3A%2F%2Fgemini.google.com&cache=1

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महत्वपूर्ण जानकारी: उम्र के साथ हमारे कार्टिलेज घिसते हैं और लिगामेंट्स सख्त होते हैं, लेकिन हाइपरमोबिलिटी वाले लोगों में जोड़ों की अत्यधिक गति के कारण यह घर्षण (Wear and Tear) सामान्य लोगों की तुलना में जल्दी शुरू हो सकता है।

बीटन स्कोर (Beighton Score): घर पर कैसे चेक करें अपना लचीलापन?

फिजियोथेरेपी और मेडिकल साइंस में हाइपरमोबिलिटी को मापने के लिए बीटन स्कोर (Beighton Score) का इस्तेमाल किया जाता है। यह 9-पॉइंट का एक आसान टेस्ट है जिसे आप खुद भी परख सकते हैं:

  1. छोटी उंगली (Pinky Finger): क्या आपकी छोटी उंगली हाथ के पीछे की तरफ 90 डिग्री से ज्यादा मुड़ जाती है? (दाएं और बाएं हाथ के लिए 1-1 पॉइंट)
  2. अंगूठा (Thumb): क्या आप अपने अंगूठे को मोड़कर अपनी कलाई (Forearm) के अंदरूनी हिस्से से छुआ सकते हैं? (दाएं और बाएं हाथ के लिए 1-1 पॉइंट)
  3. कोहनी (Elbow): जब आप अपने हाथों को बिल्कुल सीधा करते हैं, तो क्या आपकी कोहनी पीछे की तरफ (10 डिग्री से ज्यादा) मुड़ जाती है? (दाएं और बाएं हाथ के लिए 1-1 पॉइंट)
  4. घुटना (Knee): सीधे खड़े होने पर क्या आपके घुटने पीछे की तरफ (Hyperextension) मुड़ जाते हैं? (दाएं और बाएं पैर के लिए 1-1 पॉइंट)
  5. कमर और हाथ: क्या आप घुटनों को बिल्कुल सीधा रखते हुए कमर से आगे झुककर अपनी दोनों हथेलियों को पूरी तरह से जमीन पर सपाट रख सकते हैं? (1 पॉइंट)

स्कोर का मतलब: यदि इन 9 पॉइंट्स में से आपका स्कोर 4 या उससे अधिक आता है, तो आपको हाइपरमोबिलिटी हो सकती है।सामान्य बनाम हाइपरमोबाइल जोड़, AI generated

सामान्य बनाम हाइपरमोबाइल जोड़.

क्या शरीर का बहुत ज्यादा लचीला होना खतरनाक है?

बहुत से लोग अपनी लचीली उंगलियों या कोहनी को दोस्तों के सामने एक ‘पार्टी ट्रिक’ की तरह दिखाते हैं। हालांकि हर हाइपरमोबाइल व्यक्ति को समस्या नहीं होती, लेकिन जब यह दर्द का कारण बनने लगे, तो इसे जॉइंट हाइपरमोबिलिटी सिंड्रोम (Joint Hypermobility Syndrome – JHS) कहते हैं। इसके प्रमुख खतरे इस प्रकार हैं:

  • बार-बार जोड़ खिसकना (Recurrent Dislocations): कंधे, घुटने की चकरी (Patella) या उंगलियों के जोड़ों का अपनी जगह से हट जाना।
  • लगातार दर्द रहना: जोड़ों को स्थिर रखने के लिए मांसपेशियों को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, जिससे मांसपेशियों में हमेशा थकान और दर्द (Muscle Fatigue) बना रहता है।
  • अर्थराइटिस का जल्दी खतरा (Early Osteoarthritis): जोड़ों की अनियंत्रित गति के कारण कार्टिलेज जल्दी घिसने लगता है।
  • चोट लगने की संभावना: मोच आना (Sprains) और सॉफ्ट टिश्यू इंजरी इन लोगों में बहुत आम है।

विभिन्न व्यवसायों पर हाइपरमोबिलिटी का प्रभाव (Ergonomics & Occupation)

गुजरात के औद्योगिक क्षेत्रों और शहरों जैसे अहमदाबाद, सूरत और वस्त्राल में अलग-अलग व्यवसायों में काम करने वाले लोगों पर हाइपरमोबिलिटी का अलग-अलग असर पड़ता है।

  • सूरत के हीरा उद्योग (Diamond Industry) के कारीगर: जो कारीगर दिन भर छोटी उंगलियों से बारीक काम करते हैं, यदि वे हाइपरमोबाइल हैं, तो उनके उंगलियों के जोड़ों (Knuckles) में जल्दी दर्द शुरू हो सकता है क्योंकि उनके जोड़ों को स्थिर रखने में ज्यादा ताकत लगती है।
  • शिक्षक (Teachers) और बोर्ड पर काम करने वाले: जो शिक्षक ब्लैकबोर्ड या व्हाइटबोर्ड पर लिखते हैं, हाइपरमोबाइल कोहनी (Hyperextended elbow) होने के कारण उनके कोहनी और कंधे के जोड़ों में जल्दी सूजन आ सकती है।
  • औद्योगिक मजदूर (Industrial Workers): भारी मशीनरी उठाने वाले मजदूर यदि हाइपरमोबाइल हैं, तो उनके घुटने और कमर (Spine) पर अत्यधिक दबाव पड़ता है, जिससे स्लिप डिस्क (Slip Disc) का खतरा बढ़ जाता है।

डॉ. नितेश पटेल (समर्पण फिजियोथेरेपी क्लिनिक) की विशेषज्ञ सलाह और इलाज

यदि आपके जोड़ बहुत ज्यादा लचीले हैं और आपको अक्सर दर्द रहता है, तो समर्पण फिजियोथेरेपी क्लिनिक के प्रमुख विशेषज्ञ डॉ. नितेश पटेल की ओर से कुछ महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश और मैनेजमेंट टिप्स यहाँ दिए गए हैं:

1. स्ट्रेचिंग से बचें, स्ट्रेंथनिंग पर ध्यान दें (Focus on Strengthening, Avoid Stretching)

हाइपरमोबिलिटी वाले लोगों की सबसे बड़ी गलती यह होती है कि दर्द होने पर वे और ज्यादा स्ट्रेचिंग (Stretching) करने लगते हैं। आपके लिगामेंट्स पहले से ही ढीले हैं, उन्हें और खींचना नुकसानदायक है। इसके बजाय, जोड़ों के आसपास की मांसपेशियों को मजबूत (Strengthening) करने पर ध्यान दें। मजबूत मांसपेशियां ढीले लिगामेंट्स की भरपाई करती हैं और जोड़ को एक प्राकृतिक ‘ब्रेस’ (Brace) की तरह सपोर्ट करती हैं। आइसोमेट्रिक (Isometric) व्यायाम इसके लिए सबसे बेहतरीन होते हैं।

2. प्रोपियोसेप्शन ट्रेनिंग (Proprioception Training)

यह एक विशेष प्रकार की ट्रेनिंग है। हाइपरमोबिलिटी में अक्सर दिमाग को यह पता नहीं चल पाता कि जोड़ किस स्थिति में है (Poor Joint Awareness)। बैलेंस पैड (Balance Pad), वूबल बोर्ड (Wobble Board) या एक पैर पर खड़े होकर किए जाने वाले व्यायाम जॉइंट सेंस (Proprioception) को बेहतर बनाते हैं, जिससे चोट लगने का खतरा काफी कम हो जाता है।

3. योग करते समय सावधानी (Modified Yoga)

योग स्वास्थ्य के लिए बहुत अच्छा है, लेकिन हाइपरमोबाइल लोगों को सावधान रहना चाहिए। योगासनों में अपने जोड़ों को उनके अंतिम बिंदु (End range) तक ले जाने से बचें। ‘माइक्रो-बेंड’ (Micro-bend) का सिद्धांत अपनाएं—यानी घुटने या कोहनी को पूरी तरह लॉक (Lock) करने के बजाय हल्का सा मुड़ा हुआ रखें।

4. सही फुटवियर और ऑर्थोटिक्स (Proper Footwear)

अक्सर हाइपरमोबिलिटी का असर पैरों के तलवों पर भी पड़ता है जिससे फ्लैट फीट (Flat feet) की समस्या हो जाती है। इसके कारण चलते समय बायोमैकेनिक्स बिगड़ जाता है और घुटनों एवं कमर में दर्द शुरू हो जाता है। सही आर्च सपोर्ट (Arch support) वाले जूते पहनना इसका एक बहुत प्रभावी और सरल उपाय है।

निष्कर्ष (Conclusion)

‘डबल जॉइंटेड’ होना कोई जादू नहीं, बल्कि हमारे शरीर की कनेक्टिव टिश्यू संरचना का परिणाम है। यह कुछ एथलीट्स, जिम्नास्ट या डांसर के लिए एक वरदान हो सकता है, लेकिन अगर इसका सही ध्यान न रखा जाए, तो यह उम्र भर के जोड़ों के दर्द का कारण भी बन सकता है।

सबसे जरूरी बात यह है कि कभी भी अपनी लचीली उंगलियों या कोहनी को दूसरों को दिखाने के लिए बार-बार उल्टा न मोड़ें। यह ‘पार्टी ट्रिक’ आपके जोड़ों को स्थायी नुकसान पहुंचा सकती है। सही फिजियोथेरेपी, व्यायाम और उचित मार्गदर्शन के साथ आप दर्द-मुक्त और पूरी तरह से सक्रिय जीवन जी सकते हैं।

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