ऑर्थोसिस और कैलीपर (AFO) लकवे के बाद पैर को लटकने (Foot Drop) से रोकने वाले जूते का सही चयन।
| | | |

ऑर्थोसिस और कैलीपर (AFO): लकवे के बाद फुट ड्रॉप (पैर लटकने) को रोकने के लिए सही जूते व उपकरण का चयन

लकवा (Paralysis), स्ट्रोक (Brain Stroke), या रीढ़ की हड्डी में चोट (Spinal Cord Injury) जैसी गंभीर चिकित्सीय स्थितियों के बाद मरीज को जीवन में कई शारीरिक बदलावों का सामना करना पड़ता है। इनमें से सबसे आम और परेशान करने वाली समस्याओं में से एक है ‘फुट ड्रॉप’ (Foot Drop), जिसे आम भाषा में ‘पैर का लटकना’ भी कहा जाता है।

फुट ड्रॉप के कारण मरीज अपने पैर के पंजे को ऊपर की तरफ (Dorsiflexion) नहीं उठा पाता है। जब वह चलने की कोशिश करता है, तो उसका पैर जमीन पर घिसटता है, जिससे गिरने या ठोकर लगने का खतरा बहुत बढ़ जाता है। इस समस्या के समाधान और मरीज को दोबारा सुरक्षित रूप से चलाने के लिए Ankle Foot Orthosis (AFO) यानी टखने और पैर के ऑर्थोसिस (जिसे पहले कैलीपर कहा जाता था) का उपयोग किया जाता है।

इस लेख में हम विस्तार से समझेंगे कि फुट ड्रॉप क्या है, AFO या कैलीपर कैसे काम करते हैं, ये कितने प्रकार के होते हैं, और एक मरीज के लिए सही उपकरण और जूते का चयन कैसे किया जाना चाहिए।

फुट ड्रॉप (Foot Drop) क्या है और यह क्यों होता है?

फुट ड्रॉप अपने आप में कोई बीमारी नहीं है, बल्कि यह किसी अंतर्निहित न्यूरोलॉजिकल (मांसपेशियों या नसों से जुड़ी) समस्या का लक्षण है। हमारे पैर के पंजे को ऊपर उठाने का काम पेरोनियल नर्व (Peroneal Nerve) और पैर के अगले हिस्से की मांसपेशियां करती हैं। जब लकवे या स्ट्रोक के कारण मस्तिष्क से इन मांसपेशियों तक सिग्नल पहुंचना बंद हो जाता है, तो ये मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं।

फुट ड्रॉप के कारण होने वाली समस्याएं:

  • ठोकर लगना और गिरना: पंजे के लटकने के कारण चलते समय पैर जमीन या कालीन से टकरा जाता है, जिससे मरीज संतुलन खोकर गिर सकता है।
  • चाल का बिगड़ना (High Steppage Gait): पैर को जमीन पर घिसटने से बचाने के लिए मरीज अपने घुटने को सामान्य से बहुत ज्यादा ऊपर उठाकर चलता है। इससे चाल असामान्य हो जाती है।
  • ऊर्जा की बर्बादी: इस तरह से चलने में शरीर की बहुत अधिक ऊर्जा खर्च होती है, जिससे मरीज जल्दी थक जाता है।
  • मांसपेशियों में जकड़न (Contractures): यदि पैर लंबे समय तक लटकी हुई स्थिति में रहे, तो टखने के पीछे की मांसपेशियां (Calf muscles) सिकुड़ जाती हैं और पैर स्थायी रूप से उसी स्थिति में जकड़ सकता है।

AFO (Ankle Foot Orthosis) या कैलीपर क्या है?

ऑर्थोसिस (Orthosis) वह उपकरण है जो शरीर के किसी कमजोर हिस्से को बाहरी सपोर्ट (सहारा) देता है। जब यह सपोर्ट टखने (Ankle) और पैर (Foot) को दिया जाता है, तो इसे AFO कहा जाता है।

पुराने समय में लोहे और चमड़े से बने भारी-भरकम उपकरण इस्तेमाल किए जाते थे, जिन्हें ‘कैलीपर’ (Caliper) कहा जाता था। वे वजन में बहुत भारी होते थे और उन्हें जूतों के साथ स्थायी रूप से फिक्स कर दिया जाता था।

आज के आधुनिक चिकित्सा विज्ञान ने कैलीपर्स की जगह हल्के, मजबूत और आरामदायक AFO का निर्माण किया है। ये मुख्य रूप से हल्के प्लास्टिक (Thermoplastic), कार्बन फाइबर (Carbon Fiber) या सिलिकॉन से बने होते हैं। इन्हें मरीज अपने सामान्य जूतों के अंदर आसानी से पहन सकता है।

AFO (ऑर्थोसिस) के मुख्य प्रकार

मरीज की शारीरिक स्थिति, पैर की ताकत और अकड़न (Spasticity) के आधार पर AFO कई प्रकार के होते हैं:

1. सॉलिड एएफओ (Solid AFO)

यह एक कठोर प्लास्टिक का बना होता है जो पैर की पिंडली (Calf) से लेकर पैर के तलवे तक जाता है। यह टखने को 90 डिग्री के कोण पर फिक्स कर देता है।

  • किसके लिए सही है: उन मरीजों के लिए जिनके पैर में बिल्कुल भी ताकत नहीं है, या जिनके टखने में बहुत ज्यादा अकड़न (Severe Spasticity) है और टखना बार-बार मुड़ जाता है।
  • फायदा: यह अधिकतम सपोर्ट देता है और घुटने को भी अनचाहे तरीके से मुड़ने से रोकता है।

2. हिंज्ड या आर्टिकुलेटिंग एएफओ (Hinged AFO)

इस एएफओ में टखने के पास एक कब्जा (Hinge) लगा होता है। यह पैर के पंजे को नीचे लटकने से तो रोकता है, लेकिन पंजे को थोड़ा ऊपर की तरफ (Dorsiflexion) मोड़ने की आजादी देता है।

  • किसके लिए सही है: जिन मरीजों के घुटने और कूल्हे में अच्छी ताकत है और पैर में ज्यादा अकड़न नहीं है।
  • फायदा: इससे मरीज की चाल (Gait) अधिक प्राकृतिक लगती है और सीढ़ियां चढ़ना या ढलान पर चलना आसान हो जाता है।

3. पोस्टीरियर लीफ स्प्रिंग (Posterior Leaf Spring – PLS)

यह सॉलिड एएफओ का ही एक लचीला रूप है। इसमें एड़ी के पीछे का प्लास्टिक बहुत पतला होता है।

  • किसके लिए सही है: ऐसे मरीज जिन्हें हल्का फुट ड्रॉप है और मांसपेशियों में जकड़न या ऐंठन (Spasticity) नहीं है।
  • फायदा: यह बहुत हल्का होता है। चलते समय जब पैर जमीन पर पड़ता है तो यह स्प्रिंग की तरह काम करता है और पैर को आगे बढ़ाने में मदद करता है।

4. कार्बन फाइबर एएफओ (Carbon Fiber AFO)

यह आधुनिक तकनीक से बना सबसे प्रीमियम एएफओ है। कार्बन फाइबर वजन में बेहद हल्का लेकिन लोहे से भी ज्यादा मजबूत होता है।

  • किसके लिए सही है: सक्रिय जीवनशैली वाले मरीजों के लिए।
  • फायदा: यह ‘एनर्जी रिटर्न’ (Energy Return) तकनीक पर काम करता है। जब मरीज चलता है तो यह स्प्रिंग की तरह ऊर्जा सोखता है और कदम उठाते समय उसे वापस देता है, जिससे थकान बहुत कम होती है।

5. ग्राउंड रिएक्शन एएफओ (GRAFO)

लकवे के कुछ मामलों में मरीज चलते समय अपने घुटने को सीधा नहीं रख पाता और घुटना अचानक आगे की तरफ मुड़ जाता है (Knee Buckling)। GRAFO विशेष रूप से घुटने को सहारा देने और उसे सीधा रखने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

सही AFO का चयन कैसे करें? (निर्णय लेने की प्रक्रिया)

किसी भी मरीज के लिए AFO खरीदने से पहले ऑर्थोटिस्ट (Orthotist) और फिजियोथेरेपिस्ट (Physiotherapist) की सलाह लेना अनिवार्य है। एक गलत एएफओ फायदे की जगह नुकसान कर सकता है। सही चुनाव के लिए इन बातों का ध्यान रखा जाता है:

  1. अकड़न (Spasticity) का स्तर: यदि लकवे वाले पैर में बहुत ज्यादा ऐंठन या अकड़न है, तो लचीला AFO (जैसे PLS या कार्बन फाइबर) काम नहीं करेगा। ऐसे में सॉलिड AFO ही सुरक्षित रहता है।
  2. घुटने और कूल्हे की ताकत: यदि मरीज के घुटने में ताकत कम है, तो टखने के साथ-साथ घुटने को भी स्थिर करने वाले ऑर्थोसिस की जरूरत पड़ सकती है।
  3. मरीज का वजन और जीवनशैली: एक युवा, नौकरीपेशा और सक्रिय व्यक्ति के लिए कार्बन फाइबर एएफओ बेहतरीन है, जबकि घर में रहने वाले बुजुर्ग मरीज के लिए एक आरामदायक प्लास्टिक एएफओ पर्याप्त हो सकता है।
  4. पैर का आकार (Custom vs. Ready-made): रेडीमेड AFO सस्ते होते हैं, लेकिन यदि मरीज के पैर का आकार असामान्य है, पैर में सूजन रहती है या कोई घाव है, तो ऑर्थोटिस्ट मरीज के पैर का नाप (Plaster Cast) लेकर ‘कस्टम-मेड’ (Custom-made) AFO बनाते हैं। यह सबसे सुरक्षित और आरामदायक विकल्प है।

AFO के साथ सही जूतों (Footwear) का चयन

AFO चाहे कितना भी अच्छा क्यों न हो, यदि जूते का चुनाव सही नहीं है, तो मरीज न तो आराम से चल पाएगा और न ही सुरक्षित रहेगा। AFO पहनने वाले मरीजों को जूते खरीदते समय निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:

  • बड़ा आकार (Size up): AFO के प्लास्टिक या कार्बन फाइबर के कारण पैर की चौड़ाई और लंबाई बढ़ जाती है। इसलिए मरीज को अपने सामान्य जूते से 1 या 2 नंबर बड़ा जूता लेना पड़ता है।
  • जूते की गहराई (Extra Depth): ऐसा जूता चुनें जो अंदर से गहरा हो। ज्यादातर स्पोर्ट्स जूतों में अंदर एक गद्देदार इनसोल (Insole) होता है। AFO पहनते समय उस इनसोल को बाहर निकाल दें ताकि AFO के लिए जगह बन सके।
  • फीते या वेल्क्रो (Laces vs. Velcro): लकवे के मरीजों का एक हाथ अक्सर कमजोर होता है, जिससे फीते बांधना मुश्किल होता है। इसलिए वेल्क्रो (Velcro) वाले जूते सबसे अच्छे रहते हैं। वेल्क्रो को एक हाथ से आसानी से खोला और बंद किया जा सकता है।
  • चौड़ा अगला हिस्सा (Wide Toe Box): जूते का आगे का हिस्सा (जहां उंगलियां होती हैं) चौड़ा होना चाहिए ताकि पैर की उंगलियां दबें नहीं।
  • एड़ी की ऊंचाई (Heel Pitch): जूते की एड़ी (Heel) और आगे के हिस्से में ज्यादा अंतर नहीं होना चाहिए। फ्लैट या बहुत कम हील वाले रबर सोल के जूते चुनें जो जमीन पर अच्छी पकड़ (Grip) बनाते हों।

AFO का उपयोग करते समय सावधानियां और देखभाल

जब कोई मरीज पहली बार AFO पहनना शुरू करता है, तो उसके शरीर और त्वचा को इसकी आदत पड़ने में समय लगता है।

  1. क्रमशः शुरुआत करें (Gradual Wearing): पहले ही दिन इसे पूरे दिन न पहनें। शुरुआत में इसे दिन में सिर्फ 1-2 घंटे पहनें और बीच-बीच में उतार लें। धीरे-धीरे इसका समय बढ़ाएं।
  2. त्वचा की जांच (Skin Inspection): एएफओ उतारने के बाद पैर की त्वचा (खासकर एड़ी, टखने की हड्डी और पिंडली के पास) को ध्यान से देखें। यदि त्वचा पर लाल निशान पड़ गए हैं जो 15-20 मिनट में भी ठीक नहीं हो रहे हैं, तो इसका मतलब है कि एएफओ पैर को काट रहा है। ऐसे में तुरंत अपने ऑर्थोटिस्ट से संपर्क करें ताकि वह उसे एडजस्ट कर सके।
  3. सूती मोज़े पहनें: एएफओ को कभी भी सीधे त्वचा पर नहीं पहनना चाहिए। हमेशा एएफओ पहनने से पहले सूती, बिना जोड़ (Seamless) वाला और घुटने तक लंबा मोजा (Knee-high sock) पहनें। यह पसीना सोखता है और त्वचा को रगड़ से बचाता है।
  4. साफ-सफाई: प्लास्टिक एएफओ को नियमित रूप से गीले कपड़े और हल्के साबुन से साफ करें। ध्यान रखें कि इसे पहनने से पहले यह पूरी तरह सूख चुका हो।

निष्कर्ष (Conclusion)

लकवे के बाद फुट ड्रॉप एक हताश करने वाली स्थिति हो सकती है, लेकिन सही AFO (ऑर्थोसिस) और कैलीपर के चुनाव से इस समस्या को बहुत प्रभावी ढंग से प्रबंधित किया जा सकता है। यह उपकरण न केवल गिरने के डर को खत्म करता है, बल्कि मरीज को दोबारा आत्मनिर्भर बनने और आत्मविश्वास के साथ चलने की आजादी देता है।

यह ध्यान रखना बहुत महत्वपूर्ण है कि AFO कोई एक जादू की छड़ी नहीं है। इसके साथ-साथ नियमित फिजियोथेरेपी (Physiotherapy) और मांसपेशियों की स्ट्रेचिंग भी उतनी ही जरूरी है। यदि आप या आपका कोई परिचित लकवे के बाद फुट ड्रॉप की समस्या से जूझ रहा है, तो बिना देरी किए किसी अनुभवी ऑर्थोटिस्ट और न्यूरो-फिजियोथेरेपिस्ट से संपर्क करें। सही उपकरण, सही जूते और मजबूत इच्छाशक्ति के साथ, लकवे के बाद की जिंदगी को फिर से गतिमान किया जा सकता है।

Similar Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *