कंजिनाइटल टॉर्टिकॉलिस (Torticollis) नवजात शिशु की गर्दन का एक तरफ झुका होना और उसे स्ट्रेचिंग से ठीक करना।
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कंजिनाइटल टॉर्टिकॉलिस (Congenital Torticollis): नवजात शिशु की गर्दन का एक तरफ झुका होना और स्ट्रेचिंग से इसका इलाज

जब घर में नन्हे मेहमान का आगमन होता है, तो माता-पिता उसकी हर छोटी-बड़ी गतिविधि पर ध्यान देते हैं। अक्सर कुछ माता-पिता यह नोटिस करते हैं कि उनके नवजात शिशु की गर्दन हमेशा एक ही तरफ झुकी रहती है या बच्चा अपना सिर घुमाने में असहज महसूस करता है। इसे देखकर घबराना स्वाभाविक है, लेकिन चिकित्सा विज्ञान में यह एक बेहद आम स्थिति है जिसे कंजिनाइटल मस्कुलर टॉर्टिकॉलिस (Congenital Muscular Torticollis) या ‘राईनेक’ (Wryneck) कहा जाता है।

अच्छी खबर यह है कि यह स्थिति पूरी तरह से ठीक हो सकती है। ज्यादातर मामलों में, घर पर ही कुछ आसान स्ट्रेचिंग और सही पोजीशनिंग की मदद से इस समस्या को जड़ से खत्म किया जा सकता है। आइए इस लेख के माध्यम से विस्तार से समझते हैं कि कंजिनाइटल टॉर्टिकॉलिस क्या है, इसके कारण क्या हैं और स्ट्रेचिंग के जरिए इसे कैसे ठीक किया जा सकता है।

कंजिनाइटल टॉर्टिकॉलिस क्या है?

“कंजिनाइटल” का अर्थ है ‘जन्म से मौजूद’ और “टॉर्टिकॉलिस” का अर्थ है ‘मुड़ी हुई गर्दन’। शिशु की गर्दन के दोनों तरफ एक प्रमुख मांसपेशी होती है जिसे स्टर्नोक्लिडोमैस्टॉइड (Sternocleidomastoid – SCM) कहा जाता है। यह मांसपेशी कॉलरबोन (हंसली) से लेकर कान के पीछे तक जाती है।

जब किसी कारणवश एक तरफ की SCM मांसपेशी छोटी और सख्त (टाइट) हो जाती है, तो बच्चे का सिर उस टाइट मांसपेशी की तरफ झुक जाता है और उसकी ठुड्डी (Chin) दूसरी दिशा में मुड़ जाती है। उदाहरण के लिए, यदि बच्चे की दाईं ओर की मांसपेशी सख्त है, तो उसका सिर दाईं ओर झुकेगा, लेकिन उसका चेहरा बाईं ओर मुड़ा हुआ दिखाई देगा।

यह समस्या क्यों होती है? (कारण)

डॉक्टरों और विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे कोई एक निश्चित कारण नहीं है, लेकिन निम्नलिखित कुछ मुख्य कारण हो सकते हैं:

  1. गर्भ में जगह की कमी: गर्भावस्था के अंतिम महीनों में यदि गर्भाशय में शिशु को हिलने-डुलने के लिए पर्याप्त जगह नहीं मिलती है, तो उसका सिर एक ही स्थिति में फंसा रह सकता है।
  2. ब्रीच पोजीशन (Breech Position): यदि शिशु जन्म के समय सीधा होने के बजाय उल्टा (पैर पहले) होता है, तो उसकी गर्दन की मांसपेशियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
  3. जन्म के समय खिंचाव: डिलीवरी के दौरान (खासकर वैक्यूम या फोर्सेप्स डिलीवरी में) बच्चे की गर्दन पर खिंचाव आ सकता है, जिससे SCM मांसपेशी में हल्की चोट या सूजन आ जाती है और वह टाइट हो जाती है।

माता-पिता इसे कैसे पहचानें? (लक्षण)

टॉर्टिकॉलिस जन्म के समय मौजूद होता है, लेकिन अक्सर माता-पिता इसे तब नोटिस करते हैं जब बच्चा 2 से 4 सप्ताह का हो जाता है। आप इसे इन लक्षणों से पहचान सकते हैं:

  • सिर का झुकाव: बच्चे का सिर लगातार एक ही तरफ (कंधे की ओर) झुका रहता है।
  • चेहरे की दिशा: बच्चा ज्यादातर समय अपना चेहरा एक ही दिशा में रखता है और दूसरी तरफ देखने में उसे परेशानी होती है या वह रोने लगता है।
  • स्तनपान में कठिनाई: माँ यह महसूस कर सकती है कि बच्चा एक तरफ के स्तन से दूध पीने में तो सहज है, लेकिन दूसरी तरफ से दूध पीने में उसे दिक्कत हो रही है।
  • गर्दन में गांठ: कुछ मामलों में, कसी हुई मांसपेशी (SCM) के बीच में मटर के दाने जैसी एक छोटी सी गांठ महसूस हो सकती है। यह खतरनाक नहीं होती और समय के साथ अपने आप घुल जाती है।

ध्यान दें: यदि शिशु का सिर लगातार एक ही स्थिति में रहता है, तो उसके सिर का एक हिस्सा चपटा हो सकता है। इसे पोजीशनल प्लागियोसेफली (Positional Plagiocephaly) या ‘फ्लैट हेड सिंड्रोम’ कहते हैं। टॉर्टिकॉलिस का सही समय पर इलाज करने से सिर के चपटे होने की समस्या से भी बचा जा सकता है।

स्ट्रेचिंग और व्यायाम: टॉर्टिकॉलिस का मुख्य इलाज

कंजिनाइटल टॉर्टिकॉलिस का सबसे प्रभावी और प्राथमिक इलाज फिजिकल थेरेपी (भौतिक चिकित्सा) और स्ट्रेचिंग है। बाल रोग विशेषज्ञ (Pediatrician) या पीडियाट्रिक फिजियोथेरेपिस्ट आपको कुछ सुरक्षित स्ट्रेचिंग तकनीकें सिखाएंगे, जिन्हें आप घर पर हर दिन कर सकते हैं।

नियम: स्ट्रेचिंग हमेशा तब करनी चाहिए जब बच्चा शांत और खुश हो। अगर बच्चा बहुत ज्यादा रो रहा है या विरोध कर रहा है, तो उस समय रुक जाएं और बाद में प्रयास करें।

नीचे कुछ प्रमुख स्ट्रेचिंग और पोजीशनिंग तकनीकें दी गई हैं:

1. नेक रोटेशन स्ट्रेच (गर्दन घुमाने का स्ट्रेच)

यह स्ट्रेच बच्चे को उस दिशा में देखने में मदद करता है जिधर देखने में उसे परेशानी होती है।

  • कैसे करें: बच्चे को अपनी पीठ के बल एक समतल और आरामदायक जगह पर लिटाएं।
  • अपने एक हाथ को धीरे से बच्चे की छाती पर रखें ताकि उसका शरीर न घूमे।
  • अपने दूसरे हाथ से बच्चे के सिर को हल्के से पकड़ें।
  • बच्चे के चेहरे को धीरे-धीरे उस दिशा में घुमाएं जहाँ उसे देखने में कठिनाई होती है (यानी टाइट मांसपेशी की तरफ)।
  • इस पोजीशन को 10 से 15 सेकंड तक रोक कर रखें।
  • फिर धीरे से सिर को बीच में लाएं। इस प्रक्रिया को 4-5 बार दोहराएं।

2. साइड-बेंडिंग स्ट्रेच (कान से कंधे तक का स्ट्रेच)

यह व्यायाम कसी हुई SCM मांसपेशी की लंबाई बढ़ाने में मदद करता है।

  • कैसे करें: बच्चे को पीठ के बल लिटाएं।
  • एक हाथ बच्चे के उस कंधे पर रखें जो टाइट मांसपेशी वाली तरफ है (ताकि कंधा ऊपर न उठे)।
  • दूसरे हाथ से बच्चे के सिर को पकड़ें और धीरे से उसके सिर को विपरीत दिशा (सही वाली तरफ) के कंधे की ओर झुकाएं।
  • कोशिश करें कि बच्चे का कान उसके कंधे को छुए (लेकिन जोर न लगाएं)।
  • 10-15 सेकंड के लिए होल्ड करें और फिर सिर सीधा कर दें। इसे भी 4-5 बार करें।

1.माहौल शांत रखें:

स्ट्रेचिंग शुरू करने से पहले सुनिश्चित करें कि बच्चा भूखा न हो और उसकी नींद पूरी हो चुकी हो।

2.खिलौनों का इस्तेमाल करें:

बच्चे का ध्यान भटकाने के लिए रंग-बिरंगे या आवाज़ करने वाले खिलौनों का उपयोग करें।

3.हल्का दबाव डालें:

खिंचाव बहुत ही सौम्य होना चाहिए। अगर बच्चा दर्द से रोता है, तो दबाव कम कर दें।

4.नियमितता बनाए रखें:

इन व्यायामों को दिन में 3 से 4 बार (जैसे डायपर बदलते समय) करने का नियम बनाएं।

दिनचर्या में बदलाव और सही पोजीशनिंग

स्ट्रेचिंग के अलावा, दिनभर बच्चे को किस तरह से लिटाया या उठाया जाता है, यह टॉर्टिकॉलिस को ठीक करने में अहम भूमिका निभाता है।

टमी टाइम (Tummy Time)

टमी टाइम टॉर्टिकॉलिस के इलाज का ‘ब्रह्मास्त्र’ है। जब बच्चा जाग रहा हो और आपकी निगरानी में हो, तो उसे पेट के बल लिटाएं।

  • पेट के बल लेटने पर बच्चा अपना सिर उठाने की कोशिश करता है, जिससे उसकी गर्दन और पीठ की मांसपेशियां मजबूत होती हैं।
  • खिलौनों को बच्चे की उस तरफ रखें जिधर देखने में उसे परेशानी होती है। इससे वह अपनी टाइट मांसपेशी को खुद स्ट्रेच करने के लिए प्रेरित होगा।

खिलाने की पोजीशन (Feeding Position)

चाहे आप स्तनपान करा रही हों या बोतल से दूध पिला रही हों, बच्चे को इस तरह से पकड़ें कि उसे दूध पीते समय अपनी कमजोर दिशा की ओर मुड़ना पड़े। इससे अनजाने में ही उसकी गर्दन की स्ट्रेचिंग हो जाएगी।

क्रिब या पालने की सेटिंग

बच्चे स्वाभाविक रूप से कमरे में हो रही गतिविधियों, खिड़की की रोशनी या अपनी माँ की आवाज़ की तरफ देखना पसंद करते हैं।

  • बच्चे को पालने (Crib) में इस तरह लिटाएं कि इन रोचक चीज़ों को देखने के लिए उसे अपनी गर्दन उस दिशा में घुमानी पड़े जहाँ उसे दिक्कत होती है।
  • उदाहरण के लिए, यदि बच्चे का सिर दाईं ओर झुका रहता है और वह बाईं ओर नहीं देख पाता, तो उसे पालने में ऐसे सुलाएं कि कमरे का दरवाज़ा या रोशनी उसके बाईं ओर हो।

डॉक्टर से कब मिलें?

यद्यपि कंजिनाइटल टॉर्टिकॉलिस घर पर स्ट्रेचिंग से 90-95% मामलों में पूरी तरह ठीक हो जाता है, फिर भी आपको एक बाल रोग विशेषज्ञ की देखरेख में ही इसका इलाज शुरू करना चाहिए। अगर:

  • स्ट्रेचिंग के 2-3 महीने बाद भी कोई सुधार नहीं दिख रहा है।
  • बच्चे के सिर का आकार असामान्य रूप से चपटा हो रहा है।
  • बच्चा 6 महीने का हो गया है और अभी भी उसकी गर्दन झुकी हुई है।

ऐसी स्थिति में डॉक्टर बच्चे को किसी विशेषज्ञ के पास भेज सकते हैं। बहुत ही दुर्लभ मामलों (लगभग 5%) में, यदि मांसपेशी बहुत ज्यादा टाइट हो और स्ट्रेचिंग से न खुल रही हो, तो एक छोटी सी सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है।

निष्कर्ष

कंजिनाइटल टॉर्टिकॉलिस माता-पिता के लिए चिंता का विषय हो सकता है, लेकिन यह कोई गंभीर बीमारी नहीं है। शिशु का शरीर बहुत लचीला होता है और प्रारंभिक अवस्था (शुरुआती 2 से 6 महीने) में शुरू की गई जेंटल स्ट्रेचिंग थेरेपी से बेहतरीन परिणाम मिलते हैं। धैर्य रखें, अपने डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट के निर्देशों का पालन करें और बच्चे के साथ खेलते-खेलते इन व्यायामों को उसकी दिनचर्या का हिस्सा बना लें। जल्द ही आपके शिशु की गर्दन बिल्कुल सीधी और मजबूत हो जाएगी।

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