क्या आपकी कोहनी के अंदर की तरफ़ (शरीर की ओर वाले हिस्से में) दर्द रहता है? क्या सामान उठाते समय, हाथ मिलाते समय, दरवाज़े का हैंडल घुमाते समय या कपड़े निचोड़ते समय वह दर्द और बढ़ जाता है? अगर हाँ, तो संभव है कि आप गोल्फर एल्बो से परेशान हैं।
नाम से ऐसा लगता है कि यह सिर्फ़ गोल्फ खेलने वालों की समस्या है, लेकिन सच यह है कि इसका गोल्फ से बहुत कम और रोज़मर्रा की आदतों से ज़्यादा संबंध है। कंप्यूटर पर काम करने वाले, पेंटर, बढ़ई, रसोई में काम करने वाले, भारी बैग उठाने वाले, जिम में वज़न उठाने वाले और क्रिकेट या बैडमिंटन खेलने वाले लोग भी इसकी चपेट में आते हैं।
अच्छी बात यह है कि सही समझ, सही व्यायाम और थोड़े धैर्य के साथ इस समस्या से लगभग पूरी तरह छुटकारा पाया जा सकता है। इस लेख में हम जानेंगे कि गोल्फर एल्बो क्या है, क्यों होता है, कैसे पहचानें, और इसका टिकाऊ (लंबे समय तक चलने वाला) समाधान क्या है।
गोल्फर एल्बो क्या है?
चिकित्सा भाषा में इसे मेडियल एपिकॉन्डिलाइटिस (Medial Epicondylitis) कहते हैं। हमारी कोहनी की हड्डी के अंदरूनी उभार को “मेडियल एपिकॉन्डाइल” कहा जाता है। कलाई को नीचे की ओर मोड़ने वाली और उँगलियों को बंद करने वाली कलाई की मांसपेशियाँ (फ्लेक्सर मसल्स) इसी उभार से टेंडन (कंडरा) के ज़रिए जुड़ी होती हैं।
जब इन मांसपेशियों और टेंडन पर बार-बार ज़रूरत से ज़्यादा दबाव पड़ता है, तो टेंडन में बहुत छोटे-छोटे फटाव (माइक्रो-टियर) और खिंचाव आ जाता है। शरीर इसकी मरम्मत करने की कोशिश करता है, लेकिन अगर दबाव लगातार बना रहे तो मरम्मत अधूरी रह जाती है और दर्द पुराना (क्रॉनिक) हो जाता है।
आजकल विशेषज्ञ इसे केवल “सूजन” की समस्या नहीं मानते। लंबे समय से चल रहे मामलों में टेंडन की बनावट में बदलाव आ जाता है, जिसे टेंडिनोपैथी कहा जाता है। यही कारण है कि सिर्फ़ दर्द की गोली या कुछ दिन का आराम अक्सर स्थायी राहत नहीं देता।
टेनिस एल्बो से अंतर
टेनिस एल्बो में दर्द कोहनी के बाहरी हिस्से में होता है, जबकि गोल्फर एल्बो में अंदरूनी हिस्से में। दोनों की जड़ एक जैसी है, यानी टेंडन पर अत्यधिक दबाव, पर प्रभावित मांसपेशियाँ अलग होती हैं।
गोल्फर एल्बो के मुख्य कारण
1. बार-बार दोहराई जाने वाली गतिविधियाँ कलाई मोड़ने या मुट्ठी कसकर पकड़ने वाले काम बार-बार करना, जैसे हथौड़ा चलाना, पेंच कसना, कपड़े निचोड़ना, सब्ज़ी काटना या लंबे समय तक पकड़ बनाए रखना।
2. खेलों का गलत तरीका गोल्फ, क्रिकेट (गेंदबाज़ी, थ्रो), बेसबॉल, टेनिस (गलत फोरहैंड तकनीक), भाला फेंक और बैडमिंटन में गलत तकनीक से कोहनी के अंदरूनी हिस्से पर झटका लगता है।
3. जिम में गलत तरीका बाइसेप्स कर्ल, पुल-अप, डेडलिफ्ट या रोइंग में ज़्यादा वज़न के साथ कलाई और कोहनी पर अनुचित तनाव। बिना वॉर्म-अप के भारी वज़न उठाना भी बड़ा कारण है।
4. कंप्यूटर और मोबाइल का ज़्यादा उपयोग माउस का लगातार इस्तेमाल, कलाई को गलत कोण पर रखकर टाइपिंग और कोहनी को लंबे समय तक मुड़ी स्थिति में रखना।
5. कमज़ोर मांसपेशियाँ और अकड़न अगर अग्रबाहु (फोरआर्म), कंधे और ऊपरी पीठ की मांसपेशियाँ कमज़ोर हैं, तो सारा दबाव कोहनी के टेंडन पर आ जाता है।
6. उम्र और अन्य कारक 35 से 55 वर्ष की उम्र में यह ज़्यादा देखा जाता है। धूम्रपान, मोटापा और मधुमेह भी टेंडन के ठीक होने की क्षमता को कम कर सकते हैं।
गोल्फर एल्बो के लक्षण
- कोहनी के अंदरूनी उभार पर दर्द और छूने पर दुखन
- दर्द का अग्रबाहु (फोरआर्म) से कलाई की ओर फैलना
- मुट्ठी कसने, हाथ मिलाने या चीज़ें पकड़ने में कमज़ोरी
- कलाई को नीचे मोड़ने या हाथ को अंदर की ओर घुमाने पर दर्द
- कोहनी में अकड़न, खासकर सुबह के समय
- कुछ लोगों में अनामिका और छोटी उँगली में झुनझुनी या सुन्नपन
ध्यान दें कि सूजन, लालिमा या बुखार इस समस्या में आमतौर पर नहीं होते। अगर ये हों, तो डॉक्टर को तुरंत दिखाएँ।
जाँच कैसे होती है?
ज़्यादातर मामलों में डॉक्टर या फिज़ियोथेरेपिस्ट शारीरिक जाँच से ही निदान कर लेते हैं। वे कोहनी के अंदरूनी उभार को दबाकर देखते हैं और कलाई को मोड़ने या हाथ घुमाने पर दर्द की जाँच करते हैं।
ज़रूरत पड़ने पर ये जाँचें कराई जा सकती हैं:
- एक्स-रे: हड्डी की किसी अन्य समस्या (फ्रैक्चर, गठिया) को अलग करने के लिए
- अल्ट्रासाउंड या एमआरआई: टेंडन की स्थिति और फटाव देखने के लिए
- नर्व कंडक्शन टेस्ट: अगर उँगलियों में झुनझुनी है और अलनार नर्व पर दबाव (क्यूबिटल टनल सिंड्रोम) का संदेह है
“पक्के समाधान” की सच्चाई
इंटरनेट पर अक्सर “रातों-रात इलाज” या “एक नुस्खे में जड़ से खत्म” जैसे दावे मिलते हैं। सच यह है कि टेंडन की मरम्मत में समय लगता है, क्योंकि टेंडन में रक्त संचार मांसपेशियों के मुकाबले कम होता है। ज़्यादातर लोग 6 से 12 सप्ताह में काफ़ी बेहतर हो जाते हैं, और कुछ मामलों में पूरी तरह ठीक होने में 6 से 12 महीने भी लग सकते हैं। अच्छी खबर यह है कि बहुत बड़ी संख्या में मरीज़ बिना ऑपरेशन के ठीक हो जाते हैं।
पक्का समाधान तीन स्तंभों पर टिका है:
- दर्द और सूजन को शांत करना
- टेंडन को व्यायाम से दोबारा मज़बूत बनाना
- उन आदतों को सुधारना जिनसे समस्या शुरू हुई थी
अगर तीसरा काम छूट गया, तो दर्द वापस आ सकता है। यही कारण है कि कई लोग “ठीक होकर फिर बीमार” होते रहते हैं।
शुरुआती राहत (पहले 1–2 सप्ताह)
आराम, पर पूरी तरह निष्क्रियता नहीं। जिस गतिविधि से दर्द बढ़ता है, उसे कुछ समय के लिए रोक दें या कम करें। हाथ को पूरी तरह स्थिर रखना भी ठीक नहीं है, क्योंकि इससे टेंडन और कमज़ोर हो सकता है। हल्की, दर्द-रहित हरकतें जारी रखें।
बर्फ की सिकाई। शुरुआती दिनों में या काम के बाद दर्द बढ़ने पर, कपड़े में लपेटी बर्फ 10 से 15 मिनट तक कोहनी के अंदरूनी हिस्से पर रखें। बर्फ सीधे त्वचा पर न रखें। दिन में 2 से 3 बार कर सकते हैं।
गर्म सिकाई। पुराने, अकड़न वाले दर्द में कुछ लोगों को गुनगुनी सिकाई से आराम मिलता है, खासकर व्यायाम से पहले। जो आपको ज़्यादा आराम दे, वही चुनें।
दर्द निवारक दवाएँ। कुछ दिनों के लिए पैरासिटामोल या डॉक्टर की सलाह से NSAID दवाएँ (जैसे इबुप्रोफेन) राहत दे सकती हैं। ध्यान रखें कि ये दवाएँ सिर्फ़ दर्द दबाती हैं, टेंडन को ठीक नहीं करतीं। पेट, किडनी या ब्लड प्रेशर की समस्या हो तो बिना पूछे न लें। इसी तरह दर्द निवारक जेल या स्प्रे अस्थायी मदद कर सकते हैं।
कोहनी का स्ट्रैप (ब्रेस)। कोहनी के ठीक नीचे अग्रबाहु पर बाँधा जाने वाला काउंटरफ़ोर्स स्ट्रैप टेंडन पर पड़ने वाले खिंचाव को कुछ कम करता है। इसे काम या खेल के दौरान पहनें, रात में नहीं। यह सहारा है, इलाज का विकल्प नहीं।
टेंडन को मज़बूत बनाने वाले व्यायाम (असली इलाज)
लंबे समय का समाधान यहीं छिपा है। शोध बताते हैं कि नियमित, चरणबद्ध व्यायाम टेंडन की मरम्मत में सबसे भरोसेमंद तरीका है। नीचे दिए व्यायाम तभी शुरू करें जब तेज़ दर्द कम हो जाए। व्यायाम के दौरान हल्की असुविधा (10 में से 3 या 4) स्वीकार्य है, पर तेज़ दर्द हो तो रुक जाएँ।
1. कलाई के फ्लेक्सर की स्ट्रेचिंग
कोहनी सीधी रखें, हथेली ऊपर की ओर करें। दूसरे हाथ से उँगलियों को धीरे से नीचे की ओर खींचें, जब तक अग्रबाहु के अंदर खिंचाव महसूस हो। 30 सेकंड रोकें। 3 बार दोहराएँ, दिन में 2 से 3 बार।

2. आइसोमेट्रिक व्यायाम (शुरुआती चरण के लिए)
हथेली ऊपर की ओर करके हाथ मेज़ पर टिकाएँ। दूसरे हाथ से कलाई पर नीचे से दबाव दें और कलाई को ऊपर की ओर दबाने की कोशिश करें, पर कलाई हिले नहीं। 30 से 45 सेकंड तक रोकें। 4 से 5 बार दोहराएँ। यह दर्द होने पर भी सुरक्षित तरीके से टेंडन को सक्रिय करता है।
3. एक्सेंट्रिक रिस्ट कर्ल (मुख्य व्यायाम)
कुर्सी पर बैठें, अग्रबाहु को जाँघ या मेज़ पर टिकाएँ, हथेली ऊपर की ओर रहे। हाथ में 0.5 से 1 किलो का डंबल (या पानी की छोटी बोतल) लें।
- दूसरे हाथ की मदद से कलाई को ऊपर की ओर मोड़ें।
- अब प्रभावित हाथ से धीरे-धीरे (3 से 5 सेकंड में) कलाई को नीचे की ओर उतारें।
- 10 से 15 बार दोहराएँ, 3 सेट, दिन में एक बार।
- जैसे-जैसे आसानी हो, वज़न बहुत धीरे-धीरे बढ़ाएँ।
इस व्यायाम की खासियत यह है कि ऊपर उठाने में प्रभावित हाथ की मेहनत नहीं लगती, केवल नीचे लाते समय टेंडन पर नियंत्रित भार पड़ता है, जो उसकी मरम्मत के लिए उपयोगी है।

4. पकड़ मज़बूत करने का व्यायाम
नरम रबर की गेंद या थेरेपी पुट्टी को 5 सेकंड तक धीरे से दबाएँ और छोड़ें। 10 से 15 बार दोहराएँ। शुरुआत में हल्का दबाव दें।

5. अग्रबाहु का घुमाव (प्रोनेशन-सुपिनेशन)
कोहनी को शरीर से सटाकर 90 डिग्री पर मोड़ें और हल्का हथौड़ा या डंबल पकड़ें। हथेली को धीरे-धीरे ऊपर और नीचे की ओर घुमाएँ। 10 बार, 2 से 3 सेट।

6. कंधे और ऊपरी पीठ को मज़बूत बनाना
कोहनी की समस्या अक्सर कंधे और स्कैपुला की कमज़ोरी से जुड़ी होती है। रेज़िस्टेंस बैंड के साथ रो (rows) और बाहरी घुमाव (external rotation) जैसे व्यायाम फ़ायदेमंद हैं। फिज़ियोथेरेपिस्ट सही तरीका सिखा सकते हैं।
व्यायाम के नियम: हर व्यायाम से पहले हल्का वार्म-अप करें। भार धीरे-धीरे बढ़ाएँ। अगर व्यायाम के बाद दर्द 24 घंटे से ज़्यादा बढ़ा रहे, तो अगली बार भार या दोहराव कम कर दें। 6 से 12 सप्ताह तक नियमित रहना ज़रूरी है।
वो आदतें जो दर्द को वापस लाती हैं, और उनका सुधार
कंप्यूटर पर काम करते समय
- कुर्सी और मेज़ की ऊँचाई ऐसी रखें कि कोहनी लगभग 90 डिग्री पर रहे और कलाई सीधी।
- कलाई के लिए पैड या सपोर्ट का उपयोग करें; कलाई को न मोड़ें।
- एर्गोनॉमिक (ऊर्ध्वाधर) माउस पर विचार करें।
- हर 30 से 45 मिनट पर कुछ मिनट का ब्रेक लेकर हाथ खोलें और स्ट्रेच करें।
भारी सामान उठाते समय
- बैग या सामान को हथेली नीचे की ओर रखकर, कलाई मोड़कर न उठाएँ। कोशिश करें कि भार शरीर के पास रहे और पूरे हाथ से उठाया जाए।
- ब्रीफ़केस या थैला कंधे पर टाँगें, या दोनों हाथों में बाँटें।
औज़ारों और घरेलू काम में
- मोटे हैंडल वाले औज़ार चुनें; पतले हैंडल पर पकड़ ज़्यादा कसनी पड़ती है।
- कपड़े निचोड़ने, ढक्कन खोलने जैसे कामों में दोनों हाथ बाँटकर इस्तेमाल करें।
खेल और जिम में
- गोल्फ़ या क्रिकेट जैसे खेलों में कोच से अपनी तकनीक जँचवाएँ। गलत स्विंग या ग्रिप मुख्य कारण होता है।
- गोल्फ़ क्लब या बैडमिंटन रैकेट की ग्रिप का साइज़ सही हो।
- जिम में वॉर्म-अप करें, वज़न धीरे बढ़ाएँ और कलाई-कोहनी के सहारे के बजाय सही मांसपेशी पर ध्यान दें।
फिज़ियोथेरेपी और अन्य उपचार
अगर 2 से 3 सप्ताह के घरेलू उपायों से आराम न मिले, तो फिज़ियोथेरेपिस्ट से मिलें। वे ये कर सकते हैं:
- आपके दर्द के अनुसार व्यायाम का व्यक्तिगत प्लान बनाना
- मैनुअल थेरेपी और सॉफ्ट-टिशू मसाज
- कंधे, गर्दन और अग्रबाहु की ताक़त और लचीलेपन की जाँच
- शॉकवेव थेरेपी या अल्ट्रासाउंड थेरेपी जैसी विधियाँ, जो कुछ मरीज़ों में उपयोगी पाई गई हैं (इनके प्रमाण मिले-जुले हैं, इसलिए सिर्फ़ इन पर निर्भर न रहें)
इंजेक्शन और सर्जरी (केवल ज़रूरत पड़ने पर)
स्टेरॉयड इंजेक्शन। यह कुछ हफ़्तों के लिए दर्द में जल्दी राहत दे सकता है, लेकिन अध्ययन बताते हैं कि लंबे समय में इसके परिणाम व्यायाम से बेहतर नहीं होते, और कुछ मामलों में दर्द बाद में लौट आता है। बार-बार इंजेक्शन से टेंडन कमज़ोर भी हो सकता है। इसलिए इसे पहला विकल्प न बनाएँ और डॉक्टर से जोखिम-लाभ पर चर्चा करें।
PRP (प्लेटलेट-रिच प्लाज़्मा)। आपके अपने रक्त से तैयार इस इंजेक्शन का उपयोग कुछ जिद्दी मामलों में किया जाता है। वैज्ञानिक प्रमाण अभी सीमित और मिले-जुले हैं, और यह महँगा हो सकता है।
सर्जरी। बहुत कम मरीज़ों को इसकी ज़रूरत पड़ती है। जब 6 से 12 महीने के उचित गैर-सर्जिकल इलाज के बावजूद दर्द रोज़मर्रा के काम में बाधा डाले, तब ही इसे सोचा जाता है। इसमें क्षतिग्रस्त टेंडन के हिस्से को हटाया या ठीक किया जाता है।
घरेलू और जीवनशैली संबंधी सहायक उपाय
- पर्याप्त नींद: टेंडन की मरम्मत नींद में ज़्यादा होती है।
- संतुलित आहार: पर्याप्त प्रोटीन, विटामिन C और विटामिन D का ध्यान रखें। जाँच में कमी हो तो डॉक्टर की सलाह से पूरक लें।
- धूम्रपान छोड़ें: निकोटीन टेंडन में रक्त प्रवाह घटाकर ठीक होने की गति धीमी करता है।
- वज़न और शुगर नियंत्रित रखें: इससे टेंडन की सेहत बेहतर रहती है।
- हल्दी, अदरक जैसे घरेलू उपाय: इनका सेवन सूजन-रोधी माना जाता है, पर इनके पक्के प्रमाण सीमित हैं। इन्हें मुख्य इलाज की जगह न रखें।
कब तुरंत डॉक्टर को दिखाएँ?
निम्न स्थितियों में देर न करें:
- चोट लगने या गिरने के बाद अचानक तेज़ दर्द, सूजन या कोहनी हिलाने में असमर्थता
- कोहनी का लाल, गर्म होना या बुखार (संक्रमण का संकेत हो सकता है)
- हाथ या उँगलियों में लगातार सुन्नपन, झुनझुनी या कमज़ोरी
- कोहनी को पूरी तरह मोड़ या सीधा न कर पाना
- 6 सप्ताह के सही उपचार के बाद भी कोई सुधार न होना
- रात में बिना हरकत भी तेज़ दर्द
कोहनी के दर्द का एक कारण गर्दन की नस दबना, गठिया या दिल की समस्या भी हो सकती है, इसलिए असामान्य लक्षणों को नज़रअंदाज़ न करें।
दर्द दोबारा न लौटे, इसके लिए
- ठीक हो जाने के बाद भी हफ़्ते में 2 से 3 बार मज़बूती के व्यायाम जारी रखें।
- खेल या भारी काम से पहले हमेशा वार्म-अप करें।
- एक ही हरकत घंटों तक न दोहराएँ; बीच में ब्रेक लें।
- दर्द की शुरुआती चेतावनी को नज़रअंदाज़ न करें। हल्का दर्द होते ही गतिविधि घटाएँ।
- सही उपकरण, ग्रिप साइज़ और एर्गोनॉमिक सेटअप अपनाएँ।
निष्कर्ष
गोल्फर एल्बो एक आम लेकिन ठीक होने वाली समस्या है। “पक्का समाधान” किसी जादुई दवा या इंजेक्शन में नहीं, बल्कि सही निदान, धैर्य के साथ नियमित व्यायाम और दोबारा चोट पहुँचाने वाली आदतों में सुधार में है। शुरुआत में आराम और सिकाई से दर्द काबू में करें, फिर एक्सेंट्रिक व्यायामों से टेंडन को मज़बूत करें, और अंत में अपनी दिनचर्या व तकनीक बदलें। अधिकांश लोग 2 से 3 महीनों में बहुत बेहतर महसूस करते हैं, जबकि कुछ को पूरी तरह ठीक होने में अधिक समय लग सकता है। इसे असफलता न मानें।
अगर दर्द लंबा खिंचे या ऊपर बताए गए चेतावनी संकेत दिखें, तो किसी ऑर्थोपेडिक डॉक्टर या फिज़ियोथेरेपिस्ट से ज़रूर मिलें।

