एसिड भाटा
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एसिड भाटा

एसिड भाटा क्या है?

एसिड भाटा, जिसे गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज (जीईआरडी) भी कहा जाता है, एक पाचन विकार है जो तब होता है जब पेट का एसिड बार-बार भोजन नली (ग्रासनली) में वापस बहता है। यह एसिड रिफ्लक्स ग्रासनली की परत को परेशान कर सकता है।

एसिड भाटा के लक्षण:

  • सीने में जलन (हार्टबर्न), जो आमतौर पर खाने के बाद और रात में बढ़ जाती है।
  • मुंह में खट्टा या कड़वा स्वाद आना।
  • भोजन या खट्टा तरल पदार्थ का वापस आना (रीगर्जिटेशन)।
  • ऊपरी पेट या छाती में दर्द।
  • निगलने में कठिनाई (डिस्फेजिया)
  • लगातार सूखी खांसी।
  • स्वर बैठना या गले में खराश।

एसिड भाटा के कारण:

  • निचले ग्रासनली स्फिंक्टर (एलईएस) का कमजोर होना, जो पेट के एसिड को ग्रासनली में वापस आने से रोकता है।
  • पेट में अत्यधिक एसिड का उत्पादन।
  • लेटने या झुकने के तुरंत बाद खाना खाना।
  • कुछ खाद्य पदार्थ और पेय पदार्थ, जैसे कि वसायुक्त या तले हुए भोजन, टमाटर, खट्टे फल, चॉकलेट, पुदीना, लहसुन, प्याज, कैफीन और अल्कोहल।
  • धूम्रपान।
  • मोटापा।
  • गर्भावस्था।
  • कुछ दवाएं, जैसे कि एस्पिरिन, इबुप्रोफेन और कुछ रक्तचाप की दवाएं।
  • हायटस हर्निया।

एसिड भाटा का निदान:

  • शारीरिक परीक्षण और चिकित्सा इतिहास।
  • ऊपरी एंडोस्कोपी।
  • पीएच निगरानी।
  • ग्रासनली मनोमिति।

एसिड भाटा का उपचार:

  • जीवनशैली में बदलाव, जैसे कि वजन कम करना, धूम्रपान छोड़ना, छोटे और अधिक बार भोजन करना, और सोने से कुछ घंटे पहले खाना खाने से बचना।
  • ओवर-द-काउंटर दवाएं, जैसे कि एंटासिड, एच2 ब्लॉकर्स और प्रोटॉन पंप इनहिबिटर (पीपीआई)।
  • गंभीर मामलों में सर्जरी।

एसिड भाटा से बचाव:

  • स्वस्थ वजन बनाए रखें।
  • धूम्रपान छोड़ें।
  • छोटे और अधिक बार भोजन करें।
  • सोने से कुछ घंटे पहले खाना खाने से बचें।
  • उन खाद्य पदार्थों और पेय पदार्थों से बचें जो एसिड भाटा को बढ़ाते हैं।
  • तंग कपड़े पहनने से बचें।
  • अपने सिर को बिस्तर पर ऊपर उठाएं।

जीईआरडी क्या है?

जीईआरडी (गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज) एक पाचन संबंधी विकार है जो तब होता है जब पेट का एसिड बार-बार भोजन नली (ग्रासनली) में वापस बहता है। यह एसिड रिफ्लक्स ग्रासनली की परत को परेशान कर सकता है।

जीईआरडी के लक्षण:

  • सीने में जलन (हार्टबर्न), जो आमतौर पर खाने के बाद और रात में बढ़ जाती है।
  • मुंह में खट्टा या कड़वा स्वाद आना।
  • भोजन या खट्टा तरल पदार्थ का वापस आना (रीगर्जिटेशन)।
  • ऊपरी पेट या छाती में दर्द।
  • निगलने में कठिनाई (डिस्फेजिया)।
  • लगातार सूखी खांसी।
  • स्वर बैठना या गले में खराश।

जीईआरडी के कारण:

  • निचले ग्रासनली स्फिंक्टर (एलईएस) का कमजोर होना, जो पेट के एसिड को ग्रासनली में वापस आने से रोकता है।
  • पेट में अत्यधिक एसिड का उत्पादन।
  • लेटने या झुकने के तुरंत बाद खाना खाना।
  • कुछ खाद्य पदार्थ और पेय पदार्थ, जैसे कि वसायुक्त या तले हुए भोजन, टमाटर, खट्टे फल, चॉकलेट, पुदीना, लहसुन, प्याज, कैफीन और अल्कोहल।
  • धूम्रपान।
  • मोटापा।
  • गर्भावस्था।
  • कुछ दवाएं, जैसे कि एस्पिरिन, इबुप्रोफेन और कुछ रक्तचाप की दवाएं।
  • हायटस हर्निया।

जीईआरडी का निदान:

  • शारीरिक परीक्षण और चिकित्सा इतिहास।
  • ऊपरी एंडोस्कोपी।
  • पीएच निगरानी।
  • ग्रासनली मनोमिति।

जीईआरडी का उपचार:

  • जीवनशैली में बदलाव, जैसे कि वजन कम करना, धूम्रपान छोड़ना, छोटे और अधिक बार भोजन करना, और सोने से कुछ घंटे पहले खाना खाने से बचना।
  • ओवर-द-काउंटर दवाएं, जैसे कि एंटासिड, एच2 ब्लॉकर्स और प्रोटॉन पंप इनहिबिटर (पीपीआई)।
  • गंभीर मामलों में सर्जरी।

जीईआरडी से बचाव:

  • स्वस्थ वजन बनाए रखें।
  • धूम्रपान छोड़ें।
  • छोटे और अधिक बार भोजन करें।
  • सोने से कुछ घंटे पहले खाना खाने से बचें।
  • उन खाद्य पदार्थों और पेय पदार्थों से बचें जो एसिड भाटा को बढ़ाते हैं।
  • तंग कपड़े पहनने से बचें।
  • अपने सिर को बिस्तर पर ऊपर उठाएं।

एसिड भाटा के कारण क्या हैं?

एसिड भाटा, जिसे गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज (जीईआरडी) भी कहा जाता है, के कई कारण हो सकते हैं। यहाँ कुछ मुख्य कारण दिए गए हैं:

  • निचले ग्रासनली स्फिंक्टर (एलईएस) का कमजोर होना:
    • एलईएस एक मांसपेशी है जो ग्रासनली और पेट के बीच स्थित होती है। जब यह मांसपेशी कमजोर हो जाती है, तो पेट का एसिड ग्रासनली में वापस बह सकता है।
  • पेट में अत्यधिक एसिड का उत्पादन:
    • कुछ लोगों में पेट में सामान्य से अधिक एसिड का उत्पादन होता है, जिससे एसिड भाटा का खतरा बढ़ जाता है।
  • हायटस हर्निया:
    • यह तब होता है जब पेट का ऊपरी हिस्सा डायाफ्राम के माध्यम से छाती में चला जाता है। यह एलईएस पर दबाव डाल सकता है और एसिड भाटा का कारण बन सकता है।
  • कुछ खाद्य पदार्थ और पेय पदार्थ:
    • कुछ खाद्य पदार्थ और पेय पदार्थ एलईएस को कमजोर कर सकते हैं या पेट में एसिड के उत्पादन को बढ़ा सकते हैं। इनमें वसायुक्त या तले हुए भोजन, टमाटर, खट्टे फल, चॉकलेट, पुदीना, लहसुन, प्याज, कैफीन और अल्कोहल शामिल हैं।
  • धूम्रपान:
    • धूम्रपान एलईएस को कमजोर कर सकता है और पेट में एसिड के उत्पादन को बढ़ा सकता है।
  • मोटापा:
    • अतिरिक्त वजन पेट पर दबाव डाल सकता है, जिससे एसिड भाटा का खतरा बढ़ जाता है।
  • गर्भावस्था:
    • गर्भावस्था के दौरान हार्मोनल परिवर्तन और बढ़े हुए गर्भाशय पेट पर दबाव डाल सकते हैं, जिससे एसिड भाटा हो सकता है।
  • कुछ दवाएं:
    • कुछ दवाएं, जैसे कि एस्पिरिन, इबुप्रोफेन और कुछ रक्तचाप की दवाएं, एसिड भाटा का कारण बन सकती हैं।

एसिड भाटा के संकेत और लक्षण क्या हैं?

एसिड भाटा, जिसे गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स डिजीज (जीईआरडी) भी कहा जाता है, के कई संकेत और लक्षण हो सकते हैं। यहाँ कुछ सामान्य लक्षण दिए गए हैं:

  • सीने में जलन (हार्टबर्न):
    • यह सबसे आम लक्षण है, जो छाती में जलन या बेचैनी के रूप में महसूस होता है।
  • मुंह में खट्टा या कड़वा स्वाद:
    • पेट का एसिड मुंह में वापस आने से ऐसा महसूस होता है।
  • भोजन या खट्टा तरल पदार्थ का वापस आना (रीगर्जिटेशन):
    • यह तब होता है जब पेट की सामग्री ग्रासनली में वापस आ जाती है।
  • ऊपरी पेट या छाती में दर्द:
    • यह दर्द सीने में जलन के साथ या बिना हो सकता है।
  • निगलने में कठिनाई (डिस्फेजिया):
    • यह तब होता है जब ग्रासनली में सूजन आ जाती है।
  • लगातार सूखी खांसी:
    • पेट का एसिड ग्रासनली में जलन पैदा कर सकता है, जिससे खांसी होती है।
  • स्वर बैठना या गले में खराश:
    • पेट का एसिड स्वरयंत्र को परेशान कर सकता है।
  • दांतों में खराबी:
    • बार-बार एसिड का मुंह में आना दांतों के इनेमल को खराब कर सकता है।
  • अस्थमा का बिगड़ना:
    • एसिड रिफ्लक्स अस्थमा के लक्षणों को बढ़ा सकता है।
  • सांसों की बदबू:
    • पेट का एसिड मुंह में वापस आने से सांसों में बदबू आ सकती है।

यदि आपको इनमें से कोई भी लक्षण अनुभव होता है, तो डॉक्टर से परामर्श करना महत्वपूर्ण है।

एसिड भाटा का खतरा किसे अधिक होता है?

एसिड भाटा (GERD) का खतरा कई लोगों को अधिक होता है, खासकर उन लोगों को जो निम्नलिखित जोखिम कारकों से ग्रस्त हैं:

  • मोटापा: अतिरिक्त वजन पेट पर दबाव डालता है, जिससे एसिड भाटा का खतरा बढ़ जाता है।
  • गर्भावस्था: गर्भावस्था के दौरान हार्मोनल परिवर्तन और बढ़े हुए गर्भाशय पेट पर दबाव डाल सकते हैं, जिससे एसिड भाटा हो सकता है।
  • धूम्रपान: धूम्रपान निचले ग्रासनली स्फिंक्टर (एलईएस) को कमजोर कर सकता है, जिससे एसिड भाटा का खतरा बढ़ जाता है।
  • कुछ दवाएं: कुछ दवाएं, जैसे कि एस्पिरिन, इबुप्रोफेन और कुछ रक्तचाप की दवाएं, एसिड भाटा का कारण बन सकती हैं।
  • हायटस हर्निया: यह तब होता है जब पेट का ऊपरी हिस्सा डायाफ्राम के माध्यम से छाती में चला जाता है। यह एलईएस पर दबाव डाल सकता है और एसिड भाटा का कारण बन सकता है।
  • अस्वास्थ्यकर आहार: वसायुक्त या तले हुए भोजन, टमाटर, खट्टे फल, चॉकलेट, पुदीना, लहसुन, प्याज, कैफीन और अल्कोहल जैसे खाद्य पदार्थ और पेय पदार्थ एलईएस को कमजोर कर सकते हैं या पेट में एसिड के उत्पादन को बढ़ा सकते हैं।
  • तनाव: तनाव पेट में एसिड के उत्पादन को बढ़ा सकता है।
  • शारीरिक निष्क्रियता: शारीरिक गतिविधि की कमी पेट में एसिड के उत्पादन को बढ़ा सकती है।
  • सोने के तुरंत पहले खाना: सोने के तुरंत पहले खाने से पेट में एसिड का उत्पादन बढ़ सकता है।

एसिड भाटा से कौन सी बीमारियां जुड़ी हैं?

एसिड भाटा (GERD) कई बीमारियों से जुड़ा हो सकता है, जिनमें शामिल हैं:

  • ग्रासनली का संकुचन (Esophageal stricture):
    • बार-बार एसिड भाटा ग्रासनली में स्कार टिश्यू बना सकता है, जिससे यह संकीर्ण हो जाती है।
  • ग्रासनली का अल्सर (Esophageal ulcer):
    • एसिड ग्रासनली की परत को नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे अल्सर हो सकते हैं।
  • बैरेट ग्रासनली (Barrett’s esophagus):
    • यह एक गंभीर स्थिति है जिसमें ग्रासनली की परत बदल जाती है। यह ग्रासनली के कैंसर के खतरे को बढ़ा सकता है।
  • ग्रासनली का कैंसर (Esophageal cancer):
    • लंबे समय तक एसिड भाटा ग्रासनली के कैंसर के खतरे को बढ़ा सकता है।
  • अस्थमा:
    • एसिड भाटा अस्थमा के लक्षणों को बढ़ा सकता है।
  • लैरिंगाइटिस (Laryngitis):
    • एसिड स्वरयंत्र को परेशान कर सकता है, जिससे स्वर बैठना या गले में खराश हो सकती है।
  • क्रोनिक खांसी:
    • एसिड भाटा लगातार खांसी का कारण बन सकता है।
  • दांतों में खराबी:
    • बार-बार एसिड का मुंह में आना दांतों के इनेमल को खराब कर सकता है।
  • स्लीप एपनिया:
    • एसिड भाटा स्लीप एपनिया को बढ़ा सकता है।

एसिड भाटा का निदान कैसे करें?

एसिड भाटा का निदान करने के लिए, डॉक्टर कई तरह के परीक्षण कर सकते हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • शारीरिक परीक्षण और चिकित्सा इतिहास:
    • डॉक्टर आपके लक्षणों और चिकित्सा इतिहास के बारे में पूछेंगे।
    • वे आपके आहार, जीवनशैली और दवाओं के बारे में भी पूछ सकते हैं।
  • ऊपरी एंडोस्कोपी:
    • यह एक प्रक्रिया है जिसमें एक पतली, लचीली ट्यूब को आपके गले के नीचे और ग्रासनली में डाला जाता है।
    • यह डॉक्टर को ग्रासनली की परत को देखने और किसी भी क्षति या सूजन का पता लगाने की अनुमति देता है।
  • पीएच निगरानी:
    • यह परीक्षण 24 घंटे की अवधि में ग्रासनली में एसिड के स्तर को मापता है।
    • यह डॉक्टर को यह निर्धारित करने में मदद करता है कि आपको एसिड भाटा है या नहीं।
  • ग्रासनली मनोमिति:
    • यह परीक्षण ग्रासनली की मांसपेशियों के संकुचन को मापता है।
    • यह डॉक्टर को यह निर्धारित करने में मदद करता है कि एलईएस ठीक से काम कर रहा है या नहीं।
  • एक्स-रे:
    • एक्स-रे में बेरियम नामक एक विशेष घोल पीने के बाद एक्स-रे से आपकी ग्रासनली अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई दे सकती है।

एसिड भाटा का इलाज क्या है?

एसिड भाटा का इलाज कई तरीकों से किया जा सकता है, जिनमें जीवनशैली में बदलाव, दवाएं और सर्जरी शामिल हैं। यहाँ कुछ सामान्य उपचार दिए गए हैं:

1. जीवनशैली में बदलाव:

  • वजन कम करें: यदि आप अधिक वजन वाले या मोटापे से ग्रस्त हैं, तो वजन कम करने से एसिड भाटा के लक्षणों को कम करने में मदद मिल सकती है।
  • धूम्रपान छोड़ें: धूम्रपान एलईएस को कमजोर कर सकता है और एसिड भाटा के खतरे को बढ़ा सकता है।
  • छोटे और अधिक बार भोजन करें: बड़े भोजन खाने से पेट पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे एसिड भाटा हो सकता है।
  • सोने से कुछ घंटे पहले खाना खाने से बचें: सोने के तुरंत पहले खाने से पेट में एसिड का उत्पादन बढ़ सकता है।
  • उन खाद्य पदार्थों और पेय पदार्थों से बचें जो एसिड भाटा को बढ़ाते हैं: इनमें वसायुक्त या तले हुए भोजन, टमाटर, खट्टे फल, चॉकलेट, पुदीना, लहसुन, प्याज, कैफीन और अल्कोहल शामिल हैं।
  • तंग कपड़े पहनने से बचें: तंग कपड़े पेट पर दबाव डाल सकते हैं, जिससे एसिड भाटा हो सकता है।
  • अपने सिर को बिस्तर पर ऊपर उठाएं: अपने सिर को बिस्तर पर 6 से 8 इंच ऊपर उठाने से एसिड भाटा के लक्षणों को कम करने में मदद मिल सकती है।

2. दवाएं:

  • एंटासिड: ये दवाएं पेट में एसिड को बेअसर करती हैं और जल्दी राहत प्रदान करती हैं।
  • एच2 ब्लॉकर्स: ये दवाएं पेट में एसिड के उत्पादन को कम करती हैं।
  • प्रोटॉन पंप इनहिबिटर (पीपीआई): ये दवाएं पेट में एसिड के उत्पादन को सबसे प्रभावी ढंग से कम करती हैं।
  • प्रोकाइनेटिक एजेंट: ये दवाएं पेट को तेजी से खाली करने में मदद करती हैं।

3. सर्जरी:

  • गंभीर मामलों में, सर्जरी की आवश्यकता हो सकती है।
  • सर्जरी में, एलईएस को मजबूत करने या हायटस हर्निया को ठीक करने के लिए प्रक्रियाएं शामिल हो सकती हैं।

4. घरेलू उपचार:

  • अदरक: अदरक में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो एसिड भाटा के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकते हैं।
  • एलोवेरा जूस: एलोवेरा जूस ग्रासनली को शांत करने में मदद कर सकता है।
  • बेकिंग सोडा: बेकिंग सोडा पेट में एसिड को बेअसर कर सकता है।
  • केला: केला एक प्राकृतिक एंटासिड है।
  • इलायची: इलायची एसिडिटी को कम करने में मदद करता है।
  • सौंफ: सौंफ का पानी पेट की कई समस्याओं को दूर करने में कारगर साबित होता है।
  • अजवाइन: अजवाइन का सेवन से जीईआरडी के लक्षणों को कम करने में मदद मिल सकती है।

एसिड भाटा का घरेलू इलाज क्या है?

एसिड भाटा (GERD) के लिए कुछ घरेलू उपचार इस प्रकार हैं:

  • जीवनशैली में बदलाव:
    • आहार में बदलाव:
      • वसायुक्त या तले हुए भोजन, टमाटर, खट्टे फल, चॉकलेट, पुदीना, लहसुन, प्याज, कैफीन और अल्कोहल जैसे खाद्य पदार्थों और पेय पदार्थों से बचें।
      • छोटे और अधिक बार भोजन करें।
      • सोने से कुछ घंटे पहले खाना खाने से बचें।
    • वजन कम करें: यदि आप अधिक वजन वाले या मोटापे से ग्रस्त हैं, तो वजन कम करें।
    • धूम्रपान छोड़ें: धूम्रपान एलईएस को कमजोर कर सकता है और एसिड भाटा के खतरे को बढ़ा सकता है।
    • तंग कपड़े पहनने से बचें: तंग कपड़े पेट पर दबाव डाल सकते हैं, जिससे एसिड भाटा हो सकता है।
    • अपने सिर को बिस्तर पर ऊपर उठाएं: अपने सिर को बिस्तर पर 6 से 8 इंच ऊपर उठाने से एसिड भाटा के लक्षणों को कम करने में मदद मिल सकती है।
  • घरेलू उपचार:
    • अदरक: अदरक में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो एसिड भाटा के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकते हैं।
    • एलोवेरा जूस: एलोवेरा जूस ग्रासनली को शांत करने में मदद कर सकता है।
    • बेकिंग सोडा: बेकिंग सोडा पेट में एसिड को बेअसर कर सकता है।
    • केला: केला एक प्राकृतिक एंटासिड है।
    • इलायची: इलायची एसिडिटी को कम करने में मदद करता है।
    • सौंफ: सौंफ का पानी पेट की कई समस्याओं को दूर करने में कारगर साबित होता है।
    • अजवाइन: अजवाइन का सेवन से जीईआरडी के लक्षणों को कम करने में मदद मिल सकती है।
    • सेब का सिरका: एक गिलास पानी में एक चम्मच सेब का सिरका डालकर पीने से एसिड रिफ्लक्स से राहत मिल सकती है।
    • नारियल पानी: नारियल पानी पाचन को सुधारता है और पेट की जलन को कम करता है।
    • गुड़: भोजन के बाद या दिन में कभी भी गुड़ का सेवन करें। गुड़ पाचन क्रिया को सुधार कर पाचन तंत्र को अधिक क्षारीय बनाता है और पेट की अम्लता को कम करता है।

एसिड भाटा में क्या खाएं और क्या न खाएं?

एसिड भाटा (GERD) से पीड़ित लोगों को अपने आहार पर विशेष ध्यान देना चाहिए। यहाँ कुछ खाद्य पदार्थ दिए गए हैं जिन्हें आपको खाना चाहिए और जिनसे आपको बचना चाहिए:

क्या खाएं:

  • फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ: फाइबर कब्ज को रोकने में मदद करता है, जो पेट पर दबाव डाल सकता है। साबुत अनाज, फल, सब्जियां और फलियां खाएं।
  • क्षारीय खाद्य पदार्थ: क्षारीय खाद्य पदार्थ पेट के एसिड को बेअसर करने में मदद करते हैं। केले, खरबूजे और फूलगोभी खाएं।
  • लीन प्रोटीन: लीन प्रोटीन पेट में एसिड के उत्पादन को कम करने में मदद करता है। चिकन, मछली और टोफू खाएं।
  • स्वस्थ वसा: स्वस्थ वसा सूजन को कम करने में मदद करते हैं। एवोकाडो, नट्स और बीज खाएं।
  • अदरक: अदरक में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं जो एसिड भाटा के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकते हैं।
  • एलोवेरा: एलोवेरा पेट को शांत करने में मदद कर सकता है।
  • केला: केला एक प्राकृतिक एंटासिड है।
  • इलायची: इलायची एसिडिटी को कम करने में मदद करता है।
  • सौंफ: सौंफ का पानी पेट की कई समस्याओं को दूर करने में कारगर साबित होता है।
  • दही: दही में प्रोबायोटिक्स होते हैं, जो पाचन को बेहतर बनाने में मदद करते हैं।

क्या न खाएं:

  • वसायुक्त और तले हुए खाद्य पदार्थ: ये खाद्य पदार्थ पेट में एसिड के उत्पादन को बढ़ाते हैं।
  • खट्टे फल: खट्टे फल पेट में एसिड के उत्पादन को बढ़ाते हैं।
  • टमाटर: टमाटर में एसिड की मात्रा अधिक होती है।
  • चॉकलेट: चॉकलेट एलईएस को कमजोर कर सकता है और एसिड भाटा के लक्षणों को बढ़ा सकता है।
  • पुदीना: पुदीना एलईएस को कमजोर कर सकता है।
  • लहसुन और प्याज: ये खाद्य पदार्थ पेट में एसिड के उत्पादन को बढ़ाते हैं।
  • कैफीन: कैफीन पेट में एसिड के उत्पादन को बढ़ाता है।
  • शराब: शराब एलईएस को कमजोर कर सकती है और एसिड भाटा के लक्षणों को बढ़ा सकती है।
  • मसालेदार भोजन: मसालेदार भोजन पेट में एसिड के उत्पादन को बढ़ाता है।
  • कार्बोनेटेड पेय: कार्बोनेटेड पेय पेट में गैस और सूजन पैदा कर सकते हैं, जो एसिड भाटा के लक्षणों को बढ़ा सकते हैं।
  • फास्ट फूड: फास्ट फूड में वसा, नमक और चीनी की मात्रा अधिक होती है, जो एसिड भाटा के लक्षणों को बढ़ा सकती है।

एसिड भाटा के जोखिम को कैसे कम करें?

एसिड भाटा (GERD) के जोखिम को कम करने के लिए आप कई उपाय कर सकते हैं। यहाँ कुछ सुझाव दिए गए हैं:

  • स्वस्थ वजन बनाए रखें: अतिरिक्त वजन पेट पर दबाव डालता है, जिससे एसिड भाटा का खतरा बढ़ जाता है।
  • धूम्रपान छोड़ें: धूम्रपान एलईएस को कमजोर कर सकता है और एसिड भाटा के खतरे को बढ़ा सकता है।
  • छोटे और अधिक बार भोजन करें: बड़े भोजन खाने से पेट पर दबाव बढ़ सकता है, जिससे एसिड भाटा हो सकता है।
  • सोने से कुछ घंटे पहले खाना खाने से बचें: सोने के तुरंत पहले खाने से पेट में एसिड का उत्पादन बढ़ सकता है।
  • उन खाद्य पदार्थों और पेय पदार्थों से बचें जो एसिड भाटा को बढ़ाते हैं: इनमें वसायुक्त या तले हुए भोजन, टमाटर, खट्टे फल, चॉकलेट, पुदीना, लहसुन, प्याज, कैफीन और अल्कोहल शामिल हैं।
  • तंग कपड़े पहनने से बचें: तंग कपड़े पेट पर दबाव डाल सकते हैं, जिससे एसिड भाटा हो सकता है।
  • अपने सिर को बिस्तर पर ऊपर उठाएं: अपने सिर को बिस्तर पर 6 से 8 इंच ऊपर उठाने से एसिड भाटा के लक्षणों को कम करने में मदद मिल सकती है।
  • तनाव कम करें: तनाव पेट में एसिड के उत्पादन को बढ़ा सकता है।
  • शारीरिक रूप से सक्रिय रहें: नियमित व्यायाम पाचन में सुधार करने और वजन को नियंत्रित करने में मदद कर सकता है।

सारांश

एसिड भाटा, जिसे जीईआरडी भी कहते हैं, तब होता है जब पेट का एसिड ग्रासनली में वापस आता है। इसके कारण एलईएस का कमजोर होना, अत्यधिक एसिड उत्पादन, और कुछ खाद्य पदार्थ हैं। लक्षणों में सीने में जलन, खट्टा स्वाद, और खांसी शामिल हैं। मोटापा, गर्भावस्था और धूम्रपान से खतरा बढ़ता है। यह ग्रासनली के संकुचन और कैंसर जैसी बीमारियों से जुड़ा है।

निदान में एंडोस्कोपी और पीएच निगरानी शामिल है। इलाज में जीवनशैली में बदलाव, दवाएं और सर्जरी शामिल हैं। घरेलू उपचारों में अदरक, एलोवेरा और बेकिंग सोडा शामिल हैं। फाइबर युक्त भोजन खाएं और वसायुक्त, खट्टे और मसालेदार भोजन से बचें। स्वस्थ वजन, धूम्रपान न करना और छोटे भोजन करना जोखिम को कम करते हैं।

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