कार्पल टनल सिंड्रोम और हस्त/कलाई रोगों का प्रबंधन
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कार्पल टनल सिंड्रोम और हस्त/कलाई रोगों का प्रबंधन

कार्पल टनल सिंड्रोम (Carpal Tunnel Syndrome – CTS) एक आम और अक्सर दर्दनाक न्यूरोलॉजिकल स्थिति है जो कलाई और हाथ को प्रभावित करती है। यह तब होता है जब कलाई में स्थित एक संकीर्ण मार्ग, जिसे कार्पल टनल कहते हैं, में सूजन या दबाव के कारण मीडियन नस (Median Nerve) दब जाती है।

यह स्थिति न केवल कार्पल टनल सिंड्रोम के रूप में प्रकट होती है, बल्कि हाथ और कलाई के कई अन्य रोग भी दैनिक जीवन को प्रभावित कर सकते हैं।

इस लेख में, हम कार्पल टनल सिंड्रोम के लक्षणों, कारणों और इसके साथ-साथ हाथ और कलाई के अन्य सामान्य रोगों पर चर्चा करेंगे, और फिजियोथेरेपी और अन्य प्रबंधन विधियों के माध्यम से इनका प्रभावी ढंग से कैसे इलाज किया जा सकता है, इस पर विस्तार से जानेंगे।

कार्पल टनल सिंड्रोम (CTS) क्या है?

कार्पल टनल कलाई में स्थित एक संकीर्ण, कठोर मार्ग है जो कलाई की हड्डियों और एक लिगामेंट से बना होता है। यह मार्ग नौ टेंडन (जो उंगलियों को मोड़ते हैं) और मीडियन नस को हाथ तक जाने देता है। मीडियन नस अंगूठे, तर्जनी, मध्यमा और अनामिका के आधे हिस्से में संवेदना और गति प्रदान करती है। जब इस टनल में सूजन या दबाव बढ़ता है, तो यह नस दब जाती है, जिससे कार्पल टनल सिंड्रोम के लक्षण दिखाई देते हैं।

कार्पल टनल सिंड्रोम के लक्षण

  • सुन्नता और झुनझुनी: अंगूठे, तर्जनी, मध्यमा और अनामिका में सुन्नता या झुनझुनी का एहसास। यह अक्सर रात में अधिक होता है।
  • दर्द: कलाई और हथेली में दर्द, जो कभी-कभी बांह तक फैल सकता है।
  • कमजोरी: अंगूठे और उंगलियों में कमजोरी महसूस होना, जिससे चीजों को पकड़ना या उठाना मुश्किल हो जाता है।
  • संवेदना में कमी: हाथ में संवेदना की कमी, जिससे गर्मी या ठंड को महसूस करना मुश्किल हो सकता है।

कार्पल टनल सिंड्रोम के कारण

  • बार-बार होने वाली गतिविधियाँ: टाइपिंग, सिलाई, या किसी भी काम में हाथ और कलाई का बार-बार और दोहरावदार उपयोग।
  • गर्भावस्था: गर्भावस्था के दौरान शरीर में तरल पदार्थ का जमाव सूजन का कारण बन सकता है।
  • चिकित्सीय स्थितियाँ: मधुमेह (Diabetes), गठिया (Arthritis) और थायराइड रोग जैसी स्थितियाँ इसका जोखिम बढ़ा सकती हैं।
  • कलाई की चोटें: कलाई में फ्रैक्चर या मोच।

हाथ और कलाई के अन्य सामान्य रोग

कार्पल टनल सिंड्रोम के अलावा, हाथ और कलाई को प्रभावित करने वाले कई अन्य रोग भी हैं जिनका प्रबंधन आवश्यक है।

  • डेक्वेर्वेंस टेनोसिनोवाइटिस (De Quervain’s Tenosynovitis): अंगूठे के आधार पर दर्द और सूजन, जो अंगूठे को हिलाने पर बढ़ जाता है।
  • गाउट (Ganglion Cyst): कलाई या उंगली के जोड़ के पास एक गैर-कैंसरयुक्त गांठ।
  • ट्रिगर फिंगर (Trigger Finger): एक या अधिक उंगलियों का मुड़ने के बाद सीधा न हो पाना, या सीधी होते समय एक झटके के साथ खुलना।
  • गठिया (Arthritis): कलाई और हाथ के जोड़ों में दर्द, सूजन और अकड़न।

कार्पल टनल सिंड्रोम और अन्य हस्त/कलाई रोगों का प्रबंधन

इन स्थितियों का प्रबंधन आमतौर पर गैर-सर्जिकल तरीकों से शुरू होता है। फिजियोथेरेपी इन रोगों के उपचार में एक केंद्रीय भूमिका निभाती है।

1. फिजियोथेरेपी दृष्टिकोण

एक योग्य फिजियोथेरेपिस्ट मरीज की स्थिति का मूल्यांकन करता है और एक व्यक्तिगत उपचार योजना बनाता है। इस योजना में निम्नलिखित विधियाँ शामिल होती हैं:

  • आराम और स्थिरीकरण (Rest and Immobilization):
    • स्प्लिंट का उपयोग: रात में कलाई का स्प्लिंट (Splint) पहनना मीडियन नस पर दबाव को कम कर सकता है। यह कलाई को एक सीधी स्थिति में रखता है।
  • हाथ और कलाई के लिए व्यायाम:
    • नर्व ग्लाइडिंग एक्सरसाइज (Nerve Gliding Exercises): ये व्यायाम मीडियन नस को धीरे-धीरे फैलाते हैं और टनल के अंदर उसकी गति को बेहतर बनाते हैं। इससे नस पर दबाव कम होता है।
    • स्ट्रेंथनिंग एक्सरसाइज: हाथ और कलाई के आसपास की मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए व्यायाम। मजबूत मांसपेशियां जोड़ों को सहारा देती हैं और दर्द कम करती हैं।
  • मैनुअल थेरेपी:
    • मसाज और स्ट्रेचिंग: फिजियोथेरेपिस्ट कलाई और हाथ की मांसपेशियों और टेंडन में तनाव कम करने के लिए मालिश और स्ट्रेचिंग कर सकते हैं।
  • इलेक्ट्रोथेरेपी:
    • अल्ट्रासाउंड और TENS: इन तकनीकों का उपयोग दर्द और सूजन को कम करने के लिए किया जाता है।

2. जीवनशैली में बदलाव

  • एर्गोनॉमिक्स (Ergonomics): कार्यस्थल में बदलाव करना बहुत जरूरी है। कंप्यूटर पर काम करते समय कलाई को सीधा रखें और कीबोर्ड और माउस को सही ऊंचाई पर रखें।
  • नियमित ब्रेक: यदि आप दोहरावदार कार्य करते हैं, तो हर घंटे में कुछ मिनट का ब्रेक लें। इस दौरान हाथ और उंगलियों को स्ट्रेच करें।
  • स्वस्थ वजन बनाए रखें: अतिरिक्त वजन कार्पल टनल पर दबाव डाल सकता है।

3. अन्य उपचार विधियाँ

  • दवाएं: डॉक्टर सूजन और दर्द को कम करने के लिए नॉन-स्टेरायडल एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाएं (NSAIDs) लिख सकते हैं।
  • स्टेरॉयड इंजेक्शन: कुछ मामलों में, डॉक्टर सीधे कार्पल टनल में स्टेरॉयड का इंजेक्शन दे सकते हैं, जो सूजन को कम करता है और दर्द से राहत देता है।
  • सर्जरी: यदि गैर-सर्जिकल उपचार प्रभावी नहीं होते हैं, तो डॉक्टर सर्जरी की सलाह दे सकते हैं। सर्जरी में लिगामेंट को काटकर टनल में जगह बढ़ाई जाती है, जिससे नस पर से दबाव हट जाता है।

निष्कर्ष

कार्पल टनल सिंड्रोम और अन्य हस्त/कलाई रोग दर्दनाक और दैनिक जीवन को बाधित करने वाले हो सकते हैं। हालांकि, सही प्रबंधन के साथ, इन स्थितियों को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है। फिजियोथेरेपी एक महत्वपूर्ण गैर-सर्जिकल विकल्प है जो दर्द से राहत देने, गतिशीलता बहाल करने और भविष्य में होने वाली समस्याओं को रोकने में मदद करता है।

यदि आपको हाथ या कलाई में दर्द, सुन्नता या कमजोरी महसूस होती है, तो इसे नज़रअंदाज़ न करें। एक योग्य चिकित्सक या फिजियोथेरेपिस्ट से सलाह लेना सबसे महत्वपूर्ण कदम है। समय पर निदान और उपचार के साथ, आप इन समस्याओं से मुक्त होकर एक सक्रिय और दर्द-रहित जीवन जी सकते हैं।

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