पार्किंसंस रोग (Parkinson's Disease) में संतुलन और चाल (Gait) के लिए व्यायाम।
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पार्किंसंस रोग (Parkinson’s Disease) में संतुलन और चाल (Gait) के लिए व्यायाम।

पार्किंसंस रोग (Parkinson’s Disease) में संतुलन और चाल (Gait) के लिए व्यायाम

पार्किंसंस रोग एक प्रगतिशील न्यूरोलॉजिकल विकार है जो मुख्य रूप से मस्तिष्क में डोपामाइन नामक रसायन का उत्पादन करने वाली कोशिकाओं के नुकसान के कारण होता है। इसके परिणामस्वरूप, व्यक्ति की गति, समन्वय और संतुलन प्रभावित होते हैं। पार्किंसंस रोग के क्लासिक लक्षण हैं कंपन (tremors), मांसपेशियों में अकड़न (rigidity), और धीमी गति (bradykinesia)

इन लक्षणों के कारण, रोगी की चाल (Gait) और संतुलन बुरी तरह प्रभावित होता है। चाल छोटी हो जाती है, पैर घिसटते हैं (shuffling gait), और संतुलन बिगड़ने से गिरने (falls) का खतरा बहुत बढ़ जाता है। हालांकि, फिजियोथेरेपी और नियमित, विशिष्ट व्यायाम पार्किंसंस रोग के प्रबंधन में एक शक्तिशाली उपकरण हैं। ये व्यायाम मस्तिष्क में न्यूरोप्लास्टिसिटी को बढ़ावा देते हैं और रोगी को अपनी चाल और संतुलन पर नियंत्रण बनाए रखने में मदद करते हैं।

इस लेख में, हम पार्किंसंस रोग में संतुलन और चाल में सुधार के लिए सबसे प्रभावी व्यायामों पर विस्तार से चर्चा करेंगे।

व्यायाम क्यों आवश्यक हैं?

पार्किंसंस रोग से पीड़ित व्यक्तियों के लिए व्यायाम केवल शक्ति बनाए रखने का साधन नहीं है, बल्कि यह डोपामाइन की कमी के कारण होने वाली धीमी गति और संतुलन की समस्याओं को दूर करने का एक सीधा तरीका है।

  • न्यूरोप्लास्टिसिटी: व्यायाम मस्तिष्क को नए तंत्रिका मार्ग बनाने के लिए प्रोत्साहित करता है, जिससे गतिशीलता में सुधार होता है।
  • बड़ा आंदोलन (Big Movements): पार्किंसंस रोग के रोगियों में आंदोलन छोटे हो जाते हैं। व्यायाम उन्हें जानबूझकर बड़े कदम उठाने और हाथ हिलाने के लिए प्रशिक्षित करता है।
  • गिरने से बचाव: संतुलन वाले व्यायाम कोर (पेट और पीठ) की मांसपेशियों को मजबूत करते हैं और प्रतिक्रिया समय (reaction time) में सुधार करते हैं, जिससे गिरने का जोखिम कम होता है।

चाल (Gait) में सुधार के लिए व्यायाम

ये व्यायाम रोगियों को लंबे, अधिक लयबद्ध (rhythmic) और सुरक्षित कदम उठाने पर ध्यान केंद्रित करने में मदद करते हैं।

1. ऊँची मार्चिंग (High Marching)

यह जानबूझकर बड़े कदम उठाने पर जोर देता है।

  • कैसे करें:
    • सीधे खड़े हो जाएं और किसी स्थिर सहारे को पकड़ें।
    • घुटनों को कूल्हे के स्तर तक ऊंचा उठाकर चलें।
    • चलते समय हाथों को भी ज़ोर से आगे-पीछे हिलाएं।
  • उद्देश्य: छोटे, घिसटने वाले कदमों (shuffling) को रोकना।

2. लंबे कदम और लाइन वॉक (Long Steps and Line Walk)

  • कैसे करें:
    • फर्श पर टेप या रस्सी की एक सीधी रेखा बनाएं।
    • इस रेखा पर चलते समय जानबूझकर लंबे कदम उठाएं।
    • ध्यान दें कि एड़ी पहले ज़मीन पर पड़े, न कि पूरा पंजा।
  • उद्देश्य: चाल की लंबाई (Stride Length) और पैर को उठाने की ऊंचाई बढ़ाना।

3. मेट्रोनोम/संगीत के साथ चलना (Walking with Metronome/Music)

संगीत या मेट्रोनोम का उपयोग एक स्थिर, बाहरी ताल (external cue) प्रदान करता है जो चाल की लय (rhythm) और गति को बेहतर बनाने में मदद करता है।

  • कैसे करें: एक स्थिर ताल (जैसे 90-110 बीट्स प्रति मिनट) पर सेट किए गए मेट्रोनोम या संगीत की ताल पर कदम रखें।
  • उद्देश्य: चाल को नियमित और स्वचालित बनाना।

4. बाधाओं पर कदम रखना (Stepping Over Obstacles)

गिरने के जोखिम को कम करने के लिए बाधाओं पर सुरक्षित रूप से कदम रखना सीखना महत्वपूर्ण है।

  • कैसे करें:
    • फर्श पर छोटी, सुरक्षित बाधाएँ (जैसे योग ब्लॉक या सपाट फोम रोल) रखें।
    • धीरे-धीरे और जानबूझकर, घुटनों को ऊँचा उठाकर इन बाधाओं पर कदम रखें।
  • उद्देश्य: पैर उठाने की क्षमता (Foot Clearance) और समन्वय में सुधार करना।

संतुलन (Balance) में सुधार के लिए व्यायाम

ये व्यायाम शरीर की स्थिरता, कोर की शक्ति और गिरने से बचने के लिए आवश्यक प्रतिक्रियाओं को बेहतर बनाने पर केंद्रित हैं।

1. एक पैर पर खड़े होना (Single Leg Stance)

  • कैसे करें:
    • किसी स्थिर मेज या काउंटर को पकड़कर खड़े हों।
    • धीरे-धीरे एक पैर को ज़मीन से उठाएं।
    • जितनी देर हो सके, संतुलन बनाए रखने की कोशिश करें (लक्ष्य 30 सेकंड)।
    • जब यह आसान हो जाए, तो बिना सहारे के अभ्यास करें।
  • उद्देश्य: टखने और कूल्हे की स्थिरता बढ़ाना।

2. वज़न में बदलाव (Weight Shifting)

  • कैसे करें:
    • सीधे खड़े हो जाएं।
    • धीरे-धीरे शरीर का वजन एक पैर से दूसरे पैर पर शिफ्ट करें।
    • वजन शिफ्ट करते समय पैर को जमीन से हल्का सा ऊपर उठाएं।
  • उद्देश्य: चलने के दौरान आवश्यक पार्श्व स्थिरता (Lateral Stability) को बेहतर बनाना।

3. टैंडेम स्टांस (Tandem Stance)

  • कैसे करें: एक पैर के पंजे को दूसरे पैर की एड़ी के ठीक सामने रखकर सीधे खड़े हों (जैसे रस्सी पर चल रहे हों)।
  • प्रगति: इस स्थिति में रहते हुए आँखें बंद करें या सिर को धीरे-धीरे दाएं-बाएं घुमाएं।
  • उद्देश्य: संतुलन और प्रतिक्रियाशीलता (Reactivity) को चुनौती देना।

4. सतह में बदलाव (Changing Surfaces)

  • कैसे करें: विभिन्न सतहों पर चलने का अभ्यास करें, जैसे कालीन, टाइल, घास और बजरी।
  • उद्देश्य: प्रोप्रियोसेप्शन (Proprioception – शरीर की स्थिति की आंतरिक समझ) को बेहतर बनाना।

महत्वपूर्ण सावधानियां और टिप्स

  • सुरक्षा पहले: सभी संतुलन वाले व्यायाम किसी स्थिर सहारे (दीवार, कुर्सी या थेरेपिस्ट) के पास ही शुरू करें।
  • पर्यवेक्षण: यदि रोगी को गंभीर संतुलन की समस्या है, तो व्यायाम हमेशा किसी सहायक या फिजियोथेरेपिस्ट की देखरेख में ही किया जाना चाहिए।
  • ध्यान केंद्रित करें: पार्किंसंस रोग में ‘स्वचालित’ गतिशीलता बाधित होती है। रोगी को अपने प्रत्येक कदम और शरीर की मुद्रा पर जानबूझकर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
  • बड़ा सोचें: व्यायाम करते समय, रोगी को हमेशा यह कल्पना करनी चाहिए कि वह सामान्य से बड़ा, तेज़ और ऊँचा हिल रहा है (जैसे- “बिग स्टेप्स”, “बिग आर्म स्विंग्स”)।
  • दवा का समय: व्यायाम करने का सबसे अच्छा समय वह होता है जब आपकी दवा (जैसे लेवोडोपा) का असर सबसे अधिक हो रहा हो (ऑन पीरियड)।
  • नियमितता: इन व्यायामों को सप्ताह में कई बार, आदर्श रूप से प्रतिदिन, करना चाहिए।

निष्कर्ष

पार्किंसंस रोग के प्रबंधन में दवाएं महत्वपूर्ण हैं, लेकिन फिजियोथेरेपी और सक्रिय व्यायाम चाल और संतुलन में सुधार के लिए आवश्यक हैं। ऊपर बताए गए विशिष्ट व्यायामों पर ध्यान केंद्रित करके, रोगी न केवल अपनी शारीरिक क्षमताओं को बनाए रख सकता है, बल्कि गिरने के डर को कम करके आत्मविश्वास और स्वतंत्रता के साथ जी सकता है। हमेशा याद रखें, फिजियोथेरेपिस्ट आपकी स्थिति के अनुसार सबसे सुरक्षित और प्रभावी व्यक्तिगत कार्यक्रम बनाने में आपकी सबसे अच्छी मदद कर सकते हैं।

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