गठिया (arthritis) फिजियोथेरेपी से कैसे नियंत्रित करें
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गठिया (arthritis) फिजियोथेरेपी से कैसे नियंत्रित करें

गठिया (Arthritis) आज की जीवनशैली और बढ़ती उम्र की सबसे आम समस्याओं में से एक है। यह बीमारी जोड़ों को प्रभावित करती है और उनमें सूजन, अकड़न और दर्द पैदा करती है। गठिया केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं है, बल्कि आजकल युवाओं और महिलाओं में भी यह समस्या बढ़ रही है। समय पर इलाज और सही देखभाल से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। दवाइयों के साथ-साथ फिजियोथेरेपी (Physiotherapy) गठिया के दर्द और लक्षणों को कम करने का एक बेहद कारगर तरीका है।

इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे – गठिया क्या है, इसके कारण और लक्षण, तथा फिजियोथेरेपी द्वारा इसे कैसे नियंत्रित किया जा सकता है।

गठिया (Arthritis) क्या है?

गठिया का अर्थ है जोड़ों में सूजन और दर्द। इसमें हड्डियों को जोड़ने वाली उपास्थि (Cartilage) घिस जाती है जिससे हड्डियाँ आपस में रगड़ खाती हैं और दर्द पैदा होता है।

गठिया के प्रकार

  1. ऑस्टियोआर्थ्राइटिस (Osteoarthritis) – उम्र बढ़ने पर कार्टिलेज घिसने से।
  2. रूमेटॉइड आर्थ्राइटिस (Rheumatoid Arthritis) – प्रतिरक्षा तंत्र (Immunity) की गड़बड़ी से।
  3. गाउट (Gout) – यूरिक एसिड की अधिकता से जोड़ों में क्रिस्टल जमा होना।
  4. सोरियाटिक आर्थ्राइटिस (Psoriatic Arthritis) – सोरायसिस त्वचा रोग से जुड़ा हुआ।

गठिया के कारण

  • बढ़ती उम्र
  • मोटापा और अधिक वजन
  • परिवारिक इतिहास (Genetics)
  • चोट या फ्रैक्चर
  • हार्मोनल असंतुलन
  • शारीरिक निष्क्रियता

गठिया के लक्षण

  • जोड़ों में दर्द और सूजन
  • सुबह उठते समय अकड़न
  • चलने-फिरने या सीढ़ियाँ चढ़ने में कठिनाई
  • जोड़ से चरमराहट की आवाज
  • जोड़ों की गतिशीलता (Mobility) कम होना

गठिया में फिजियोथेरेपी की भूमिका

फिजियोथेरेपी गठिया का स्थायी इलाज तो नहीं है लेकिन यह दर्द कम करने, सूजन घटाने और जोड़ों को लचीला बनाने में अत्यंत सहायक है। नियमित व्यायाम और सही तकनीक से गठिया के मरीज अपनी जीवन की गुणवत्ता (Quality of Life) को काफी हद तक बेहतर बना सकते हैं।

फिजियोथेरेपी से होने वाले लाभ

  • दर्द और अकड़न में राहत
  • मांसपेशियों की ताकत बढ़ती है
  • जोड़ों की गति (Mobility) में सुधार
  • संतुलन और चलने की क्षमता बढ़ती है
  • भविष्य में जोड़ बदलने (Replacement) की संभावना कम होती है

गठिया में फिजियोथेरेपी तकनीक

1. हॉट और कोल्ड थेरेपी

  • गर्म सिकाई से मांसपेशियों की अकड़न और दर्द कम होता है।
  • ठंडी सिकाई से सूजन और जलन में राहत मिलती है।

2. मालिश (Massage Therapy)

हल्की मालिश से रक्त संचार बेहतर होता है और जोड़ों में लचीलापन आता है।

3. अल्ट्रासाउंड थेरेपी

फिजियोथेरेपिस्ट अल्ट्रासाउंड मशीन से गहरे ऊतकों (Deep tissues) पर काम करते हैं, जिससे दर्द और सूजन कम होती है।

4. TENS (Transcutaneous Electrical Nerve Stimulation)

यह एक इलेक्ट्रिक स्टिमुलेशन तकनीक है जिससे दर्द में त्वरित राहत मिलती है।

5. हाइड्रोथेरेपी (Hydrotherapy)

पानी में किए गए व्यायाम से जोड़ों पर दबाव कम पड़ता है और व्यायाम आसानी से हो पाता है।

गठिया में उपयोगी फिजियोथेरेपी एक्सरसाइज

(क) घुटनों के लिए

  1. क्वाड्रिसेप्स सेटिंग – सीधा बैठकर घुटने को कसें और कुछ सेकंड तक दबाव दें।
  2. सीधा पैर उठाना – लेटकर पैर सीधा ऊपर उठाएँ।
  3. स्टेप-अप एक्सरसाइज – छोटे स्टूल पर पैर रखकर ऊपर-नीचे जाएँ।

(ख) कंधों और हाथों के लिए

  1. पेंडुलम एक्सरसाइज – हाथ को आगे झुकाकर धीरे-धीरे गोल घुमाएँ।
  2. वॉल वॉकिंग – उंगलियों की मदद से दीवार पर हाथ ऊपर चढ़ाएँ।

(ग) रीढ़ और पीठ के लिए

  1. कैट-कैमल स्ट्रेच – घुटनों के बल बैठकर रीढ़ को ऊपर-नीचे मोड़ें।
  2. पेल्विक टिल्ट – पीठ के बल लेटकर कमर को ऊपर-नीचे उठाएँ।

(घ) पैरों और टखनों के लिए

  1. एंकल सर्कल – टखनों को गोल-गोल घुमाएँ।
  2. टो रेज़ – पंजों पर खड़े होकर ऊपर-नीचे हों।

गठिया मरीजों के लिए सावधानियाँ

  • बहुत देर तक एक ही स्थिति में न बैठें।
  • अचानक भारी वजन न उठाएँ।
  • कठोर सतह पर ज्यादा न चलें।
  • सीढ़ियों का कम उपयोग करें।
  • डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह के अनुसार ही व्यायाम करें।

गठिया नियंत्रण के घरेलू उपाय

  • हल्दी वाला दूध पीएँ (एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण)।
  • मेथी दाना और अलसी का सेवन करें।
  • आहार में हरी सब्जियाँ, दूध, दही और मछली शामिल करें।
  • वजन को नियंत्रित रखें।

निष्कर्ष

गठिया एक दीर्घकालिक बीमारी है लेकिन फिजियोथेरेपी, नियमित व्यायाम और संतुलित जीवनशैली अपनाकर इसे नियंत्रित किया जा सकता है। सही व्यायाम और तकनीक न केवल दर्द और सूजन को कम करते हैं बल्कि जोड़ों को मजबूत और लचीला भी बनाते हैं। इसलिए गठिया मरीजों को दवाइयों के साथ-साथ फिजियोथेरेपी को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए।

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