बच्चों का पोस्चर (Postural issues in children) कैसे सुधारें
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बच्चों का पोस्चर (Postural issues in children) कैसे सुधारें

बच्चों का पोस्चर (Postural issues in children) कैसे सुधारें: स्वस्थ रीढ़ की हड्डी की नींव 👶🧍

बच्चों का पोस्चर (मुद्रा) उनके समग्र शारीरिक और मानसिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। सही पोस्चर रीढ़ की हड्डी (Spine) को सहारा देता है, मांसपेशियों पर तनाव कम करता है, और साँस लेने की प्रक्रिया को बेहतर बनाता है। आधुनिक जीवनशैली, जिसमें स्क्रीन टाइम में वृद्धि, ऑनलाइन क्लासेस और गतिहीन लाइफस्टाइल शामिल है, के कारण आजकल बच्चों में ख़राब पोस्चर की समस्याएँ तेजी से बढ़ रही हैं।

ख़राब पोस्चर न केवल सौंदर्य संबंधी चिंता का विषय है, बल्कि इससे दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याएँ जैसे पीठ दर्द, गर्दन दर्द, और यहाँ तक कि रीढ़ की हड्डी की विकृति (Spinal Deformities) भी हो सकती हैं। माता-पिता और शिक्षकों को इस समस्या को पहचानना और इसके समाधान के लिए सक्रिय उपाय करना आवश्यक है।

इस विस्तृत लेख में, हम बच्चों में सामान्य पोस्चर समस्याओं, उनके कारणों, और उन्हें सुधारने के लिए प्रभावी व्यायामों और जीवनशैली बदलावों पर चर्चा करेंगे।

1. बच्चों में ख़राब पोस्चर के सामान्य प्रकार और कारण

ख़राब पोस्चर को समझना इसे सुधारने की दिशा में पहला कदम है।

सामान्य पोस्चर समस्याएँ:

  • काइफोसिस (Kyphosis) या कूबड़पन (Hunchback): इसमें ऊपरी पीठ असामान्य रूप से आगे की ओर झुक जाती है, जिससे कंधों में गोलाई आ जाती है। यह अक्सर ‘स्लाउचिंग’ (झुककर बैठना) या फॉरवर्ड हेड पोस्चर (Forward Head Posture) से जुड़ा होता है।
  • स्कोलियोसिस (Scoliosis): यह रीढ़ की हड्डी का एक असामान्य पार्श्व (Side-to-Side) घुमाव है, जो कुछ मामलों में आनुवंशिक या अज्ञात कारणों से होता है।
  • लोर्डोसिस (Lordosis) या स्वैबैक (Swayback): इसमें पीठ का निचला हिस्सा (Lower Back) अत्यधिक अंदर की ओर मुड़ जाता है।

ख़राब पोस्चर के मुख्य कारण:

  • स्क्रीन टाइम और डिवाइसेस का उपयोग: मोबाइल फोन, लैपटॉप या टैबलेट का लंबे समय तक इस्तेमाल करते समय गर्दन आगे झुकाकर बैठना।
  • गतिहीन जीवनशैली: शारीरिक गतिविधि की कमी से कोर और पीठ की मांसपेशियाँ कमजोर हो जाती हैं, जिससे रीढ़ की हड्डी को सहारा नहीं मिल पाता।
  • गलत बैठने की आदतें: पढ़ाई या खाने के दौरान मेज पर झुककर बैठना, या बिस्तर पर लेटकर पढ़ना।
  • भारी स्कूल बैग: बहुत भारी बैग एक कंधे पर टाँगने से कंधों का संरेखण (Alignment) बिगड़ जाता है।
  • कमज़ोर मांसपेशियाँ: पेट (Core) और पीठ की सहायक मांसपेशियों (Stabilizing Muscles) का कमजोर होना।

2. पोस्चर सुधार के लिए प्रभावी व्यायाम और योग

पोस्चर सुधारने का सबसे प्रभावी तरीका कमजोर मांसपेशियों को मजबूत करना (Strengthening) और तंग मांसपेशियों को खींचना (Stretching) है। ये व्यायाम बच्चों के लिए मजेदार और सरल होने चाहिए।

A. कोर और पीठ को मजबूत करने वाले व्यायाम

ये व्यायाम रीढ़ की हड्डी की स्थिरता (Spinal Stability) बढ़ाते हैं।

  • प्लैंक (Plank): शरीर को सिर से एड़ी तक एक सीधी रेखा में रखने की कोशिश करें, कोहनी और पैर की उंगलियों पर टिके रहें। यह पूरे कोर को मजबूत करता है।
  • ब्रिज (Bridge): पीठ के बल लेटकर घुटनों को मोड़ें। धीरे-धीरे हिप्स को ऊपर उठाएं, जिससे शरीर कंधों से घुटनों तक एक सीधी रेखा बनाए।
  • बर्ड-डॉग (Bird-Dog Movement): हाथों और घुटनों के बल (टेबलटॉप स्थिति) पर आएँ। विपरीत हाथ और पैर को एक साथ सीधा करें, पीठ को सीधा रखें।
    • लक्ष्य: ये व्यायाम बच्चों को सही ढंग से बैठने या खड़े होने में मदद करते हैं।

B. योगासन (Yoga Asanas)

योग पोस्चर को सुधारने में बहुत सहायक होता है:

  • ताड़ासन (Tadasana – Mountain Pose): सीधे खड़े हों और हाथों को सिर के ऊपर ले जाकर स्ट्रेच करें। यह रीढ़ की हड्डी को खींचता है और पूरे शरीर के पोस्चर को सही करता है।
  • वृक्षासन (Vrikshasana – Tree Pose): एक पैर पर खड़े होकर दूसरे पैर को जांघ के अंदरूनी हिस्से पर रखें। यह एकाग्रता और संतुलन (Balance) के साथ-साथ रीढ़ को लचीला बनाता है।
  • चक्रासन (Chakrasana – Wheel Pose): पीठ और हाथ-पैर की मांसपेशियों को मजबूत करता है, कुबड़पन को ठीक करने में मदद करता है।
  • बालासन (Balasana – Child Pose): यह एक आरामदेह आसन है जो पीठ और कूल्हों को स्ट्रेच करता है।

3. एर्गोनॉमिक्स और बैठने की सही आदतें

बच्चों के दैनिक वातावरण को उनके पोस्चर के अनुकूल बनाना बहुत महत्वपूर्ण है।

स्थितिसही पोस्चर / एर्गोनॉमिक्सक्यों जरूरी?
बैठना (अध्ययन/स्क्रीन)* पैर ज़मीन पर सपाट होने चाहिए। * पीठ सीधी होनी चाहिए और कुर्सी के सपोर्ट से सटी होनी चाहिए (जरूरत पड़ने पर पीछे तकिया लगाएँ)। * स्क्रीन आँखों के स्तर पर होनी चाहिए (झुकना नहीं)।यह गर्दन और पीठ पर अनावश्यक तनाव को रोकता है।
स्कूल बैग* बैग का वजन बच्चे के शरीर के वजन के 10-15% से अधिक नहीं होना चाहिए। * बैग हमेशा दोनों कंधों पर पहनना चाहिए।वजन का समान वितरण सुनिश्चित करता है और रीढ़ के घुमाव को रोकता है।
सोना* बहुत मुलायम या बहुत सख्त गद्दे पर न सोएँ। * गर्दन और रीढ़ को एक सीध में रखने के लिए सही तकिए का उपयोग करें।रात में मांसपेशियों को आराम देता है और संरेखण बनाए रखता है।

4. जीवनशैली में महत्वपूर्ण बदलाव

  • नियमित ब्रेक: बच्चों को स्क्रीन के उपयोग या पढ़ाई के दौरान हर 30-40 मिनट में खड़े होने, घूमने या स्ट्रेचिंग करने के लिए प्रोत्साहित करें।
  • शारीरिक गतिविधि: योग के अलावा, दौड़ना, कूदना, और खेलना जैसी सामान्य शारीरिक गतिविधियाँ मांसपेशियों को मजबूत बनाए रखती हैं।
  • प्रोन ऑन एल्बोस (Prone on Elbows): बच्चों को दिन में कुछ देर पेट के बल कोहनियों पर लेटने के लिए कहें (जैसे गेम खेलना या पढ़ना)। यह पीठ की मांसपेशियों में ताकत लाता है और आगे झुके हुए पोस्चर को ठीक करता है।
  • सीधा खड़ा होना सिखाना: बच्चों को सिखाएँ कि खड़े होते समय अपने कानों, कंधों, कूल्हों और टखनों को एक सीधी रेखा में कैसे रखें।
  • हाइड्रेशन और पोषण: रीढ़ की डिस्क (Discs) और मांसपेशियों के स्वास्थ्य के लिए उचित पोषण (जैसे विटामिन डी) और पर्याप्त पानी पीना आवश्यक है।

5. डॉक्टर से कब सलाह लें

यदि ख़राब पोस्चर के कारण बच्चे को लगातार दर्द, पैरों या हाथों में कमजोरी या सुन्नपन, या यदि आप स्पष्ट रूप से देखते हैं कि उसकी रीढ़ की हड्डी में असामान्य घुमाव (जैसे स्कोलियोसिस) है, तो तुरंत एक बाल अस्थि रोग विशेषज्ञ (Pediatric Orthopedist) या फिजियोथेरेपिस्ट से सलाह लेनी चाहिए। वे सही निदान और एक व्यक्तिगत उपचार योजना (जैसे कि ब्रेसेस या विशेष फिजियोथेरेपी) प्रदान कर सकते हैं।

निष्कर्ष

बच्चों का पोस्चर सुधारना केवल सुंदरता का विषय नहीं, बल्कि उनके दीर्घकालिक स्वास्थ्य और कार्यक्षमता का आधार है। माता-पिता को चाहिए कि वे न केवल बच्चों की आदतों पर ध्यान दें, बल्कि उनके लिए एक ऐसा सक्रिय और एर्गोनॉमिक वातावरण बनाएँ जो सही पोस्चर को बढ़ावा दे। नियमित व्यायाम, जागरूकता, और सही बैठने की आदतें सिखाकर, आप सुनिश्चित कर सकते हैं कि आपके बच्चे की रीढ़ की हड्डी स्वस्थ रहे और वह आत्मविश्वास के साथ जीवन में आगे बढ़े।

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