बैठने से होने वाले कूल्हे के दर्द से राहत कैसे पाएं?
बैठने से होने वाले कूल्हे के दर्द से राहत कैसे पाएं? (How To Relieve Buttock Pain from Sitting)
क्या आपको भी ऑफिस में काम करते समय, लंबी ड्राइव पर, या घर पर आराम करते समय कूल्हों में दर्द (Buttock Pain) महसूस होता है? आजकल की जीवनशैली में, जहाँ हम अपना अधिकांश समय बैठकर बिताते हैं, यह एक बहुत ही सामान्य समस्या बन गई है। इसे अक्सर हम नज़रअंदाज़ कर देते हैं, लेकिन अगर इसका समय पर इलाज न किया जाए, तो यह ‘पिरिफोर्मिस सिंड्रोम’ (Piriformis Syndrome) या ‘साइटिका’ (Sciatica) जैसी गंभीर समस्याओं का रूप ले सकता है।
इस विस्तृत लेख में, हम जानेंगे कि लगातार बैठने से कूल्हों में दर्द क्यों होता है, और कुछ सरल स्ट्रेचिंग, व्यायाम और पोस्चर (Posture) सुधार के माध्यम से आप इस दर्द से हमेशा के लिए छुटकारा कैसे पा सकते हैं।
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ज्यादा देर बैठने से कूल्हों में दर्द क्यों होता है? (Why Sitting Causes Buttock Pain)
जब हम लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठते हैं, तो हमारे शरीर के निचले हिस्से, विशेष रूप से कूल्हों (Glutes) और कमर की मांसपेशियों पर गहरा असर पड़ता है। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
- मांसपेशियों की जकड़न (Muscle Tightness): लगातार बैठने से कूल्हों के सामने की मांसपेशियां (Hip Flexors) छोटी और सख्त हो जाती हैं, जबकि पीछे की मांसपेशियां (Glutes) कमजोर और निष्क्रिय हो जाती हैं। इसे “Gluteal Amnesia” या “Dead Butt Syndrome” भी कहा जाता है।
- रक्त संचार में कमी (Poor Circulation): बैठकर काम करने से कूल्हों के क्षेत्र में रक्त का प्रवाह धीमा हो जाता है, जिससे मांसपेशियों को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और दर्द शुरू हो जाता है।
- नसों पर दबाव (Nerve Compression): कूल्हों के बीच से होकर गुजरने वाली ‘साइटिक नर्व’ (Sciatic Nerve) पर लगातार दबाव पड़ने से दर्द, सुन्नता या झुनझुनी महसूस हो सकती है।
- पिरिफोर्मिस सिंड्रोम (Piriformis Syndrome): पिरिफोर्मिस एक छोटी मांसपेशी है जो कूल्हे के गहरे हिस्से में होती है। ज्यादा देर बैठने से यह मांसपेशी अकड़ जाती है और साइटिक नर्व को दबाने लगती है, जिससे तेज दर्द होता है।
बैठने से होने वाले कूल्हे के दर्द से राहत कैसे पाएं? (How To Relieve Buttock Pain From Sitting)
A. दर्द से तुरंत राहत के लिए स्ट्रेचिंग (Stretches for Relief)
दर्द को कम करने और मांसपेशियों को लचीला बनाने के लिए नीचे दिए गए स्ट्रेचेस को दिन में 2-3 बार करें।
A. फिगर-4 स्ट्रेच (Figure-4 Stretch – Lying Down)
अगर बैठकर स्ट्रेच करने में कठिनाई हो, तो आप लेटकर यह स्ट्रेच कर सकते हैं।
कैसे करें:
- पीठ के बल लेट जाएं।
- दोनों घुटनों को मोड़ लें।
- दाहिने पैर के टखने को बाएं घुटने के ऊपर रखें।
- अब अपने दोनों हाथों से बाएं जांघ के पीछे पकड़ें और उसे अपनी छाती की ओर खींचें।
- आपको दाहिने कूल्हे में खिंचाव महसूस होगा।
- 30 सेकंड होल्ड करें और फिर दूसरे पैर से करें।

B. नी-टू-चेस्ट स्ट्रेच (Knee to Chest Stretch)
यह लोअर बैक और ग्लूट्स दोनों को रिलैक्स करता है।
कैसे करें:
- सीधे लेट जाएं।
- एक घुटने को मोड़ें और अपने दोनों हाथों से पकड़कर छाती की तरफ खींचें।
- 20-30 सेकंड होल्ड करें और फिर छोड़ दें।
- दूसरे पैर से भी यही प्रक्रिया दोहराएं।

B. दर्द को रोकने के लिए मजबूती वाले व्यायाम (Strengthening Exercises)
सिर्फ स्ट्रेचिंग काफी नहीं है। अगर आपकी ग्लूट्स (Glutes) मांसपेशियां कमजोर हैं, तो दर्द बार-बार वापस आएगा। इन मांसपेशियों को मजबूत करना बहुत जरूरी है।
A. ग्लूट ब्रिज (Glute Bridges)
यह व्यायाम आपकी ग्लूट्स को सक्रिय (activate) करता है और कमर को मजबूती देता है।
कैसे करें:
- पीठ के बल लेटें, घुटनों को मोड़ें और पैरों को जमीन पर सपाट रखें।
- अपने पेट की मांसपेशियों को टाइट करें और धीरे-धीरे अपने कूल्हों (hips) को ऊपर उठाएं।
- ऊपर जाकर 2-3 सेकंड रुकें और अपने ग्लूट्स को जोर से भींचें (squeeze)।
- धीरे-धीरे नीचे आएं।
- इसके 10-15 बार के 2 सेट करें।

B. क्लैमशेल एक्सरसाइज (Clamshells)
यह व्यायाम कूल्हों की बाहरी मांसपेशियों (Gluteus Medius) को मजबूत करता है, जो बैठने के पोस्चर को सुधारने में मदद करती हैं।
कैसे करें:
- करवट लेकर लेट जाएं। अपने दोनों घुटनों को 45 डिग्री के कोण पर मोड़ें।
- अपने पैरों के पंजों को आपस में जोड़े रखें और ऊपर वाले घुटने को धीरे-धीरे ऊपर उठाएं (जैसे सीप खुलती है)।
- ध्यान रखें कि आपकी कमर पीछे की तरफ न झुके।
- इसे 10-15 बार दोहराएं और फिर दूसरी करवट लेकर करें।

C. स्टैंडिंग हिप एक्सटेंशन (Standing Hip Extension)
यह व्यायाम आप ऑफिस में खड़े होकर भी कर सकते हैं।
कैसे करें:
- एक कुर्सी या दीवार का सहारा लेकर खड़े हो जाएं।
- अपने एक पैर को सीधा रखते हुए धीरे-धीरे पीछे की ओर ले जाएं।
- ध्यान रहे कि आप केवल कूल्हे से पैर पीछे ले जा रहे हैं, कमर को झुका नहीं रहे हैं।
- 2 सेकंड रुकें और वापस आएं।
- हर पैर से 10-12 बार करें।
D. स्ट्रेट लेग रेज़ (Straight Leg Raise – SLR)
यह व्यायाम घुटने के दर्द, विशेष रूप से ओस्टियोआर्थराइटिस (OA Knee), और कूल्हे की मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए सबसे सुरक्षित और प्रभावी माना जाता है। यह मुख्य रूप से आपकी जांघ की सामने की मांसपेशियों (Quadriceps) और हिप फ्लेक्सर्स पर काम करता है।
किनके लिए फायदेमंद है?
- जिन्हें घुटने में दर्द रहता है।
- घुटने या कूल्हे की सर्जरी के बाद रिकवरी के लिए।
- कमर दर्द (Back Pain) के मरीजों के लिए (कोर स्ट्रेन्थेनिंग के लिए)।
करने का सही तरीका (Steps):
- पोजीशन: ज़मीन या बेड पर पीठ के बल सीधे लेट जाएं।
- तैयारी: अपने एक पैर (जिसे नहीं उठाना है) को घुटने से मोड़ लें और तलवे को ज़मीन पर रखें। यह आपकी कमर को सहारा देने के लिए ज़रूरी है।
- एक्शन: दूसरे पैर को बिल्कुल सीधा रखें। अपने घुटने को टाइट करें (जांघ की मांसपेशी को कसें)।
- लिफ्ट: अब सांस छोड़ते हुए सीधे वाले पैर को धीरे-धीरे ऊपर उठाएं। इसे लगभग 45 डिग्री या दूसरे मुड़े हुए घुटने की ऊंचाई तक ही उठाएं।
- होल्ड: इस स्थिति में 5 से 10 सेकंड तक रुकें।
- रिलैक्स: सांस लेते हुए पैर को धीरे-धीरे नीचे लाएं।
- दोहराव: एक पैर से 10-15 बार करें, फिर दूसरे पैर से करें।
सावधानियां (Precautions):
- पैर को बहुत ज्यादा ऊपर न उठाएं, इससे कमर पर जोर आ सकता है।
- उठाते समय घुटना मुड़ना नहीं चाहिए।
- अगर कमर में दर्द महसूस हो, तो पेट की मांसपेशियों को टाइट रखें।

E. प्रोन हिप एक्सटेंशन (Prone Hip Extension)
यह व्यायाम कूल्हों (Glutes) और जांघ के पिछले हिस्से (Hamstrings) को मजबूत करने के लिए बेहतरीन है। यह उन लोगों के लिए बहुत जरूरी है जो ज्यादा देर तक बैठते हैं, क्योंकि यह हिप्स को ‘ओपन’ करता है।
किनके लिए फायदेमंद है?
- कमजोर ग्लूट्स (Weak Glutes) को मजबूत करने के लिए।
- लोअर बैक पेन (Lower Back Pain) से राहत के लिए।
- चलने और दौड़ने की क्षमता (Gait) सुधारने के लिए।
करने का सही तरीका (Steps):
- पोजीशन: ज़मीन या मैट पर पेट के बल (Prone) लेट जाएं। दोनों पैर सीधे रखें। अपने हाथों को सिर के नीचे या साइड में रख सकते हैं।
- एक्शन: अपने पेट की मांसपेशियों को थोड़ा अंदर खींचें ताकि कमर पर ज्यादा लचक (arch) न आए।
- लिफ्ट: अब अपने एक पैर को बिल्कुल सीधा रखते हुए ज़मीन से ऊपर उठाएं।
- फोकस: ध्यान दें कि पैर उठाते समय ताकत आपके कूल्हे (Buttock) की मांसपेशियों से लगनी चाहिए, न कि कमर से।
- होल्ड: पैर को हवा में 3 से 5 सेकंड तक रोकें।
- रिलैक्स: धीरे-धीरे पैर नीचे लाएं।
- दोहराव: हर पैर से 10-12 बार दोहराएं।

C. बैठने के सही तरीके और बचाव के उपाय (Posture Tips & Prevention)
दर्द का इलाज करने से बेहतर है कि दर्द होने ही न दिया जाए। अपनी दिनचर्या में ये छोटे बदलाव करें:
- हर 30-45 मिनट में ब्रेक लें: लगातार घंटों तक न बैठें। हर आधे घंटे में उठें, थोड़ा टहलें या खड़े होकर स्ट्रेच करें।
- एर्गोनोमिक कुर्सी का उपयोग करें: ऐसी कुर्सी का चुनाव करें जो आपकी पीठ के निचले हिस्से (Lumbar spine) को सपोर्ट दे।
- बैठने का सही तरीका (Sitting Posture):
- आपके पैर जमीन पर सपाट होने चाहिए।
- घुटने कूल्हों के स्तर (Hip level) पर या उससे थोड़े नीचे होने चाहिए।
- स्क्रीन आपकी आंखों के स्तर (Eye level) पर होनी चाहिए ताकि गर्दन न झुकानी पड़े।
- कूल्हों के नीचे कुशन का प्रयोग: अगर आपकी कुर्सी बहुत सख्त है, तो एक नरम कुशन या ‘Coccyx Cushion’ (जो पूंछ की हड्डी के दबाव को कम करता है) का उपयोग करें।
- वॉलेट (बटुए) को पीछे की जेब में न रखें: पुरुषों में कूल्हे दर्द और साइटिका का एक बड़ा कारण पीछे की जेब में मोटा पर्स रखकर बैठना है। इससे रीढ़ की हड्डी टेढ़ी हो जाती है और नसों पर दबाव पड़ता है। इसे “Wallet Sciatica” कहते हैं।
निष्कर्ष (Conclusion)
बैठने से होने वाला कूल्हे का दर्द एक आम समस्या है, लेकिन इसे नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए। ऊपर बताए गए स्ट्रेचेस (जैसे पिरिफोर्मिस स्ट्रेच) और व्यायाम (जैसे ग्लूट ब्रिज) को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।
याद रखें, हमारा शरीर चलने-फिरने के लिए बना है, घंटों तक एक जगह बैठने के लिए नहीं। “Motion is Lotion” — यानी गति ही शरीर के लिए दवा है।
महत्वपूर्ण सूचना: यदि ये व्यायाम करने के बाद भी आपका दर्द कम नहीं होता है, या दर्द पैरों में नीचे की तरफ जा रहा है, तो कृपया किसी योग्य फिजियोथेरेपिस्ट या डॉक्टर से संपर्क करें।
