गुर्दे की पथरी
गुर्दे की पथरी क्या हैं?
गुर्दे की पथरी (Kidney Stones) छोटे, कठोर जमाव होते हैं जो आपके गुर्दे में बनते हैं। ये विभिन्न खनिजों और लवणों से बने होते हैं जो आमतौर पर मूत्र में घुले रहते हैं। जब इन पदार्थों की सांद्रता मूत्र में बहुत अधिक हो जाती है, तो वे क्रिस्टलीकृत हो सकते हैं और धीरे-धीरे पथरी का रूप ले सकते हैं।
गुर्दे की पथरी आकार में रेत के दाने से लेकर गोल्फ की गेंद तक भिन्न हो सकती है। छोटी पथरी बिना किसी ध्यान देने योग्य दर्द के मूत्र मार्ग से अपने आप निकल सकती है। हालांकि, बड़ी पथरी मूत्र मार्ग में फंस सकती है, जिससे गंभीर दर्द हो सकता है।
गुर्दे की पथरी के मुख्य प्रकार:
गुर्दे की पथरी की संरचना के आधार पर कई प्रकार होते हैं:
- कैल्शियम ऑक्सालेट पथरी (Calcium Oxalate Stones): यह सबसे आम प्रकार है। ऑक्सालेट एक प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला पदार्थ है जो भोजन में भी मौजूद होता है। कैल्शियम के साथ मिलकर यह पथरी बना सकता है।
- कैल्शियम फॉस्फेट पथरी (Calcium Phosphate Stones): ये पथरी भी कैल्शियम से बनी होती हैं, लेकिन फॉस्फेट के साथ मिलकर बनती हैं। ये कुछ चयापचय संबंधी स्थितियों या मूत्र मार्ग के संक्रमण से जुड़े हो सकते हैं।
- यूरिक एसिड पथरी (Uric Acid Stones): ये पथरी तब बनती हैं जब मूत्र में यूरिक एसिड का स्तर बहुत अधिक होता है। यह गाउट, उच्च प्रोटीन वाले आहार या कुछ आनुवंशिक स्थितियों वाले लोगों में अधिक आम है।
- स्ट्रुवाइट पथरी (Struvite Stones): इन्हें “संक्रमण पथरी” भी कहा जाता है। ये मूत्र मार्ग के संक्रमण के जवाब में बनते हैं और तेजी से बड़े हो सकते हैं। ये महिलाओं में अधिक आम हैं।
- सिस्टीन पथरी (Cystine Stones): यह एक दुर्लभ प्रकार की पथरी है जो सिस्टिनुरिया नामक एक आनुवंशिक विकार वाले लोगों में बनती है, जिससे गुर्दे बहुत अधिक सिस्टीन उत्सर्जित करते हैं।
गुर्दे की पथरी के लक्षण:
छोटी पथरी अक्सर कोई लक्षण पैदा नहीं करती हैं और मूत्र के साथ शरीर से बाहर निकल जाती हैं। हालांकि, जब एक पथरी मूत्र मार्ग में फंस जाती है, तो यह अचानक और गंभीर दर्द का कारण बन सकती है, जिसे रीनल कोलिक (Renal Colic) कहा जाता है। इस दर्द के लक्षणों में शामिल हो सकते हैं:
- पीठ के किनारे और नीचे की ओर तेज, ऐंठन वाला दर्द जो पेट और कमर तक फैल सकता है।
- लहरों में आने वाला दर्द जिसकी तीव्रता बदलती रहती है।
- पेशाब करते समय दर्द (डिसुरिया)।
- बार-बार पेशाब आना।
- पेशाब करने की तीव्र इच्छा।
- पेशाब में खून (हेमट्यूरिया)।
- जी मिचलाना और उल्टी।
- बुखार और ठंड लगना (यदि संक्रमण मौजूद है)।
- बादलदार या दुर्गंधयुक्त पेशाब।
गुर्दे की पथरी के कारण:
गुर्दे की पथरी बनने के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें शामिल हैं:
- पर्याप्त पानी न पीना (निर्जलीकरण)।
- कुछ खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन (जैसे ऑक्सालेट युक्त खाद्य पदार्थ)।
- कुछ चिकित्सा स्थितियाँ (जैसे गाउट, हाइपरपैराथायरायडिज्म, सिस्टिनुरिया)।
- कुछ दवाएं।
- मूत्र मार्ग में संक्रमण (स्ट्रुवाइट पथरी के लिए)।
- आनुवंशिक प्रवृत्ति।
गुर्दे की पथरी के कारण क्या हैं?
गुर्दे की पथरी के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें शामिल हैं:
- पानी की कमी: पर्याप्त मात्रा में पानी न पीने से मूत्र गाढ़ा हो जाता है, जिससे खनिजों का जमाव हो सकता है और पथरी बन सकती है।
- आहार: कुछ खाद्य पदार्थों में उच्च मात्रा में ऑक्सलेट, यूरिक एसिड या कैल्शियम होता है, जो कुछ लोगों में पथरी के गठन के जोखिम को बढ़ा सकता है। उदाहरण के लिए, पालक, चुकंदर, चॉकलेट और नट्स में ऑक्सलेट की मात्रा अधिक होती है। रेड मीट, शेलफिश और ऑर्गन मीट में प्यूरिन की मात्रा अधिक होती है, जो यूरिक एसिड के स्तर को बढ़ा सकती है।
- चिकित्सा स्थितियाँ: कुछ चिकित्सा स्थितियाँ, जैसे कि हाइपरपैराथायरायडिज्म, सिस्टिनुरिया, रीनल ट्यूबलर एसिडोसिस और बार-बार होने वाले मूत्र पथ के संक्रमण, गुर्दे की पथरी के विकास के जोखिम को बढ़ा सकती हैं।
- दवाएं और पूरक: कुछ दवाएं और पूरक, जैसे कि विटामिन सी, कैल्शियम युक्त एंटासिड और कुछ मूत्रवर्धक, गुर्दे की पथरी के जोखिम को बढ़ा सकते हैं।
- पारिवारिक इतिहास: यदि आपके परिवार में किसी को गुर्दे की पथरी हुई है, तो आपको भी इसके होने का खतरा अधिक होता है।
- मोटापा: मोटापा भी गुर्दे की पथरी के बढ़ते जोखिम से जुड़ा हुआ है।
- पेट की सर्जरी या पाचन संबंधी समस्याएं: गैस्ट्रिक बाईपास सर्जरी, सूजन आंत्र रोग या पुरानी दस्त जैसी स्थितियां शरीर के कैल्शियम और पानी को अवशोषित करने के तरीके को बदल सकती हैं, जिससे पथरी बनने का खतरा बढ़ जाता है।
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि कई मामलों में, गुर्दे की पथरी का कोई एक कारण नहीं होता है, बल्कि कई कारकों का संयोजन होता है।
गुर्दे की पथरी के मुख्य प्रकार हैं:
- कैल्शियम की पथरी: यह सबसे आम प्रकार है और अक्सर कैल्शियम ऑक्सलेट से बनी होती है।
- यूरिक एसिड की पथरी: यह उन लोगों में अधिक आम है जो बहुत अधिक पशु प्रोटीन खाते हैं या जिन्हें गाउट है।
- स्ट्रुवाइट की पथरी: ये संक्रमण के कारण बनते हैं।
- सिस्टीन की पथरी: यह एक दुर्लभ आनुवंशिक विकार के कारण होता है।
गुर्दे की पथरी के संकेत और लक्षण क्या हैं?
गुर्दे की पथरी के संकेत और लक्षण तब तक प्रकट नहीं हो सकते जब तक कि पथरी आपके गुर्दे के अंदर न घूम जाए या आपके मूत्रवाहिनी में न चली जाए – वह नली जो आपके गुर्दे और मूत्राशय को जोड़ती है। एक बार जब यह मूत्रवाहिनी में फंस जाता है, तो यह मूत्र के प्रवाह को अवरुद्ध कर सकता है, जिससे आपके गुर्दे में सूजन हो जाती है और ऐंठन होती है, जिससे दर्द होता है।
गुर्दे की पथरी के लक्षणों में शामिल हो सकते हैं:
- पार्श्व और पीठ में तेज, ऐंठन वाला दर्द, पसलियों के नीचे
- पेट के निचले हिस्से और कमर तक फैलने वाला दर्द
- दर्द जो लहरों में आता है और तीव्रता में बदलता है
- पेशाब करते समय दर्द या जलन
- बार-बार पेशाब करने की आवश्यकता
- सामान्य से अधिक बार पेशाब करना या थोड़ी मात्रा में पेशाब करना
- गुलाबी, लाल या भूरा मूत्र
- बादलदार या दुर्गंधयुक्त मूत्र
- जी मिचलाना और उल्टी
- यदि कोई संक्रमण मौजूद है तो बुखार और ठंड लगना
गुर्दे की पथरी से होने वाला दर्द जैसे-जैसे पथरी आपके मूत्र पथ से गुजरती है, स्थानांतरित हो सकता है।
आपको तत्काल चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए यदि आपको निम्नलिखित लक्षणों का अनुभव हो:
- इतना गंभीर दर्द कि आप शांत नहीं बैठ सकते या आरामदायक स्थिति नहीं ढूंढ सकते
- दर्द के साथ जी मिचलाना और उल्टी
- दर्द के साथ बुखार और ठंड लगना
- आपके मूत्र में रक्त
- पेशाब करने में परेशानी
गुर्दे की पथरी का खतरा किसे अधिक होता है?
गुर्दे की पथरी का खतरा कुछ लोगों में दूसरों की तुलना में अधिक होता है। निम्नलिखित कारकों से गुर्दे की पथरी होने का खतरा बढ़ जाता है:
- लिंग: पुरुषों में महिलाओं की तुलना में गुर्दे की पथरी होने की संभावना अधिक होती है।
- आयु: 20 से 50 वर्ष की आयु के लोगों में गुर्दे की पथरी अधिक आम है।
- पारिवारिक इतिहास: यदि आपके परिवार में किसी को गुर्दे की पथरी हुई है, तो आपको भी इसके होने का खतरा अधिक होता है।
- पानी की कमी (निर्जलीकरण): पर्याप्त मात्रा में पानी न पीने से मूत्र गाढ़ा हो जाता है, जिससे पथरी बनने का खतरा बढ़ जाता है।
- आहार:
- उच्च प्रोटीन, सोडियम (नमक) और चीनी वाला आहार: यह कुछ प्रकार की पथरी के जोखिम को बढ़ा सकता है।
- कुछ खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन: पालक, चुकंदर, चॉकलेट और नट्स जैसे ऑक्सलेट युक्त खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन कैल्शियम ऑक्सलेट पथरी के खतरे को बढ़ा सकता है। रेड मीट, शेलफिश और ऑर्गन मीट में प्यूरिन की मात्रा अधिक होती है, जो यूरिक एसिड के स्तर को बढ़ा सकती है।
- मोटापा: अधिक वजन या मोटापा गुर्दे की पथरी के बढ़ते जोखिम से जुड़ा हुआ है।
- चिकित्सा स्थितियाँ:
- पहले गुर्दे की पथरी होना: यदि आपको पहले कभी गुर्दे की पथरी हुई है, तो आपको दोबारा होने का खतरा अधिक है।
- कुछ चयापचय संबंधी विकार: जैसे कि हाइपरपैराथायरायडिज्म, सिस्टिनुरिया, रीनल ट्यूबलर एसिडोसिस और गाउट।
- बार-बार होने वाले मूत्र पथ के संक्रमण (यूटीआई)।
- सूजन आंत्र रोग (आईबीडी), जैसे क्रोहन रोग और अल्सरेटिव कोलाइटिस।
- पॉलीसिस्टिक किडनी रोग।
- डायबिटीज (मधुमेह)।
- पेट की सर्जरी या पाचन संबंधी समस्याएं: गैस्ट्रिक बाईपास सर्जरी जैसी स्थितियां कैल्शियम और पानी के अवशोषण को प्रभावित कर सकती हैं।
- दवाएं और पूरक: कुछ दवाएं, जैसे कि कुछ मूत्रवर्धक, कैल्शियम युक्त एंटासिड और विटामिन सी की उच्च खुराक, गुर्दे की पथरी के जोखिम को बढ़ा सकती हैं।
गुर्दे की पथरी से कौन सी बीमारियां जुड़ी हैं?
गुर्दे की पथरी कई अन्य बीमारियों और स्थितियों से जुड़ी हो सकती है, जिनमें शामिल हैं:
- हाइपरपैराथायरायडिज्म: यह स्थिति पैराथाइरॉइड ग्रंथियों के अतिसक्रिय होने के कारण होती है, जिससे रक्त में कैल्शियम का स्तर बढ़ जाता है। यह गुर्दे में कैल्शियम की पथरी बनने के जोखिम को बढ़ा सकता है।
- गाउट: यह एक प्रकार का गठिया है जो रक्त में यूरिक एसिड के उच्च स्तर के कारण होता है। यूरिक एसिड क्रिस्टल जोड़ों में जमा हो सकते हैं, लेकिन वे गुर्दे में भी पथरी बना सकते हैं।
- मूत्र पथ के संक्रमण (यूटीआई): कुछ प्रकार की गुर्दे की पथरी, विशेष रूप से स्ट्रुवाइट पथरी, मूत्र पथ के संक्रमण के कारण बन सकती है। इसके विपरीत, गुर्दे की पथरी मूत्र पथ के संक्रमण के जोखिम को भी बढ़ा सकती है।
- सूजन आंत्र रोग (आईबीडी): क्रोहन रोग और अल्सरेटिव कोलाइटिस जैसी स्थितियां शरीर के कैल्शियम और पानी को अवशोषित करने के तरीके को बदल सकती हैं, जिससे गुर्दे की पथरी का खतरा बढ़ जाता है।
- सिस्टिनुरिया: यह एक दुर्लभ आनुवंशिक विकार है जिसके कारण मूत्र में सिस्टीन नामक एक अमीनो एसिड का स्तर बढ़ जाता है। इससे सिस्टीन की पथरी बन सकती है।
- रीनल ट्यूबलर एसिडोसिस: यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें गुर्दे मूत्र में एसिड को ठीक से फ़िल्टर नहीं कर पाते हैं। इससे विभिन्न प्रकार की गुर्दे की पथरी बनने का खतरा बढ़ सकता है।
- मोटापा: मोटापा गुर्दे की पथरी के बढ़ते जोखिम से जुड़ा हुआ है। मोटापे वाले लोगों में मूत्र में कैल्शियम और यूरिक एसिड का स्तर अधिक होता है, जिससे पथरी बनने की संभावना बढ़ जाती है।
- डायबिटीज (मधुमेह): मधुमेह वाले लोगों में गुर्दे की पथरी का खतरा अधिक होता है।
गुर्दे की पथरी का निदान कैसे करें?
गुर्दे की पथरी का निदान करने के लिए डॉक्टर कई तरीकों का इस्तेमाल कर सकते हैं, जिनमें शामिल हैं:
- चिकित्सा इतिहास और शारीरिक परीक्षण: डॉक्टर आपके लक्षणों, चिकित्सा इतिहास और पारिवारिक इतिहास के बारे में पूछेंगे। वे आपको दर्द के स्थान और प्रकार के बारे में भी पूछ सकते हैं। एक शारीरिक परीक्षण भी किया जा सकता है।
- मूत्र परीक्षण:
- मूत्र विश्लेषण: यह देखने के लिए मूत्र का नमूना लिया जाता है कि क्या उसमें रक्त, क्रिस्टल या संक्रमण के लक्षण हैं।
- 24 घंटे का मूत्र संग्रह: यह परीक्षण यह मापने के लिए किया जाता है कि आप एक दिन में कितना मूत्र उत्सर्जित करते हैं और उसमें कौन से खनिज होते हैं। यह जानकारी पथरी के प्रकार की पहचान करने और भविष्य में उन्हें रोकने में मदद कर सकती है।
- रक्त परीक्षण: रक्त में कैल्शियम, फास्फोरस, यूरिक एसिड और गुर्दे के कार्य के स्तर को मापने के लिए रक्त के नमूने लिए जा सकते हैं। ये परीक्षण गुर्दे की पथरी के गठन में योगदान करने वाली किसी भी अंतर्निहित चिकित्सा स्थिति की पहचान करने में मदद कर सकते हैं।
- इमेजिंग परीक्षण:
- एक्स-रे (KUB): किडनी, ureters और मूत्राशय (KUB) का एक साधारण एक्स-रे कैल्शियम युक्त पथरी को दिखा सकता है। हालांकि, सभी प्रकार की पथरी एक्स-रे पर दिखाई नहीं देती हैं।
- इंट्रावेनस पाइलोग्राफी (IVP): इस परीक्षण में, एक डाई को नस में इंजेक्ट किया जाता है और फिर गुर्दे, ureters और मूत्राशय के एक्स-रे लिए जाते हैं। डाई मूत्र पथ के माध्यम से बहती है और किसी भी रुकावट या पथरी को उजागर कर सकती है। हालांकि, अब यह परीक्षण कम आम है।
- कम्प्यूटेड टोमोग्राफी (सीटी स्कैन): यह एक अधिक विस्तृत इमेजिंग परीक्षण है जो गुर्दे और मूत्र पथ की क्रॉस-सेक्शनल तस्वीरें बनाता है। सीटी स्कैन छोटे पत्थरों सहित अधिकांश प्रकार की गुर्दे की पथरी का पता लगा सकता है और अक्सर निदान के लिए सबसे अच्छा इमेजिंग परीक्षण माना जाता है।
- अल्ट्रासाउंड: यह इमेजिंग परीक्षण ध्वनि तरंगों का उपयोग करके गुर्दे और मूत्र पथ की तस्वीरें बनाता है। यह गर्भवती महिलाओं और बच्चों में पथरी का निदान करने के लिए एक सुरक्षित और गैर-आक्रामक तरीका है। हालांकि, यह सीटी स्कैन जितना संवेदनशील नहीं हो सकता है।
गुर्दे की पथरी का इलाज क्या है?
गुर्दे की पथरी का इलाज पथरी के आकार, प्रकार और आपके लक्षणों की गंभीरता पर निर्भर करता है। छोटे पत्थरों के लिए, उपचार में आमतौर पर दर्द प्रबंधन और खूब पानी पीना शामिल होता है ताकि वे स्वाभाविक रूप से निकल जाएं। बड़े पत्थरों या जटिल मामलों के लिए, अधिक आक्रामक उपचार की आवश्यकता हो सकती है। गुर्दे की पथरी के मुख्य उपचार विकल्प इस प्रकार हैं:
छोटे पत्थरों के लिए (जो स्वाभाविक रूप से निकल सकते हैं):
- दर्द निवारक दवाएं: गुर्दे की पथरी के कारण होने वाले तीव्र दर्द को प्रबंधित करने के लिए ओवर-द-काउंटर या डॉक्टर द्वारा निर्धारित दर्द निवारक दवाएं, जैसे कि इबुप्रोफेन या नेप्रोक्सन, का उपयोग किया जा सकता है। गंभीर दर्द के लिए ओपिओइड दवाएं भी निर्धारित की जा सकती हैं।
- खूब पानी पीना: प्रतिदिन कम से कम 2-3 लीटर पानी पीने की सलाह दी जाती है ताकि मूत्र पतला हो और पथरी को आसानी से निकलने में मदद मिले।
- अल्फा-ब्लॉकर्स: ये दवाएं ureter (वह नली जो गुर्दे से मूत्राशय तक मूत्र ले जाती है) की मांसपेशियों को आराम करने में मदद कर सकती हैं, जिससे पथरी के लिए बाहर निकलना आसान हो जाता है। उदाहरणों में टैमसुलोसिन शामिल है।
- घर पर मूत्र छानना: डॉक्टर आपको घर पर अपने मूत्र को छानने के लिए कह सकते हैं ताकि निकली हुई पथरी को एकत्र किया जा सके। पथरी का विश्लेषण यह निर्धारित करने में मदद कर सकता है कि यह किस प्रकार की है और भविष्य में उन्हें रोकने के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं।
बड़े पत्थरों या जटिल मामलों के लिए (जिनके लिए चिकित्सा हस्तक्षेप की आवश्यकता होती है):
- एक्स्ट्राकोर्पोरियल शॉक वेव लिथोट्रिप्सी (ईएसडब्ल्यूएल): यह एक गैर-आक्रामक प्रक्रिया है जो शरीर के बाहर से शॉक वेव्स का उपयोग करके पथरी को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ती है। फिर ये छोटे टुकड़े मूत्र के माध्यम से आसानी से निकल सकते हैं।
- पर्क्यूटेनियस नेफ्रोलिथोटॉमी (पीसीएनएल): यह प्रक्रिया तब की जाती है जब पथरी बड़ी होती है या ईएसडब्ल्यूएल प्रभावी नहीं होती है। एक छोटा सा चीरा पीठ में लगाया जाता है और एक पतली ट्यूब सीधे गुर्दे में डाली जाती है। फिर पथरी को या तो निकाला जाता है या लेजर या अन्य उपकरणों का उपयोग करके छोटे टुकड़ों में तोड़ दिया जाता है।
- यूरेटेरोस्कोपी: इस प्रक्रिया में, एक पतली, लचीली ट्यूब जिसमें एक कैमरा और एक लेजर या अन्य उपकरण लगा होता है, मूत्रमार्ग और मूत्राशय के माध्यम से ureter में डाला जाता है। पथरी को देखा जाता है और फिर लेजर से तोड़ा जाता है या छोटे उपकरण का उपयोग करके निकाला जाता है।
- सर्जरी: खुले सर्जरी की आवश्यकता शायद ही कभी होती है, लेकिन यह तब आवश्यक हो सकती है जब अन्य उपचार विकल्प सफल न हों या पथरी बहुत बड़ी या जटिल हो।
पथरी के प्रकार के आधार पर विशिष्ट उपचार:
- यूरिक एसिड की पथरी: इन पत्थरों को मूत्र को क्षारीय बनाने वाली दवाओं से भंग किया जा सकता है।
- सिस्टीन की पथरी: इन पत्थरों के गठन को रोकने के लिए अधिक मात्रा में तरल पदार्थ पीने और मूत्र को क्षारीय बनाने वाली दवाओं की आवश्यकता हो सकती है।
- स्ट्रुवाइट की पथरी: इन पत्थरों के इलाज के लिए आमतौर पर सर्जरी या अन्य आक्रामक प्रक्रियाओं की आवश्यकता होती है, और अंतर्निहित मूत्र पथ के संक्रमण का इलाज करना भी महत्वपूर्ण है।
गुर्दे की पथरी का घरेलू इलाज क्या है?
गुर्दे की पथरी के लिए कुछ घरेलू उपचार हैं जो लक्षणों को प्रबंधित करने और छोटे पत्थरों को स्वाभाविक रूप से निकलने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि ये उपचार चिकित्सा सलाह या पेशेवर उपचार का विकल्प नहीं हैं। यदि आपको गुर्दे की पथरी के गंभीर लक्षण हैं या तेज दर्द हो रहा है, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।
यहां कुछ घरेलू उपचार दिए गए हैं जो सहायक हो सकते हैं:
- खूब पानी पिएं: यह सबसे महत्वपूर्ण घरेलू उपचार है। प्रतिदिन कम से कम 2-3 लीटर पानी पीने का लक्ष्य रखें। यह मूत्र को पतला करने में मदद करता है और पथरी को मूत्र मार्ग से आसानी से निकलने में सहायता करता है। जब तक आपका मूत्र साफ न हो जाए तब तक पीते रहें।
- नींबू का रस: नींबू के रस में साइट्रिक एसिड होता है, जो कैल्शियम ऑक्सलेट पत्थरों को तोड़ने में मदद कर सकता है और नए पत्थरों के गठन को धीमा कर सकता है। आप पानी में ताजा नींबू का रस मिलाकर दिन में कई बार पी सकते हैं।
- तुलसी: तुलसी में एसिटिक एसिड होता है, जो गुर्दे की पथरी को तोड़ने और दर्द को कम करने में मदद कर सकता है। आप तुलसी की चाय पी सकते हैं या रोजाना कुछ तुलसी के पत्ते चबा सकते हैं।
- सेब का सिरका: सेब के सिरके में भी एसिटिक एसिड होता है और यह मूत्र को क्षारीय बनाने में मदद कर सकता है, जिससे पथरी घुल सकती है। हालांकि, इसे कम मात्रा में ही लेना चाहिए (पानी में 1-2 चम्मच मिलाकर)। दांतों के इनेमल को नुकसान से बचाने के लिए इसे पतला करना महत्वपूर्ण है।
- अनार का रस: कुछ अध्ययनों से पता चला है कि अनार का रस गुर्दे की पथरी के गठन को रोकने में मदद कर सकता है।
- व्हीटग्रास जूस (गेहूं का जवारा): कुछ लोगों का मानना है कि व्हीटग्रास जूस मूत्र मार्ग को साफ करने और गुर्दे की पथरी को बाहर निकालने में मदद कर सकता है।
- डैंडेलियन रूट टी (सिंहपर्णी की जड़ की चाय): यह चाय एक प्राकृतिक मूत्रवर्धक है और गुर्दे को साफ करने में मदद कर सकती है।
कुछ सावधानियां:
- अपने डॉक्टर से सलाह लें: किसी भी घरेलू उपचार को आजमाने से पहले हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह लें, खासकर यदि आपको कोई अन्य स्वास्थ्य समस्या है या आप कोई दवा ले रहे हैं।
- दर्द पर ध्यान दें: यदि आपका दर्द असहनीय हो जाता है या आपको बुखार, ठंड लगना या उल्टी जैसे अन्य लक्षण महसूस होते हैं, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें। यह संक्रमण या अधिक गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है।
- पथरी का प्रकार: घरेलू उपचार सभी प्रकार की गुर्दे की पथरी के लिए समान रूप से प्रभावी नहीं हो सकते हैं। पथरी का प्रकार जानने के लिए डॉक्टर से जांच करवाना महत्वपूर्ण है।
- बड़ी पथरी: बड़े पत्थरों को घरेलू उपचार से निकालना मुश्किल हो सकता है और इसके लिए चिकित्सा हस्तक्षेप की आवश्यकता हो सकती है।
गुर्दे की पथरी में क्या खाएं और क्या न खाएं?
गुर्दे की पथरी होने पर क्या खाना चाहिए और क्या नहीं खाना चाहिए, यह पथरी के प्रकार पर निर्भर करता है। इसलिए, यह जानना महत्वपूर्ण है कि आपकी पथरी किस प्रकार की है। आपका डॉक्टर पथरी का विश्लेषण करने के बाद आपको विशिष्ट आहार संबंधी सिफारिशें दे सकता है। हालांकि, कुछ सामान्य दिशानिर्देश हैं जिनका पालन किया जा सकता है:
गुर्दे की पथरी में क्या खाएं:
- खूब पानी पिएं: प्रतिदिन कम से कम 2-3 लीटर पानी पीना सबसे महत्वपूर्ण है। यह मूत्र को पतला करता है और पथरी को निकलने में मदद करता है। पानी के अलावा, आप नींबू पानी, छाछ और अन्य तरल पदार्थ भी ले सकते हैं।
- फल और सब्जियां: अधिकांश फल और सब्जियां गुर्दे की पथरी वाले लोगों के लिए अच्छे होते हैं। विशेष रूप से सिट्रस फल (जैसे संतरा, नींबू, अंगूर) में साइट्रेट होता है, जो कुछ प्रकार की पथरी को बनने से रोकने में मदद कर सकता है।
- साबुत अनाज: ब्राउन राइस, ओट्स और साबुत गेहूं जैसे साबुत अनाज फाइबर से भरपूर होते हैं और गुर्दे के स्वास्थ्य के लिए अच्छे होते हैं।
- फलियां: दालें और बीन्स प्रोटीन और फाइबर का अच्छा स्रोत हैं।
- कम वसा वाले डेयरी उत्पाद: कैल्शियम का सेवन सीमित करने की आवश्यकता नहीं है, खासकर यदि आपकी पथरी कैल्शियम ऑक्सलेट की है। कम वसा वाले डेयरी उत्पाद कैल्शियम का अच्छा स्रोत हैं। हालांकि, कैल्शियम सप्लीमेंट के बारे में अपने डॉक्टर से सलाह लें।
गुर्दे की पथरी में क्या न खाएं (पथरी के प्रकार के आधार पर):
- कैल्शियम ऑक्सलेट पथरी होने पर:
- ऑक्सलेट युक्त खाद्य पदार्थ सीमित करें: पालक, रूबर्ब, चुकंदर, नट्स (मूंगफली, बादाम), चॉकलेट, चाय, कोको, सोया उत्पाद, शकरकंद, भिंडी, और स्टार फ्रूट जैसे खाद्य पदार्थों का सेवन कम करें।
- विटामिन सी की अत्यधिक मात्रा से बचें: विटामिन सी शरीर में ऑक्सलेट में परिवर्तित हो सकता है, इसलिए उच्च खुराक वाले सप्लीमेंट से बचें।
- यूरिक एसिड की पथरी होने पर:
- प्यूरिन युक्त खाद्य पदार्थ सीमित करें: रेड मीट (बीफ, लैम्ब, पोर्क), ऑर्गन मीट (लिवर, किडनी), शेलफिश (झींगा, मसल्स, एन्कोवी), और तैलीय मछली (सार्डिन, हेरिंग) का सेवन कम करें।
- शराब से बचें: शराब यूरिक एसिड के स्तर को बढ़ा सकती है।
- मीठे पेय और खाद्य पदार्थों से बचें: फ्रुक्टोज युक्त खाद्य पदार्थ यूरिक एसिड के उत्पादन को बढ़ा सकते हैं।
- स्ट्रुवाइट पथरी होने पर:
- आहार इस प्रकार की पथरी के गठन में सीधी भूमिका नहीं निभाता है, लेकिन मूत्र पथ के संक्रमण को रोकना महत्वपूर्ण है।
- सिस्टीन की पथरी होने पर:
- सोडियम (नमक) का सेवन कम करें: उच्च सोडियम का सेवन मूत्र में सिस्टीन के उत्सर्जन को बढ़ा सकता है।
- प्रोटीन का सेवन मध्यम रखें: अत्यधिक प्रोटीन का सेवन मूत्र में सिस्टीन के स्तर को बढ़ा सकता है।
- खूब पानी पिएं: मूत्र को पतला रखना महत्वपूर्ण है।
सामान्य आहार संबंधी सुझाव:
- सोडियम (नमक) का सेवन सीमित करें: उच्च सोडियम का सेवन मूत्र में कैल्शियम के उत्सर्जन को बढ़ा सकता है, जिससे कुछ प्रकार की पथरी का खतरा बढ़ जाता है। प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों से बचें जिनमें अक्सर उच्च मात्रा में सोडियम होता है।
- पशु प्रोटीन का सेवन मध्यम रखें: अत्यधिक पशु प्रोटीन (मांस, मुर्गी, मछली) यूरिक एसिड के स्तर को बढ़ा सकता है।
- कैल्शियम का पर्याप्त सेवन करें: कैल्शियम को पूरी तरह से न छोड़ें, खासकर यदि आपकी पथरी कैल्शियम ऑक्सलेट की है। आहार में पर्याप्त कैल्शियम वास्तव में पथरी के खतरे को कम कर सकता है क्योंकि यह आंत में ऑक्सलेट से बंध जाता है और इसके अवशोषण को कम करता है। हालांकि, कैल्शियम सप्लीमेंट के बारे में अपने डॉक्टर से सलाह लें।
गुर्दे की पथरी के जोखिम को कैसे कम करें?
गुर्दे की पथरी के जोखिम को कम करने के लिए कई प्रभावी तरीके हैं, जिनमें मुख्य रूप से जीवनशैली और आहार में बदलाव शामिल हैं:
1. खूब पानी पिएं: यह गुर्दे की पथरी को रोकने का सबसे महत्वपूर्ण तरीका है। प्रतिदिन कम से कम 2-2.5 लीटर (लगभग 8-10 गिलास) पानी पीने का लक्ष्य रखें। गर्म मौसम में या व्यायाम के दौरान आपको और अधिक पानी पीने की आवश्यकता हो सकती है। आपका मूत्र हल्का पीला या साफ होना चाहिए, जो इंगित करता है कि आप पर्याप्त हाइड्रेटेड हैं।
2. आहार में बदलाव: आपकी पथरी के प्रकार के आधार पर आहार में बदलाव महत्वपूर्ण हो सकते हैं। सामान्य सुझावों में शामिल हैं:
- सोडियम (नमक) का सेवन सीमित करें: उच्च सोडियम का सेवन मूत्र में कैल्शियम के उत्सर्जन को बढ़ा सकता है, जिससे कुछ प्रकार की पथरी का खतरा बढ़ जाता है। प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों से बचें।
- पशु प्रोटीन का सेवन मध्यम रखें: रेड मीट, पोल्ट्री और मछली जैसे पशु प्रोटीन का अत्यधिक सेवन यूरिक एसिड के स्तर को बढ़ा सकता है, जिससे यूरिक एसिड की पथरी बन सकती है।
- कैल्शियम का पर्याप्त सेवन करें: आहार से कैल्शियम को पूरी तरह से न हटाएं। पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम का सेवन वास्तव में आंत में ऑक्सलेट से बंधकर कैल्शियम ऑक्सलेट पथरी के खतरे को कम कर सकता है। हालांकि, कैल्शियम सप्लीमेंट लेने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह लें।
- ऑक्सलेट युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करें (यदि आपको कैल्शियम ऑक्सलेट पथरी है): पालक, रूबर्ब, चुकंदर, नट्स, चॉकलेट और चाय जैसे खाद्य पदार्थों का सेवन कम करें।
- मीठे पेय पदार्थों से बचें: फ्रुक्टोज युक्त सोडा और अन्य मीठे पेय गुर्दे की पथरी के खतरे को बढ़ा सकते हैं।
- विटामिन सी की अत्यधिक मात्रा से बचें: उच्च खुराक वाले विटामिन सी सप्लीमेंट शरीर में ऑक्सलेट के उत्पादन को बढ़ा सकते हैं।
3. नींबू का रस पिएं: नींबू के रस में साइट्रिक एसिड होता है, जो कुछ प्रकार की गुर्दे की पथरी को बनने से रोकने में मदद कर सकता है। आप पानी में ताजा नींबू का रस मिलाकर पी सकते हैं।
4. स्वस्थ वजन बनाए रखें: मोटापा गुर्दे की पथरी के बढ़ते जोखिम से जुड़ा हुआ है। स्वस्थ आहार और नियमित व्यायाम के माध्यम से स्वस्थ वजन बनाए रखें।
5. नियमित व्यायाम करें: नियमित शारीरिक गतिविधि गुर्दे के स्वास्थ्य के लिए अच्छी है।
6. कुछ दवाओं से बचें: कुछ दवाएं, जैसे कि कुछ मूत्रवर्धक और कैल्शियम युक्त एंटासिड, गुर्दे की पथरी के खतरे को बढ़ा सकती हैं। यदि आप ऐसी दवाएं ले रहे हैं, तो अपने डॉक्टर से बात करें।
7. अंतर्निहित चिकित्सा स्थितियों का प्रबंधन करें: यदि आपको गाउट, हाइपरपैराथायरायडिज्म या अन्य चिकित्सा स्थितियां हैं जो गुर्दे की पथरी के जोखिम को बढ़ा सकती हैं, तो उनका उचित प्रबंधन करें।
8. पथरी के प्रकार की पहचान करें: यदि आपको पहले गुर्दे की पथरी हुई है, तो उस पथरी का विश्लेषण करवाना महत्वपूर्ण है ताकि यह पता चल सके कि वह किस प्रकार की थी। इससे भविष्य में पथरी को रोकने के लिए विशिष्ट आहार और जीवनशैली में बदलाव करने में मदद मिलेगी।
9. डॉक्टर से नियमित जांच कराएं: यदि आपको गुर्दे की पथरी का खतरा अधिक है या आपको पहले पथरी हुई है, तो अपने डॉक्टर से नियमित रूप से सलाह लें। वे आपकी स्थिति की निगरानी कर सकते हैं और निवारक उपाय सुझा सकते हैं।
सारांश
गुर्दे की पथरी के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें पानी की कमी, आहार, कुछ चिकित्सा स्थितियाँ और दवाएं शामिल हैं। इसका खतरा पुरुषों, कुछ आयु वर्ग के लोगों और जिनके परिवार में इसका इतिहास रहा है, उनमें अधिक होता है। गुर्दे की पथरी गाउट और मूत्र पथ के संक्रमण जैसी बीमारियों से जुड़ी हो सकती है।
निदान में मूत्र और रक्त परीक्षण, और इमेजिंग शामिल हैं। छोटे पत्थरों का इलाज दर्द निवारक और खूब पानी पीकर किया जा सकता है, जबकि बड़े पत्थरों के लिए ईएसडब्ल्यूएल या सर्जरी जैसे चिकित्सा हस्तक्षेप की आवश्यकता हो सकती है। घरेलू उपचार में खूब पानी पीना और नींबू का रस लेना शामिल है, लेकिन ये चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं हैं। रोकथाम के लिए खूब पानी पीना और पथरी के प्रकार के अनुसार आहार में बदलाव करना महत्वपूर्ण है।
