लम्बर स्पोंडिलोलिस्थेसिस (Lumbar Spondylolisthesis)
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लम्बर स्पोंडिलोलिस्थेसिस (Lumbar Spondylolisthesis)

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लम्बर स्पोंडिलोलिस्थेसिस (Lumbar Spondylolisthesis): कारण, लक्षण, उपचार और फिजियोथेरेपी

रीढ़ की हड्डी (Spine) मानव शरीर की संरचना का केंद्रीय स्तंभ है, जो न केवल हमें सीधा खड़ा रहने में मदद करती है, बल्कि हमारे शरीर की नसों (Nerves) की भी रक्षा करती है। लेकिन, बढ़ती उम्र, चोट या जीवनशैली की गलत आदतों के कारण रीढ़ की हड्डी से जुड़ी समस्याएं आम होती जा रही हैं। इनमें से एक प्रमुख समस्या है लम्बर स्पोंडिलोलिस्थेसिस (Lumbar Spondylolisthesis), जिसे आम बोलचाल में ‘मनका खिसकना’ कहा जाता है।

यह स्थिति तब उत्पन्न होती है जब रीढ़ की हड्डी का एक मनका (Vertebra) अपने नीचे वाले मनके के ऊपर से आगे या पीछे की ओर खिसक जाता है। यह अक्सर कमर के निचले हिस्से (Lumbar region) में होता है। यदि इसका समय पर निदान और उपचार न किया जाए, तो यह नसों पर दबाव डाल सकता है, जिससे भीषण दर्द और पैरों में सुन्नपन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

लम्बर स्पोंडिलोलिस्थेसिस (Understanding Spondylolisthesis)

हमारी रीढ़ की हड्डी 33 मनकों (Vertebrae) से बनी होती है जो एक के ऊपर एक व्यवस्थित होते हैं। लम्बर स्पाइन (Lumbar Spine) पीठ का निचला हिस्सा है, जिसमें 5 बड़े मनके होते हैं (L1 से L5)। ये मनके शरीर का अधिकांश वजन उठाते हैं।

स्पोंडिलोलिस्थेसिस क्या है?

जब L4 या L5 मनका अपनी जगह से हटकर आगे की तरफ खिसक जाता है, तो रीढ़ की हड्डी का संरेखण (Alignment) बिगड़ जाता है। इससे स्पाइनल कैनाल (वह नली जहाँ से नसें गुजरती हैं) संकरी हो सकती है, जिसे ‘स्पाइनल स्टेनोसिस’ कहते हैं। यह नसों पर दबाव डालता है, जिससे दर्द और अन्य न्यूरोलॉजिकल समस्याएं होती हैं।

लम्बर स्पोंडिलोलिस्थेसिस (Types of Spondylolistheses)

चिकित्सा विज्ञान में इस स्थिति को इसके कारणों के आधार पर मुख्य रूप से 5 प्रकारों में वर्गीकृत किया गया है:

  1. इस्थमिक (Isthmic): यह सबसे सामान्य प्रकार है। यह ‘पार्स इंटरआर्टिक्युलरिस’ (Pars interarticularis) नामक हड्डी के छोटे हिस्से में फ्रैक्चर या दरार के कारण होता है। यह अक्सर एथलीटों या भारी वजन उठाने वाले लोगों में देखा जाता है।
  2. डीजेनेरेटिव (Degenerative): यह उम्र बढ़ने के साथ होता है। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, दो मनकों के बीच की डिस्क (Disc) अपनी नमी खो देती है और कमजोर हो जाती है, जिससे मनका अपनी जगह से खिसक जाता है। यह बुजुर्गों में सबसे आम है।
  3. डिस्प्लास्टिक (Dysplastic/Congenital): यह जन्मजात होता है। जब रीढ़ की हड्डी का निर्माण जन्म से ही सही ढंग से नहीं होता, तो भविष्य में मनका खिसकने का जोखिम बढ़ जाता है।
  4. ट्रॉमेटिक (Traumatic): किसी गंभीर दुर्घटना, गिरने या चोट लगने के कारण जब रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर होता है और मनका खिसक जाता है।
  5. पैथोलॉजिकल (Pathological): जब किसी बीमारी, जैसे ऑस्टियोपोरोसिस (हड्डियों का कमजोर होना), संक्रमण या ट्यूमर के कारण हड्डी कमजोर होकर खिसक जाती है।

कारण और जोखिम कारक (Causes and Risk Factors)

मनका खिसकने के पीछे कई कारण हो सकते हैं:

  • उम्र (Age): उम्र बढ़ने के साथ रीढ़ की हड्डी में घिसाव (Wear and tear) होना स्वाभाविक है, जो इसका प्रमुख कारण है।
  • आनुवंशिकी (Genetics): कुछ लोगों की हड्डियों की बनावट जन्म से ही ऐसी होती है कि उन्हें यह समस्या होने का खतरा अधिक होता है।
  • खेल गतिविधियाँ (Sports): जिमनास्टिक्स, फुटबॉल, और वेटलिफ्टिंग जैसे खेल जिनमें रीढ़ की हड्डी को बहुत अधिक पीछे की ओर झुकाना (Hyperextension) पड़ता है, जोखिम बढ़ाते हैं।
  • भारी वजन उठाना: गलत तरीके से भारी वजन उठाने से रीढ़ पर अत्यधिक दबाव पड़ता है।
  • पुरानी चोट: पीठ के निचले हिस्से में बार-बार लगने वाली चोटें।

लम्बर स्पोंडिलोलिस्थेसिस (Symptoms)

कई मामलों में, स्पोंडिलोलिस्थेसिस के कोई लक्षण नहीं होते और यह केवल एक्स-रे में ही पता चलता है। लेकिन जब लक्षण दिखाई देते हैं, तो वे निम्नलिखित हो सकते हैं:

  • पीठ के निचले हिस्से में दर्द: यह दर्द गतिविधि करने पर बढ़ता है और आराम करने पर कम हो जाता है।
  • मांसपेशियों में जकड़न (Stiffness): विशेष रूप से सुबह के समय या लंबे समय तक बैठने के बाद कमर में अकड़न।
  • पैरों में दर्द (Sciatica): यदि खिसका हुआ मनका नस को दबाता है, तो दर्द कूल्हों से होता हुआ पैरों तक जा सकता है।
  • सुन्नपन और झुनझुनी: पैरों या पंजों में सुन्नपन महसूस होना।
  • चलने में कठिनाई: गंभीर मामलों में, रोगी को चलने या सीधे खड़े होने में परेशानी होती है। ‘बत्तख की चाल’ (Waddling gait) विकसित हो सकती है।

निदान (Diagnosis)

सही इलाज के लिए सही निदान अत्यंत आवश्यक है। डॉक्टर निम्नलिखित विधियों का उपयोग करते हैं:

  1. शारीरिक परीक्षण (Physical Examination): डॉक्टर आपकी रीढ़ की हड्डी को छूकर जांचेंगे और आपसे पैर उठाने या झुकने के लिए कहेंगे ताकि दर्द के क्षेत्र और नसों की स्थिति का पता चल सके।
  2. एक्स-रे (X-Ray): यह सबसे प्राथमिक जांच है। इसमें मनके के खिसकने की स्पष्ट तस्वीर दिखाई देती है। डॉक्टर यह भी मापते हैं कि मनका कितना प्रतिशत खिसका है (Grades 1 to 4)।
  3. एम.आर.आई (MRI): यदि नसों पर दबाव का संदेह हो, तो एमआरआई स्कैन किया जाता है। यह सॉफ्ट टिशू और डिस्क की स्थिति को विस्तार से दिखाता है।
  4. सीटी स्कैन (CT Scan): हड्डियों की विस्तृत जानकारी के लिए कभी-कभी इसकी आवश्यकता होती है।

उपचार और व्यवस्थापन (Treatment and Management)

उपचार की विधि मनके के खिसकने की गंभीरता (Grade) और लक्षणों पर निर्भर करती है। ज्यादातर मामलों में, सर्जरी की आवश्यकता नहीं होती है।

1. गैर-सर्जिकल उपचार (Conservative Treatment)

शुरुआती चरणों में डॉक्टर निम्नलिखित सलाह देते हैं:

  • आराम (Rest): उन गतिविधियों से बचना जो दर्द बढ़ाती हैं, जैसे भारी सामान उठाना या पीछे झुकना।
  • दवाएं (Medication): दर्द और सूजन कम करने के लिए NSAIDs (जैसे इबुप्रोफेन) दी जा सकती हैं।
  • ब्रेसेस (Bracing): रीढ़ की हड्डी को सहारा देने और उसे स्थिर रखने के लिए लम्बर बेल्ट का उपयोग किया जा सकता है।

2. जीवनशैली में बदलाव (Lifestyle Adjustments)

  • वजन नियंत्रण: अतिरिक्त वजन रीढ़ पर दबाव डालता है। स्वस्थ वजन बनाए रखना बहुत महत्वपूर्ण है।
  • धूम्रपान छोड़ना: धूम्रपान हड्डियों और डिस्क के ठीक होने (Healing) की प्रक्रिया को धीमा कर देता है।
  • एर्गोनॉमिक्स: सही तरीके से बैठना और सामान उठाने की सही तकनीक सीखना।

फिजियोथेरेपी (Physiotherapy)

फिजियोथेरेपी स्पोंडिलोलिस्थेसिस के प्रबंधन का आधार स्तंभ है। एक कुशल फिजियोथेरेपिस्ट आपकी रीढ़ की स्थिरता बढ़ाने के लिए कस्टमाइज्ड एक्सरसाइज प्लान बनाता है।

फिजियोथेरेपी के मुख्य उद्देश्य:

  • पेट (Core) और पीठ की मांसपेशियों को मजबूत करना ताकि वे रीढ़ को सहारा दे सकें।
  • जांघ की पिछली मांसपेशियों (Hamstrings) के कड़ेपन को कम करना।
  • मुद्रा (Posture) में सुधार करना।

लम्बर स्पोंडिलोलिस्थेसिस Physiotherapy Exercises

सावधानी: कोई भी व्यायाम शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट से सलाह अवश्य लें। यदि किसी व्यायाम से दर्द बढ़ता है, तो उसे तुरंत रोक दें।

1. डबल नी-टू-चेस्ट स्ट्रेच (Double Knee-to-Chest Stretch)

यह व्यायाम दबी हुई नसों के लिए जगह बनाता है और जकड़न कम करता है।

  • पीठ के बल लेट जाएं।
  • दोनों घुटनों को मोड़ें और अपने हाथों से उन्हें छाती की ओर खींचे।
  • गहराई से सांस लें और इस स्थिति में 20-30 सेकंड तक रहें।
  • धीरे से वापस आएं। इसे 3 बार दोहराएं।
Double Knee To Chest
Double Knee To Chest

2. हैमस्ट्रिंग स्ट्रेच (Hamstring Stretch)

स्पोंडिलोलिस्थेसिस में जांघ के पीछे की नसें (Hamstrings) अक्सर बहुत टाइट हो जाती हैं, जो कमर दर्द को बढ़ाती हैं।

  • पीठ के बल लेट जाएं।
  • एक पैर को सीधा ऊपर उठाएं (आप तौलिये या बेल्ट का उपयोग करके पैर के पंजे को अपनी ओर खींच सकते हैं)।
  • घुटने को सीधा रखें। आपको जांघ के पीछे खिंचाव महसूस होगा।
  • 30 सेकंड तक रोकें। दोनों पैरों से 3-3 बार करें।
Hamstring Stretch
Hamstring Stretch

3. ब्रिज एक्सरसाइज (Bridge Exercise)

यह व्यायाम ग्लूट्स (कूल्हों की मांसपेशियों) और कोर को मजबूत करता है।

  • पीठ के बल लेटें, घुटने मुड़े हों और पैर जमीन पर सपाट हों।
  • अपने कूल्हों (Hips) को ऊपर उठाएं ताकि आपके घुटने, कूल्हे और कंधे एक सीधी रेखा में आ जाएं।
  • पेट और कूल्हों को सिकोड़ें।
  • 5-10 सेकंड तक रोकें और धीरे-धीरे नीचे आएं। 10-12 बार दोहराएं।
Bridge Pose
Bridge Pose

4. कैट-काउ स्ट्रेच (Cat-Cow Stretch) – सावधानी के साथ

यह रीढ़ की गतिशीलता (Mobility) में सुधार करता है।

कैट-काउ स्ट्रेच (Cat-Cow Stretch)

  • घुटनों और हथेलियों के बल (चौपाया जानवर की तरह) आ जाएं।
  • Cat Pose: सांस छोड़ते हुए अपनी पीठ को ऊपर की ओर गोल करें (जैसे बिल्ली करती है) और सिर नीचे झुकाएं।
  • Cow Pose: सांस लेते हुए पीठ को हल्का नीचे की ओर ले जाएं और सिर ऊपर उठाएं (ध्यान रहे, बहुत अधिक पीठ को नीचे न झुकाएं, इससे दर्द बढ़ सकता है)।
  • धीरे-धीरे 10 बार दोहराएं।
Cat-cow Stretch
Cat-cow Stretch

5. स्ट्रेट लेग रेज़ (Straight Leg Raise – SLR)

  • पीठ के बल लेट जाएं, एक पैर मुड़ा हुआ और दूसरा सीधा।
  • सीधे पैर को धीरे-धीरे लगभग 45 डिग्री तक ऊपर उठाएं।
  • कोर (पेट) को टाइट रखें।
  • धीरे से नीचे लाएं। हर पैर से 10-15 बार करें।
Straight Leg Raise
Straight Leg Raise

दर्द व्यवस्थापन (Pain Management)

व्यायाम के साथ-साथ दर्द को नियंत्रित करने के लिए अन्य तरीके भी अपनाए जा सकते हैं:

  • गर्म और ठंडी सिकाई (Hot/Cold Therapy): चोट के तुरंत बाद बर्फ की सिकाई सूजन कम करती है। पुराने दर्द और जकड़न के लिए गर्म सिकाई (Hot pack) रक्त प्रवाह बढ़ाती है और मांसपेशियों को आराम देती है।
  • एपिड्यूरल स्टेरॉयड इंजेक्शन: यदि दर्द बहुत तेज है और दवाओं से ठीक नहीं हो रहा, तो डॉक्टर रीढ़ की हड्डी के पास स्टेरॉयड इंजेक्शन लगा सकते हैं।

सर्जिकल विकल्प (Surgical Options)

सर्जरी केवल अंतिम विकल्प के रूप में मानी जाती है। इसकी आवश्यकता तब पड़ती है जब:

  • दर्द असहनीय हो और 3-6 महीने के फिजियोथेरेपी/दवाओं से कोई फर्क न पड़ा हो।
  • नसों पर दबाव के कारण पैरों में कमजोरी बढ़ रही हो।
  • मूत्र या मल त्याग पर नियंत्रण खो गया हो (यह एक मेडिकल इमरजेंसी है)।

मुख्य सर्जिकल प्रक्रियाएं:

  1. डिकंप्रेशन (Decompression/Laminectomy): इसमें उस हड्डी के हिस्से को हटा दिया जाता है जो नसों को दबा रहा है।
  2. स्पाइनल फ्यूजन (Spinal Fusion): यह सबसे आम सर्जरी है। इसमें खिसके हुए मनके को उसके पास वाले मनके के साथ स्क्रू और रॉड की मदद से जोड़ (Fuse) दिया जाता है, ताकि वह भविष्य में न खिसके।

डॉक्टर का संपर्क कब करना चाहिए? (When to see a Doctor)

कमर दर्द को कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि आपको निम्नलिखित संकेत दिखें, तो तुरंत विशेषज्ञ से मिलें:

  • दर्द जो पैरों में नीचे तक जा रहा हो।
  • पैरों में अचानक कमजोरी महसूस होना या पैर का पंजा उठाने में दिक्कत (Foot drop)।
  • जननांग क्षेत्र (Genital area) में सुन्नपन।
  • पेशाब या मल त्यागने में नियंत्रण खोना (Cauda Equina Syndrome) – यह अत्यंत गंभीर स्थिति है।

निष्कर्ष (Conclusion)

लम्बर स्पोंडिलोलिस्थेसिस (मनका खिसकना) एक दर्दनाक स्थिति हो सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आपकी सक्रिय जीवनशैली समाप्त हो गई है। अधिकांश लोग सही निदान, अनुशासित फिजियोथेरेपी, और जीवनशैली में बदलाव के माध्यम से बिना सर्जरी के ही स्वस्थ जीवन व्यतीत कर सकते हैं।

महत्वपूर्ण यह है कि आप अपने शरीर की सुनें, दर्द को नजरअंदाज न करें और नियमित रूप से कोर स्ट्रेंथनिंग व्यायाम करें। धैर्य और सही उपचार के साथ, आप अपनी कमर को मजबूत बना सकते हैं और दर्द मुक्त जीवन जी सकते हैं।

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