लम्बर स्पॉन्डायलोसिस
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लम्बर स्पॉन्डायलोसिस के कारण, उपचार, फिजियोथेरेपी

लम्बर स्पॉन्डायलोसिस रीढ़ की हड्डी (spine) के निचले हिस्से में होने वाला एक अपक्षयी (degenerative) रोग है, जिसमें रीढ़ की हड्डियों (vertebrae), डिस्क (intervertebral discs), और जोड़ों (joints) में धीरे-धीरे घिसावट या कमजोरी आ जाती है। यह स्थिति मुख्यतः उम्र बढ़ने, गलत जीवनशैली, या शारीरिक परिश्रम की अधिकता से विकसित होती है।

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में लंबे समय तक बैठकर काम करना, गलत मुद्रा में रहना, और व्यायाम की कमी इस समस्या को और भी बढ़ा देते हैं। आइए इसे विस्तार से समझें।


🔹 लम्बर स्पॉन्डायलोसिस क्या है?

“लम्बर” शब्द रीढ़ की हड्डी के निचले हिस्से (कमर) को दर्शाता है, जबकि “स्पॉन्डायलोसिस” का अर्थ है हड्डियों या डिस्क की संरचना में होने वाले घिसाव या परिवर्तन।
जब कमर के हिस्से में यह घिसाव बढ़ जाता है, तो नसों पर दबाव पड़ने लगता है, जिससे कमर दर्द, पैरों में झनझनाहट, या चलने में कठिनाई जैसी समस्याएं होने लगती हैं।

यह समस्या 40 वर्ष से अधिक आयु के लोगों में आम है, लेकिन आजकल युवा वर्ग में भी यह तेजी से बढ़ रही है, विशेषकर उन लोगों में जो लंबे समय तक लैपटॉप या मोबाइल पर झुककर बैठते हैं।


🔹 लम्बर स्पॉन्डायलोसिस के कारण (Causes)

  1. उम्र बढ़ना (Aging):
    उम्र के साथ हड्डियों और डिस्क में लचीलापन कम हो जाता है। डिस्क के अंदर का तरल पदार्थ घटने से हड्डियों के बीच घर्षण बढ़ता है, जिससे दर्द और अकड़न होती है।
  2. गलत मुद्रा (Poor Posture):
    लंबे समय तक झुककर बैठना या खड़े रहना, ऑफिस चेयर पर बिना सपोर्ट के काम करना, या मोबाइल का अत्यधिक उपयोग रीढ़ की हड्डी पर अतिरिक्त दबाव डालता है।
  3. भारी वजन उठाना:
    बार-बार या गलत तरीके से भारी सामान उठाने से डिस्क पर दबाव बढ़ता है, जिससे घिसाव की प्रक्रिया तेज हो जाती है।
  4. चोट या दुर्घटना (Injury):
    किसी दुर्घटना या गिरने से रीढ़ की हड्डी को चोट लगने पर उसमें स्थायी क्षति हो सकती है।
  5. अधिक वजन (Obesity):
    शरीर का अतिरिक्त वजन निचले हिस्से की रीढ़ पर अतिरिक्त दबाव डालता है, जिससे सॉफ्ट टिश्यू और डिस्क जल्दी खराब होते हैं।
  6. अनुवांशिक कारण (Genetic Factors):
    जिनके परिवार में पहले से स्पॉन्डायलोसिस की समस्या रही हो, उनमें यह जोखिम अधिक रहता है।
  7. शारीरिक निष्क्रियता (Sedentary Lifestyle):
    लंबे समय तक बैठे रहने और व्यायाम न करने से मांसपेशियाँ कमजोर हो जाती हैं, जिससे रीढ़ पर तनाव बढ़ता है।

🔹 लम्बर स्पॉन्डायलोसिस के लक्षण (Symptoms)

  • लगातार या रुक-रुक कर होने वाला कमर दर्द
  • झुकने, मुड़ने या लंबे समय तक बैठने पर दर्द बढ़ना
  • पैरों में सुन्नपन, झनझनाहट या जलन
  • चलने या खड़े होने में कठिनाई
  • कमर में अकड़न, खासकर सुबह के समय
  • नींद में बाधा, क्योंकि दर्द रात में बढ़ सकता है
  • मांसपेशियों में कमजोरी और थकान महसूस होना

गंभीर स्थिति में, रीढ़ की हड्डी से निकलने वाली नसों पर दबाव बढ़ जाता है, जिससे पैरों तक दर्द फैल सकता है — इसे सियाटिका (Sciatica) कहा जाता है।


🔹 लम्बर स्पॉन्डायलोसिस का निदान (Diagnosis)

  1. शारीरिक जांच (Physical Examination):
    डॉक्टर आपके पोश्चर, चलने की स्थिति, और दर्द के क्षेत्र की जांच करते हैं।
  2. एक्स-रे (X-ray):
    इससे हड्डियों की संरचना और उनमें हुए बदलाव जैसे स्पर (bone spur) देखे जा सकते हैं।
  3. MRI (Magnetic Resonance Imaging):
    यह टेस्ट डिस्क और नसों की स्थिति बताता है। यह यह दिखा सकता है कि कोई डिस्क हर्निएटेड (फटी हुई) तो नहीं है।
  4. CT स्कैन:
    हड्डियों और जोड़ों की सूक्ष्म जानकारी के लिए किया जाता है।
  5. नर्व कंडक्शन टेस्ट (Nerve Conduction Study):
    यह जांच बताती है कि नसों में सिग्नल्स कितनी प्रभावी तरह से जा रहे हैं।

🔹 उपचार (Treatment of Lumbar Spondylosis)

लम्बर स्पॉन्डायलोसिस का इलाज व्यक्ति की स्थिति और दर्द की गंभीरता पर निर्भर करता है।

1. दवाइयाँ (Medications):

  • पेन रिलीवर: जैसे इबुप्रोफेन, पैरासिटामोल, या नैप्रोक्सेन दर्द कम करने में मदद करते हैं।
  • मसल रिलैक्सेंट्स: मांसपेशियों की अकड़न दूर करते हैं।
  • स्टेरॉयड इंजेक्शन: यदि दर्द बहुत तेज हो तो डॉक्टर नस के पास स्टेरॉयड इंजेक्शन दे सकते हैं ताकि सूजन कम हो।

2. फिजियोथेरेपी (Physiotherapy):

फिजियोथेरेपी सबसे प्रभावी गैर-शल्य (non-surgical) उपचार है।

  • स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज: मांसपेशियों को लचीला और मजबूत बनाती हैं।
  • ब्रिज पोज़, कैट-काउ स्ट्रेच, पेल्विक टिल्ट: ये एक्सरसाइज कमर और कोर को मजबूत करती हैं।
  • हॉट और कोल्ड थेरेपी: गर्म सिकाई से रक्त प्रवाह बढ़ता है और दर्द कम होता है; ठंडी सिकाई से सूजन घटती है।
  • पोश्चर करेक्शन ट्रेनिंग: सही मुद्रा सिखाई जाती है ताकि रीढ़ पर दबाव न पड़े।
  • कोर स्ट्रेंथनिंग: पेट और पीठ की मांसपेशियों को मजबूत करना ताकि वे रीढ़ को सहारा दे सकें।

3. सर्जरी (Surgery):

जब दर्द लंबे समय तक दवाओं और थेरेपी से ठीक नहीं होता, और नसों पर अधिक दबाव पड़ने लगता है, तो सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है।
सर्जरी में दबावग्रस्त नस को मुक्त (decompress) किया जाता है या क्षतिग्रस्त डिस्क को बदला जाता है।


🔹 घरेलू उपचार (Home Remedies)

  1. गर्म सिकाई (Hot Compress):
    दिन में 10-15 मिनट गर्म पानी की थैली से सिकाई करने से दर्द और अकड़न में राहत मिलती है।
  2. हल्के व्यायाम (Light Exercise):
    रोजाना हल्के योगासन या स्ट्रेचिंग से मांसपेशियाँ सक्रिय रहती हैं।
  3. सही मुद्रा बनाए रखें (Maintain Proper Posture):
    बैठते समय पीठ सीधी रखें और पैर ज़मीन पर रखें।
  4. वजन नियंत्रित रखें (Maintain Healthy Weight):
    मोटापा कमर की हड्डियों पर दबाव बढ़ाता है, इसलिए वजन नियंत्रण जरूरी है।
  5. एंटी-इंफ्लेमेटरी डाइट लें:
    हल्दी, अदरक, लहसुन, और ओमेगा-3 से भरपूर भोजन सूजन कम करते हैं।
  6. आराम और पर्याप्त नींद:
    पर्याप्त आराम रीढ़ की रिकवरी के लिए जरूरी है।

🔹 फिजियोथेरेपी एक्सरसाइज के उदाहरण

ब्रिज पोज़ (Bridge Pose):
पीठ के बल लेटें, घुटने मोड़ें और धीरे-धीरे कूल्हे ऊपर उठाएं।
10 सेकंड तक रोकें, फिर धीरे-धीरे नीचे लाएं।

Bridge Pose
Bridge Pose

कैट-काउ स्ट्रेच (Cat-Cow Stretch):
चारों हाथ-पैरों पर झुककर पहले पीठ ऊपर उठाएं (कैट पोज़) और फिर नीचे झुकाएं (काउ पोज़)।

Cat-cow Stretch
Cat-cow Stretch

पेल्विक टिल्ट (Pelvic Tilt):
पीठ के बल लेटकर पेट की मांसपेशियों को कसें और कमर को जमीन पर चिपकाएं।

ये सभी व्यायाम रीढ़ को लचीलापन देते हैं और दर्द को कम करते हैं।


🔹 लम्बर स्पॉन्डायलोसिस में बचाव (Prevention Tips)

  1. सही पोश्चर अपनाएं:
    कंप्यूटर पर काम करते समय पीठ सीधी रखें और कुर्सी में बैक सपोर्ट का उपयोग करें।
  2. नियमित व्यायाम करें:
    योग, तैराकी, और वॉकिंग रीढ़ की सेहत के लिए बहुत उपयोगी हैं।
  3. लंबे समय तक एक पोजीशन में न रहें:
    हर 30 मिनट में थोड़ी देर चलें या स्ट्रेच करें।
  4. संतुलित आहार लें:
    कैल्शियम, विटामिन D, और प्रोटीन से भरपूर आहार हड्डियों को मजबूत बनाता है।
  5. वजन नियंत्रित रखें:
    अतिरिक्त वजन कमर पर अनावश्यक दबाव डालता है।
  6. धूम्रपान और शराब से बचें:
    ये दोनों रीढ़ की हड्डियों के लिए हानिकारक हैं और हीलिंग प्रक्रिया को धीमा करते हैं।

🔹 निष्कर्ष (Conclusion)

लम्बर स्पॉन्डायलोसिस एक ऐसी समस्या है जिसे शुरुआती चरण में ही पहचाना और नियंत्रित किया जा सकता है। सही पोश्चर, नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और समय पर चिकित्सा से इस समस्या को गंभीर होने से रोका जा सकता है।
अगर दर्द लगातार बना रहे या पैरों में सुन्नपन महसूस हो, तो डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट से तुरंत संपर्क करें।

कमर की देखभाल करना हमारे दैनिक स्वास्थ्य का हिस्सा होना चाहिए, क्योंकि एक स्वस्थ रीढ़ ही स्वस्थ जीवन का आधार है।


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