पर्वतासन (Mountain Pose): स्थिरता और शक्ति का प्रतीक – एक विस्तृत मार्गदर्शिका
योग विज्ञान में आसनों का नामकरण अक्सर प्रकृति, जानवरों और वस्तुओं के नाम पर किया जाता है, जो उनके गुणों और आकारों को दर्शाते हैं। ‘पर्वतासन’ (Parvatasana) भी इसी परंपरा का एक हिस्सा है। संस्कृत शब्द ‘पर्वत’ का अर्थ है ‘पहाड़’ और ‘आसन’ का अर्थ है ‘मुद्रा’।
इस आसन का अभ्यास करते समय शरीर एक पर्वत की भांति अचल, स्थिर और भव्य दिखाई देता है। यह आसन न केवल शारीरिक ढांचे को मजबूती देता है, बल्कि मानसिक दृढ़ता भी प्रदान करता है।
इस विस्तृत लेख में, हम पर्वतासन की विधि, इसके प्रकार, लाभ, सावधानियां और इसके पीछे के विज्ञान को गहराई से समझेंगे।
पर्वतासन का परिचय (Introduction)
पर्वतासन को मुख्य रूप से दो रूपों में जाना जाता है:
- बैठकर किया जाने वाला पर्वतासन: यह ध्यानात्मक आसनों (जैसे पद्मासन) का एक विस्तार है, जिसमें हाथों को ऊपर की ओर खींचा जाता है। हठ योग में इसे ही मुख्य पर्वतासन माना जाता है।
- सूर्य नमस्कार का हिस्सा (अधोमुख श्वानासन जैसा): सूर्य नमस्कार के 12 चरणों में से एक चरण में शरीर उल्टे ‘V’ आकार में आता है, जिसे भी कई परंपराओं में पर्वतासन कहा जाता है।
इस लेख में हम मुख्य रूप से बैठकर किए जाने वाले पर्वतासन पर ध्यान केंद्रित करेंगे, क्योंकि यह एक स्वतंत्र आसन है जो रीढ़ की हड्डी और फेफड़ों के लिए अत्यंत लाभकारी है।
पर्वतासन करने की विधि (Step-by-Step Guide)
पर्वतासन एक सरल दिखने वाला लेकिन गहरा प्रभाव डालने वाला आसन है। इसे सही तकनीक के साथ करना आवश्यक है।
चरण 1: प्रारंभिक स्थिति
- सबसे पहले जमीन पर एक योग मैट बिछाएं और दंडासन (पैरों को सामने फैलाकर) में बैठ जाएं।
- अब सुखासन (साधारण पालथी) या पद्मासन (कमल मुद्रा) में बैठें। पद्मासन में बैठना इस आसन के लिए सर्वोत्तम माना जाता है क्योंकि यह आधार को मजबूती देता है।
- अपनी रीढ़ की हड्डी, गर्दन और सिर को एक सीधी रेखा में रखें। हाथों को घुटनों पर रखें और कुछ गहरी सांसें लें।
चरण 2: हाथों की स्थिति
- गहरी सांस भरते हुए अपने दोनों हाथों को बगल से ऊपर उठाएं।
- अपने सिर के ठीक ऊपर हथेलियों को एक साथ लाएं।
- अब अपनी उंगलियों को आपस में फंसा लें (Interlock fingers)।
चरण 3: खिंचाव (The Stretch)
- हथेलियों को ऊपर की ओर (आसमान की तरफ) पलट दें।
- सांस भरते हुए, अपने हाथों को ऊपर की ओर जितना हो सके खींचें। महसूस करें कि आपकी रीढ़ की हड्डी नीचे से ऊपर की ओर खिंच रही है।
- ध्यान रहे कि आपके कूल्हे (Hips) जमीन से न उठें। वे जमीन पर मजबूती से टिके रहने चाहिए, जैसे पहाड़ की जड़ें।
चरण 4: अंतिम मुद्रा
- आपकी भुजाएं (Biceps) आपके कानों को छूनी चाहिए।
- कोहनियां बिल्कुल सीधी रखें।
- सीने को थोड़ा आगे और ऊपर की ओर तानें।
- आंखें बंद कर लें या सामने किसी एक बिंदु पर ध्यान केंद्रित करें।
चरण 5: धारण करना और वापसी
- इस स्थिति में सामान्य रूप से सांस लेते रहें। इसे 30 सेकंड से 1 मिनट तक बनाए रखें।
- वापस आने के लिए, सांस छोड़ते हुए हाथों की पकड़ ढीली करें, हथेलियों को नीचे लाएं और प्रारंभिक स्थिति में लौट आएं।
श्वास-प्रश्वास प्रक्रिया (Breathing Pattern)
योग में सांसों का तालमेल सबसे महत्वपूर्ण है। पर्वतासन में सांस लेने का तरीका इस प्रकार है:
- ऊपर जाते समय: जब आप हाथ ऊपर उठाते हैं और उंगलियों को लॉक करके स्ट्रेच करते हैं, तो पूरक (Inhale) करें। यह फेफड़ों को फैलने में मदद करता है।
- आसन में रुकते समय: जब आप अंतिम मुद्रा में स्थिर हो जाएं, तो सामान्य रूप से सांस लेते रहें (Normal Breathing)। सांस रोके नहीं। गहरी और धीमी सांसें लें ताकि पसलियां खुलें।
- नीचे आते समय: जब आप हाथों को नीचे लाएं और शरीर को ढीला छोड़ें, तो रेचक (Exhale) करें।
पर्वतासन के लाभ (Benefits of Parvatasana)
पर्वतासन के लाभों को हम तीन श्रेणियों में बांट सकते हैं: शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक।
1. शारीरिक लाभ (Physical Benefits)
- रीढ़ की हड्डी का लचीलापन: यह आसन रीढ़ की हड्डी (Spine) को ऊपर की ओर खींचता है, जिससे कशेरुकाओं (Vertebrae) के बीच का दबाव कम होता है। यह उन लोगों के लिए बेहतरीन है जो दिन भर बैठकर काम करते हैं।
- फेफड़ों की क्षमता में वृद्धि: हाथों को ऊपर खींचने से छाती की मांसपेशियों और पसलियों (Rib cage) का विस्तार होता है। इससे फेफड़ों की ऑक्सीजन ग्रहण करने की क्षमता बढ़ती है, जो अस्थमा और श्वसन संबंधी समस्याओं में लाभकारी है।
- पेट के अंगों की मालिश: ऊपर की ओर खिंचाव से पेट की मांसपेशियों में भी हल्का खिंचाव आता है, जिससे पाचन तंत्र सक्रिय होता है और कब्ज जैसी समस्याओं में राहत मिलती है।
- भुजाओं और कंधों की टोनिंग: यह ट्राइसेप्स, बाइसेप्स और कंधों की मांसपेशियों को मजबूत और सुडौल बनाता है। फ्रोजन शोल्डर (Frozen Shoulder) की समस्या में यह (हल्के अभ्यास के साथ) लाभकारी हो सकता है।
- रक्त संचार: यह शरीर के ऊपरी हिस्से, विशेषकर मस्तिष्क और हृदय की ओर रक्त प्रवाह को सुचारू करता है।
2. मानसिक लाभ (Mental Benefits)
- एकाग्रता (Concentration): पहाड़ की तरह स्थिर रहने का प्रयास मन को भटकने से रोकता है। यह छात्रों और बौद्धिक कार्य करने वालों के लिए फोकस बढ़ाने वाला आसन है।
- तनाव में कमी: गहरी सांसों के साथ शरीर को खींचने से मांसपेशियों का तनाव (Muscle Tension) दूर होता है, जिससे मानसिक शांति मिलती है और चिंता (Anxiety) कम होती है।
- आलस्य का नाश: यदि आपको काम करते समय सुस्ती महसूस हो रही हो, तो केवल 2 मिनट पर्वतासन करने से शरीर में ऊर्जा का संचार होता है।
3. आध्यात्मिक लाभ (Spiritual Benefits)
- यह आसन ‘मूलाधार चक्र’ (Root Chakra) को जमीन से जोड़ता है और ऊर्जा को ‘सहस्रार चक्र’ (Crown Chakra) की ओर ऊपर उठाता है। यह कुंडलिनी जागरण की प्रक्रिया में सहायक माना जाता है। यह साधक के भीतर स्थिरता और दृढ़ता का भाव जगाता है।
पर्वतासन में होने वाली सामान्य गलतियां (Common Mistakes)
अक्सर शुरुआती अभ्यासी कुछ गलतियां करते हैं, जिससे आसन का पूरा लाभ नहीं मिल पाता:
- कंधों को कानों की तरफ सिकोड़ना: खिंचाव देते समय कई लोग अपने कंधों (Shoulders) को कानों की तरफ उठा लेते हैं (shrugging)। कंधे कानों से दूर और नीचे की ओर होने चाहिए, केवल भुजाएं कानों के पास होनी चाहिए।
- कोहनियों को मोड़ना: पूर्ण लाभ के लिए कोहनियां बिल्कुल सीधी होनी चाहिए।
- गर्दन को झुकाना: कई लोग गर्दन को आगे या पीछे झुका लेते हैं। गर्दन रीढ़ की सीध में होनी चाहिए और दृष्टि सामने होनी चाहिए।
- कूल्हों को उठाना: ऊपर खिंचते समय कूल्हे (Hips) जमीन से उठने नहीं चाहिए। निचला शरीर भारी और स्थिर रहना चाहिए।
सावधानियां और मतभेद (Precautions & Contraindications)
यद्यपि पर्वतासन सभी के लिए सुरक्षित माना जाता है, फिर भी कुछ स्थितियों में सावधानी बरतना आवश्यक है:
- कंधे या कलाई की चोट: यदि आपको कंधों, कोहनियों या कलाइयों में गंभीर चोट या दर्द है, तो हाथों को ऊपर खींचने से बचें या डॉक्टर की सलाह लें।
- घुटनों का दर्द: यदि आप पद्मासन में नहीं बैठ सकते, तो जबरदस्ती न करें। आप इसे कुर्सी पर बैठकर या सुखासन में भी कर सकते हैं।
- हालिया सर्जरी: यदि पेट या छाती की कोई सर्जरी हुई है, तो पूरी तरह ठीक होने तक इस खिंचाव से बचें।
- चक्कर आना: यदि हाथ ऊपर करने पर चक्कर आते हैं, तो आंखों को खुला रखें और खिंचाव कम करें।
पर्वतासन के प्रकार (Variations)
अभ्यास को रोचक बनाने और विभिन्न लाभों के लिए इसके कुछ वेरिएशन किए जा सकते हैं:
- पर्वतासन (वज्रासन में): यदि आप पद्मासन नहीं लगा सकते, तो वज्रासन (घुटनों के बल बैठना) में बैठकर भी इसे किया जा सकता है। यह पाचन के लिए और भी बेहतर हो जाता है।
- खड़े होकर (ताड़ासन): जब यही क्रिया खड़े होकर की जाती है और पंजों के बल शरीर को उठाया जाता है, तो इसे ‘ताड़ासन’ कहते हैं। यह पर्वतासन का ही खड़ा रूप है।
- एक हस्त पर्वतासन: इसमें एक हाथ को जमीन पर टिकाकर दूसरे हाथ को कान से सटाते हुए साइड में झुकाया जाता है। यह रीढ़ के पार्श्व भाग (Side stretch) के लिए अच्छा है।
वैज्ञानिक दृष्टिकोण (Scientific Perspective)
एनाटॉमी (शरीर रचना विज्ञान) के अनुसार, पर्वतासन मुख्य रूप से “लैटिसिमस डोर्सी” (Latissimus Dorsi – पीठ की बड़ी मांसपेशी), “ट्रैपेज़ियस” और “इंटरकोस्टल मसल्स” (पसलियों के बीच की मांसपेशियां) पर काम करता है।
जब हम हाथों को ऊपर खींचते हैं, तो डायफ्राम (Diaphragm) को गति करने के लिए अधिक जगह मिलती है। यह ‘डीप ब्रीदिंग’ को ट्रिगर करता है, जिससे पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम (विश्राम और पाचन तंत्र) सक्रिय होता है। यही कारण है कि इस आसन को करने के बाद व्यक्ति को तुरंत शांति का अनुभव होता है।
इसके अलावा, पद्मासन में बैठकर इसे करने से पैरों में रक्त प्रवाह कम हो जाता है और यह रक्त पेल्विक क्षेत्र (Pelvic region) और पेट की ओर निर्देशित होता है, जो प्रजनन और पाचन अंगों के स्वास्थ्य को सुधारता है।
निष्कर्ष (Conclusion)
पर्वतासन केवल शरीर को ऊपर खींचने का नाम नहीं है, बल्कि यह अपनी चेतना को ऊपर उठाने का एक प्रयास है। जिस प्रकार एक पर्वत आंधी-तूफान में भी अडिग खड़ा रहता है, उसी प्रकार इस आसन का नियमित अभ्यास हमें जीवन की कठिनाइयों और तनाव के बीच स्थिर और शांत रहना सिखाता है।
चाहे आप एक विद्यार्थी हों, कॉर्पोरेट कर्मचारी हों, या एक गृहिणी, दिन में केवल 5 मिनट निकालकर इस आसन का अभ्यास करने से आपकी रीढ़ की हड्डी स्वस्थ रहेगी, मन शांत रहेगा और आप ऊर्जावान महसूस करेंगे।
