कण्ठमाला रोग
कण्ठमाला क्या है?
कण्ठमाला एक संक्रामक वायरल संक्रमण है जो लार ग्रंथियों को प्रभावित करता है, विशेषकर पैरोटिड ग्रंथियों को, जो कानों के पास स्थित होती हैं। यह पैरामिक्सोवायरस नामक वायरस के कारण होता है।
कण्ठमाला के लक्षणों में शामिल हैं:
- बुखार
- सिरदर्द
- मांसपेशियों में दर्द
- थकान
- सूजी हुई लार ग्रंथियां (गाल और जबड़े में सूजन)
कण्ठमाला वायरस के कारण होता है, जो संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने पर हवा में फैलती बूंदों के माध्यम से फैलता है।
कण्ठमाला का कोई विशिष्ट इलाज नहीं है। उपचार में लक्षणों से राहत के लिए आराम, तरल पदार्थ और दर्द निवारक दवाएं शामिल हैं।
कण्ठमाला से बचाव का सबसे अच्छा तरीका है एमएमआर टीका लगवाना। यह टीका खसरा, कण्ठमाला और रूबेला से बचाता है।
कण्ठमाला के कारण कुछ जटिलताएं हो सकती हैं, जैसे कि:
- वृषणशोथ (अंडकोष की सूजन)
- ओवरीज (अंडाशय) की सूजन
- मेनिन्जाइटिस (मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी की झिल्लियों की सूजन)
- एन्सेफेलिटिस (मस्तिष्क की सूजन)
- बहरापन
कण्ठमाला रोग के क्या कारण हैं?
कण्ठमाला रोग का मुख्य कारण पैरामिक्सोवायरस नामक एक वायरस है। यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के लार, छींकने या खांसने के दौरान हवा में फैलती छोटी बूंदों के माध्यम से फैलता है।
कण्ठमाला कैसे फैलता है?
- सीधे संपर्क: संक्रमित व्यक्ति के लार के सीधे संपर्क में आने से, जैसे कि चुंबन या बर्तन साझा करना।
- हवा में बूंदें: जब कोई संक्रमित व्यक्ति खांसता या छींकता है, तो वायरस युक्त छोटी बूंदें हवा में फैल जाती हैं और सांस लेने के माध्यम से दूसरे व्यक्ति को संक्रमित कर सकती हैं।
- दूषित सतहें: वायरस दूषित सतहों पर भी जीवित रह सकता है, और यदि कोई व्यक्ति उन सतहों को छूता है और फिर अपने मुंह, नाक या आंखों को छूता है, तो वह संक्रमित हो सकता है।
कण्ठमाला के खतरे को कौन बढ़ा सकता है?
- टीकाकरण नहीं: जिन लोगों ने कण्ठमाला का टीका नहीं लगवाया है, उनमें इस बीमारी का खतरा अधिक होता है।
- कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली: कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों, जैसे कि एचआईवी/एड्स से पीड़ित लोगों या कुछ दवाओं का सेवन करने वाले लोगों में कण्ठमाला का खतरा अधिक होता है।
- भीड़भाड़ वाली जगहें: भीड़भाड़ वाली जगहों पर रहने या काम करने से कण्ठमाला के संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।
कण्ठमाला से बचाव के लिए क्या करें?
- टीकाकरण: कण्ठमाला से बचाव का सबसे अच्छा तरीका है एमएमआर टीका लगवाना।
- अच्छी स्वच्छता: बार-बार हाथ धोएं और खांसते या छींकते समय अपना मुंह और नाक ढकें।
- बीमार लोगों से दूर रहें: यदि कोई बीमार है, तो उससे दूर रहें और उसके साथ बर्तन या अन्य चीजें साझा न करें।
कण्ठमाला के संकेत और लक्षण क्या हैं?
कण्ठमाला (गलसुआ) के संकेत और लक्षण आमतौर पर वायरस के संपर्क में आने के 2 से 3 सप्ताह बाद दिखाई देते हैं। कुछ लोगों में हल्के लक्षण होते हैं या कोई लक्षण नहीं दिखाई देते हैं।
कण्ठमाला के सामान्य संकेतों और लक्षणों में शामिल हैं:
- सूजी हुई लार ग्रंथियां (पैरोटिड ग्रंथियां): यह कण्ठमाला का सबसे विशिष्ट लक्षण है। एक या दोनों तरफ के गालों में सूजन आ जाती है, जिससे जबड़े के पास दर्द और कोमलता महसूस होती है। सूजन कान के निचले हिस्से और जबड़े के कोण के बीच दिखाई देती है।
- बुखार: आमतौर पर हल्का से मध्यम होता है।
- सिरदर्द
- मांसपेशियों में दर्द
- थकान
- भूख न लगना
- चबाने या निगलने में कठिनाई: सूजी हुई ग्रंथियों के कारण हो सकता है।
- कान दर्द
कण्ठमाला रोग का खतरा किसे अधिक होता है?
कण्ठमाला रोग का खतरा उन लोगों को अधिक होता है जो:
जिन लोगों की वैक्सीन से प्रतिरक्षा कम हो गई है: कुछ लोगों में, एमएमआर वैक्सीन से मिली प्रतिरक्षा समय के साथ कम हो सकती है, जिससे वे बाद के जीवन में संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाते हैं, खासकर प्रकोप की स्थिति में।
टीकाकरण नहीं करवाते हैं: एमएमआर (खसरा, कण्ठमाला, रूबेला) का टीका कण्ठमाला से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है। जिन लोगों को यह टीका नहीं लगा है, उनमें कण्ठमाला होने का खतरा बहुत अधिक होता है।
पूरी तरह से टीकाकरण नहीं करवाते हैं: एमएमआर टीके की दो खुराकें कण्ठमाला से सर्वोत्तम सुरक्षा प्रदान करती हैं। जिन लोगों ने केवल एक खुराक ली है, उनमें भी कण्ठमाला होने का खतरा बना रहता है, हालांकि संक्रमण आमतौर पर हल्का होता है।
कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोग: एचआईवी/एड्स, कुछ चिकित्सीय स्थितियों या दवाओं (जैसे कि कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स या कीमोथेरेपी) के कारण कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों में कण्ठमाला होने और गंभीर जटिलताओं का विकास होने का खतरा अधिक होता है।
अंतर्राष्ट्रीय यात्रा करने वाले लोग: उन क्षेत्रों की यात्रा करने वाले लोग जहां कण्ठमाला अभी भी आम है या जहां प्रकोप चल रहा है, उनमें संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
भीड़भाड़ वाली जगहों पर रहने वाले लोग: स्कूल, कॉलेज के छात्रावास, और अन्य घनिष्ठ समुदायों जैसे भीड़भाड़ वाली जगहों पर रहने वाले लोगों में कण्ठमाला फैलने का खतरा अधिक होता है क्योंकि वायरस आसानी से निकट संपर्क के माध्यम से फैलता है।
स्कूल जाने वाले बच्चे: टीकाकरण के बावजूद, स्कूल जाने वाले बच्चे घनिष्ठ संपर्क के कारण संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील हो सकते हैं।
स्वास्थ्यकर्मी: स्वास्थ्यकर्मियों को संक्रमित रोगियों के संपर्क में आने का अधिक खतरा होता है यदि वे पूरी तरह से प्रतिरक्षित नहीं हैं।
कण्ठमाला रोग से कौन सी बीमारियां जुड़ी हैं?
कण्ठमाला रोग, जिसे गलसुआ भी कहा जाता है, एक संक्रामक वायरल संक्रमण है जो मुख्य रूप से लार ग्रंथियों को प्रभावित करता है। हालांकि यह आमतौर पर एक हल्की बीमारी है, लेकिन कुछ मामलों में यह जटिलताओं का कारण बन सकता है। कण्ठमाला से जुड़ी कुछ बीमारियां और जटिलताएं इस प्रकार हैं:
सामान्य जटिलताएं:
- ऑर्काइटिस: एक या दोनों अंडकोषों की सूजन। यह दर्दनाक हो सकता है और दुर्लभ मामलों में बांझपन का कारण बन सकता है।
- ऊफोराइटिस: अंडाशय की सूजन। यह पेट के निचले हिस्से में दर्द पैदा कर सकती है।
- मेनिन्जाइटिस: मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी को ढकने वाले सुरक्षात्मक ऊतकों की सूजन। इसके लक्षणों में सिरदर्द, गर्दन में अकड़न और बुखार शामिल हो सकते हैं।
- एन्सेफलाइटिस: मस्तिष्क की सूजन। यह एक गंभीर जटिलता है जिसके कारण न्यूरोलॉजिकल समस्याएं और यहां तक कि मृत्यु भी हो सकती है।
- अग्नाशयशोथ: अग्न्याशय की सूजन, जिससे पेट में दर्द और उल्टी हो सकती है।
- बहरापन: दुर्लभ मामलों में, कण्ठमाला स्थायी श्रवण हानि का कारण बन सकता है।
- गठिया: जोड़ों की सूजन।
- थायरॉइडिटिस: थायरॉयड ग्रंथि की सूजन।
- गर्भावस्था में जटिलताएं: गर्भावस्था के दौरान कण्ठमाला होने पर गर्भपात का खतरा बढ़ सकता है, खासकर गर्भावस्था की शुरुआत में।
- हृदय संबंधी समस्याएं: बहुत ही दुर्लभ मामलों में, अनियमित नाड़ी और हृदय की मांसपेशियों की बीमारियों को कण्ठमाला से जोड़ा गया है।
यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि कण्ठमाला से जुड़ी अधिकांश जटिलताएं असामान्य हैं, खासकर उन लोगों में जिन्हें एमएमआर (खसरा, कण्ठमाला, रूबेला) का टीका लगाया गया है। टीकाकरण कण्ठमाला और इसकी जटिलताओं से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।
कण्ठमाला के लक्षणों में बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, थकान, भूख न लगना और सूजी हुई लार ग्रंथियां (गालों में सूजन) शामिल हैं। यदि आपको या आपके बच्चे में कण्ठमाला के लक्षण दिखाई देते हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेना महत्वपूर्ण है।
कण्ठमाला का निदान कैसे करें?
आमतौर पर लक्षणों और शारीरिक परीक्षण के आधार पर किया जाता है। डॉक्टर आपसे आपके लक्षणों के बारे में पूछेंगे और आपके गले, जबड़े और गालों की जांच करेंगे। यदि डॉक्टर को संदेह है कि आपको कण्ठमाला है, तो वे प्रयोगशाला परीक्षणों का आदेश दे सकते हैं।
कण्ठमाला के निदान के लिए सबसे आम प्रयोगशाला परीक्षणों में शामिल हैं:
- वायरल कल्चर: यह परीक्षण आपके लार या गले के स्वाब से वायरस को उगाकर कण्ठमाला वायरस की उपस्थिति की पुष्टि करता है।
- आरटी-पीसीआर: यह परीक्षण आपके लार या मूत्र के नमूने में कण्ठमाला वायरस के आनुवंशिक पदार्थ का पता लगाता है।
- सीरोलॉजिकल परीक्षण: यह परीक्षण आपके रक्त में कण्ठमाला वायरस के एंटीबॉडीज का पता लगाता है। एंटीबॉडीज वे प्रोटीन होते हैं जो आपका शरीर संक्रमण से लड़ने के लिए बनाता है।
इन परीक्षणों के परिणामों के आधार पर, डॉक्टर यह निर्धारित कर सकते हैं कि आपको कण्ठमाला है या नहीं। यदि आपको कण्ठमाला है, तो डॉक्टर आपको लक्षणों से राहत के लिए उपचार की सलाह देंगे।
कण्ठमाला का कोई विशिष्ट इलाज नहीं है, लेकिन उपचार में आमतौर पर शामिल हैं:
- आराम
- तरल पदार्थ
- दर्द निवारक दवाएं, जैसे कि एसिटामिनोफेन या इबुप्रोफेन
- सूजन को कम करने के लिए गर्म या ठंडी सेक
ज्यादातर लोग कुछ हफ़्तों में कण्ठमाला से ठीक हो जाते हैं। हालांकि, कुछ लोगों को जटिलताएं हो सकती हैं, जैसे कि वृषणशोथ (अंडकोष की सूजन), मेनिन्जाइटिस (मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी की झिल्लियों की सूजन), या एन्सेफेलिटिस (मस्तिष्क की सूजन)। यदि आपको कण्ठमाला है और आपको कोई जटिलता होती है, तो डॉक्टर से संपर्क करना महत्वपूर्ण है।कण्ठमाला का निदान कैसे करें?
कण्ठमाला का इलाज क्या है?
कण्ठमाला एक वायरल संक्रमण है जिसका कोई विशिष्ट इलाज नहीं है। उपचार का मुख्य लक्ष्य लक्षणों से राहत प्रदान करना और जटिलताओं को रोकना है। कण्ठमाला के इलाज में शामिल हैं:
- आराम: कण्ठमाला से पीड़ित व्यक्ति को पर्याप्त आराम करना चाहिए, खासकर जब तक सूजन कम न हो जाए।
- तरल पदार्थ: निर्जलीकरण से बचने के लिए खूब सारे तरल पदार्थ पिएं, जैसे कि पानी, जूस या शोरबा।
- दर्द निवारक: बुखार और दर्द से राहत के लिए एसिटामिनोफेन या इबुप्रोफेन जैसी ओवर-द-काउंटर दर्द निवारक दवाओं का उपयोग किया जा सकता है।
- सूजन कम करने के लिए सेक: सूजन को कम करने के लिए गालों पर गर्म या ठंडी सेक लगाई जा सकती है।
- मुलायम आहार: चबाने में आसानी के लिए नरम खाद्य पदार्थों का सेवन करें, जैसे कि सूप, दही या मसले हुए आलू।
- अलगाव: कण्ठमाला एक संक्रामक बीमारी है, इसलिए इसे फैलने से रोकने के लिए संक्रमित व्यक्ति को कुछ दिनों के लिए दूसरों से दूर रहना चाहिए।
जटिलताओं का इलाज: यदि कण्ठमाला के कारण कोई जटिलता होती है, तो डॉक्टर उसका अलग से इलाज करेंगे। उदाहरण के लिए, यदि वृषणशोथ (अंडकोष की सूजन) होता है, तो डॉक्टर दर्द और सूजन को कम करने के लिए दवाएं लिख सकते हैं।
कण्ठमाला से बचाव: कण्ठमाला से बचाव का सबसे अच्छा तरीका है एमएमआर टीका लगवाना। यह टीका खसरा, कण्ठमाला और रूबेला से बचाता है।
यदि आपको कण्ठमाला के लक्षण हैं, तो डॉक्टर से सलाह लें। वे आपको उचित उपचार और देखभाल के बारे में सलाह दे पाएंगे।
कण्ठमाला रोग का फिजियोथेरेपी उपचार क्या है?
कण्ठमाला रोग एक वायरल संक्रमण है जिसका कोई विशिष्ट फिजियोथेरेपी उपचार नहीं है क्योंकि यह एक स्व-सीमित बीमारी है जो आमतौर पर कुछ हफ्तों में अपने आप ठीक हो जाती है। कण्ठमाला के प्रबंधन का मुख्य ध्यान लक्षणों को कम करने और जटिलताओं को रोकने पर होता है।
हालांकि, फिजियोथेरेपी की भूमिका अप्रत्यक्ष रूप से कुछ संबंधित लक्षणों और जटिलताओं के प्रबंधन में हो सकती है, खासकर यदि वे बने रहते हैं। कण्ठमाला के संदर्भ में फिजियोथेरेपी उपचार में शामिल हो सकते हैं:
- दर्द प्रबंधन:
- कोल्ड या हॉट पैक: सूजी हुई लार ग्रंथियों या अंडकोष (ऑर्काइटिस) में दर्द और सूजन को कम करने के लिए कोल्ड या हॉट पैक का उपयोग करने की सलाह दी जा सकती है। फिजियोथेरेपिस्ट यह बता सकता है कि कौन सा अधिक उपयुक्त है और इसे कितनी देर तक और कितनी बार लगाना है।
- कोमल व्यायाम: एक बार तीव्र सूजन कम हो जाने के बाद, गर्दन और जबड़े की कोमल गति अभ्यास मांसपेशियों की जकड़न को कम करने और सामान्य गति को बहाल करने में मदद कर सकती है। फिजियोथेरेपिस्ट उचित व्यायाम सिखा सकता है।
- ऑर्काइटिस (अंडकोष की सूजन):
- एलिवेशन: अंडकोष को सहारा देने और सूजन को कम करने के लिए एलिवेशन तकनीकों की सलाह दी जा सकती है।
- सहायक वस्त्र: दर्द और बेचैनी को कम करने के लिए सहायक अंडरवियर पहनने की सलाह दी जा सकती है।
- जोड़ों का दर्द (गठिया):
- यदि कण्ठमाला के कारण जोड़ों में दर्द और सूजन होती है, तो फिजियोथेरेपिस्ट कोमल गति अभ्यास, स्ट्रेचिंग और दर्द कम करने वाली तकनीकों (जैसे कि कोल्ड या हॉट थेरेपी) का उपयोग करके लक्षणों को प्रबंधित करने में मदद कर सकता है।
- थकान प्रबंधन:
- कण्ठमाला के बाद कुछ लोगों को लंबे समय तक थकान महसूस हो सकती है। फिजियोथेरेपिस्ट धीरे-धीरे गतिविधि स्तर बढ़ाने के लिए मार्गदर्शन और एक व्यक्तिगत व्यायाम कार्यक्रम विकसित करने में मदद कर सकता है।
कण्ठमाला रोग का घरेलू इलाज क्या है?
कण्ठमाला रोग एक वायरल संक्रमण है जिसका कोई विशिष्ट घरेलू इलाज नहीं है जो वायरस को मार सके। घरेलू उपचार का मुख्य उद्देश्य लक्षणों को कम करना और आराम प्रदान करना है ताकि शरीर स्वयं संक्रमण से लड़ सके।
कण्ठमाला के लक्षणों को प्रबंधित करने के लिए कुछ घरेलू उपाय इस प्रकार हैं:
- आराम करें: पर्याप्त आराम करना शरीर को संक्रमण से लड़ने में मदद करता है। जब तक सूजन कम न हो जाए और बुखार न उतर जाए, तब तक घर पर ही रहें और ज़ोरदार गतिविधियों से बचें।
- तरल पदार्थ खूब पिएं: निर्जलीकरण से बचने के लिए पानी, जूस, शोरबा या हर्बल चाय जैसे तरल पदार्थ खूब पिएं। खट्टे फलों के जूस से बचें क्योंकि वे सूजी हुई लार ग्रंथियों को परेशान कर सकते हैं।
- नरम आहार लें: चबाने और निगलने में आसानी के लिए नरम खाद्य पदार्थ जैसे सूप, दही, मसले हुए आलू और उबली हुई सब्जियां खाएं। ऐसे खाद्य पदार्थों से बचें जिन्हें चबाने में कठिनाई हो या जो लार ग्रंथियों को उत्तेजित करें (जैसे खट्टे फल)।
- दर्द और बुखार के लिए:
- कोल्ड या हॉट पैक: सूजी हुई लार ग्रंथियों पर दर्द और सूजन को कम करने के लिए कोल्ड या हॉट पैक लगाएं। आप बारी-बारी से दोनों का उपयोग कर सकते हैं और देख सकते हैं कि किससे अधिक आराम मिलता है।
- ओवर-द-काउंटर दर्द निवारक: एसिटामिनोफेन (पैरासिटामोल) या इबुप्रोफेन जैसे ओवर-द-काउंटर दर्द निवारक बुखार और दर्द को कम करने में मदद कर सकते हैं। बच्चों को एस्पिरिन न दें क्योंकि इससे रेये सिंड्रोम नामक एक गंभीर स्थिति हो सकती है। हमेशा दवा की सही खुराक के लिए लेबल पढ़ें।
- गरारे करें: गुनगुने नमक के पानी से गरारे करने से गले की खराश और बेचैनी कम हो सकती है।
- अच्छी स्वच्छता बनाए रखें: दूसरों में संक्रमण फैलने से रोकने के लिए नियमित रूप से हाथ धोएं और खांसते या छींकते समय अपना मुंह और नाक ढकें।
- ऑर्काइटिस (अंडकोष की सूजन) के लिए: यदि अंडकोष में सूजन और दर्द हो तो सहारा देने वाले अंडरवियर पहनें और आराम करें। आप दर्द कम करने के लिए कोल्ड पैक लगा सकते हैं।
कब डॉक्टर से सलाह लें:
हालांकि कण्ठमाला आमतौर पर एक हल्की बीमारी है, लेकिन जटिलताएं हो सकती हैं। यदि आपको या आपके बच्चे में निम्नलिखित लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लें:
- तेज बुखार
- तेज सिरदर्द
- गर्दन में अकड़न
- उल्टी
- पेट दर्द
- दौरे पड़ना
- सुनने में परेशानी
- अंडकोष में तेज दर्द और सूजन
- सांस लेने में कठिनाई
कण्ठमाला रोग में क्या खाएं और क्या न खाएं?
कण्ठमाला रोग में, चबाने और निगलने में कठिनाई हो सकती है, खासकर जब लार ग्रंथियों में सूजन हो। इसलिए, ऐसे खाद्य पदार्थों का चयन करना महत्वपूर्ण है जो नरम हों और जिन्हें चबाने में आसानी हो। कुछ खाद्य पदार्थों से बचना भी महत्वपूर्ण है जो लार ग्रंथियों को उत्तेजित कर सकते हैं और दर्द को बढ़ा सकते हैं।
क्या खाएं:
- नरम और आसानी से निगलने वाले खाद्य पदार्थ:
- तरल पदार्थ: पानी, पतला शोरबा, नारियल पानी, हर्बल चाय (बिना खट्टे फलों के), पतला जूस (जैसे सेब या अंगूर का)। निर्जलीकरण से बचने के लिए खूब सारे तरल पदार्थ पिएं।
- नरम फल: मसले हुए केले, पका हुआ नाशपाती, खरबूजा (छोटे टुकड़ों में)।
- नरम सब्जियां: अच्छी तरह से उबली हुई और मसली हुई सब्जियां (जैसे आलू, गाजर, शकरकंद)।
- दही और पुडिंग: सादा दही या नरम पुडिंग (खट्टे स्वाद वाले नहीं)।
- अनाज: अच्छी तरह से पकाया हुआ दलिया, सूजी, खिचड़ी, नरम चावल।
- सूप: पतला सूप (क्रीम-आधारित या शोरबा-आधारित)।
- अंडे: उबले हुए या हल्के तले हुए अंडे।
- मसला हुआ टोफू या पनीर: नरम बनावट वाले।
- ठंडे खाद्य पदार्थ: ठंडे खाद्य पदार्थ और पेय सूजी हुई ग्रंथियों को शांत करने में मदद कर सकते हैं। जैसे ठंडा दही, आइसक्रीम (खट्टे स्वाद वाले नहीं)।
क्या न खाएं:
- खट्टे फल और जूस: संतरा, नींबू, अंगूर, अनानास और उनके जूस लार ग्रंथियों को उत्तेजित कर सकते हैं और दर्द बढ़ा सकते हैं।
- कठोर और चबाने में मुश्किल खाद्य पदार्थ: कच्ची सब्जियां, कठोर फल, सूखे मेवे, चिप्स, कैंडी, च्यूइंग गम। इन्हें चबाने में अधिक प्रयास लगता है और यह दर्दनाक हो सकता है।
- मसालेदार भोजन: मसालेदार भोजन लार के उत्पादन को बढ़ा सकता है और सूजन वाली ग्रंथियों को परेशान कर सकता है।
- अम्लीय भोजन: टमाटर-आधारित खाद्य पदार्थ और सिरका जैसे अम्लीय खाद्य पदार्थ भी लार ग्रंथियों को परेशान कर सकते हैं।
- प्रसंस्कृत और जंक फूड: ये खाद्य पदार्थ आमतौर पर पौष्टिक नहीं होते हैं और प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर कर सकते हैं।
- शराब और कैफीन: ये निर्जलीकरण कर सकते हैं और बीमारी के लक्षणों को बढ़ा सकते हैं।
कुछ अतिरिक्त सुझाव:
- छोटे और बार-बार भोजन करें ताकि चबाने और निगलने में आसानी हो।
- भोजन को अच्छी तरह से पकाएं ताकि वह नरम हो जाए।
- भोजन को छोटे टुकड़ों में काट लें।
- अगर निगलने में बहुत दर्द हो रहा है, तो तरल आहार पर ध्यान केंद्रित करें।
कण्ठमाला के जोखिम को कैसे कम करें?
कण्ठमाला एक संक्रामक रोग है जिससे बचाव के लिए टीकाकरण सबसे प्रभावी तरीका है। इसके अतिरिक्त, कुछ सावधानियां बरतकर भी कण्ठमाला के खतरे को कम किया जा सकता है।
कण्ठमाला के खतरे को कम करने के उपाय:
- टीकाकरण: कण्ठमाला से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है एमएमआर टीका लगवाना। यह टीका खसरा, कण्ठमाला और रूबेला से बचाता है। बच्चों को एमएमआर टीके की दो खुराकें लगवानी चाहिए। पहली खुराक 12 से 15 महीने की उम्र में और दूसरी खुराक 4 से 6 साल की उम्र में लगवानी चाहिए। जिन वयस्कों को कण्ठमाला नहीं हुआ है या जिन्होंने टीका नहीं लगवाया है, उन्हें भी टीका लगवाना चाहिए।
- अच्छी स्वच्छता: कण्ठमाला के प्रसार को रोकने के लिए अच्छी स्वच्छता का अभ्यास करना महत्वपूर्ण है। बार-बार हाथ धोएं, खासकर खाने से पहले और बाद में, और खांसते या छींकते समय अपना मुंह और नाक ढकें।
- संक्रमित व्यक्तियों से दूर रहें: यदि कोई व्यक्ति कण्ठमाला से संक्रमित है, तो उससे दूर रहें। कण्ठमाला एक संक्रामक रोग है जो आसानी से फैल सकता है।
- अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत रखें: एक स्वस्थ जीवन शैली बनाए रखें, जिसमें पर्याप्त नींद, स्वस्थ भोजन और नियमित व्यायाम शामिल हैं। एक मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली आपको संक्रमणों से लड़ने में मदद कर सकती है।
इन उपायों का पालन करके आप कण्ठमाला के खतरे को कम कर सकते हैं।
यदि आपको कण्ठमाला के लक्षण दिखाई देते हैं, तो डॉक्टर से सलाह लें। कण्ठमाला का कोई विशिष्ट इलाज नहीं है, लेकिन डॉक्टर लक्षणों से राहत के लिए दवाएं लिख सकते हैं।
सारांश
कण्ठमाला एक संक्रामक वायरल बीमारी है जो लार ग्रंथियों को प्रभावित करती है। यह आमतौर पर एक हल्की बीमारी है, लेकिन यह गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकती है। कण्ठमाला को रोकने का सबसे अच्छा तरीका एमएमआर का टीका लगवाना है।
