साइटिका (Sciatica) के दर्द से राहत के लिए नर्व ग्लाइडिंग (Nerve Gliding) एक्सरसाइज
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साइटिका (Sciatica) के दर्द से राहत के लिए नर्व ग्लाइडिंग (Nerve Gliding) एक्सरसाइज

साइटिका (Sciatica) के दर्द से राहत के लिए नर्व ग्लाइडिंग (Nerve Gliding) एक्सरसाइज: तंत्रिका तनाव कम करने की विधि 🦵🧠

साइटिका (Sciatica), जिसे आम भाषा में गृध्रसी भी कहा जाता है, एक ऐसी स्थिति है जिसमें कमर के निचले हिस्से से शुरू होकर नितंब (Buttocks) से होते हुए पैर के पिछले हिस्से तक गंभीर दर्द, सुन्नता (Numbness), या झुनझुनी (Tingling) महसूस होती है।

यह दर्द तब होता है जब शरीर की सबसे बड़ी तंत्रिका, साइटिक तंत्रिका (Sciatic Nerve), पर दबाव पड़ता है या उसमें जलन होती है। यह दबाव अक्सर स्लिप डिस्क (Herniated Disc) या पिरिफॉर्मिस सिंड्रोम (Piriformis Syndrome) के कारण होता है।

साइटिका के पारंपरिक उपचार में दवाएं और आराम शामिल हैं, लेकिन आधुनिक फिजियोथेरेपी में, नर्व ग्लाइडिंग (Nerve Gliding) या नर्व मोबिलाइजेशन (Nerve Mobilization) एक्सरसाइज को तंत्रिका दर्द से राहत पाने के लिए एक अत्यंत प्रभावी और सक्रिय दृष्टिकोण माना जाता है। ये अभ्यास तंत्रिका को उसके मार्ग (Path) के साथ “फिसलने” (Gliding) या “खिसकने” में मदद करते हैं, जिससे तंत्रिका के आस-पास की अकड़न और ऊतकों का दबाव कम होता है।

यह लेख साइटिका के दर्द से राहत के लिए नर्व ग्लाइडिंग एक्सरसाइज के सिद्धांत, सबसे प्रभावी अभ्यास और इन तकनीकों को सुरक्षित रूप से करने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान करता है।

१. नर्व ग्लाइडिंग का सिद्धांत (The Principle of Nerve Gliding)

तंत्रिकाएं, हमारी नसों, मांसपेशियों और जोड़ों की तरह, गतिमान (Mobile) होनी चाहिए। जब हम अपने अंगों को हिलाते हैं, तो तंत्रिकाएं भी खिंचती और फिसलती हैं।

  • समस्या: साइटिका में, सूजन, डिस्क के उभार (Disc Bulge), या आस-पास के स्नायुओं के तनाव के कारण साइटिक तंत्रिका अपने मार्ग में फंस (Tethered) जाती है या बहुत संवेदनशील (Hypersensitive) हो जाती है। जब पैर चलता है, तो तंत्रिका फिसलने के बजाय खींची जाती है, जिससे तेज दर्द होता है।
  • समाधान: नर्व ग्लाइडिंग एक्सरसाइज का उद्देश्य तंत्रिका को खींचने के बजाय, उसे धीरे-धीरे उसके चैनल के भीतर “फिसलने” (Slide) में मदद करना है। यह तंत्रिका पर यांत्रिक तनाव (Mechanical Tension) को कम करता है, रक्त परिसंचरण (Blood Circulation) में सुधार करता है, और तंत्रिका की संवेदनशीलता को शांत (Desensitize) करता है।

२. साइटिका के लिए सबसे प्रभावी नर्व ग्लाइडिंग एक्सरसाइज

ये अभ्यास विशेष रूप से साइटिक तंत्रिका को गति प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।

क. साइटिक नर्व ग्लाइड (Sciatic Nerve Glide/Flossing) – “स्लम टेस्ट मॉडिफिकेशन”

यह सबसे सामान्य और महत्वपूर्ण नर्व ग्लाइडिंग अभ्यास है।

  1. प्रारंभिक मुद्रा: एक कुर्सी के किनारे पर बैठें। अपनी रीढ़ को सीधा रखें और थोड़ा आगे झुकें।
  2. मांगना: जिस पैर में दर्द हो, उस घुटने को धीरे-धीरे सीधा करें (फर्श से ऊपर उठाएँ)।
  3. टखने की गति: जैसे ही आप घुटना सीधा करते हैं, अपने टखने (Ankle) को ऊपर की ओर मोड़ें (पैर की उंगलियों को अपनी ओर खींचें – डॉर्सीफ्लेक्सन)।
  4. सिर की गति: इसी समय, अपने सिर को धीरे-धीरे पीछे की ओर झुकाएँ (छत की ओर देखें)।
  5. विपरीत गति (दबाव कम करना): अब, घुटने को थोड़ा मोड़ें, टखने को नीचे की ओर करें (पैर की उंगलियों को दूर धकेलें – प्लांटरफ्लेक्सन), और सिर को आगे की ओर झुकाएँ।
  6. ग्लाइडिंग: यह क्रिया एक धीमी, लयबद्ध (Rhythmic) गति में करें—एक क्रिया में तंत्रिका को खिसकाएँ (Glide) और दूसरी क्रिया में रिलीज़ (Release) करें।
  • पुनरावृत्ति: इसे १० से १५ बार दोहराएँ।
  • उद्देश्य: जब घुटने को सीधा किया जाता है और टखने को मोड़ा जाता है, तो साइटिक तंत्रिका पर तनाव आता है। सिर को पीछे झुकाकर उस तनाव को गर्दन की ओर स्थानांतरित किया जाता है, जिससे कमर में खिंचाव कम होता है—यही “ग्लाइडिंग” है।

ख. सिटिंग नी एक्सटेंशन (Sitting Knee Extension) – “पैर उठाना”

यह एक सरल और नियंत्रित ग्लाइडिंग अभ्यास है।

  1. प्रारंभिक मुद्रा: एक कुर्सी पर सीधे बैठें।
  2. क्रिया: दर्द वाले पैर के घुटने को धीरे-धीरे सीधा करें (जितना हो सके)। टखने को तटस्थ (Neutral) रखें (न मोड़ें)।
  3. रोकना: जब आपको खिंचाव या तनाव महसूस हो, तो २-३ सेकंड तक रोकें।
  4. वापस आना: धीरे-धीरे घुटने को वापस नीचे ले आएँ।
    • पुनरावृत्ति: इसे ८ से १० बार दोहराएँ।
    • टिप: यदि यह अभ्यास दर्द को बढ़ाता है, तो गति की सीमा को कम करें या इसे केवल आधा ही करें।

ग. पीठ के बल लेटकर नर्व ग्लाइड (Supine Nerve Glide)

जब बैठना असहज हो तब यह प्रभावी है।

  1. प्रारंभिक मुद्रा: पीठ के बल लेटें। दर्द वाले घुटने को मोड़कर दोनों हाथों से पकड़ें (जैसे नी-टू-चेस्ट स्ट्रेच)।
  2. क्रिया: अब, घुटने को मोड़कर रखते हुए, पैर को सीधा करने की कोशिश करें (छत की ओर)।
  3. टखने की भूमिका: जब पैर सीधा हो, तो टखने को अपनी ओर खींचें (डॉर्सीफ्लेक्सन) ताकि तंत्रिका पर अधिकतम खिंचाव महसूस हो।
  4. ग्लाइडिंग: पैर को सीधा करते समय टखने को खींचें, और पैर को मोड़ते समय टखने को ढीला छोड़ें।
    • पुनरावृत्ति: इसे ८ से १२ बार दोहराएँ।

३. सुरक्षित नर्व ग्लाइडिंग के लिए मार्गदर्शन

नर्व ग्लाइडिंग एक शक्तिशाली हस्तक्षेप है, और इसे सुरक्षित रूप से करना महत्वपूर्ण है:

  • ‘ग्लाइड’ करें, ‘स्ट्रेच’ नहीं: इन अभ्यासों का लक्ष्य तंत्रिका को खींचना (स्ट्रेच करना) नहीं है, बल्कि उसे फिसलने देना है। स्ट्रेच करने से जलन बढ़ सकती है।
  • कोई तीव्र दर्द नहीं: अभ्यास के दौरान तीव्र (Sharp) या जलने वाला (Burning) दर्द नहीं होना चाहिए। हल्का खिंचाव या तनाव सामान्य है, लेकिन यदि दर्द बढ़ता है या पैर में और नीचे तक फैलता है (पेरिफेरलाइज़ेशन), तो आपको उस अभ्यास की सीमा (Range) को कम करना चाहिए या रुक जाना चाहिए।
  • धीमा और नियंत्रित: सभी गतियाँ धीमी और नियंत्रित होनी चाहिए। झटके (Jerky Movements) से बचें।
  • नियमितता: प्रभावी होने के लिए नर्व ग्लाइडिंग को नियमित रूप से (दिन में २-३ बार) किया जाना चाहिए।

४. अन्य फिजियोथेरेपी हस्तक्षेप

नर्व ग्लाइडिंग के अलावा, साइटिका के प्रबंधन के लिए फिजियोथेरेपिस्ट अन्य उपचार भी शामिल कर सकते हैं:

  • मैकेंजी व्यायाम (McKenzie Exercises): डिस्क के दबाव को कम करने के लिए विस्तार (Extension) अभ्यास।
  • कोर मजबूती (Core Strengthening): पेट और पीठ के गहरे स्नायुओं को मजबूत करना ताकि रीढ़ को बेहतर सहारा मिले।
  • पिरिफॉर्मिस स्ट्रेचिंग: यदि सिंड्रोम का कारण पिरिफॉर्मिस मांसपेशी का कसाव है, तो उसे आराम देने के लिए स्ट्रेचिंग।

निष्कर्ष

साइटिका के दर्द से राहत के लिए नर्व ग्लाइडिंग एक्सरसाइज एक वैज्ञानिक और प्रभावी तरीका है जो तंत्रिका की गतिशीलता को बहाल करके और उसकी संवेदनशीलता को कम करके काम करता है। ये सक्रिय अभ्यास मरीज़ों को अपने दर्द प्रबंधन में नियंत्रण देते हैं और उन्हें निष्क्रिय आराम से बाहर आने में मदद करते हैं। साइटिका से जुड़ी पुरानी समस्याओं को दूर करने के लिए, इन अभ्यासों को शुरू करने से पहले एक योग्य फिजियोथेरेपिस्ट से सटीक निदान और व्यक्तिगत मार्गदर्शन प्राप्त करना आवश्यक है।

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