स्ट्रोक (Stroke) के बाद फिजियोथेरेपी: गतिशीलता वापस पाना
स्ट्रोक (Stroke) के बाद फिजियोथेरेपी: गतिशीलता वापस पाना
स्ट्रोक, जिसे आमतौर पर ब्रेन अटैक भी कहा जाता है, एक गंभीर चिकित्सा आपातकाल है जो तब होता है जब मस्तिष्क के एक हिस्से में रक्त की आपूर्ति बाधित हो जाती है (इस्केमिक स्ट्रोक) या जब मस्तिष्क में रक्तस्राव (हेमोरेजिक स्ट्रोक) होता है।
इसके परिणामस्वरूप, मस्तिष्क की कोशिकाएं ऑक्सीजन की कमी के कारण मरने लगती हैं, जिससे शरीर के कार्यों, जैसे गति, भाषण और अनुभूति (cognition) पर गंभीर प्रभाव पड़ता है।
स्ट्रोक से प्रभावित लगभग 80% लोगों को किसी न किसी तरह की शारीरिक अक्षमता (physical disability) का सामना करना पड़ता है। हालांकि, अच्छी खबर यह है कि मस्तिष्क में न्यूरोप्लास्टिसिटी (Neuroplasticity) नामक अद्भुत क्षमता होती है, जिसके तहत मस्तिष्क क्षति के बाद खुद को पुनर्गठित कर सकता है और खोए हुए कार्यों को फिर से सीख सकता है। इस प्रक्रिया में फिजियोथेरेपी (Physiotherapy) या भौतिक चिकित्सा की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है।
स्ट्रोक के बाद फिजियोथेरेपी, गतिशीलता (mobility) को वापस पाने और रोगी को एक स्वतंत्र जीवन जीने के लिए सशक्त बनाने की कुंजी है।
फिजियोथेरेपी क्यों आवश्यक है?
स्ट्रोक के बाद फिजियोथेरेपी का उद्देश्य रोगी की शारीरिक क्षमता को अधिकतम करना है। इसके मुख्य लक्ष्य निम्नलिखित हैं:
- मांसपेशियों की शक्ति में सुधार: लकवाग्रस्त या कमजोर अंगों में शक्ति और सहनशक्ति को बहाल करना।
- संतुलन और समन्वय: खड़े होने, चलने और दैनिक कार्यों को करने के लिए संतुलन और समन्वय (coordination) में सुधार करना।
- गति की सीमा (Range of Motion): मांसपेशियों की जकड़न (spasticity) और संकुचन (contractures) को रोकना।
- दैनिक जीवन के कार्यों (ADLs) में स्वतंत्रता: जैसे कपड़े पहनना, नहाना और खाना खाने में आत्मनिर्भर बनना।
- गिरने के जोखिम को कम करना: चलने के पैटर्न (gait) में सुधार करके आत्मविश्वास बढ़ाना और गिरने से रोकना।
फिजियोथेरेपी के तीन चरण (Phases of Physiotherapy)
स्ट्रोक के बाद फिजियोथेरेपी एक लंबी प्रक्रिया है जिसे तीन मुख्य चरणों में विभाजित किया जा सकता है:
1. तीव्र चरण (Acute Phase)
(अस्पताल में भर्ती के दौरान)
फिजियोथेरेपी सर्जरी के कुछ घंटों बाद या जितनी जल्दी हो सके, अस्पताल में ही शुरू हो जाती है।
- बिस्तर पर व्यायाम (Bed Exercises): निष्क्रिय रेंज ऑफ मोशन (Passive ROM) व्यायाम, जहां फिजियोथेरेपिस्ट प्रभावित अंगों को धीरे-धीरे हिलाता है, ताकि जोड़ों में अकड़न न आए।
- स्थिति बदलना (Positioning): प्रभावित अंगों को सही स्थिति में रखना ताकि सूजन कम हो और दबाव के घावों (pressure sores) से बचा जा सके।
- शुरुआती बैठना/खड़ा होना: फिजियोथेरेपिस्ट की देखरेख में धीरे-धीरे बिस्तर के किनारे बैठना (sitting balance) और पहले 24-48 घंटों के भीतर कुछ मिनटों के लिए खड़ा होना (यदि संभव हो तो)।
- टखने के व्यायाम: रक्त के थक्के (blood clots) बनने से रोकने के लिए टखने के पंप्स (ankle pumps) जैसे सरल व्यायाम करना।
2. पुनर्वास चरण (Rehabilitation Phase)
(अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद)
यह चरण सबसे महत्वपूर्ण है, जहां गहन और केंद्रित थेरेपी दी जाती है।
- गतिशीलता प्रशिक्षण (Mobility Training):
- चलने का अभ्यास: वॉकर, छड़ी या टखने के ब्रेस (AFO) की सहायता से चलने का अभ्यास करना। फिजियोथेरेपिस्ट अक्सर ट्रेडमिल ट्रेनिंग का उपयोग करते हैं।
- भार सहन करना (Weight Bearing): प्रभावित पैर पर धीरे-धीरे शरीर का भार डालना सीखना।
- संतुलन प्रशिक्षण (Balance Training): सीधे खड़े होने, एक पैर पर खड़े होने और गतिशील संतुलन (Dynamic Balance) बनाए रखने का अभ्यास करना।
- क्रियात्मक विद्युत उत्तेजना (Functional Electrical Stimulation – FES): कमजोर मांसपेशियों को सक्रिय करने और उन्हें काम करने का ‘याद’ दिलाने के लिए हल्की विद्युत धारा का उपयोग करना।
- कठोरता प्रबंधन (Spasticity Management): स्ट्रेचिंग, पोजिशनिंग और कभी-कभी बोटॉक्स इंजेक्शन के साथ मिलकर फिजियोथेरेपी से मांसपेशियों की अत्यधिक जकड़न को कम करना।
- मिरर थेरेपी (Mirror Therapy): यह तकनीक मस्तिष्क के मोटर कॉर्टेक्स को सक्रिय करने में मदद करती है, खासकर हाथ और बांह की कार्यक्षमता के लिए।
3. सामुदायिक और दीर्घकालिक चरण (Community & Long-Term Phase)
(घर लौटने के बाद)
यह चरण जीवन भर चलता है और इसका उद्देश्य स्वतंत्रता और सामाजिक भागीदारी बनाए रखना है।
- घर पर व्यायाम कार्यक्रम: फिजियोथेरेपिस्ट द्वारा सुझाए गए नियमित व्यायाम (जैसे बैंड के साथ ताकत वाले व्यायाम, स्ट्रेचिंग) को प्रतिदिन करना।
- समुदाय में चलना: पार्क या बाजार जैसी विभिन्न सतहों पर चलने का अभ्यास करना।
- समूह चिकित्सा: योग, ताई ची या विशेष रूप से स्ट्रोक के लिए डिज़ाइन किए गए व्यायाम समूहों में शामिल होना।
- जीवनशैली में बदलाव: स्वस्थ आहार, वजन नियंत्रण और धूम्रपान से परहेज करना।
न्यूरोप्लास्टिसिटी का महत्व
स्ट्रोक पुनर्वास में, फिजियोथेरेपी सीधे न्यूरोप्लास्टिसिटी को बढ़ावा देती है। यह निरंतर, दोहराव वाला और विशिष्ट अभ्यास मस्तिष्क को नए तंत्रिका मार्ग (neural pathways) बनाने या अप्रभावित क्षेत्रों को क्षतिग्रस्त क्षेत्रों के कार्यों को संभालने के लिए प्रशिक्षित करने में मदद करता है।
- दोहराव (Repetition): किसी भी गतिविधि को बार-बार करने से मस्तिष्क उस गतिविधि को कोड कर लेता है।
- तीव्रता (Intensity): उच्च तीव्रता वाला प्रशिक्षण अधिक प्रभावी न्यूरोप्लास्टिक परिवर्तन करता है।
- कार्य-विशिष्ट प्रशिक्षण (Task Specificity): वास्तविक कार्यों (जैसे कप उठाना) का अभ्यास करने से मस्तिष्क उस कार्य को बेहतर ढंग से सीखता है।
स्ट्रोक के बाद फिजियोथेरेपी की सफलता में महत्वपूर्ण कारक
- समय: जितनी जल्दी फिजियोथेरेपी शुरू होती है, रिकवरी की संभावना उतनी ही बेहतर होती है।
- रोगी की प्रेरणा: ठीक होने की इच्छाशक्ति और व्यायाम कार्यक्रम के प्रति समर्पण।
- देखभाल करने वालों का सहयोग: परिवार और देखभाल करने वालों का भावनात्मक और शारीरिक समर्थन।
- लगातार अभ्यास: क्लिनिक के बाहर घर पर नियमित अभ्यास करना।
निष्कर्ष
स्ट्रोक के बाद गतिशीलता वापस पाना एक चुनौतीपूर्ण लेकिन प्राप्त करने योग्य लक्ष्य है। न्यूरोलॉजिकल फिजियोथेरेपी वह पुल है जो स्ट्रोक से हुई क्षति और पूर्ण स्वतंत्रता के बीच काम करता है। यह केवल मांसपेशियों को मजबूत करने के बारे में नहीं है, बल्कि मस्तिष्क को फिर से प्रशिक्षित करने, संतुलन वापस पाने और दैनिक जीवन में आत्मविश्वास के साथ लौटने के बारे में है।
