सैक्रोइलिएक (SI) जॉइंट पेन के लिए 9 फिजियोथेरेपी व्यायाम
कमर दर्द की शिकायतों में सैक्रोइलिएक (SI) जॉइंट पेन एक बहुत ही सामान्य लेकिन अक्सर नजरअंदाज की जाने वाली समस्या है। कई बार लोग इसे “स्लिप डिस्क” या “साइटिका” समझ लेते हैं, जबकि असल समस्या उनके पेल्विस (Pelvis) यानी कूल्हे के जोड़ में होती है। यदि आप बैठने, करवट लेने या सीढ़ियां चढ़ने में कूल्हे के पिछले हिस्से में तीखा दर्द महसूस करते हैं, तो यह SI जॉइंट डिसफंक्शन (SI Joint Dysfunction) हो सकता है।
यह वीडियो और लेख आपको सैक्रोइलिएक (SI) जॉइंट पेन के लिए 9 बेहतरीन फिजियोथेरेपी व्यायाम के माध्यम से मार्गदर्शन करेगा जो विशेष रूप से SI जॉइंट की सूजन को कम करने, पेल्विक स्थिरता (Stability) में सुधार करने और पीठ के निचले हिस्से की बेचैनी को दूर करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं।
सैक्रोइलिएक (SI) जॉइंट दर्द क्यों होता है?
सैक्रोइलिएक जोड़ आपकी रीढ़ की हड्डी के निचले हिस्से (Sacrum) को आपके कूल्हे की हड्डियों (Ilium) से जोड़ता है। इसका मुख्य काम आपके शरीर के ऊपरी हिस्से के वजन को पैरों तक पहुंचाना और झटकों को सोखना (Shock absorption) है।
दर्द तब होता है जब:
- हाइपरमोबिलिटी (Hypermobility): जोड़ बहुत ढीला हो जाता है (अक्सर गर्भावस्था या चोट के बाद)।
- हाइपोमोबिलिटी (Hypomobility): जोड़ बहुत सख्त या जाम हो जाता है।
- मांसपेशियों का असंतुलन: जब ग्लूट्स और कोर की मांसपेशियां कमजोर होती हैं।
नीचे दिए गए व्यायामों को दो भागों में बांटा गया है: पहले स्ट्रेचिंग (मांसपेशियों को ढीला करने के लिए) और फिर स्ट्रेंथनिंग (जोड़ को स्थिर करने के लिए)।
सैक्रोइलिएक (SI) जॉइंट पेन के लिए 9 बेहतरीन फिजियोथेरेपी व्यायाम Video
सैक्रोइलिएक (SI) जॉइंट पेन के लिए 9 फिजियोथेरेपी व्यायाम
भाग 1: जेंटल स्ट्रेच (Gentle Stretches) – जकड़न और दर्द कम करने के लिए
दर्द से राहत पाने का पहला कदम उन मांसपेशियों को रिलैक्स करना है जो SI जॉइंट पर अनावश्यक तनाव डाल रही हैं। ये स्ट्रेच बहुत ही सौम्य हैं और इन्हें आप दर्द की शुरुआत में भी कर सकते हैं।
1. नी-टू-चेस्ट स्ट्रेच (Knee to Chest Stretch)
यह सबसे बुनियादी और सुरक्षित स्ट्रेच है जो पीठ के निचले हिस्से और हिप्स की जकड़न को कम करता है।
कैसे करें (How to do):
- पीठ के बल जमीन या मैट पर सीधे लेट जाएं।
- अपने एक घुटने (जिस तरफ दर्द है या दोनों) को मोड़ें और अपने दोनों हाथों से पकड़ें।
- धीरे-धीरे घुटने को अपनी छाती (Chest) की ओर खींचें।
- ध्यान रहे कि दूसरा पैर जमीन पर बिल्कुल सीधा रहे।
- इस स्थिति में 20-30 सेकंड तक रुकें और पीठ के निचले हिस्से में हल्का खिंचाव महसूस करें।
- धीरे से पैर वापस रखें और दूसरे पैर से दोहराएं।
- फ्रीक्वेंसी: दोनों पैरों से 3-3 बार करें।

2. पिरिफॉर्मिस स्ट्रेच (Piriformis Stretch)
कैसे करें (How to do):
- पीठ के बल लेटें और दोनों घुटनों को मोड़ लें।
- अब अपने प्रभावित पैर (Painful side) के टखने (Ankle) को दूसरे घुटने के ऊपर रखें (जैसे अंक ‘4’ बनता है)।
- अपने दोनों हाथों से नीचे वाली जांघ (Thigh) को पकड़ें और धीरे-धीरे अपनी छाती की ओर खींचें।
- आपको कूल्हे (Buttock) के गहरे हिस्से में खिंचाव महसूस होगा।
- 30 सेकंड होल्ड करें।
- नोट: अगर दर्द ज्यादा हो, तो ज्यादा जोर न लगाएं।

3. चाइल्ड पोज (Child Pose / Balasana)
यह एक योग मुद्रा है जो रीढ़ की हड्डी को लंबा (Elongate) करती है और SI जॉइंट से दबाव हटाती है। यह विश्राम के लिए बेहतरीन है।
कैसे करें (How to do):
- जमीन पर घुटनों के बल बैठ जाएं (वज्रासन की स्थिति में)।
- अपने दोनों घुटनों को थोड़ा चौड़ा करें ताकि धड़ उनके बीच आ सके।
- सांस छोड़ते हुए आगे की ओर झुकें और अपने हाथों को सामने जमीन पर फैला दें।
- अपने माथे को जमीन पर टिकाने की कोशिश करें।
- इस स्थिति में 30-60 सेकंड तक रहें और गहरी सांसें लें।
- यह आपकी पूरी पीठ को रिलैक्स कर देगा।

4. कैट-काउ स्ट्रेच (Cat-Cow Stretch)
यह व्यायाम पेल्विस और रीढ़ की हड्डी की गतिशीलता (Mobility) बढ़ाने के लिए किया जाता है। यह SI जॉइंट को “लॉक” होने से रोकता है।
कैसे करें (How to do):
- चौपाया स्थिति (हाथों और घुटनों के बल) में आ जाएं। कलाइयां कंधों के नीचे और घुटने कूल्हों के नीचे रखें।
- काउ पोज (Cow): सांस अंदर लें, पेट को जमीन की तरफ नीचे जाने दें और सिर व टेलबोन (Tailbone) को ऊपर उठाएं।
- कैट पोज (Cat): सांस छोड़ते हुए अपनी पीठ को ऊपर छत की तरफ गोल करें (जैसे बिल्ली करती है) और सिर को नीचे झुकाएं।
- इसे बहुत धीरे-धीरे और लयबद्ध तरीके से करें।
- फ्रीक्वेंसी: 10-15 बार दोहराएं।

भाग 2: सुदृढ़ीकरण और स्थिरता व्यायाम (Strengthening & Stabilization Exercises)
स्ट्रेचिंग से आपको अस्थायी राहत मिलेगी, लेकिन दर्द को हमेशा के लिए दूर रखने के लिए आपको स्थिरता (Stability) की आवश्यकता है। इसके लिए ग्लूट्स (Glutes) और कोर (Core) का मजबूत होना जरूरी है।
5. ब्रिज पोज (Bridge Pose / Setu Bandhasana)
कमजोर ग्लूट्स (कूल्हों की मांसपेशियां) SI जॉइंट पेन का सबसे बड़ा कारण हैं। ब्रिजिंग व्यायाम ग्लूट्स को सक्रिय करने का सबसे अच्छा तरीका है।
कैसे करें (How to do):
- पीठ के बल लेटें, घुटने मुड़े हुए और पैर जमीन पर सपाट रखें।
- पैरों को कूल्हों की चौड़ाई (Hip-width) पर रखें।
- अपनी एड़ियों पर जोर देते हुए धीरे-धीरे अपनी कमर (Hips) को ऊपर उठाएं।
- ऊपर जाकर अपने ग्लूट्स को सिकोड़ें (Squeeze)। ध्यान रहे पीठ में आर्च न बने, शरीर एक सीधी रेखा में हो।
- 5 सेकंड होल्ड करें और फिर नीचे आएं।
- फ्रीक्वेंसी: 10-15 बार के 2 सेट करें।

6. बर्ड डॉग एक्सरसाइज (Bird Dog Exercise)
यह कोर स्टेबिलिटी के लिए “गोल्ड स्टैंडर्ड” व्यायाम है। यह रीढ़ पर दबाव डाले बिना पीठ और पेट की मांसपेशियों को एक साथ काम करना सिखाता है।
कैसे करें (How to do):
- हाथों और घुटनों के बल (Table-top position) आ जाएं। पीठ बिल्कुल सीधी रखें।
- अपने कोर (पेट) की मांसपेशियों को टाइट करें।
- धीरे-धीरे एक हाथ (Right arm) सामने और विपरीत पैर (Left leg) पीछे सीधा उठाएं।
- संतुलन बनाएं रखें और कूल्हों को हिलने न दें।
- 5-10 सेकंड होल्ड करें।
- वापस आएं और दूसरी तरफ (Left arm, Right leg) से करें।
- फ्रीक्वेंसी: हर तरफ 10 बार दोहराएं।

7. साइड लाइंग क्लैमशेल्स (Side Lying Clamshells)
यह व्यायाम ‘ग्लूटियस मीडियस’ (Gluteus Medius) को टारगेट करता है, जो पेल्विक स्थिरता के लिए सबसे महत्वपूर्ण मांसपेशी है।
कैसे करें (How to do):
- करवट (Side) लेकर लेट जाएं। (दर्द वाली साइड ऊपर रखें)।
- अपने घुटनों को 45 डिग्री पर मोड़ लें और एड़ियों को एक-दूसरे से चिपका कर रखें।
- अब, एड़ियों को अलग किए बिना, ऊपर वाले घुटने को छत की तरफ खोलें (जैसे सीप खुलता है)।
- ध्यान दें कि आपकी कमर (Pelvis) पीछे की तरफ न लुढ़के।
- धीरे-धीरे वापस लाएं।
- फ्रीक्वेंसी: 12-15 बार दोहराएं, फिर करवट बदलें।

8. प्लैंक ऑन नीज़ (Plank On Knees)
कैसे करें (How to do):
- पेट के बल लेट जाएं और अपनी कोहनियों (Elbows) को कंधों के नीचे रखें।
- अपने शरीर को कोहनियों और घुटनों के सहारे ऊपर उठाएं।
- सिर से घुटनों तक शरीर एक सीधी रेखा में होना चाहिए। पेट को अंदर खींच कर रखें।
- कमर को नीचे न झुकने दें।
- होल्ड: जितनी देर हो सके (20-30 सेकंड) होल्ड करें।
- 3-4 बार दोहराएं।

9. वॉल स्क्वैट्स (Wall Squats)
यह पैरों और ग्लूट्स को मजबूत करने का एक सुरक्षित तरीका है, क्योंकि दीवार आपकी पीठ को सहारा देती है, जिससे SI जॉइंट पर लोड कम आता है।Getty Images
कैसे करें (How to do):
- दीवार से लगभग 1-1.5 फीट दूर खड़े हो जाएं और अपनी पीठ दीवार से लगा लें।
- पैरों को कंधे की चौड़ाई पर रखें।
- धीरे-धीरे दीवार के सहारे नीचे स्लाइड करें जैसे कि आप कुर्सी पर बैठ रहे हों।
- घुटनों को 90 डिग्री तक मोड़ें (या जितना दर्द रहित हो)।
- 5-10 सेकंड होल्ड करें और फिर एड़ियों पर जोर देकर वापस ऊपर आएं।
- फ्रीक्वेंसी: 10 बार दोहराएं।

किन चीजों से बचें? (Things To Avoid)
व्यायाम करना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है उन गतिविधियों से बचना जो दर्द को बढ़ा सकती हैं (“Trigger activities”)।
- भारी वजन उठाना और मुड़ना: झुककर भारी चीज उठाना और साथ में कमर को मोड़ना (Twisting) SI जॉइंट के लिए सबसे खतरनाक है।
- एक पैर पर खड़ा होना (Single Leg Stance): जब हम एक पैर पर वजन डालते हैं, तो सारा भार एक तरफ के SI जॉइंट पर आ जाता है। कपड़े पहनते समय या सीढ़ियां चढ़ते समय सावधान रहें।
- लंबे कदम (Lunges) या दौड़ना: बड़े कदम रखने से पेल्विस के दोनों हिस्सों पर विपरीत दिशा में बल लगता है (Shearing force), जिससे दर्द बढ़ सकता है। हाई इम्पैक्ट एक्टिविटी जैसे कूदना या दौड़ना भी अभी न करें।
- लंबे समय तक बैठना: खास तौर पर पैरों को क्रॉस करके (Cross-legged) बैठने से बचें। यह पेल्विस का संतुलन बिगाड़ देता है।
- असमान सतह पर चलना: उबड़-खाबड़ रास्तों पर चलने से झटके सीधे जोड़ पर लगते हैं।
निष्कर्ष (Conclusion)
सैक्रोइलिएक (SI) जॉइंट का दर्द आपके दैनिक जीवन को प्रभावित कर सकता है, लेकिन सही दिशा में किए गए प्रयास से इसे नियंत्रित किया जा सकता है। ऊपर बताए गए व्यायाम—स्ट्रेचिंग (Stretching) से तनाव कम करने और स्टेबिलाइजेशन (Stabilization) से जोड़ को मजबूत बनाने—का एक संतुलित मिश्रण हैं।
मुख्य बातें याद रखें:
- निरंतरता: इन व्यायामों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।
- दर्द की सीमा: व्यायाम करते समय हल्का खिंचाव ठीक है, लेकिन तेज दर्द नहीं होना चाहिए। अगर दर्द बढ़े, तो रुक जाएं।
- धैर्य: फिजियोथेरेपी का असर दिखने में कुछ सप्ताह लग सकते हैं।
यदि आपका दर्द इन व्यायामों के बाद भी कम नहीं होता है या पैरों में सुन्नपन बढ़ता है, तो तुरंत अपने फिजियोथेरेपिस्ट या ऑर्थोपेडिक डॉक्टर से संपर्क करें। स्वस्थ रहें, सक्रिय रहें!
