रोटेटर कफ (Rotator Cuff) की चोट: कारण और पुनर्वास
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रोटेटर कफ (Rotator Cuff) की चोट: कारण और पुनर्वास

रोटेटर कफ (Rotator Cuff) की चोट: कारण, लक्षण और पुनर्वास (Rotator Cuff Injury: Causes, Symptoms, and Rehabilitation) 💪🤕

रोटेटर कफ (Rotator Cuff) कंधे के जोड़ (Shoulder Joint) के आसपास की चार मांसपेशियों (Muscles) और उनके टेंडन (Tendons) का एक समूह है। इन चार मांसपेशियों (सुप्रास्पाइनेटस, इन्फ्रास्पाइनेटस, टेरेस माइनर और सबस्कैपुलरिस) का मुख्य कार्य कंधे के जोड़ को स्थिर करना, बांह को ऊपर उठाना (Elevation) और बांह को घुमाना (Rotation) है।

रोटेटर कफ की चोट (Rotator Cuff Injury) कंधे के दर्द के सबसे आम कारणों में से एक है, जो मांसपेशियों में तनाव (Strain) से लेकर टेंडन में आंशिक (Partial) या पूर्ण रूप से फटने (Tear) तक हो सकती है। यह चोट खेलकूद में शामिल एथलीटों (जैसे क्रिकेट या टेनिस), शारीरिक श्रम करने वाले व्यक्तियों, या बढ़ती उम्र के लोगों को प्रभावित कर सकती है। यदि इसका उचित प्रबंधन न किया जाए तो यह कंधे की गतिशीलता और कार्यक्षमता को गंभीर रूप से सीमित कर सकती है।

यह लेख रोटेटर कफ की चोट के सामान्य कारण, इसके लक्षण, और दर्द से राहत तथा शक्ति बहाली के लिए फिजियोथेरेपी (Physiotherapy) पर आधारित पुनर्वास रणनीति पर विस्तृत मार्गदर्शन प्रदान करता है।

१. रोटेटर कफ की चोट के कारण और प्रकार

रोटेटर कफ की चोट को दो मुख्य श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है:

क. तीव्र चोट (Acute Tears)

ये चोटें अचानक लगती हैं और अक्सर किसी विशिष्ट घटना से जुड़ी होती हैं:

  • अचानक झटका: किसी भारी वस्तु को उठाते समय अचानक झटका लगना।
  • गिरना: बांह को फैलाकर गिरने पर सीधे कंधे पर बल पड़ना।
  • खेलकूद: क्रिकेट में गेंद फेंकना या टेनिस में जोरदार सर्विस करना, जिसमें बांह को अचानक घुमाना शामिल हो।

ख. क्रोनिक और अपक्षयी चोट (Chronic and Degenerative Tears)

ये चोटें समय के साथ धीरे-धीरे विकसित होती हैं और सबसे आम हैं:

  • घिसाव और अपक्षय: बढ़ती उम्र के साथ टेंडन में रक्त की आपूर्ति कम होने और बार-बार दोहराए जाने वाले तनाव (Repetitive Stress) के कारण टेंडन घिस जाते हैं और कमजोर हो जाते हैं।
  • इम्पिंजमेंट सिंड्रोम (Impingement Syndrome): जब बांह को ऊपर उठाया जाता है, तो रोटेटर कफ टेंडन, विशेष रूप से सुप्रास्पाइनेटस, एक्रोमियन हड्डी (Acromion Bone) के नीचे बार-बार दबते हैं और घिसते हैं, जिससे जलन और क्षति होती है।
  • खराब मुद्रा (Poor Posture): कंधे को आगे की ओर झुकाकर बैठने या काम करने से इम्पिंजमेंट का जोखिम बढ़ जाता है।

२. रोटेटर कफ चोट के लक्षण

  • दर्द: कंधे के बाहरी हिस्से में या ऊपरी बांह में गहरा, दर्द। यह दर्द अक्सर रात में, विशेष रूप से प्रभावित कंधे पर लेटने पर, बढ़ जाता है।
  • कमजोरी: बांह को ऊपर उठाने (Elevation) या बाहर की ओर घुमाने (External Rotation) में कठिनाई या कमजोरी महसूस होना।
  • क्लिकिंग/क्रैकिंग ध्वनि: गति के दौरान कंधे में एक क्लिक करने या पीसने जैसी ध्वनि (Crepitus) आना।
  • गति की सीमितता: दैनिक कार्य, जैसे कपड़े पहनना, कंघी करना, या ऊँची शेल्फ तक पहुँचना मुश्किल हो जाता है।

३. रोटेटर कफ चोट के लिए पुनर्वास (Physiotherapy Rehabilitation)

रोटेटर कफ टियर के अधिकांश मामले (आंशिक टियर) सर्जरी के बिना, केवल फिजियोथेरेपी के माध्यम से सफलतापूर्वक प्रबंधित किए जा सकते हैं। पुनर्वास कार्यक्रम का लक्ष्य दर्द को कम करना, सूजन को नियंत्रित करना, गति की सीमा को बहाल करना और अंततः मांसपेशियों की शक्ति और सहनशक्ति को बढ़ाना है।

पुनर्वास को आमतौर पर तीन प्रगतिशील चरणों में विभाजित किया जाता है:

चरण १: तीव्र चरण – दर्द और सूजन प्रबंधन

  • लक्ष्य: दर्द कम करना और सूजन नियंत्रित करना।
  • हस्तक्षेप:
    • आराम और बर्फ: सूजन कम करने के लिए बर्फ का उपयोग करना।
    • कोमल निष्क्रिय गति (Gentle Passive Motion): फिजियोथेरेपिस्ट धीरे-धीरे और दर्द-मुक्त सीमा में कंधे को हिलाते हैं ताकि अकड़न (Stiffness) से बचा जा सके।
    • पेंडुलम एक्सरसाइज (Pendulum Exercises): शरीर को आगे झुकाकर बांह को ढीला छोड़ना और छोटे-छोटे गोले में घुमाना। इससे जोड़ में रक्त परिसंचरण बढ़ता है।
    • इलेक्ट्रोथेरेपी: दर्द से राहत के लिए TENS (ट्रांसक्यूटेनियस इलेक्ट्रिकल नर्व स्टिमुलेशन) का उपयोग।

चरण २: उप-तीव्र चरण – गति और गतिशीलता की बहाली

  • लक्ष्य: कंधे की गति की सामान्य सीमा (Range of Motion) को बहाल करना।
  • हस्तक्षेप:
    • सक्रिय सहायक गति (Active Assisted Range of Motion – AAROM): एक रस्सी (Pulley) या अप्रभावित हाथ का उपयोग करके प्रभावित बांह को उठाना।
    • स्ट्रेचिंग: पोस्टर कैप्सूल स्ट्रेच (हाथ को छाती के पार खींचना) और दरवाजे के फ्रेम में सीने की मांसपेशियों को खींचना।
    • आइसोमेट्रिक मजबूती (Isometric Strengthening): बिना जोड़ को हिलाए, बाहरी घुमाव (External Rotation) और आंतरिक घुमाव (Internal Rotation) की मांसपेशियों को कसने का अभ्यास।

चरण ३: पुनर्प्राप्ति और कार्यात्मक प्रशिक्षण – शक्ति और सहनशक्ति

  • लक्ष्य: रोटेटर कफ और स्कैपुला (कंधे का ब्लेड) की मांसपेशियों की पूरी शक्ति और सहनशक्ति को बहाल करना।
  • हस्तक्षेप:
    • प्रतिरोध प्रशिक्षण (Resistance Training):थेरा-बैंड (Thera-Band) या हल्के डम्बल का उपयोग करके विशिष्ट मजबूती अभ्यास।
      • बाहरी घुमाव: रोटेटर कफ की सबसे महत्वपूर्ण मजबूती।
      • स्कैपुला स्थिरीकरण: कंधे के ब्लेड को स्थिर करने वाले स्नायुओं (जैसे सीरेटस एंटीरियर और ट्रेपीजियस) को मजबूत करना।
    • पॉस्चरल सुधार: बैठे और खड़े होने की सही मुद्रा बनाए रखने के लिए अभ्यास, क्योंकि खराब मुद्रा इम्पिंजमेंट को बढ़ाती है।
    • कार्यात्मक/खेल विशिष्ट अभ्यास: खेल या काम से संबंधित विशिष्ट गतिविधियों की नकल करने वाले अभ्यास, चोट से पहले के स्तर पर लौटने की तैयारी।

४. सफल पुनर्वास के लिए महत्वपूर्ण टिप्स

  1. दर्द को नियंत्रित रखें: पुनर्वास के दौरान कभी भी तीव्र दर्द में कसरत न करें। दर्द होने पर अभ्यास की तीव्रता या सीमा कम करें।
  2. निरंतरता: नियमित रूप से (दिन में २-३ बार) छोटे सत्रों में व्यायाम करना सप्ताह में कुछ बड़े सत्रों की तुलना में अधिक प्रभावी होता है।
  3. धैर्य: रोटेटर कफ टेंडन बहुत धीरे-धीरे ठीक होते हैं। पूर्ण रिकवरी में ६ महीने से १ साल तक का समय लग सकता है।
  4. सर्जरी: यदि पूर्ण टियर है या रूढ़िवादी उपचार के बाद भी ६ महीने तक सुधार नहीं होता है, तो सर्जन से परामर्श आवश्यक है। सर्जरी के बाद भी, सफल रिकवरी के लिए फिजियोथेरेपी (पुनर्वास) अनिवार्य है।

निष्कर्ष

रोटेटर कफ की चोट एक जटिल समस्या है जिसके लिए एक संरचित और प्रगतिशील पुनर्वास कार्यक्रम की आवश्यकता होती है। फिजियोथेरेपी इस कार्यक्रम का केंद्रबिंदु है, जो न केवल दर्द से राहत दिलाती है बल्कि कंधे की पूरी ताकत और कार्यक्षमता को बहाल करने में भी मदद करती है। सही मार्गदर्शन और मरीज़ की सक्रिय भागीदारी से, अधिकांश लोग रोटेटर कफ की चोट से सफलतापूर्वक उबर सकते हैं और अपनी सामान्य गतिविधियों में वापस आ सकते हैं।

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