कंधा खिसकना (Shoulder Dislocation): फिजियोथेरेपी से मजबूती
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कंधा खिसकना (Shoulder Dislocation): फिजियोथेरेपी से मजबूती

कंधा खिसकना (Shoulder Dislocation): फिजियोथेरेपी से मजबूती और बार-बार खिसकने से बचाव 💪🔄

कंधा खिसकना (Shoulder Dislocation), जिसे चिकित्सकीय भाषा में ग्लेनोह्यूमरल जॉइंट डिसलोकेशन (Glenohumeral Joint Dislocation) कहते हैं, तब होता है जब बांह की हड्डी (Humerus) का गोलाकार सिरा, कंधे के ब्लेड (Scapula) की छोटी सी सॉकेट (Glenoid) से बाहर निकल जाता है। यह शरीर का सबसे अधिक खिसकने वाला जोड़ (Most Commonly Dislocated Joint) है क्योंकि यह सबसे अधिक गतिशील (Mobile) जोड़ भी है।

कंधा आमतौर पर आगे की ओर (Anterior Dislocation) खिसकता है, जो किसी आघात (Trauma), खेलकूद की चोट, या गिरने के कारण हो सकता है। एक बार कंधा खिसक जाने के बाद, कैप्सूल (Capsule) और लिगामेंट्स (Ligaments) क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। इस क्षति के कारण, कंधे के बार-बार खिसकने (Recurrent Dislocation) का खतरा बहुत बढ़ जाता है, खासकर युवा और सक्रिय व्यक्तियों में।

कंधे को फिर से जगह पर बिठाने (Reduction) के बाद, इसका सफल प्रबंधन मुख्य रूप से फिजियोथेरेपी (Physiotherapy) पर निर्भर करता है। फिजियोथेरेपी का लक्ष्य न केवल दर्द और सूजन को कम करना है, बल्कि कंधे की स्थिरता (Stability) को बहाल करने के लिए रोटेटर कफ (Rotator Cuff) और स्कैपुला स्थिरीकरण मांसपेशियों (Scapular Stabilizer Muscles) को मजबूत करना है, ताकि भविष्य में खिसकने की घटनाओं से बचा जा सके।

यह लेख कंधा खिसकने के बाद की पुनर्वास प्रक्रिया, फिजियोथेरेपी के चरण और कंधे को मजबूत करने वाली विशिष्ट व्यायाम रणनीतियों पर विस्तृत मार्गदर्शन प्रदान करता है।

१. चोट के बाद प्रारंभिक प्रबंधन और फिजियोथेरेपी के लक्ष्य

कंधे के अपनी जगह पर आ जाने के बाद, प्रारंभिक उपचार और पुनर्वास शुरू होता है।

क. प्रारंभिक चरण (Immobilization Phase)

  • आराम और स्लिंग (Sling): कंधे को आराम देने और क्षतिग्रस्त ऊतकों को ठीक होने का समय देने के लिए शुरुआत में २ से ४ सप्ताह तक स्लिंग (Sling) का उपयोग किया जाता है।
  • फिजियोथेरेपी का लक्ष्य: इस चरण में दर्द और सूजन को कम करना, और कोहनी, कलाई और हाथ की गति को बनाए रखना शामिल है, जबकि कंधे को पूरी तरह से स्थिर रखा जाता है।

ख. पुनर्वास के अंतिम लक्ष्य

  • रोटेटर कफ की मजबूती: कंधे के जोड़ को सॉकेट के केंद्र में रखने के लिए रोटेटर कफ की मांसपेशियों (विशेषकर सबस्कैपुलरिस, सुप्रास्पाइनेटस) को मजबूत करना।
  • स्कैपुला स्थिरीकरण: कंधे के ब्लेड को स्थिर करने वाले स्नायुओं को मजबूत करना ताकि जोड़ की यांत्रिकी (Mechanics) सही रहे।
  • प्रोप्रियोसेप्शन (Proprioception) प्रशिक्षण: जोड़ की स्थिति (Position Sense) की समझ को बहाल करना ताकि शरीर आकस्मिक परिस्थितियों में सही ढंग से प्रतिक्रिया करे।
  • कार्यात्मक बहाली: रोगी को उसकी दैनिक, काम या खेल-संबंधी गतिविधियों में वापस लाना।

२. कंधा खिसकने के बाद पुनर्वास के चरण

फिजियोथेरेपी कार्यक्रम को रोगी की उम्र, गतिविधि के स्तर और चोट की गंभीरता के आधार पर सावधानीपूर्वक प्रगतिशील होना चाहिए।

चरण १: निष्क्रिय और कोमल सक्रिय गति (Passive and Gentle Active Motion)

  • अवधि: आमतौर पर चोट के बाद ० से ६ सप्ताह।
  • फोकस: जोड़ की गति को धीरे-धीरे शुरू करना, जोर देकर स्ट्रेचिंग करने से बचना।
  • व्यायाम:
    • पेंडुलम एक्सरसाइज (Pendulum Exercises): शरीर को आगे झुकाकर और बांह को ढीला छोड़कर छोटे, दर्द-मुक्त दायरे में गोलाकार घुमाना।
    • टेबल स्लाइड एक्सरसाइज: एक मेज पर हाथ रखकर, शरीर को आगे खिसकाकर हाथ को धीरे-धीरे आगे की ओर ले जाना।
    • आइसोमेट्रिक मजबूती: बिना जोड़ को हिलाए, बाहरी और आंतरिक घुमाव की मांसपेशियों को कसना।

चरण २: पूर्ण गति सीमा और शुरुआती मजबूती

  • अवधि: आमतौर पर ६ से १२ सप्ताह।
  • फोकस: जोड़ की सामान्य गति सीमा (ROM) को बहाल करना और प्रतिरोध के साथ शुरुआती मजबूती शुरू करना।
  • व्यायाम:
    • सक्रिय गति (Active ROM): हाथ को बिना सहायता के सिर के ऊपर उठाने का अभ्यास शुरू करना।
    • रोटेटर कफ मजबूती (थेरा-बैंड के साथ): कमजोर प्रतिरोध (Low Resistance) वाले थेरा-बैंड का उपयोग करके आंतरिक और बाहरी घुमाव (Internal and External Rotation) के अभ्यास करना। यह चोट के बाद कंधे की स्थिरता के लिए सबसे महत्वपूर्ण है।
    • स्कैपुला मजबूती: पुश-अप्स प्लस (दीवार पर शुरू), स्कैपुला स्क्वीज़ (कंधे के ब्लेड को निचोड़ना), और रोइंग (Rowing) अभ्यास।

चरण ३: उन्नत मजबूती और कार्यात्मक प्रशिक्षण

  • अवधि: १२ सप्ताह और उसके बाद।
  • फोकस: शक्ति, धीरज (Endurance) और खेल/कार्य-विशिष्ट कार्यक्षमता को पूरी तरह से बहाल करना।
  • व्यायाम:
    • उच्च प्रतिरोध मजबूती: मध्यम से उच्च प्रतिरोध वाले थेरा-बैंड या हल्के डम्बल का उपयोग करके सभी विमानों (Planes) में ताकत बढ़ाना।
    • प्रोप्रियोसेप्शन और न्यूरोमस्कुलर नियंत्रण:
      • बॉल-रोलिंग एक्सरसाइज: दीवार के सहारे थेरा-बॉल पर हाथ रखकर छोटे-छोटे वृत्त बनाना।
      • अस्थिर सतहों पर पुश-अप्स: स्थिरता में सुधार के लिए।
    • विलंबित मजबूती (Eccentric Strengthening): मांसपेशियों को लंबा करते हुए प्रतिरोध को नियंत्रित करने वाले व्यायाम (जैसे धीरे-धीरे हाथ को नीचे लाना)।
    • प्लायोमेट्रिक प्रशिक्षण: फेंकने या कूदने जैसी गतिशील गतिविधियों की आवश्यकता वाले एथलीटों के लिए।

३. कंधे के बार-बार खिसकने (Recurrence) से बचाव की रणनीति

पुनर्वास के दौरान, विशेष ध्यान उस स्थिति पर दिया जाना चाहिए जिससे खिसकने का जोखिम सबसे अधिक होता है: अपहरण और बाहरी घुमाव (Abduction and External Rotation)

  • विशिष्ट मजबूती: सबस्कैपुलरिस (Subscapularis) मांसपेशी पर जोर देना, क्योंकि यह कंधा खिसकने के दौरान सबसे अधिक घायल होती है और जोड़ को आगे की ओर खिसकने से रोकती है।
  • दैनिक मुद्रा: खराब मुद्रा (गोल कंधे) से बचें, क्योंकि यह कंधे के जोड़ को अस्थिर कर सकती है।
  • वापसी की तैयारी: किसी भी खेल गतिविधि में लौटने से पहले फिजियोथेरेपिस्ट से “स्पोर्ट्स-रेडी” क्लीयरेंस (Sports-Ready Clearance) प्राप्त करना आवश्यक है। यह सुनिश्चित करता है कि शक्ति और स्थिरता चोट से पहले के स्तर पर है।

४. निष्कर्ष

कंधा खिसकना एक दर्दनाक घटना है, लेकिन इसका सफल उपचार और बार-बार होने से बचाव संभव है। कुंजी यह है कि कंधे को जगह पर बिठाने के बाद केवल आराम पर निर्भर न रहें, बल्कि एक संरचित और प्रगतिशील फिजियोथेरेपी कार्यक्रम का पालन करें।

रोटेटर कफ और स्कैपुला स्थिरीकरण पर केंद्रित निरंतर व्यायाम कंधे के जोड़ को स्थिर करके लिगामेंट्स के कार्य को प्रतिस्थापित (Substitute) करते हैं, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि आप अपनी पूर्ण शक्ति और गतिशीलता के साथ सुरक्षित रूप से दैनिक और खेल गतिविधियों में लौट सकें। किसी भी पुनर्वास कार्यक्रम को शुरू करने से पहले एक योग्य फिजियोथेरेपिस्ट से व्यक्तिगत मूल्यांकन और मार्गदर्शन प्राप्त करना महत्वपूर्ण है।

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