स्ट्रेट लेग रेज (Straight Leg Raise – SLR): संपूर्ण गाइड – फायदे, तरीका और सावधानियां
स्ट्रेट लेग रेज (SLR), जिसे हिंदी में ‘सीधा पैर उठाना’ कहा जाता है, एक बहुत ही महत्वपूर्ण शारीरिक क्रिया है। यह फिटनेस की दुनिया में एक बेहतरीन कोर और लेग एक्सरसाइज है, जबकि चिकित्सा (Physiotherapy/Orthopedics) की दुनिया में यह कमर दर्द और साइटिका (Sciatica) का पता लगाने के लिए एक महत्वपूर्ण टेस्ट भी है।
चाहे आप अपने पेट की मांसपेशियों (Abs) को मजबूत करना चाहते हों, घुटने की सर्जरी के बाद रिकवरी कर रहे हों, या पीठ दर्द के कारण को समझना चाहते हों—SLR की जानकारी आपके लिए बेहद जरूरी है।
इस विस्तृत लेख में हम SLR के हर पहलू पर चर्चा करेंगे।
स्ट्रेट लेग रेज (SLR) क्या है? (What is SLR?)
SLR को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बांटा जा सकता है:
- एक व्यायाम के रूप में (As an Exercise): यह एक लो-इम्पैक्ट (कम झटके वाला) व्यायाम है जो हिप फ्लेक्सर्स (Hip Flexors), क्वाड्रिसेप्स (जांघ के सामने की मांसपेशियां) और निचले पेट (Lower Abs) को लक्षित करता है।
- एक नैदानिक परीक्षण के रूप में (As a Clinical Test): इसे Lasègue’s sign भी कहा जाता है। डॉक्टर इसका उपयोग यह जांचने के लिए करते हैं कि क्या मरीज को ‘हर्निएटेड डिस्क’ (Slip Disc) या नसों में खिंचाव (Neural Tension) की समस्या है।
1. व्यायाम के रूप में SLR (SLR Exercise)
यह व्यायाम विशेष रूप से उन लोगों के लिए फायदेमंद है जो घुटने के दर्द से पीड़ित हैं या जिन्हें अपनी कोर स्ट्रेंथ बढ़ानी है लेकिन वे भारी वजन नहीं उठा सकते।
कौन सी मांसपेशियां काम करती हैं? (Muscles Targeted)
SLR करते समय शरीर की कई प्रमुख मांसपेशियां सक्रिय होती हैं:
- क्वाड्रिसेप्स (Quadriceps): जांघ के सामने की बड़ी मांसपेशी। यह घुटने को सीधा रखने में मदद करती है।
- हिप फ्लेक्सर्स (Iliopsoas): यह मांसपेशी पैर को ऊपर उठाने में मदद करती है।
- एब्डोमिनल्स (Abdominals): विशेष रूप से ‘रेक्टस एब्डोमिनिस’ (Rectus Abdominis) का निचला हिस्सा, जो पैर उठाते समय पेल्विस को स्थिर रखता है।
- हैमस्ट्रिंग्स (Hamstrings): जब पैर ऊपर जाता है, तो जांघ के पीछे की यह मांसपेशी स्ट्रेच होती है।
SLR व्यायाम के फायदे (Benefits of SLR Exercise)
- घुटने का पुनर्वास (Knee Rehab): घुटने की सर्जरी (जैसे ACL या घुटना प्रत्यारोपण) के बाद यह सबसे पहला और सुरक्षित व्यायाम है। यह घुटने पर वजन डाले बिना क्वाड्रिसेप्स को मजबूत करता है।
- कोर स्ट्रेंथ (Core Strength): यह “लोअर एब्स” (Lower Abs) को टोन करने के लिए सबसे प्रभावी व्यायामों में से एक है।
- पीठ दर्द में राहत: यदि इसे एक पैर मोड़कर (Single Leg) किया जाए, तो यह कोर को मजबूत करके पीठ दर्द को कम करने में मदद कर सकता है।
- लचीलापन (Flexibility): यह हैमस्ट्रिंग्स की जकड़न को कम करने और कूल्हों (Hips) की गतिशीलता बढ़ाने में मदद करता है।
- कोई उपकरण नहीं चाहिए: इसे आप घर पर, बिस्तर पर या जिम में कहीं भी कर सकते हैं।
SLR करने का सही तरीका (Step-by-Step Guide)
SLR को सही फॉर्म के साथ करना बहुत जरूरी है, वरना पीठ में दर्द हो सकता है।
चरण 1: शुरुआती स्थिति (Starting Position)
- जमीन पर या योगा मैट पर अपनी पीठ के बल सीधे लेट जाएं।
- अपने हाथों को शरीर के बगल में रखें, हथेलियां नीचे की ओर हों।
- महत्वपूर्ण: अपने एक पैर (जिसका व्यायाम नहीं करना है) को घुटने से मोड़ लें और तलवे को जमीन पर रखें। यह आपकी पीठ के निचले हिस्से (Lower Back) को सहारा देता है और चोट से बचाता है। दूसरा पैर बिल्कुल सीधा रखें।
चरण 2: पैर उठाना (The Lift)
- अपनी कोर (पेट) की मांसपेशियों को कस लें।
- धीरे-धीरे अपने सीधे पैर को ऊपर उठाएं। घुटने को बिल्कुल सीधा रखें, मुड़ने न दें।
- पैर को तब तक उठाएं जब तक वह दूसरे (मुड़े हुए) पैर के घुटने की ऊंचाई तक न पहुंच जाए (लगभग 45-60 डिग्री)।
- सांस: पैर उठाते समय सांस छोड़ें (Exhale)।
चरण 3: होल्ड करना (The Hold)
- इस स्थिति में पैर को 3 से 5 सेकंड के लिए रोककर रखें।
- महसूस करें कि आपकी जांघ और पेट की मांसपेशियों पर जोर पड़ रहा है।
चरण 4: नीचे लाना (Lowering)
- धीरे-धीरे और नियंत्रण के साथ पैर को वापस जमीन पर लाएं। पैर को धड़ाम से नीचे न गिराएं।
- सांस: पैर नीचे लाते समय सांस लें (Inhale)।
रेप्स और सेट्स (Reps and Sets):
- शुरुआत में 10-15 बार (Reps) एक पैर से करें।
- फिर दूसरे पैर से यही प्रक्रिया दोहराएं।
- कुल 2-3 सेट करें।
SLR के विभिन्न प्रकार (Variations of SLR)
जैसे-जैसे आप मजबूत होते जाएं, आप इस व्यायाम को कठिन बना सकते हैं:
- डबल लेग रेज (Double Leg Raise):
- इसमें दोनों पैर एक साथ उठाए जाते हैं। यह पेट (Abs) के लिए बहुत ही एडवांस एक्सरसाइज है।
- चेतावनी: यदि आपकी पीठ कमजोर है, तो इसे न करें, क्योंकि इससे पीठ के निचले हिस्से पर बहुत दबाव पड़ता है।
- वेटेड SLR (Weighted SLR):
- अपने टखनों (Ankles) पर वजन (Ankle Weights) बांधकर SLR करें। यह मांसपेशियों को बड़ा और मजबूत बनाने में मदद करता है।
- हैंगिंग लेग रेज (Hanging Leg Raise):
- यह जिम में एक बार (Bar) से लटक कर किया जाता है। यह सिक्स-पैक एब्स बनाने के लिए बहुत प्रभावी है।
- साइड लेग रेज (Side Leg Raise):
- करवट लेकर लेटें और पैर को ऊपर की ओर उठाएं। यह कूल्हों के बाहरी हिस्से (Glutes/Abductors) को मजबूत करता है।
2. मेडिकल टेस्ट के रूप में SLR (The SLR Test for Back Pain/Sciatica)
जब आप डॉक्टर के पास कमर दर्द या पैर में सुन्नपन की शिकायत लेकर जाते हैं, तो वे अक्सर आपको लेटने के लिए कहते हैं और आपका पैर सीधा ऊपर उठाते हैं। इसे SLR Test कहते हैं।
यह टेस्ट क्यों किया जाता है?
यह टेस्ट मुख्य रूप से Lumbosacral Radiculopathy (कमर की नस दबना) या साइटिका (Sciatica) का पता लगाने के लिए किया जाता है। यह बताता है कि क्या L4-L5 या L5-S1 कशेरुकाओं (Vertebrae) के बीच कोई डिस्क खिसक गई है जो नस को दबा रही है।
टेस्ट कैसे काम करता है?
- मरीज पीठ के बल लेटता है।
- डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट मरीज के पैर को एड़ी से पकड़ते हैं और घुटने को सीधा रखते हुए धीरे-धीरे ऊपर उठाते हैं।
- मरीज को पूरी प्रक्रिया के दौरान शिथिल (Relaxed) रहना होता है; उन्हें खुद पैर नहीं उठाना होता (यह Passive movement है)।
परिणाम का क्या मतलब है? (Interpreting Results)
- 0 से 30 डिग्री: अगर दर्द शुरू हो जाए, तो इसका मतलब हो सकता है कि हिप में कोई समस्या है या गंभीर सूजन है, लेकिन यह अक्सर साइटिका नहीं होता।
- 30 से 70 डिग्री (Positive SLR): अगर पैर को इस कोण (Angle) तक उठाने पर पीठ से लेकर घुटने के नीचे तक बिजली जैसा दर्द (Shooting Pain) दौड़ जाए, तो यह साइटिका या हर्निएटेड डिस्क का प्रबल संकेत है। यह नसों में खिंचाव को दर्शाता है।
- 70 डिग्री से ऊपर: अगर दर्द 70 डिग्री के बाद हो, तो यह आमतौर पर हैमस्ट्रिंग की जकड़न (Tightness) या कूल्हे के जोड़ (Hip Joint) की समस्या हो सकती है।
सामान्य गलतियां (Common Mistakes to Avoid)
चाहे आप व्यायाम कर रहे हों या टेस्ट, कुछ गलतियां इसके प्रभाव को कम कर सकती हैं या चोट पहुंचा सकती हैं:
- पीठ को मोड़ना (Arching the Back):
- सबसे बड़ी गलती है पैर उठाते समय पीठ के निचले हिस्से को जमीन से ऊपर उठा लेना। इससे कमर दर्द बढ़ सकता है। अपनी नाभि को रीढ़ की ओर खींचकर रखें ताकि पीठ जमीन से चिपकी रहे।
- घुटने मोड़ना:
- व्यायाम का नाम ही “स्ट्रेट” लेग रेज है। घुटने को लॉक रखें। अगर आप घुटना मोड़ते हैं, तो क्वाड्रिसेप्स पर सही असर नहीं पड़ेगा।
- बहुत तेजी से करना:
- पैर को झटके से ऊपर ले जाना और नीचे गिराना गलत है। गति पर नियंत्रण (Control) ही मांसपेशियों को मजबूत बनाता है।
- सांस रोकना:
- अक्सर लोग जोर लगाते समय सांस रोक लेते हैं। इससे ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। सामान्य रूप से सांस लेते रहें।
- गर्दन उठाना:
- पैर को देखते समय अपनी गर्दन को जमीन से ऊपर न उठाएं, इससे गर्दन में तनाव आ सकता है।
सावधानियां और कब न करें (Precautions & Contraindications)
हालाँकि SLR एक सुरक्षित व्यायाम है, लेकिन कुछ स्थितियों में सावधानी बरतनी चाहिए:
- तीव्र पीठ दर्द (Acute Back Pain): अगर आपको हाल ही में स्लिप डिस्क हुई है या बहुत तेज पीठ दर्द है, तो ‘डबल लेग रेज’ बिल्कुल न करें। सिंगल लेग रेज भी डॉक्टर की सलाह से ही करें।
- साइटिका का दर्द: अगर पैर उठाते ही दर्द बढ़ जाता है, तो जबरदस्ती न करें। यह नसों को और अधिक उत्तेजित कर सकता है।
- गर्भावस्था (Pregnancy): दूसरी और तीसरी तिमाही में पीठ के बल लंबे समय तक लेटकर यह व्यायाम करना सुरक्षित नहीं हो सकता, क्योंकि इससे प्रमुख रक्त वाहिकाओं पर दबाव पड़ सकता है।
- ऑस्टियोपोरोसिस (Osteoporosis): कमजोर हड्डियों वाले लोगों को रीढ़ पर अत्यधिक दबाव डालने वाले लेग रेज (विशेषकर डबल लेग) से बचना चाहिए।
निष्कर्ष (Conclusion)
स्ट्रेट लेग रेज (SLR) एक बहुमुखी (versatile) और शक्तिशाली मूवमेंट है। एक मरीज के लिए, यह सर्जरी के बाद चलने-फिरने की क्षमता वापस पाने का पहला कदम हो सकता है। एक एथलीट के लिए, यह मजबूत एब्स और हिप्स बनाने का एक शानदार तरीका है। और एक डॉक्टर के लिए, यह दर्द की जड़ तक पहुंचने का एक विश्वसनीय औजार है।
मुख्य बातें याद रखें:
- अगर आप इसे व्यायाम के तौर पर कर रहे हैं, तो धीमी गति (Slow movement) और कोर एंगेजमेंट (Core engagement) सबसे ज्यादा जरूरी है।
- एक पैर मोड़कर रखना (Supportive leg) आपकी पीठ को सुरक्षा देता है।
- अगर आपको पैर उठाते समय करंट जैसा दर्द महसूस हो, तो तुरंत रुक जाएं और डॉक्टर से सलाह लें।
SLR को अपनी दिनचर्या में शामिल करें, और आप देखेंगे कि आपकी जांघें और पेट की मांसपेशियां पहले से कहीं अधिक मजबूत और स्थिर हो गई हैं।
