सूर्य नमस्कार (Sun Salutation - 12 आसनों का समूह)
| | |

सूर्य नमस्कार: शरीर, मन और आत्मा के लिए 12 आसनों का संपूर्ण योग

सूर्य नमस्कार (Sun Salutation) योग की दुनिया में सबसे लोकप्रिय, प्रभावशाली और संपूर्ण अभ्यासों में से एक है। संस्कृत में ‘सूर्य’ का अर्थ है ‘सूरज’ और ‘नमस्कार’ का अर्थ है ‘अभिवादन’ या ‘प्रणाम करना’। यह अभ्यास न केवल एक शारीरिक व्यायाम है, बल्कि यह सूर्य के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का एक आध्यात्मिक तरीका भी है, जो पृथ्वी पर जीवन का प्राथमिक स्रोत है।

सूर्य नमस्कार 12 शक्तिशाली योग आसनों का एक क्रम है। यदि इसका नियमित रूप से और सही श्वास प्रक्रिया के साथ अभ्यास किया जाए, तो यह संपूर्ण शरीर को ऊर्जावान बनाता है, मानसिक शांति प्रदान करता है और समग्र स्वास्थ्य में सुधार करता है। इस विस्तृत लेख में हम सूर्य नमस्कार के 12 आसनों, उनकी विधियों, मंत्रों और लाभों के बारे में विस्तार से जानेंगे।


सूर्य नमस्कार का महत्व और विज्ञान

प्राचीन भारतीय ऋषियों ने सूर्य नमस्कार को एक दैनिक दिनचर्या के रूप में विकसित किया था। विज्ञान भी अब यह मानता है कि सूर्य की किरणें हमारे शरीर में विटामिन डी का निर्माण करती हैं और हमारे सर्केडियन रिदम (जैविक घड़ी) को संतुलित करती हैं।

“सूर्य नमस्कार केवल एक व्यायाम नहीं है, बल्कि यह आपके भीतर की सौर ऊर्जा (Solar Energy) को जाग्रत करने और उसे ब्रह्मांडीय ऊर्जा के साथ संरेखित करने की एक प्राचीन वैज्ञानिक प्रक्रिया है।”

सूर्य नमस्कार को दिनचर्या का हिस्सा बनाने से शरीर के सातों चक्र सक्रिय होते हैं। इसे सुबह के समय खाली पेट, उगते सूरज की ओर मुख करके करना सबसे अधिक फलदायी माना जाता है।


सूर्य नमस्कार के 12 आसन, मंत्र और श्वास प्रक्रिया

सूर्य नमस्कार का हर एक चरण एक विशेष मंत्र और श्वास प्रक्रिया (Inhale/Exhale) के साथ जुड़ा हुआ है। आइए इन 12 चरणों को विस्तार से समझें:

1. प्रणामासन (प्रार्थना मुद्रा – Prayer Pose)

यह सूर्य नमस्कार का पहला आसन है जो मन को शांत और केंद्रित करने में मदद करता है।

  • मंत्र: ॐ मित्राय नमः (Om Mitraya Namah)
  • श्वास: सामान्य रूप से श्वास लें और छोड़ें।
  • विधि: अपनी योगा मैट के किनारे पर सीधे खड़े हो जाएं। दोनों पैरों को एक साथ रखें और शरीर का वजन दोनों पैरों पर समान रूप से डालें। अपने कंधों को ढीला छोड़ें। श्वास भरते हुए दोनों हाथों को ऊपर उठाएं और श्वास छोड़ते हुए हाथों को छाती के सामने प्रणाम की मुद्रा (नमस्कार मुद्रा) में ले आएं।
  • लाभ: यह आसन एकाग्रता बढ़ाता है और नर्वस सिस्टम को शांत करता है।

2. हस्तौत्तनासन (उठाए हुए हाथों की मुद्रा – Raised Arms Pose)

  • मंत्र: ॐ रवये नमः (Om Ravaye Namah)
  • श्वास: गहरी श्वास अंदर लें (Inhale)।
  • विधि: प्रणाम मुद्रा से, श्वास अंदर भरते हुए अपने दोनों हाथों को ऊपर और थोड़ा पीछे की ओर ले जाएं। अपनी बाहों को कानों के करीब रखें। इस आसन में पूरे शरीर को एड़ियों से लेकर उंगलियों के सिरों तक ऊपर की ओर खींचने का प्रयास करें। थोड़ा पीछे की ओर झुकें।
  • लाभ: यह पेट की मांसपेशियों को खींचता है, पाचन में सुधार करता है और फेफड़ों का विस्तार करता है।

3. पादहस्तासन (हाथ से पैर की मुद्रा – Hand to Foot Pose)

  • मंत्र: ॐ सूर्याय नमः (Om Suryaya Namah)
  • श्वास: श्वास बाहर छोड़ें (Exhale)।
  • विधि: श्वास छोड़ते हुए कमर से आगे की ओर झुकें। रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें। पूरी तरह से श्वास छोड़ते हुए अपने दोनों हाथों को पैरों के पंजों के बगल में जमीन पर रखने की कोशिश करें। यदि आवश्यक हो तो शुरुआत में घुटनों को थोड़ा मोड़ सकते हैं।
  • लाभ: यह हैमस्ट्रिंग (जांघों के पीछे की मांसपेशियों) और रीढ़ की हड्डी को लचीला बनाता है। पेट की चर्बी कम करने में सहायक है।

4. अश्व संचालनासन (घुड़सवार मुद्रा – Equestrian Pose)

  • मंत्र: ॐ भानवे नमः (Om Bhanave Namah)
  • श्वास: श्वास अंदर लें (Inhale)।
  • विधि: श्वास भरते हुए अपने दाहिने पैर को जितना हो सके पीछे की ओर ले जाएं। दाहिने घुटने को जमीन पर रखें। बायां पैर दोनों हाथों के बीच में रहेगा और बायां घुटना 90 डिग्री के कोण पर मुड़ा होगा। अपनी गर्दन को ऊपर की ओर उठाएं और सामने देखें।
  • लाभ: पैरों की मांसपेशियों को मजबूत करता है और तंत्रिका तंत्र को उत्तेजित करता है।

5. पर्वतासन (पर्वत मुद्रा / अधोमुख श्वानासन – Mountain Pose)

  • मंत्र: ॐ खगाय नमः (Om Khagaya Namah)
  • श्वास: श्वास बाहर छोड़ें (Exhale)।
  • विधि: श्वास छोड़ते हुए बाएं पैर को भी पीछे ले जाएं और दाहिने पैर के पास रखें। कूल्हों और टेलबोन को ऊपर की ओर उठाएं। शरीर को ‘V’ (उल्टे वी) के आकार में लाएं। अपनी एड़ियों को जमीन पर टिकाने की कोशिश करें और अपनी नाभि की ओर देखें।
  • लाभ: कंधों, बाहों और पैरों को मजबूती प्रदान करता है। शरीर में रक्त संचार को बढ़ाता है।

6. अष्टांग नमस्कार (आठ अंगों वाली मुद्रा – Eight-Limbed Salutation)

  • मंत्र: ॐ पूष्णे नमः (Om Pushne Namah)
  • श्वास: श्वास रोक कर रखें या सामान्य रखें (Hold breath / Suspend)।
  • विधि: अपने घुटनों को जमीन पर लाएं। फिर छाती और ठुड्डी को भी जमीन पर टिकाएं। कूल्हे थोड़ा ऊपर उठे रहेंगे। इस प्रकार शरीर के आठ अंग (दो पैर, दो घुटने, दो हाथ, छाती और ठुड्डी) जमीन को छूने चाहिए।
  • लाभ: छाती और हाथों की मांसपेशियों को शक्तिशाली बनाता है। यह आसन अहंकार को कम करने का प्रतीक है।

7. भुजंगासन (कोबरा मुद्रा – Cobra Pose)

  • मंत्र: ॐ हिरण्यगर्भाय नमः (Om Hiranyagarbhaya Namah)
  • श्वास: श्वास अंदर लें (Inhale)।
  • विधि: छाती को आगे की ओर खिसकाते हुए ऊपर की ओर उठाएं, जैसे कोबरा सांप अपना फन उठाता है। अपनी कोहनियों को थोड़ा मुड़ा हुआ रखें और कंधों को कानों से दूर रखें। ऊपर आसमान की ओर देखें।
  • लाभ: पीठ के दर्द को कम करता है, रीढ़ की हड्डी को मजबूत और लचीला बनाता है।

8. पर्वतासन (पर्वत मुद्रा – Mountain Pose)

यह मुद्रा चरण 5 की तरह ही है। शरीर को वापस उल्टे ‘V’ आकार में ले आएं।

  • मंत्र: ॐ मरीचये नमः (Om Marichaye Namah)
  • श्वास: श्वास बाहर छोड़ें (Exhale)।
  • विधि: कूल्हों को ऊपर उठाएं, छाती को नीचे की ओर धकेलें और एड़ियों को जमीन से लगाने का प्रयास करें।

9. अश्व संचालनासन (घुड़सवार मुद्रा – Equestrian Pose)

यह चरण 4 की पुनरावृत्ति है, लेकिन इस बार दूसरे पैर से।

  • मंत्र: ॐ आदित्याय नमः (Om Aadityaya Namah)
  • श्वास: श्वास अंदर लें (Inhale)।
  • विधि: श्वास भरते हुए दाहिने पैर को आगे लाएं और दोनों हाथों के बीच रखें। बायां घुटना जमीन पर रखें और ऊपर की ओर देखें।

10. पादहस्तासन (हाथ से पैर की मुद्रा – Hand to Foot Pose)

यह चरण 3 की पुनरावृत्ति है।

  • मंत्र: ॐ सवित्रे नमः (Om Savitre Namah)
  • श्वास: श्वास बाहर छोड़ें (Exhale)।
  • विधि: बाएं पैर को भी आगे ले आएं और दाहिने पैर के पास रखें। कमर से झुकते हुए हाथों को पंजों के पास रखें।

11. हस्तौत्तनासन (उठाए हुए हाथों की मुद्रा – Raised Arms Pose)

यह चरण 2 की पुनरावृत्ति है।

  • मंत्र: ॐ अर्काय नमः (Om Arkaya Namah)
  • श्वास: श्वास अंदर लें (Inhale)।
  • विधि: श्वास भरते हुए शरीर को ऊपर उठाएं और दोनों हाथों को ऊपर ले जाते हुए थोड़ा पीछे की ओर झुकें।

12. प्रणामासन (प्रार्थना मुद्रा – Prayer Pose)

यह सूर्य नमस्कार का अंतिम चरण है, जो पहले चरण के समान है।

  • मंत्र: ॐ भास्कराय नमः (Om Bhaskaraya Namah)
  • श्वास: श्वास बाहर छोड़ें (Exhale)।
  • विधि: शरीर को सीधा करें और हाथों को वापस छाती के सामने नमस्कार मुद्रा में ले आएं। शरीर को विश्राम दें।

इन 12 चरणों को पूरा करने पर सूर्य नमस्कार का आधा चक्र (Half Cycle) पूरा होता है। एक पूर्ण चक्र (Full Cycle) के लिए, इन्हीं 12 चरणों को दोहराया जाता है, लेकिन चरण 4 में बाएं पैर को पीछे ले जाया जाता है।


सूर्य नमस्कार के समग्र लाभ (Health Benefits)

नियमित रूप से सूर्य नमस्कार करने से शारीरिक और मानसिक दोनों स्तरों पर अद्भुत लाभ मिलते हैं। नीचे दी गई तालिका में शरीर के विभिन्न अंगों पर पड़ने वाले प्रभावों को दर्शाया गया है:

शरीर का अंग / प्रणालीप्राप्त होने वाले लाभ
पाचन तंत्र (Digestive System)पेट के अंगों की मालिश होती है, जिससे कब्ज, अपच और एसिडिटी की समस्या दूर होती है।
हृदय प्रणाली (Cardiovascular System)रक्त संचार तेज होता है, जिससे हृदय स्वस्थ रहता है और ब्लड प्रेशर संतुलित रहता है।
वजन नियंत्रण (Weight Loss)तेज गति से करने पर यह एक बेहतरीन कार्डियो वर्कआउट बन जाता है, जो तेजी से कैलोरी बर्न करता है।
त्वचा और बाल (Skin & Hair)बेहतर रक्त संचार और विषैले तत्वों के बाहर निकलने से त्वचा पर चमक आती है और बालों का झड़ना कम होता है।
मांसपेशियां और हड्डियां (Muscles & Bones)संपूर्ण शरीर की स्ट्रेचिंग होती है, जिससे लचीलापन बढ़ता है और रीढ़ की हड्डी मजबूत होती है।
मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health)तनाव, चिंता और अवसाद को कम करता है। श्वास प्रक्रिया से तंत्रिका तंत्र शांत होता है।

सूर्य नमस्कार करते समय सावधानियां (Precautions)

हालांकि सूर्य नमस्कार अत्यधिक लाभकारी है, लेकिन कुछ स्थितियों में इसका अभ्यास करने से बचना चाहिए या विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए:

  • गर्भवती महिलाएं: गर्भावस्था के तीसरे महीने के बाद इसका अभ्यास नहीं करना चाहिए।
  • हर्निया और उच्च रक्तचाप: हर्निया के मरीजों और गंभीर हाई ब्लड प्रेशर (High BP) वाले व्यक्तियों को इसे करने से बचना चाहिए।
  • कमर दर्द या स्लिप डिस्क: यदि आपको गंभीर पीठ दर्द, स्लिप डिस्क या साइटिका की समस्या है, तो आगे झुकने वाले आसन (जैसे पादहस्तासन) करने से बचें।
  • मासिक धर्म (Menstruation): महिलाओं को मासिक धर्म के शुरुआती दिनों में इसके कठिन अभ्यास से बचना चाहिए।
  • चोट लगने पर: कलाई, घुटने या कंधे की चोट होने पर पूरी तरह से ठीक होने तक इसका अभ्यास न करें।

निष्कर्ष

सूर्य नमस्कार केवल आसनों का समूह नहीं है, यह एक पूर्ण जीवन शैली है। यदि आपके पास समय की कमी है और आप जिम जाने या अन्य व्यायाम करने का समय नहीं निकाल पाते हैं, तो केवल 10-15 मिनट का सूर्य नमस्कार आपके पूरे शरीर को स्वस्थ रखने के लिए पर्याप्त है। इसे धीमी गति से शुरू करें और धीरे-धीरे इसके चक्रों (Cycles) की संख्या बढ़ाएं।

Similar Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *