पारंपरिक मेलों (जैसे तरणेतर या वौठा का मेला) में लंबी पैदल यात्रा के बाद पैरों और तलवों की देखभाल
भारत, और विशेष रूप से गुजरात की धरती, अपने सांस्कृतिक वैभव, लोककला, और ऐतिहासिक मेलों के लिए पूरी दुनिया में जानी जाती है। सुरेन्द्रनगर जिले में लगने वाला ‘तरणेतर का मेला’ अपनी रंग-बिरंगी छतरियों, रास-गरबा और लोक-नृत्यों के लिए प्रसिद्ध है, तो वहीं धोलका के पास सात नदियों के संगम पर लगने वाला ‘वौठा का…
