टो वॉक (पंजों के बल चलना): कारण, लक्षण, निदान और उपचार – एक विस्तृत गाइड
जब एक नन्हा बच्चा अपने पहले कदम बढ़ाता है, तो यह माता-पिता के लिए सबसे खुशी के पलों में से एक होता है। अक्सर, जब बच्चे चलना सीखते हैं, तो वे अपने पंजों के बल (Toe Walking) चलते हैं। यह 2 साल से कम उम्र के बच्चों में एक सामान्य विकासात्मक चरण माना जाता है। हालांकि, यदि बच्चा 2 या 3 साल की उम्र के बाद भी लगातार पंजों के बल चलता है, या यदि वह पूरे पैर को जमीन पर रखने में असमर्थ है, तो यह चिंता का विषय हो सकता है।
चिकित्सीय भाषा में इसे ‘टो वॉकिंग’ (Toe Walking) कहा जाता है। यह लेख आपको टो वॉकिंग के बारे में गहराई से समझने, इसके कारणों को पहचानने और इसके उपचार के विकल्पों को जानने में मदद करेगा।
टो वॉकिंग क्या है? (What is Toe Walking?)
टो वॉकिंग चलने का वह पैटर्न है जिसमें बच्चा एड़ी (heel) को जमीन पर लगाए बिना अपने पंजों या पैर की उंगलियों के बल चलता है। सामान्य चाल (Gait) में, एड़ी पहले जमीन को छूती है, जिसे “हील-स्ट्राइक” (Heel-strike) कहा जाता है। टो वॉकिंग में यह हील-स्ट्राइक नदारद होती है।
ज्यादातर मामलों में, इसे “इडियोपैथिक टो वॉकिंग” (Idiopathic Toe Walking) कहा जाता है, जिसका अर्थ है कि बच्चे को कोई चिकित्सीय समस्या नहीं है, और पंजों पर चलना केवल एक आदत है। हालांकि, कुछ मामलों में, यह अंतर्निहित न्यूरोलॉजिकल (तंत्रिका संबंधी) या मस्कुलोस्केलेटल (मांसपेशियों और हड्डियों संबंधी) स्थितियों का संकेत हो सकता है।
टो वॉकिंग के कारण (Causes of Toe Walking)
टो वॉकिंग के कारणों को मुख्य रूप से दो श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है: आदतन (Habitual) और चिकित्सीय (Medical)।
1. इडियोपैथिक टो वॉकिंग (आदतन)
यह सबसे सामान्य कारण है। इसमें बच्चे की मांसपेशियां और नसें पूरी तरह से सामान्य होती हैं, और वे चाहें तो अपनी एड़ी को जमीन पर टिका सकते हैं। लेकिन वे आदतवश या पसंद के कारण पंजों पर चलते हैं। अक्सर ऐसे बच्चों के परिवार में टो वॉकिंग का इतिहास हो सकता है।
2. ए킬िस टेंडन का छोटा होना (Short Achilles Tendon)
ए킬िस टेंडन (Achilles Tendon) वह मोटी नस है जो आपकी पिंडली की मांसपेशियों (calf muscles) को एड़ी की हड्डी के पीछे से जोड़ती है। यदि यह टेंडन बहुत छोटा या कड़ा है, तो यह एड़ी को जमीन तक नीचे आने से रोकता है। इसके परिणामस्वरूप, बच्चे को खड़े होने या चलने के लिए पंजों का सहारा लेना पड़ता है।
3. सेरेब्रल पाल्सी (Cerebral Palsy – CP)
सेरेब्रल पाल्सी मस्तिष्क की क्षति या असामान्य विकास के कारण होने वाला एक विकार है जो मांसपेशियों के नियंत्रण को प्रभावित करता है। सीपी के कुछ प्रकारों में, मांसपेशियां बहुत सख्त (spastic) हो जाती हैं। यदि पिंडली की मांसपेशियां बहुत सख्त हैं, तो वे एड़ी को ऊपर खींच लेती हैं, जिससे बच्चा पंजों के बल चलने लगता है। यह अक्सर समय से पहले जन्मे बच्चों (premature babies) में देखा जाता है।
4. मस्कुलर डिस्ट्रॉफी (Muscular Dystrophy)
यह एक आनुवंशिक रोग है जिसमें समय के साथ मांसपेशियां कमजोर और क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। ड्यूशेन मस्कुलर डिस्ट्रॉफी (Duchenne Muscular Dystrophy) जैसे प्रकारों में, बच्चे शुरू में सामान्य रूप से चल सकते हैं, लेकिन जैसे-जैसे मांसपेशियां कमजोर होती हैं, वे संतुलन बनाने के लिए पंजों पर चलना शुरू कर देते हैं।
5. ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (Autism Spectrum Disorder – ASD)
टो वॉकिंग का संबंध ऑटिज्म और अन्य विकासात्मक विकारों से भी देखा गया है। ऑटिज्म से ग्रस्त बच्चों में संवेदी प्रसंस्करण (sensory processing) की समस्याएं हो सकती हैं। हो सकता है कि उन्हें अपनी एड़ी पर दबाव महसूस करना पसंद न हो, या वे अपनी मांसपेशियों को तानने (flexing) से मिलने वाली संवेदना को पसंद करते हों।
महत्वपूर्ण नोट: यदि आपका बच्चा पंजों पर चलता है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि उसे ऑटिज्म है। हालांकि, अगर टो वॉकिंग के साथ-साथ बच्चे में बातचीत (communication) या सामाजिक कौशल (social skills) की कमी भी दिखाई दे, तो डॉक्टर से परामर्श लेना आवश्यक है।
लक्षण और पहचान (Symptoms and Signs)
टो वॉकिंग का सबसे स्पष्ट लक्षण पंजों के बल चलना है, लेकिन इसके साथ कुछ अन्य संकेत भी जुड़े हो सकते हैं:
- संतुलन की समस्या: बच्चा चलते समय बार-बार गिर सकता है।
- सपाट पैर न रख पाना: बच्चा नंगे पैर या जूते पहनकर, एड़ी को जमीन पर टिकाने में असमर्थ होता है।
- शारीरिक विकृति: लंबे समय तक पंजों पर चलने से पैर का अगला हिस्सा चौड़ा हो सकता है और एड़ी संकरी हो सकती है।
- मांसपेशियों में जकड़न: पिंडली की मांसपेशियां बहुत सख्त महसूस हो सकती हैं।
- जूते पहनने में कठिनाई: एड़ी के जमीन पर न होने के कारण सामान्य जूते पहनना मुश्किल हो सकता है।
- दर्द: बड़े बच्चों को एड़ी, घुटनों या कूल्हों में दर्द की शिकायत हो सकती है।
निदान (Diagnosis)
यदि आपका बच्चा 2 साल की उम्र के बाद भी पंजों पर चल रहा है, तो बाल रोग विशेषज्ञ (Pediatrician) या हड्डी रोग विशेषज्ञ (Orthopedist) से मिलना चाहिए। निदान प्रक्रिया में निम्नलिखित शामिल हो सकते हैं:
- शारीरिक परीक्षण (Physical Exam): डॉक्टर बच्चे के पैरों की जांच करेंगे, ए킬िस टेंडन की जकड़न को महसूस करेंगे और टखने (ankle) की गति (Range of Motion) की जांच करेंगे।
- चाल का विश्लेषण (Gait Analysis): डॉक्टर बच्चे को कमरे में चलने के लिए कहेंगे ताकि वे देख सकें कि चाल में कोई असामान्यता तो नहीं है।
- न्यूरोलॉजिकल परीक्षा (Neurological Exam): यह जांचने के लिए कि क्या मांसपेशियों की ताकत और रिफ्लेक्स (reflexes) सामान्य हैं। यह सेरेब्रल पाल्सी या अन्य तंत्रिका संबंधी समस्याओं को बाहर करने में मदद करता है।
- इतिहास (Medical History): डॉक्टर पूछ सकते हैं कि क्या बच्चा समय से पहले पैदा हुआ था (premature birth) या क्या परिवार में किसी और को यह समस्या थी।
- EMG (इलेक्ट्रोमायोग्राफी): दुर्लभ मामलों में, यदि मांसपेशियों या नसों में समस्या का संदेह हो, तो डॉक्टर मांसपेशियों की विद्युत गतिविधि को मापने के लिए EMG का सुझाव दे सकते हैं।
जोखिम और जटिलताएँ (Risks and Complications)
यदि टो वॉकिंग का इलाज नहीं किया जाता है और यह लंबे समय तक जारी रहता है, तो इसके कई नकारात्मक परिणाम हो सकते हैं:
- स्थायी जकड़न: ए킬िस टेंडन और पिंडली की मांसपेशियां स्थायी रूप से छोटी हो सकती हैं, जिससे एड़ी को जमीन पर लाना असंभव हो जाता है।
- हड्डियों में बदलाव: पैरों की हड्डियों का आकार बदल सकता है।
- संतुलन और गिरने का खतरा: पंजों पर चलने से गुरुत्वाकर्षण का केंद्र (center of gravity) बदल जाता है, जिससे गिरने का जोखिम बढ़ जाता है।
- सामाजिक समस्याएँ: स्कूल जाने वाले बच्चों को उनकी चाल के कारण अन्य बच्चों द्वारा चिढ़ाए जाने का सामना करना पड़ सकता है।
- जोड़ों में दर्द: यह चाल घुटनों और कूल्हों पर अतिरिक्त तनाव डालती है, जिससे भविष्य में गठिया या दर्द की समस्या हो सकती है।
उपचार के विकल्प (Treatment Options)
उपचार इस बात पर निर्भर करता है कि समस्या कितनी गंभीर है और इसका कारण क्या है।
1. निगरानी (Observation)
यदि बच्चा छोटा है (2-3 वर्ष) और डॉक्टर को कोई न्यूरोलॉजिकल समस्या नहीं मिलती है, तो वे “प्रतीक्षा करें और देखें” (Wait and see) की सलाह दे सकते हैं। कई बच्चे समय के साथ स्वाभाविक रूप से इसे छोड़ देते हैं।
2. फिजिकल थेरेपी (Physical Therapy – PT)
यह उपचार का पहला चरण है। फिजियोथेरेपिस्ट बच्चे को मांसपेशियों को खींचने (stretching) और मजबूत करने वाले व्यायाम सिखाते हैं। इसका उद्देश्य ए킬िस टेंडन की लंबाई बढ़ाना और एड़ी को नीचे लाना है।
3. सीरियल कास्टिंग (Serial Casting)
यदि फिजिकल थेरेपी से मदद नहीं मिलती है और टेंडन बहुत सख्त है, तो डॉक्टर ‘सीरियल कास्टिंग’ का सुझाव दे सकते हैं।
- इसमें बच्चे के पैर पर फाइबरग्लास या प्लास्टर का कास्ट (plaster) लगाया जाता है।
- कास्ट को इस तरह लगाया जाता है कि टेंडन को थोड़ा खींचा जा सके।
- हर 1-2 सप्ताह में पुराना कास्ट हटाकर नया कास्ट लगाया जाता है, जिसमें खिंचाव को थोड़ा और बढ़ाया जाता है।
- यह प्रक्रिया कई हफ्तों तक चल सकती है जब तक कि टेंडन पर्याप्त लंबा न हो जाए।
4. ब्रेसेस और ऑर्थोटिक्स (Braces and Orthotics AFOs)
डॉक्टर AFO (Ankle-Foot Orthosis) नामक एक विशेष प्लास्टिक ब्रेस पहनने की सलाह दे सकते हैं। यह ब्रेस पैर को 90 डिग्री के कोण पर रखता है, जिससे बच्चे के लिए पंजों पर खड़ा होना मुश्किल हो जाता है और टेंडन में खिंचाव बना रहता है। इसे दिन में या कभी-कभी केवल रात में पहना जा सकता है।
5. बोटोक्स इंजेक्शन (Botox Injections)
सेरेब्रल पाल्सी जैसे मामलों में जहां मांसपेशियां बहुत अधिक सख्त (spastic) होती हैं, डॉक्टर पिंडलियों में बोटोक्स (Botulinum toxin A) का इंजेक्शन लगा सकते हैं। यह अस्थायी रूप से मांसपेशियों को कमजोर/शिथिल करता है, जिससे उन्हें आसानी से स्ट्रेच किया जा सकता है। इसे अक्सर कास्टिंग या थेरेपी के साथ मिलाकर प्रयोग किया जाता है।
6. सर्जरी (Surgery)
यदि अन्य सभी उपचार विफल हो जाते हैं और बच्चा 5-6 वर्ष से अधिक उम्र का है, तो सर्जरी की आवश्यकता हो सकती है। सर्जरी में सर्जन ए킬िस टेंडन या पिंडली की मांसपेशियों को लंबा करते हैं। इसे “Tendon Lengthening” कहा जाता है। सर्जरी के बाद, पैर को ठीक होने के लिए 4-6 सप्ताह तक कास्ट में रखा जाता है।
घरेलू व्यायाम (Home Exercises for Parents)
डॉक्टर की सलाह के साथ, माता-पिता घर पर कुछ सरल व्यायाम करा सकते हैं:
- काल्फ स्ट्रेच (Calf Stretch): बच्चे को पीठ के बल लिटाएं और घुटने को सीधा रखें। धीरे से उनके पैर के पंजे को उनकी नाक की तरफ ऊपर धकेलें ताकि पिंडली में खिंचाव महसूस हो। इसे 15-30 सेकंड तक रोकें। (यह दर्दनाक नहीं होना चाहिए)।
- भालू की चाल (Bear Walking): बच्चे को अपने हाथों और पैरों पर चलने के लिए कहें (घुटने जमीन पर नहीं लगने चाहिए)। इस स्थिति में एड़ी का जमीन पर टिकना आसान होता है और मांसपेशियों में खिंचाव आता है।
- पहाड़ी पर चढ़ना (Walking Uphill): बच्चे को ढलान वाली सतह या स्लाइड पर ऊपर की ओर चलने के लिए प्रोत्साहित करें। इससे एड़ी को नीचे आने के लिए मजबूर होना पड़ता है।
- पंजों से चीजें उठाना: बच्चे को पंजों से मार्बल या पेंसिल उठाने का खेल खिलाएं। यह पैरों की छोटी मांसपेशियों को मजबूत करता है।
- स्क्वाट्स (Squats): बच्चे को पूरे पैर जमीन पर रखकर बैठने और उठने का अभ्यास कराएं।
डॉक्टर को कब दिखाना चाहिए? (When to see a doctor)
आपको विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए यदि:
- बच्चा 2 साल की उम्र के बाद भी लगातार पंजों पर चलता है।
- बच्चे की चाल में लंगड़ापन है या एक पैर दूसरे से अलग व्यवहार कर रहा है।
- बच्चा पहले सामान्य रूप से चलता था और अब अचानक पंजों पर चलने लगा है।
- बच्चे को पैरों में दर्द या कठोरता की शिकायत है।
- बच्चे के अन्य विकासात्मक मील के पत्थर (milestones) जैसे बोलना, बैठना या हाथ का उपयोग करना देरी से हो रहे हैं।
निष्कर्ष (Conclusion)
टो वॉकिंग बच्चों में एक आम स्थिति है और अक्सर यह चिंता का कारण नहीं होती। इडियोपैथिक टो वॉकिंग वाले बच्चे पूरी तरह से सामान्य और स्वस्थ जीवन जीते हैं। हालांकि, माता-पिता के रूप में सतर्क रहना महत्वपूर्ण है। यदि यह आदत लंबे समय तक बनी रहती है या शारीरिक समस्याओं का कारण बनती है, तो समय पर हस्तक्षेप (Early Intervention) बहुत जरूरी है।
ज्यादातर मामलों में, स्ट्रेचिंग, फिजिकल थेरेपी और सही जूतों के इस्तेमाल से इसे ठीक किया जा सकता है। सर्जरी की आवश्यकता दुर्लभ होती है। सही मार्गदर्शन और धैर्य के साथ, आपका बच्चा जल्द ही अपने पूरे कदम जमीन पर जमाकर आत्मविश्वास के साथ चलने लगेगा।
अस्वीकरण (Disclaimer): यह लेख केवल सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए है और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। किसी भी निदान या उपचार के लिए हमेशा योग्य चिकित्सक से परामर्श करें।
