अपर ट्रेपेज़ियस दर्द: कारण, लक्षण और संपूर्ण गाइड
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी, डेस्क जॉब और मोबाइल के अत्यधिक उपयोग ने हमें कई शारीरिक समस्याएं दी हैं, जिनमें से सबसे आम है—गर्दन और कंधे का दर्द। अक्सर जब हम अपनी गर्दन के आधार (base of the neck) और कंधों के ऊपर तनाव महसूस करते हैं, तो यह वास्तव में अपर ट्रेपेज़ियस (Upper Trapezius) मांसपेशी का दर्द होता है।
यह एक ऐसा दर्द है जिसे अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है, लेकिन अगर इसका समय पर इलाज न किया जाए, तो यह पुराने सिरदर्द (Tension Headaches) और सर्वाइकल की समस्याओं का रूप ले सकता है। इस विस्तृत लेख में, हम समझेंगे कि इस मांसपेशी के दर्द को वैज्ञानिक और व्यावहारिक तरीके से कैसे ठीक किया जाए।
अपर ट्रेपेज़ियस दर्द Video
1. अपर ट्रेपेज़ियस मांसपेशी को समझना (Understanding the Upper Trapezius Muscle)
इलाज शुरू करने से पहले, यह समझना बहुत जरूरी है कि यह मांसपेशी कहाँ है और यह क्या काम करती है।
ट्रेपेज़ियस क्या है?
ट्रेपेज़ियस आपकी पीठ के ऊपरी हिस्से की एक बड़ी, त्रिकोण (triangle) के आकार की मांसपेशी है। इसे तीन भागों में विभाजित किया गया है:
- अपर ट्रेपेज़ियस (Upper Trapezius): यह गर्दन के आधार से शुरू होकर कंधों तक जाती है।
- मिडल ट्रेपेज़ियस (Middle Trapezius): यह कंधों के बीच में होती है।
- लोअर ट्रेपेज़ियस (Lower Trapezius): यह पीठ के बीच में नीचे की ओर होती है।
हमारा मुख्य फोकस अपर ट्रेपेज़ियस पर है। यह वह हिस्सा है जिसे आप तब छूते हैं जब कोई आपसे कहता है कि “मेरे कंधे दबा दो।”
इसका काम क्या है?
अपर ट्रेपेज़ियस के मुख्य कार्य हैं:
- कंधों को ऊपर उठाना (Shrugging): जब आप ‘पता नहीं’ का इशारा करते हुए कंधे उचकाते हैं।
- गर्दन की गति: गर्दन को पीछे की ओर झुकाना या दाएं-बाएं घुमाना।
- बांहों का वजन उठाना: यह आपके हाथों के वजन को सपोर्ट करता है।
इसे “तनाव की मांसपेशी” क्यों कहा जाता है?
अपर ट्रेपेज़ियस भावनाओं के प्रति बहुत संवेदनशील होती है। जब आप तनाव (Stress) या चिंता (Anxiety) में होते हैं, तो आप अनजाने में अपने कंधों को कानों की तरफ ऊपर उठा लेते हैं। इसे “गार्डिंग रिफ्लेक्स” कहा जाता है। लगातार सिकुड़े रहने के कारण इस मांसपेशी में ट्रिगर पॉइंट्स (गांठें) बन जाती हैं, जो दर्द का कारण बनती हैं।
2. अपर ट्रेपेज़ियस के दर्द के सामान्य कारण (Common Causes of Upper Trapezius Pain)
दर्द को जड़ से मिटाने के लिए यह जानना जरूरी है कि यह हो क्यों रहा है। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:
A. ख़राब पोश्चर (Poor Posture) और “टेक नेक” (Tech Neck)
यह आज के समय का सबसे बड़ा कारण है।
- फॉरवर्ड हेड पोश्चर (Forward Head Posture): जब आप कंप्यूटर स्क्रीन या मोबाइल देखने के लिए अपनी गर्दन को आगे की ओर झुकाते हैं। मानव सिर का वजन लगभग 5-6 किलो होता है। जब आप गर्दन को 60 डिग्री आगे झुकाते हैं, तो गुरुत्वाकर्षण के कारण गर्दन की मांसपेशियों पर 27 किलो तक का दबाव पड़ता है। यह अतिरिक्त भार अपर ट्रेपेज़ियस को उठाना पड़ता है।
B. तनाव और चिंता (Stress and Anxiety)
जैसा कि पहले बताया गया है, तनाव में हम अपने कंधों को सिकोड़ लेते हैं। यदि आप दिन में 8 घंटे तनाव में रहते हैं, तो इसका मतलब है कि आपकी यह मांसपेशी 8 घंटे तक जिम की तरह “वर्कआउट” कर रही है, बिना किसी आराम के। इससे वह थक जाती है और दर्द करने लगती है।
C. एर्गोनॉमिक्स की कमी (Poor Ergonomics)
- कीबोर्ड की स्थिति: यदि आपका कीबोर्ड बहुत ऊंचा है या माउस बहुत दूर है, तो आपको काम करने के लिए अपने कंधों को थोड़ा ऊपर उठाए रखना पड़ता है।
- स्क्रीन की ऊंचाई: अगर मॉनिटर आँखों के लेवल से नीचे है, तो आप लगातार नीचे देख रहे हैं।
D. भारी बैग उठाना
एक ही कंधे पर भारी लैपटॉप बैग या पर्स टांगने से उस तरफ की अपर ट्रेपेज़ियस को कंधे को गिरने से रोकने के लिए लगातार काम करना पड़ता है।
E. सोने की गलत स्थिति
पेट के बल सोना या बहुत ऊंचा तकिया इस्तेमाल करना गर्दन को रात भर अजीब स्थिति में रखता है, जिससे सुबह अकड़न होती है।
3. अपर ट्रेपेज़ियस के दर्द को कैसे ठीक करें: स्टेप-बाय-स्टेप दृष्टिकोण (Step-by-Step Approach to Fix Pain)
इस दर्द को ठीक करने के लिए हमें एक बहुआयामी दृष्टिकोण (Multi-dimensional approach) अपनाना होगा। यहाँ एक प्रभावी कार्ययोजना दी गई है:
चरण 1: तत्काल राहत (Immediate Relief)
जब दर्द बहुत तेज हो (Acute Phase), तो व्यायाम करने से पहले मांसपेशियों को शांत करना जरूरी है।
- हीट थेरेपी (Heat Therapy): दिन में 2-3 बार 15-20 मिनट के लिए गर्दन और कंधों पर हीटिंग पैड या गर्म पानी की थैली रखें। गर्मी रक्त प्रवाह को बढ़ाती है और मांसपेशियों की जकड़न को कम करती है।
- आराम (Rest): उन गतिविधियों को रोक दें जिनसे दर्द बढ़ रहा है (जैसे भारी वजन उठाना या घंटों तक टाइपिंग करना)।
चरण 2: सेल्फ-मसाज और ट्रिगर पॉइंट रिलीज़
अपर ट्रेपेज़ियस में अक्सर “गांठें” (Trigger Points) बन जाती हैं। इन्हें खोलना बहुत जरूरी है।
- टेनिस बॉल तकनीक:
- दीवार के पास खड़े हो जाएं।
- एक टेनिस बॉल या लैक्रॉस बॉल को अपनी पीठ (कंधे के ऊपर और रीढ़ की हड्डी के बीच के मांसल भाग) और दीवार के बीच रखें।
- धीरे-धीरे अपने शरीर को हिलाएं ताकि बॉल उस दर्दनाक बिंदु (Trigger point) को दबाए।
- जब आपको वह “मीठा दर्द” महसूस हो, तो 30-60 सेकंड के लिए वहां रुकें। गहरी सांस लें और छोड़ें।
चरण 3: स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज (Stretching Exercises)
जब मांसपेशी थोड़ी ढीली हो जाए, तो उसे स्ट्रेच करें। ये स्ट्रेच दिन में 2-3 बार करें।
1. अपर ट्रेपेज़ियस स्ट्रेच (Ear to Shoulder):
- सीधे बैठें।
- अपने दाहिने हाथ को अपनी पीठ के पीछे रखें (ताकि आपका दाहिना कंधा नीचे रहे)।
- धीरे से अपने बाएं कान को बाएं कंधे की ओर झुकाएं।
- हल्का खिंचाव महसूस करने के लिए अपने बाएं हाथ से सिर को थोड़ा और झुका सकते हैं।
- 30 सेकंड तक रुकें और दूसरी तरफ दोहराएं।

2. लेवेटर स्कैपुले स्ट्रेच (Nose to Armpit):
- यह मांसपेशी ट्रेपेज़ियस के ठीक नीचे होती है और अक्सर गर्दन की अकड़न का कारण बनती है।
- सीधे बैठें।
- अपनी नाक को अपनी बगल (Armpit) की ओर घुमाएं और नीचे देखें।
- हाथ से सिर को धीरे से नीचे दबाएं।
- 30 सेकंड होल्ड करें।

चरण 4: मजबूती (Strengthening) – सबसे महत्वपूर्ण चरण
ज्यादातर लोग सिर्फ स्ट्रेचिंग करते हैं, लेकिन अगर आपकी मांसपेशियां कमजोर हैं, तो दर्द वापस आ जाएगा। हमें लोअर ट्रेपेज़ियस (Lower Trapezius) को मजबूत करना होगा ताकि अपर ट्रेपेज़ियस को कम काम करना पड़े।
1. स्कैपुलर रिट्रैक्शन (Shoulder Squeezes):
- अपने दोनों कंधों को पीछे और नीचे की ओर ले जाएं।
- कल्पना करें कि आप अपने कंधों के ब्लेड (Shoulder blades) के बीच एक पेंसिल को दबाने की कोशिश कर रहे हैं।
- 5 सेकंड होल्ड करें और छोड़ दें। इसे 10-15 बार करें।

2. W-एक्सरसाइज:
- दीवार के सहारे अपनी पीठ लगाकर खड़े हो जाएं।
- अपने हाथों को ऊपर उठाएं ताकि आपका शरीर और हाथ मिलकर ‘W’ का आकार बनाएं।
- कोशिश करें कि आपकी कोहनी और कलाई दीवार को छूती रहे।
- इसे होल्ड करें और फिर हाथों को ऊपर ‘Y’ आकार में ले जाएं और वापस ‘W’ में लाएं।

4. मुद्र सुधारा (Posture Correction): लंबे समय तक राहत के लिए कुंजी
आप चाहे कितना भी व्यायाम कर लें, यदि आप दिन के 8-10 घंटे खराब पोश्चर में बिताते हैं, तो दर्द कभी ठीक नहीं होगा। इसे ठीक करना ही स्थायी समाधान है।
वर्कस्टेशन एर्गोनॉमिक्स (Workstation Ergonomics)
- मॉनिटर: अपनी स्क्रीन को ऊपर उठाएं ताकि स्क्रीन का शीर्ष भाग (Top line) आपकी आंखों के स्तर (Eye level) पर हो। इसके लिए लैपटॉप स्टैंड या किताबों का उपयोग करें।
- कुर्सी: ऐसी कुर्सी का उपयोग करें जो आपकी पीठ के निचले हिस्से (Lumbar) को सपोर्ट करे। आपके पैर जमीन पर सपाट होने चाहिए।
- कोहनी: काम करते समय आपकी कोहनी 90 डिग्री के कोण पर होनी चाहिए और शरीर के पास होनी चाहिए। अगर कोहनी दूर होगी, तो ट्रेपेज़ियस पर लोड बढ़ेगा।
दिमागी जांच (Mindfulness Check-ins)
हर 30 मिनट में एक अलार्म सेट करें। जब अलार्म बजे, तो अपने आप से पूछें: “क्या मेरे कंधे मेरे कानों को छू रहे हैं?”
अगर जवाब “हाँ” है, तो:
- गहरी सांस लें।
- सांस छोड़ते हुए कंधों को नीचे (Relax) छोड़ दें।
- गर्दन को थोड़ा घुमाएं।
सोने का तरीका
- अगर आप करवट लेकर सोते हैं, तो तकिया इतना मोटा होना चाहिए कि आपकी गर्दन और बिस्तर के बीच की जगह भर जाए, ताकि आपकी रीढ़ सीधी रहे।
- पेट के बल सोने से बचें क्योंकि इससे गर्दन एक तरफ मुड़ी रहती है, जिससे ट्रेपेज़ियस पर बहुत खिंचाव पड़ता है।
5. फिजियोथेरेपिस्ट से कब मिलें (When to See a Physiotherapist)
समस्या गंभीर है और आपको विशेषज्ञ की मदद की जरूरत है:
- न्यूरोलॉजिकल लक्षण: यदि दर्द के साथ-साथ आपके हाथ या उंगलियों में सुन्नता (Numbness), झुनझुनी (Tingling) या कमजोरी महसूस हो रही है। यह सर्वाइकल स्पाइन में नस दबने का संकेत हो सकता है।
- चोट का इतिहास: अगर यह दर्द किसी दुर्घटना, गिरने या खेल की चोट के बाद शुरू हुआ है।
- रात में दर्द: अगर दर्द इतना तेज है कि रात में आपकी नींद खुल जाती है।
- कोई सुधार नहीं: अगर 2-3 सप्ताह तक लगातार घरेलू देखभाल और व्यायाम के बाद भी दर्द कम नहीं हो रहा है या बढ़ रहा है।
- अन्य लक्षण: अगर गर्दन दर्द के साथ सीने में दर्द, सांस लेने में तकलीफ, चक्कर आना या तेज बुखार हो।
एक फिजियोथेरेपिस्ट आपकी स्थिति का सटीक आकलन (Assessment) करेगा और आपके लिए ड्राई नीडलिंग (Dry Needling), टेपिंग (Taping) या मैनुअल थेरेपी जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग कर सकता है।
6. निष्कर्ष (Conclusion)
अपर ट्रेपेज़ियस का दर्द रातों-रात पैदा नहीं होता; यह वर्षों की गलत आदतों, तनाव और खराब पोश्चर का परिणाम है। इसलिए, यह रातों-रात ठीक भी नहीं होगा।
इस दर्द को ठीक करने का मंत्र है: धैर्य और निरंतरता (Consistency)।
आपको तीन चीजों का संतुलन बनाना होगा:
- तनावग्रस्त मांसपेशियों को आराम और स्ट्रेच देना।
- कमजोर मांसपेशियों (जैसे लोअर ट्रेपेज़ियस) को मजबूत करना।
- दिन भर अपने पोश्चर के प्रति सचेत रहना।
यदि आप आज से ही ऊपर बताए गए स्ट्रेच और एर्गोनॉमिक बदलावों को अपनाते हैं, तो आप न केवल दर्द से छुटकारा पाएंगे, बल्कि भविष्य में होने वाली गर्दन और रीढ़ की हड्डी की गंभीर समस्याओं से भी बच सकेंगे। याद रखें, एक स्वस्थ शरीर ही सुखी जीवन का आधार है। अपनी गर्दन और कंधों का ख्याल रखें, वे आपके जीवन का बोझ उठा रहे हैं!
