कार्य गतिविधि विश्लेषण (Work activity analysis) और सुधार
कार्य गतिविधि विश्लेषण और सुधार: दक्षता और उत्पादकता की कुंजी
आधुनिक व्यावसायिक परिदृश्य में, किसी भी संगठन की सफलता सीधे तौर पर उसकी दक्षता (Efficiency) और उत्पादकता (Productivity) पर निर्भर करती है। इन लक्ष्यों को प्राप्त करने का एक मूलभूत तरीका है कार्य गतिविधि विश्लेषण (Work Activity Analysis) और उसमें निरंतर सुधार।
कार्य गतिविधि विश्लेषण (WAA), जिसे अक्सर कार्य अध्ययन (Work Study) या प्रक्रिया विश्लेषण (Process Analysis) के रूप में भी जाना जाता है, एक संरचित (Structured) दृष्टिकोण है जिसका उद्देश्य किसी भी कार्य या गतिविधि के घटकों को समझना, उनका मूल्यांकन करना और उन्हें इष्टतम (Optimize) बनाना है।
यह लेख कार्य गतिविधि विश्लेषण की प्रक्रिया, इसके महत्व, उपयोग की जाने वाली तकनीकों और संगठनात्मक सुधार में इसकी भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डालता है।
कार्य गतिविधि विश्लेषण क्या है?
कार्य गतिविधि विश्लेषण एक व्यवस्थित प्रक्रिया है जिसके तहत किसी कर्मचारी या समूह द्वारा किए जा रहे कार्य के प्रत्येक चरण का गहन अध्ययन किया जाता है। इसका मुख्य लक्ष्य यह पहचानना है कि:
- क्या किया जा रहा है? (मूल गतिविधि)
- यह कैसे किया जा रहा है? (विधि और उपकरण)
- यह क्यों किया जा रहा है? (गतिविधि का उद्देश्य)
- इसे कहाँ और कब किया जा रहा है? (स्थान और समय)
- इसे कौन कर रहा है? (संबंधित व्यक्ति)
इस विश्लेषण के माध्यम से, प्रबंधक उन सभी गतिविधियों को चार मुख्य श्रेणियों में विभाजित कर सकते हैं:
- मूल्य-वर्धक गतिविधियाँ (Value-Adding Activities): वे कार्य जो सीधे उत्पाद या सेवा के मूल्य में वृद्धि करते हैं (उदाहरण: उत्पाद को असेंबल करना)।
- अर्ध-मूल्य-वर्धक गतिविधियाँ (Semi-Value-Adding Activities): वे कार्य जो मूल्य-वर्धक गतिविधि का समर्थन करते हैं लेकिन ग्राहक के लिए सीधे मूल्य नहीं जोड़ते (उदाहरण: उपकरण सेट करना)।
- लॉजिस्टिक्स गतिविधियाँ (Logistics Activities): सामग्री को संभालना, परिवहन करना या प्रतीक्षा करना।
- अपशिष्ट/व्यर्थ गतिविधियाँ (Waste/Non-Value-Adding Activities): वे कार्य जो अनावश्यक हैं और जिन्हें समाप्त किया जाना चाहिए (उदाहरण: दोषों को ठीक करना, अत्यधिक चलना, अनावश्यक प्रतीक्षा)।
कार्य गतिविधि विश्लेषण का महत्व
कार्य गतिविधि विश्लेषण किसी भी संगठन के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण है क्योंकि यह:
- उत्पादकता बढ़ाता है: अनावश्यक या दोहराव वाली गतिविधियों को हटाकर कर्मचारियों को अधिक मूल्य-वर्धक कार्य करने की अनुमति देता है।
- लागत कम करता है: अप्रभावी प्रक्रियाओं और अपशिष्ट को समाप्त करके समय, श्रम और सामग्री की लागत में कमी आती है।
- कार्य की गुणवत्ता सुधारता है: प्रक्रियाओं को मानकीकृत (Standardize) करके त्रुटियों और दोषों की संभावना को कम करता है।
- कर्मचारी संतुष्टि बढ़ाता है: कार्यप्रवाह को सुव्यवस्थित करके और अनावश्यक तनाव या थकान को कम करके कार्यस्थल को अधिक एर्गोनोमिक (Ergonomic) और संतोषजनक बनाता है।
विश्लेषण की मुख्य तकनीकें
कार्य गतिविधि का विश्लेषण करने के लिए कई विधियों का उपयोग किया जाता है:
१. समय अध्ययन (Time Study)
- उद्देश्य: किसी विशेष कार्य को करने के लिए आवश्यक मानक समय निर्धारित करना।
- प्रक्रिया: एक प्रशिक्षित विश्लेषक स्टॉपवॉच का उपयोग करके कार्य के प्रत्येक तत्व को करने में लगने वाले समय को रिकॉर्ड करता है। यह तकनीक विशेष रूप से दोहराव वाले (Repetitive) और कम चक्र समय वाले कार्यों के लिए उपयोगी है।
२. गति अध्ययन (Motion Study)
- उद्देश्य: कार्य को करने के लिए आवश्यक शारीरिक गतिविधियों को सरल और कुशल बनाना।
- प्रक्रिया: इसमें किसी कार्य को करने में कर्मचारियों द्वारा किए जाने वाले अनावश्यक या थकाऊ हाथों और शरीर की हरकतों (Gestures) को खत्म करने पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। अक्सर इसमें वीडियो रिकॉर्डिंग या थर्बलिग्स (Therbligs) नामक मूल गति तत्वों का विश्लेषण शामिल होता है।
३. कार्य सैंपलिंग (Work Sampling)
- उद्देश्य: एक लंबी अवधि में एक मशीन या कर्मचारी किस विशिष्ट गतिविधि में समय बिताते हैं, इसका अनुमान लगाना।
- प्रक्रिया: विश्लेषक अनियमित (Random) अंतराल पर कार्यस्थल का अवलोकन करता है और उस समय किए जा रहे कार्य को रिकॉर्ड करता है। यह तकनीक बिना निरंतर निगरानी के बड़े कार्य समूहों का विश्लेषण करने का लागत प्रभावी तरीका है।
४. प्रक्रिया चार्ट (Process Charts)
- उद्देश्य: किसी कार्य या सामग्री के प्रवाह को ग्राफ़िक रूप से दर्शाना।
- प्रकार: फ़्लो प्रोसेस चार्ट (Flow Process Chart) (जो सामग्री, कर्मचारी या उपकरण के चरणों को दिखाता है) और ऑपरेशन प्रोसेस चार्ट (Operation Process Chart) (जो केवल मुख्य संचालन और निरीक्षण को दिखाता है) सबसे सामान्य प्रकार हैं। ये चार्ट अपशिष्ट, बाधाओं (Bottlenecks) और अनावश्यक दूरी की यात्रा की पहचान करने में मदद करते हैं।
कार्य गतिविधि में सुधार की प्रक्रिया (Improvement Process)
विश्लेषण के बाद, सुधार का चरण शुरू होता है, जो पाँच मुख्य चरणों का पालन करता है:
१. प्रश्न पूछना (Questioning the Method)
विश्लेषण से प्राप्त डेटा के आधार पर, प्रत्येक गतिविधि से संबंधित मौलिक प्रश्न पूछें:
- क्या यह गतिविधि आवश्यक है?
- क्यों इसे इस तरह से किया जाता है?
- कैसे इसे आसान बनाया जा सकता है?
- कौन इसे बेहतर कर सकता है?
२. विकल्प विकसित करना (Developing Alternatives)
प्रश्न पूछने के चरण से प्राप्त अंतर्दृष्टि (Insights) के आधार पर, कार्य करने के लिए नए, अधिक कुशल तरीके विकसित करें।
- हटाना (Eliminate): यदि संभव हो तो अनावश्यक कदम को पूरी तरह से हटा दें।
- संयोजन (Combine): दो या दो से अधिक चरणों को एक साथ मिलाएं।
- पुनर्व्यवस्थित करना (Rearrange): कार्य के अनुक्रम (Sequence) को बदलें।
- सरलीकरण (Simplify): कार्य को करने की विधि को सरल बनाएं (जैसे बेहतर उपकरण या एर्गोनोमिक सेटअप)।
३. नई विधि स्थापित करना (Establishing the New Method)
विकसित किए गए सर्वोत्तम विकल्प का चयन करें। यह सुनिश्चित करने के लिए कि नई विधि प्रभावी है, पायलट परीक्षण (Pilot Test) करें। कर्मचारियों से प्रतिक्रिया लें और आवश्यक समायोजन करें।
४. प्रशिक्षण और मानकीकरण (Training and Standardization)
एक बार जब नई विधि सिद्ध हो जाती है, तो सभी संबंधित कर्मचारियों को इस पर प्रशिक्षित (Trained) करें। नई विधि को एक मानक संचालन प्रक्रिया (Standard Operating Procedure – SOP) के रूप में प्रलेखित (Documented) करें ताकि हर कोई एक ही, सबसे प्रभावी तरीके से काम करे।
५. प्रदर्शन की निगरानी (Monitoring Performance)
सुधार की प्रक्रिया यहाँ समाप्त नहीं होती है। स्थापित नई विधि के प्रदर्शन को नियमित रूप से मापा जाना चाहिए। प्रदर्शन संकेतक (KPIs) जैसे उत्पादकता, दोष दर, और चक्र समय की निगरानी करें ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि सुधार स्थायी हैं और निरंतर सुधार की संस्कृति (Culture of Continuous Improvement) को बढ़ावा दिया जा सके।
निष्कर्ष
कार्य गतिविधि विश्लेषण और सुधार किसी भी प्रगतिशील संगठन के लिए लीन मैनेजमेंट (Lean Management) और परिचालन उत्कृष्टता (Operational Excellence) प्राप्त करने का एक अनिवार्य स्तंभ है। यह केवल प्रक्रियाओं में कटौती करने या कर्मचारियों पर दबाव डालने के बारे में नहीं है, बल्कि स्मार्ट तरीके से काम करने के बारे में है।
व्यवस्थित रूप से काम का विश्लेषण करके, संगठन न केवल अपनी निचली रेखा (Bottom Line) में सुधार कर सकते हैं, बल्कि अपने कर्मचारियों के लिए एक सुरक्षित, कम तनावपूर्ण और अधिक उत्पादक कार्य वातावरण भी बना सकते हैं। निरंतर विश्लेषण और सुधार की यह संस्कृति ही दीर्घकालिक सफलता (Long-term Success) की गारंटी देती है।
