एंजियोप्लास्टी (Stent Placement) के कितने दिन बाद सीढ़ियां चढ़ना और वजन उठाना सुरक्षित है?
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एंजियोप्लास्टी (Stent Placement) के बाद सीढ़ियां चढ़ना और वजन उठाना कब सुरक्षित है?

हार्ट अटैक या हृदय की धमनियों (Arteries) में ब्लॉकेज होने पर एंजियोप्लास्टी (Angioplasty) और स्टेंट प्लेसमेंट (Stent Placement) एक जीवन रक्षक प्रक्रिया है। इस प्रक्रिया के माध्यम से बंद धमनियों को खोला जाता है ताकि हृदय की मांसपेशियों तक रक्त का प्रवाह सुचारू रूप से हो सके।

प्रक्रिया के बाद मरीज अक्सर यह सवाल पूछते हैं कि वे अपनी सामान्य दिनचर्या में कब लौट सकते हैं, विशेष रूप से सीढ़ियां चढ़ना (Climbing Stairs) और वजन उठाना (Lifting Weights) कब सुरक्षित है। समर्पण फिजियोथेरेपी क्लिनिक (Samarpan Physiotherapy Clinic) और डॉ. नितेश पटेल (Dr. Nitesh Patel) के नैदानिक ​​अनुभव के आधार पर, यह लेख आपको एंजियोप्लास्टी के बाद की रिकवरी और कार्डियक रिहैबिलिटेशन (Cardiac Rehabilitation) से जुड़ी वैज्ञानिक और व्यावहारिक जानकारी प्रदान करेगा।

रिकवरी किस बात पर निर्भर करती है?

सीढ़ियां चढ़ने या वजन उठाने का सही समय मुख्य रूप से इस बात पर निर्भर करता है कि एंजियोप्लास्टी के लिए कैथेटर (Catheter) शरीर के किस हिस्से से डाला गया था:

  1. रेडियल आर्टरी (Radial Artery – कलाई के रास्ते): आजकल ज्यादातर एंजियोप्लास्टी कलाई की नस के माध्यम से की जाती है। इसमें रिकवरी काफी तेज होती है और मरीज को जल्दी चलने-फिरने की अनुमति मिल जाती है।
  2. फिमोरल आर्टरी (Femoral Artery – जांघ/कमर के रास्ते): यदि कैथेटर जांघ (Groin) की नस से डाला गया है, तो उस जगह पर घाव को भरने और ब्लीडिंग रोकने के लिए अधिक सावधानी और लंबे आराम की आवश्यकता होती है।

एंजियोप्लास्टी के बाद सीढ़ियां चढ़ना (Climbing Stairs)

सीढ़ियां चढ़ना एक कार्डियोवैस्कुलर गतिविधि है, जिससे हृदय गति (Heart Rate) और रक्तचाप (Blood Pressure) बढ़ता है।

1. जांघ (Groin) के रास्ते हुई एंजियोप्लास्टी के बाद

  • शुरुआती 2 से 3 दिन: आपको सीढ़ियां चढ़ने से पूरी तरह बचना चाहिए। जांघ की नस (Femoral Artery) शरीर की सबसे बड़ी रक्त वाहिकाओं में से एक है। सीढ़ियां चढ़ने से जांघ के जोड़ (Hip Joint) पर दबाव पड़ता है, जिससे पंक्चर वाली जगह से खून बहने (Bleeding) या सूजन का खतरा हो सकता है।
  • 3 से 5 दिन बाद: डॉक्टर और फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह के बाद, आप धीरे-धीरे सीढ़ियां चढ़ना शुरू कर सकते हैं।
  • नियम: सीढ़ियां चढ़ते समय “एक-कदम” (One-step-at-a-time) का पालन करें। एक पैर सीढ़ी पर रखें, फिर दूसरे पैर को उसी सीढ़ी पर लाएं। बीच-बीच में आराम करें।

2. कलाई (Wrist) के रास्ते हुई एंजियोप्लास्टी के बाद

  • शुरुआती 24 से 48 घंटे: हालांकि कलाई के रास्ते हुई प्रक्रिया में पैरों पर कोई सीधा प्रभाव नहीं पड़ता है, फिर भी हृदय पर अचानक दबाव डालने से बचना चाहिए।
  • 2 दिन बाद: आप आराम से और धीमी गति से सीढ़ियां चढ़ सकते हैं। चढ़ते समय रेलिंग का सहारा लें, लेकिन जिस हाथ में एंजियोप्लास्टी हुई है, उससे जोर लगाकर रेलिंग को न खींचें।

महत्वपूर्ण फिजियोथेरेपी टिप: सीढ़ियां चढ़ते समय अपनी सांस को कभी न रोकें। चढ़ते समय सांस छोड़ें (Exhale) और कदम रखते समय सांस लें (Inhale)। सांस रोकने से वाल्सल्वा पैंतरेबाज़ी (Valsalva Maneuver) की स्थिति बनती है, जो हृदय पर अचानक दबाव (Blood Pressure) बढ़ा देती है।

एंजियोप्लास्टी के बाद वजन उठाना (Lifting Weights)

वजन उठाने से शरीर की कोर मांसपेशियों (Core Muscles) में खिंचाव आता है और ब्लड प्रेशर तेजी से बढ़ सकता है, जो तुरंत लगे स्टेंट के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

1. जांघ (Groin) से हुई प्रक्रिया के बाद

  • पहले 1 से 2 सप्ताह तक: आपको 2 से 4 किलोग्राम (लगभग 5-10 पाउंड) से अधिक भारी कोई भी वस्तु नहीं उठानी चाहिए। इसमें पानी से भरी बाल्टी, गैस सिलेंडर, भारी बैग या यहां तक कि छोटे बच्चों को गोद में उठाना भी शामिल है।
  • कारण: भारी वजन उठाने से पेट (Abdomen) और जांघ (Groin) के हिस्से पर तीव्र दबाव (Intra-abdominal pressure) पड़ता है, जिससे फिमोरल आर्टरी का घाव खुल सकता है और आंतरिक रक्तस्राव (Internal Bleeding) हो सकता है।

2. कलाई (Wrist) से हुई प्रक्रिया के बाद

  • पहले 1 सप्ताह तक: जिस हाथ (कलाई) से एंजियोप्लास्टी हुई है, उस हाथ से 1 से 2 किलो से ज्यादा वजन न उठाएं।
  • उस हाथ से किसी चीज को जोर से धकेलने (Pushing), खींचने (Pulling) या निचोड़ने (जैसे कपड़े निचोड़ना) से बचें।
  • दूसरे (स्वस्थ) हाथ से आप हल्का काम कर सकते हैं, लेकिन भारी वजन उठाने से हृदय पर जोर पड़ता है, इसलिए पहले 10 दिनों तक पूरे शरीर के लिए भारी वजन उठाने से बचें।

एर्गोनॉमिक्स (Ergonomics) का ध्यान रखें: जब भी आप नीचे से कोई हल्की वस्तु उठाएं, तो कमर से झुकने के बजाय अपने घुटनों को मोड़कर (Squatting) बैठें। इससे हृदय और कमर दोनों पर अनावश्यक दबाव नहीं पड़ता है।

कार्डियक रिहैबिलिटेशन और फिजियोथेरेपी की भूमिका

स्टेंट डलने के बाद मरीज का शरीर और हृदय एक नई रक्त आपूर्ति प्रणाली (Blood Supply System) के साथ तालमेल बिठा रहा होता है। ऐसे में कार्डियक रिहैबिलिटेशन (Cardiac Rehabilitation) बहुत महत्वपूर्ण है।

डॉ. नितेश पटेल के मार्गदर्शन में, हम मरीजों को एक सुरक्षित और वैज्ञानिक व्यायाम योजना (Exercise Protocol) प्रदान करते हैं:

  1. फेज 1 (अस्पताल में): हल्की स्ट्रेचिंग, डीप ब्रीदिंग एक्सरसाइज (Deep Breathing) और वॉर्ड में धीरे-धीरे चलना।
  2. फेज 2 (घर पर – पहले 2 से 6 सप्ताह): इसमें हम मरीजों को एर्गोनॉमिक सलाह देते हैं। सही तरीके से उठना, बैठना और सीढ़ियां चढ़ना सिखाया जाता है। वॉकिंग की गति और समय को धीरे-धीरे बढ़ाया जाता है।
  3. फेज 3 (6 सप्ताह के बाद): ट्रेडमिल (Treadmill), स्थिर साइकिल (Stationary Bike) और हल्के रेजिस्टेंस बैंड (Resistance Bands) के साथ व्यायाम शुरू किया जाता है ताकि हृदय की मांसपेशियां मजबूत (Cardiovascular Endurance) हो सकें।

दैनिक जीवन की अन्य गतिविधियां कब शुरू करें?

  • ड्राइविंग (Driving): आमतौर पर एंजियोप्लास्टी के 1 सप्ताह बाद आप कार या बाइक चला सकते हैं। लेकिन अगर आपको हार्ट अटैक आया था, तो डॉक्टर इसे 2 से 4 सप्ताह तक टालने की सलाह दे सकते हैं।
  • ऑफिस वर्क (Office Work): डेस्क जॉब करने वाले मरीज 1 से 2 सप्ताह में काम पर लौट सकते हैं। शारीरिक श्रम (Physical Labour) वाले काम करने वालों को 4 से 6 सप्ताह का समय लग सकता है।
  • हल्का व्यायाम (Light Exercise): प्रक्रिया के अगले दिन से ही समतल जमीन पर 10-15 मिनट की धीमी सैर (Walking) शुरू कर देनी चाहिए।

डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट से तुरंत कब संपर्क करें? (Warning Signs)

अगर सीढ़ियां चढ़ते समय या वजन उठाते समय आपको निम्नलिखित में से कोई भी लक्षण महसूस हो, तो तुरंत गतिविधि रोक दें:

  • सीने में दर्द, जकड़न या भारीपन।
  • अत्यधिक सांस फूलना (Shortness of breath)।
  • चक्कर आना या आंखों के सामने अंधेरा छाना।
  • कैथेटर वाली जगह (कलाई या जांघ) पर अचानक सूजन आना, दर्द बढ़ना या खून रिसना।
  • बांह, कंधे या जबड़े में दर्द का फैलना।

निष्कर्ष (Conclusion)

एंजियोप्लास्टी (Stent Placement) के बाद शरीर को आराम और रिकवरी का समय देना बहुत जरूरी है। सीढ़ियां चढ़ना और हल्का वजन उठाना आमतौर पर 3 से 5 दिनों के बाद सुरक्षित होता है, लेकिन यह कैथेटर के स्थान (कलाई या जांघ) और आपकी समग्र स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है।

हृदय रोग के बाद जीवनशैली में बदलाव, सही दवाएं और सुपरवाइज्ड फिजियोथेरेपी (Supervised Physiotherapy) आपको एक सामान्य और सक्रिय जीवन की ओर वापस ले जाने में सबसे बड़ी भूमिका निभाते हैं। अपने शरीर की सुनें, जल्दबाजी न करें और हमेशा किसी विशेषज्ञ के मार्गदर्शन में ही अपनी शारीरिक गतिविधियां बढ़ाएं।

अधिक जानकारी और हृदय रोगियों के लिए विशेष व्यायाम प्रोटोकॉल के लिए आप समर्पण फिजियोथेरेपी क्लिनिक में संपर्क कर सकते हैं या हमारे डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म ‘फिजियोथेरेपी जानकारी हिन्दी में’ (physiotherapyhindi.in) पर विजिट कर सकते हैं।

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