लंग कैंसर सर्जरी (Lobectomy) के बाद फेफड़ों को फिर से फैलाने के लिए इन्सेन्टिव स्पाइरोमेट्री
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लंग कैंसर सर्जरी (Lobectomy) के बाद फेफड़ों को फिर से फैलाने के लिए इन्सेन्टिव स्पाइरोमेट्री

लंग कैंसर (Lung Cancer) के इलाज में लोबेक्टोमी (Lobectomy) एक प्रमुख सर्जिकल प्रक्रिया है। हमारे दाहिने फेफड़े में तीन लोब (हिस्से) और बाएं फेफड़े में दो लोब होते हैं। जब कैंसर किसी एक लोब तक सीमित होता है, तो सर्जन उस पूरे प्रभावित लोब को निकालकर शरीर को कैंसर मुक्त करने का प्रयास करते हैं। यह एक बड़ी सर्जरी है जो जीवन रक्षक होती है, लेकिन इसके बाद की रिकवरी और पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन (Pulmonary Rehabilitation) भी उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि खुद सर्जरी।

सर्जरी के बाद सबसे बड़ी चुनौती होती है—बचे हुए फेफड़ों के हिस्सों को पूरी तरह से काम करने लायक बनाना और उन्हें सिकुड़ने (Atelectasis) से रोकना। यहीं पर इन्सेन्टिव स्पाइरोमेट्री (Incentive Spirometry) सबसे कारगर और जरूरी फिजियोथेरेपी तकनीक बनकर सामने आती है।

आइए विस्तार से समझते हैं कि यह डिवाइस कैसे काम करता है, इसके क्या फायदे हैं और सर्जरी के बाद फेफड़ों की क्षमता वापस पाने के लिए इसका सही तरीके से उपयोग कैसे किया जाए।

लोबेक्टोमी के बाद फेफड़े क्यों सिकुड़ते हैं?

सर्जरी के दौरान मरीज को एनेस्थीसिया (Anesthesia) दिया जाता है और अक्सर उन्हें वेंटिलेटर पर रखा जाता है। सर्जरी के बाद जब मरीज होश में आता है, तो निम्नलिखित कारणों से फेफड़ों के पूरी तरह न फैलने का खतरा रहता है:

  1. दर्द (Pain): छाती में चीरा लगने के कारण गहरी सांस लेने या खांसने में तेज दर्द होता है। इस डर से मरीज उथली (छोटी) सांसें लेने लगता है।
  2. बलगम का जमाव (Mucus Buildup): सर्जरी और एनेस्थीसिया के कारण फेफड़ों में बलगम (Secretions) अधिक बनने लगता है। उथली सांसों के कारण यह बलगम बाहर नहीं आ पाता और वायुमार्ग (Airways) को ब्लॉक कर देता है।
  3. एटेलेक्टेसिस (Atelectasis): यह वह स्थिति है जिसमें फेफड़ों के छोटे वायु कोष (Alveoli) हवा के अभाव में पिचक या सिकुड़ जाते हैं। अगर इसे समय पर ठीक न किया जाए, तो यह निमोनिया (Pneumonia) का रूप ले सकता है।

इन्सेन्टिव स्पाइरोमीटर क्या है?

इन्सेन्टिव स्पाइरोमीटर एक हैंडहेल्ड (हाथ में पकड़े जाने वाला) मेडिकल डिवाइस है जो आपको धीमी, गहरी और लंबी सांसें लेने में मदद करता है। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसे फेफड़ों के लिए “जिम का उपकरण”।

जब आप इसके माउथपीस के जरिए हवा अंदर खींचते हैं, तो इसके अंदर मौजूद पिस्टन या गेंदें ऊपर उठती हैं। यह आपको विज़ुअल फीडबैक देता है कि आप कितनी गहरी सांस ले रहे हैं। इसके दो मुख्य प्रकार होते हैं:

  • वॉल्यूम-ओरिएंटेड (Volume-oriented): इसमें एक बड़ा चेंबर और एक पिस्टन होता है जो आपके द्वारा खींची गई हवा की मात्रा (मिलीलीटर में) मापता है।
  • फ्लो-ओरिएंटेड (Flow-oriented): इसमें तीन अलग-अलग रंग की गेंदें होती हैं (जैसा कि नीचे चित्र में दिखाया गया है), जिन्हें सांस खींचकर ऊपर उठाना और रोके रखना होता है।

लोबेक्टोमी रिकवरी में इन्सेन्टिव स्पाइरोमेट्री के मुख्य फायदे

सर्जरी के बाद समर्पण फिजियोथेरेपी क्लिनिक में हम मरीजों को पहले दिन से ही स्पाइरोमीटर का इस्तेमाल शुरू करने की सलाह देते हैं। इसके मुख्य लाभ इस प्रकार हैं:

  • फेफड़ों को फिर से फुलाना: यह उन वायु कोषों (Alveoli) को खोलने में मदद करता है जो सर्जरी के कारण पिचक गए हैं, जिससे रक्त में ऑक्सीजन का स्तर सुधरता है।
  • निमोनिया से बचाव: गहरी सांसें लेने से फेफड़ों के निचले हिस्से में फंसा हुआ बलगम ढीला होता है, जिसे बाद में खांसकर बाहर निकाला जा सकता है। यह छाती के संक्रमण और निमोनिया के खतरे को काफी कम कर देता है।
  • डायफ्राम की मजबूती: यह आपके मुख्य श्वसन मांसपेशी (Diaphragm) को मजबूत बनाता है, जिससे सांस फूलने (Shortness of breath) की समस्या कम होती है।
  • रिकवरी में तेजी: ऑक्सीजन का प्रवाह बेहतर होने से सर्जिकल घाव जल्दी भरते हैं और मरीज को अस्पताल से जल्दी छुट्टी मिलने में मदद मिलती है।

इन्सेन्टिव स्पाइरोमीटर का सही उपयोग कैसे करें

मरीजों को अक्सर इसे इस्तेमाल करने में कन्फ्यूजन होता है (जैसे कि हवा अंदर खींचनी है या बाहर छोड़नी है)। यह उपकरण हवा को अंदर खींचने (Inhalation) के लिए होता है, गुब्बारे की तरह फुलाने के लिए नहीं।

1

सही पोजीशन में बैठें

लेट कर यह व्यायाम न करें

1.सही पोजीशन में बैठें:लेट कर यह व्यायाम न करें.

बिस्तर के किनारे या एक आरामदायक कुर्सी पर सीधे बैठें। यदि आप बैठ नहीं सकते, तो बिस्तर के सिरहाने को जितना संभव हो उतना ऊपर उठा लें। सीधी रीढ़ की हड्डी फेफड़ों को पूरी तरह फैलने के लिए जगह देती है।

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डिवाइस को सेट करें

2.डिवाइस को सेट करें:

स्पाइरोमीटर को बिल्कुल सीधा (Vertical) पकड़ें। यदि आपके डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट ने आपके लिए कोई लक्ष्य (Target) तय किया है, तो डिवाइस पर मौजूद मार्कर को उस स्तर पर सेट करें।

3

सामान्य रूप से सांस छोड़ें

3.सामान्य रूप से सांस छोड़ें:

डिवाइस को मुंह में लगाने से पहले, अपने फेफड़ों से पूरी हवा धीरे-धीरे बाहर निकाल दें।

4

माउथपीस को मुंह में लगाएं

4.माउथपीस को मुंह में लगाएं:

माउथपीस को अपने होठों के बीच कसकर दबाएं। सुनिश्चित करें कि आपके होंठ माउथपीस के चारों ओर पूरी तरह से सील हैं और हवा बाहर से लीक नहीं हो रही है।

5

धीरे-धीरे और गहराई से सांस खींचें

सबसे महत्वपूर्ण कदम

5.धीरे-धीरे और गहराई से सांस खींचें:सबसे महत्वपूर्ण कदम.

स्ट्रॉ से गाढ़ा शेक पीने की तरह, माउथपीस से धीरे-धीरे और गहराई से हवा अंदर की ओर खींचें। आपको डिवाइस के अंदर की गेंद या पिस्टन को ऊपर उठते हुए देखना चाहिए। कोशिश करें कि पिस्टन या गेंदें आपके निर्धारित लक्ष्य तक पहुँचें।

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सांस को रोककर रखें (Breath Hold)

6.सांस को रोककर रखें (Breath Hold):

जब आप और अधिक हवा अंदर नहीं खींच सकते, तो माउथपीस को मुंह से निकाल लें और कम से कम 3 से 5 सेकंड तक अपनी सांस को रोक कर रखें। इस दौरान डिवाइस का पिस्टन धीरे-धीरे नीचे गिरेगा। यह फेफड़ों के सबसे निचले हिस्सों तक हवा पहुँचने देता है।

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धीरे-धीरे सांस छोड़ें और आराम करें

7.धीरे-धीरे सांस छोड़ें और आराम करें:

सामान्य रूप से सांस छोड़ें और कुछ सेकंड के लिए आराम करें। लगातार जल्दी-जल्दी करने से आपको चक्कर आ सकता है।

फ्रीक्वेंसी (कितनी बार करें?)

सामान्यतः, सर्जरी के बाद जागते रहने के दौरान, हर एक घंटे में 10 बार यह अभ्यास करने की सलाह दी जाती है। हालांकि, अपने फिजियोथेरेपिस्ट द्वारा बताए गए रूटीन का ही सख्ती से पालन करें।

दर्द से बचाव: स्प्लिंटेड कफिंग (Splinted Coughing)

इन्सेन्टिव स्पाइरोमेट्री का अभ्यास करने के बाद अक्सर आपको खांसी आ सकती है, जो कि एक अच्छा संकेत है क्योंकि यह बलगम को बाहर निकाल रहा है। लेकिन चीरे वाली जगह पर दर्द से बचने के लिए “स्प्लिंटिंग” (Splinting) तकनीक का इस्तेमाल करें:

  1. एक छोटा, मुलायम तकिया या तौलिया लें।
  2. जब आपको खांसी महसूस हो, तो उस तकिये को अपनी छाती (जहां सर्जरी का चीरा लगा है) के ऊपर मजबूती से पकड़ें या दबाएं।
  3. अब तकिये पर दबाव बनाते हुए जोर से खांसें।

यह छाती की मांसपेशियों को सपोर्ट देता है, जिससे खांसते समय दर्द बहुत कम होता है और टांकों पर जोर नहीं पड़ता।

आम गलतियां जिनसे बचना चाहिए

  • हवा बाहर फूँकना: बहुत से मरीज गलती से माउथपीस में हवा फूँकते हैं। याद रखें, आपको हवा अंदर खींचनी है।
  • बहुत तेजी से सांस खींचना: झटके से या बहुत तेजी से सांस खींचने से फेफड़े पूरी तरह नहीं फैलते और गेंदें तुरंत ऊपर जाकर नीचे आ जाती हैं। सांस धीमी और लंबी होनी चाहिए।
  • सांस न रोकना: सांस खींचने के बाद उसे 3-5 सेकंड तक न रोकना सबसे बड़ी गलती है। सांस रोकने से ही हवा फेफड़ों के बंद वायु कोषों को खोल पाती है।
  • दर्द के डर से अभ्यास छोड़ देना: सर्जरी के बाद हल्का दर्द होना स्वाभाविक है। दर्द निवारक दवाओं (Painkillers) का सही समय पर सेवन करें ताकि आप बिना दर्द के अपनी फिजियोथेरेपी कर सकें।

पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन का महत्व

डॉ. नितेश पटेल स्पष्ट करते हैं कि लोबेक्टोमी के बाद की रिकवरी सिर्फ अस्पताल के बिस्तर तक सीमित नहीं है। अस्पताल से घर जाने के बाद भी फेफड़ों की केयर जारी रहनी चाहिए। जब आप घर लौटते हैं, तो इन्सेन्टिव स्पाइरोमेट्री के साथ-साथ हल्की वॉक (Walking) और सीढ़ियां चढ़ने जैसे व्यायाम भी फेफड़ों की क्षमता बढ़ाने में बहुत मदद करते हैं। एक कस्टमाइज़्ड पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन प्रोग्राम आपके बचे हुए फेफड़े के हिस्सों को ज्यादा ऑक्सीजन प्रोसेस करने के लिए ट्रेन करता है, जिससे आप जल्द ही अपनी सामान्य दिनचर्या में लौट सकते हैं।

निष्कर्ष

लंग कैंसर सर्जरी के बाद रिकवरी का रास्ता थोड़ा लंबा जरूर हो सकता है, लेकिन सही मार्गदर्शन और अनुशासन के साथ यह पूरी तरह संभव है। इन्सेन्टिव स्पाइरोमीटर इस यात्रा में आपका सबसे अच्छा दोस्त है। यह न केवल आपके फेफड़ों को निमोनिया जैसी जटिलताओं से बचाता है, बल्कि आपको फिर से खुलकर सांस लेना भी सिखाता है।

अपने फिजियोथेरेपिस्ट की सलाह मानें, दर्द को कंट्रोल में रखें और नियमित रूप से अपनी ब्रीदिंग एक्सरसाइज करते रहें।

फेफड़ों के व्यायाम, पोस्चर करेक्शन और एडवांस पल्मोनरी रिहैबिलिटेशन से जुड़ी अधिक जानकारी के लिए, हमारी वेबसाइट physiotherapyhindi.in पर विजिट करें या हमारे यूट्यूब चैनल “फिजियोथेरेपी जानकारी हिन्दी में” के वीडियो ट्यूटोरियल्स देखें। किसी भी व्यक्तिगत परामर्श के लिए आप गुजरात स्थित समर्पण फिजियोथेरेपी क्लिनिक में संपर्क कर सकते हैं।

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