एड़ी की हड्डी बढ़ना (Heel Spur) और प्लांटर फेशिआइटिस के दर्द में क्या अंतर है?
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एड़ी की हड्डी बढ़ना (Heel Spur) और प्लांटर फेशिआइटिस के दर्द में अंतर

एड़ी में दर्द होना एक बहुत ही आम समस्या है, जिससे लाखों लोग हर साल परेशान होते हैं। खासकर सुबह उठते ही पहला कदम रखते समय जब एड़ी में तेज दर्द उठता है, तो ज़्यादातर लोग इसे “एड़ी की हड्डी बढ़ना” यानी हील स्पर (Heel Spur) समझ लेते हैं। लेकिन असल में इस दर्द का सबसे आम कारण प्लांटर फेशिआइटिस (Plantar Fasciitis) होता है। ये दोनों स्थितियां आपस में इतनी जुड़ी हुई हैं कि लोग अक्सर इन्हें एक ही समस्या समझ बैठते हैं, जबकि दोनों में कई बुनियादी अंतर हैं। आइए विस्तार से समझते हैं कि ये दोनों समस्याएं क्या हैं, इनके दर्द में क्या फर्क है, और इनका इलाज कैसे किया जाता है।

प्लांटर फेशिआइटिस क्या है?

पैर के तलवे में एक मोटी, रेशेदार झिल्ली (fibrous band) होती है जिसे “प्लांटर फेशिया” कहते हैं। यह झिल्ली एड़ी की हड्डी (कैल्केनियस) से शुरू होकर पंजे की उंगलियों तक फैली होती है। इसका मुख्य काम चलते, दौड़ते या खड़े होते समय पैर के आर्च (arch) को सहारा देना और झटकों को सोखना (shock absorption) होता है।

जब इस झिल्ली पर बार-बार जोर पड़ता है या यह ज़्यादा खिंच जाती है, तो इसमें सूक्ष्म चोटें (micro-tears) आने लगती हैं, जिससे सूजन और जलन पैदा होती है। इसी सूजन को प्लांटर फेशिआइटिस कहा जाता है। यह मूलतः एक सॉफ्ट टिश्यू (soft tissue) की समस्या है, हड्डी की नहीं।

हील स्पर (एड़ी की हड्डी बढ़ना) क्या है?

हील स्पर एक हड्डी की बनावट संबंधी स्थिति है। जब प्लांटर फेशिया एड़ी की हड्डी पर लंबे समय तक बार-बार खिंचाव डालती है, तो शरीर इस जगह पर अतिरिक्त कैल्शियम जमा करना शुरू कर देता है। यह कैल्शियम जमाव धीरे-धीरे हड्डी के एक छोटे नुकीले उभार का रूप ले लेता है, जिसे हम हील स्पर कहते हैं। यह एड़ी की हड्डी के निचले या पिछले हिस्से पर बनता है और एक्स-रे में साफ दिखाई देता है।

दिलचस्प बात यह है कि हील स्पर होना खुद में दर्द का कारण नहीं होता। कई अध्ययनों में देखा गया है कि बहुत से लोगों की एड़ी में स्पर होता है, लेकिन उन्हें कोई दर्द महसूस नहीं होता। दूसरी तरफ, प्लांटर फेशिआइटिस के कई मरीजों की एड़ी में कोई स्पर नहीं होता, फिर भी उन्हें तेज दर्द होता है।

दोनों के दर्द में मुख्य अंतर

1. दर्द का स्रोत

प्लांटर फेशिआइटिस का दर्द झिल्ली की सूजन और जलन से आता है — यह एक सॉफ्ट टिश्यू इन्फ्लेमेशन है। वहीं हील स्पर से जुड़ा दर्द (यदि होता भी है) हड्डी के उभार के आसपास के टिश्यू पर दबाव पड़ने से होता है। ज़्यादातर मामलों में जिसे लोग “हील स्पर का दर्द” समझते हैं, वह असल में उसी जगह मौजूद प्लांटर फेशिआइटिस की सूजन का दर्द होता है।

2. दर्द का समय और पैटर्न

प्लांटर फेशिआइटिस का सबसे विशिष्ट लक्षण यह है कि सुबह उठकर पहला कदम रखते ही एड़ी में बहुत तेज, चुभने जैसा दर्द होता है। रातभर पैर आराम में रहने से झिल्ली सिकुड़ जाती है, और सुबह अचानक वज़न पड़ने से यह दर्द होता है। कुछ कदम चलने के बाद यह दर्द थोड़ा कम हो जाता है, लेकिन लंबे समय तक खड़े रहने या ज़्यादा चलने से यह फिर बढ़ जाता है।

हील स्पर से जुड़ा दर्द अक्सर स्थिर और लगातार दबाव जैसा महसूस होता है, खासकर जब एड़ी सीधे किसी सख्त सतह पर दबती है। यह सुबह के समय उतना अचानक या तीव्र नहीं होता जितना प्लांटर फेशिआइटिस का दर्द होता है।

3. दर्द की प्रकृति

प्लांटर फेशिआइटिस में दर्द जलन, खिंचाव या चुभन जैसा महसूस होता है, जो एड़ी के अंदरूनी हिस्से से लेकर तलवे के बीच तक फैल सकता है। हील स्पर का दर्द अक्सर एक बिंदु (localized point) पर होता है, जैसे किसी नुकीली चीज़ पर पैर रखने जैसा एहसास।

4. जांच में अंतर

प्लांटर फेशिआइटिस का निदान ज़्यादातर शारीरिक जांच और लक्षणों के आधार पर किया जाता है — डॉक्टर एड़ी के अंदरूनी हिस्से को दबाकर दर्द की जांच करते हैं। हील स्पर की पुष्टि केवल एक्स-रे से होती है, जिसमें हड्डी का उभार साफ दिखाई देता है।

दोनों समस्याओं का आपस में संबंध

यह समझना ज़रूरी है कि हील स्पर अक्सर प्लांटर फेशिआइटिस का परिणाम होता है, कारण नहीं। लंबे समय तक चलने वाली प्लांटर फेशिआइटिस के कारण एड़ी की हड्डी पर बार-बार तनाव पड़ता है, जिससे समय के साथ स्पर बन सकता है। इसलिए बहुत से मामलों में दोनों स्थितियां एक साथ पाई जाती हैं, जिससे लोगों को यह भ्रम होता है कि दर्द हड्डी बढ़ने की वजह से है, जबकि असली दोषी झिल्ली की सूजन होती है।

कारण

दोनों समस्याओं के पीछे कुछ समान कारण होते हैं:

  • लंबे समय तक खड़े रहना या ज़्यादा चलना, खासकर सख्त सतह पर
  • गलत या घिसे हुए जूते पहनना जिनमें आर्च सपोर्ट न हो
  • अधिक वजन होना, जिससे तलवे पर दबाव बढ़ता है
  • पैर के आर्च की बनावट में समस्या — बहुत ऊंचा आर्च या फ्लैट फुट
  • उम्र बढ़ने के साथ झिल्ली में लचीलापन कम होना
  • अचानक व्यायाम की तीव्रता बढ़ाना, जैसे दौड़ना शुरू करना

निदान कैसे होता है?

डॉक्टर सबसे पहले मरीज़ के लक्षणों की जानकारी लेते हैं — दर्द कब होता है, कहां होता है, और किन गतिविधियों से बढ़ता है। इसके बाद शारीरिक जांच में एड़ी को दबाकर संवेदनशील बिंदु ढूंढा जाता है। यदि आवश्यक हो तो एक्स-रे कराया जाता है ताकि यह पता चल सके कि हड्डी में स्पर बना है या नहीं। कुछ जटिल मामलों में अल्ट्रासाउंड या एमआरआई की भी सलाह दी जा सकती है ताकि झिल्ली में सूजन की सीमा का आकलन किया जा सके।

इलाज में अंतर

चूंकि प्लांटर फेशिआइटिस असली दर्द का कारण होता है, इसलिए इलाज मुख्यतः उसी पर केंद्रित होता है, चाहे स्पर मौजूद हो या न हो।

सामान्य इलाज के तरीके:

  • आराम करना और दर्द बढ़ाने वाली गतिविधियों को कम करना
  • बर्फ की सिकाई करना, जिससे सूजन कम होती है
  • तलवे और पिंडली की मांसपेशियों को खींचने वाले (stretching) व्यायाम करना
  • अच्छी आर्च सपोर्ट वाले या कुशनयुक्त जूते पहनना
  • सिलिकॉन या जेल हील पैड का उपयोग करना
  • ज़रूरत पड़ने पर फिजियोथेरेपी लेना
  • अत्यधिक दर्द में डॉक्टर की सलाह से सूजन-रोधी दवाएं लेना
  • गंभीर मामलों में स्टेरॉयड इंजेक्शन

केवल हील स्पर के लिए, यदि वह दर्द रहित है, तो आमतौर पर किसी इलाज की ज़रूरत नहीं होती। सर्जरी की सलाह बहुत कम मामलों में दी जाती है, और वह भी तब जब लंबे समय तक अन्य इलाज असफल हो जाएं।

डॉक्टर से कब मिलें?

यदि एड़ी का दर्द दो-तीन हफ्तों से ज़्यादा बना रहे, चलने-फिरने में परेशानी हो, दर्द के साथ सूजन या लालिमा दिखे, या घरेलू उपायों से कोई राहत न मिले, तो ऑर्थोपेडिक डॉक्टर या पोडियाट्रिस्ट (पैर विशेषज्ञ) से मिलना उचित है। सही निदान होने से इलाज की दिशा तय करने में आसानी होती है।

निष्कर्ष

संक्षेप में कहें तो, प्लांटर फेशिआइटिस एक सूजन संबंधी समस्या है जो सुबह के तीव्र दर्द के लिए ज़िम्मेदार होती है, जबकि हील स्पर एक हड्डी की संरचनात्मक स्थिति है जो अक्सर बिना किसी लक्षण के मौजूद रहती है। ज़्यादातर मामलों में जिसे लोग “एड़ी की हड्डी बढ़ने का दर्द” समझते हैं, वह असल में प्लांटर फेशिआइटिस की सूजन ही होती है। इसलिए इलाज करते समय हड्डी के उभार की बजाय झिल्ली की सूजन को कम करने पर ध्यान देना ज़्यादा फायदेमंद साबित होता है। सही जीवनशैली, उचित जूते, नियमित स्ट्रेचिंग और समय पर चिकित्सीय सलाह से इस दर्द से काफी हद तक राहत पाई जा सकती है।

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