क्लबफुट (टेढ़े पैर) का बिना सर्जरी के इलाज: फिजियोथेरेपी और पोंसेटी मेथड (Ponseti Method)
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क्लबफुट (टेढ़े पैर) का बिना सर्जरी के इलाज: फिजियोथेरेपी और पोंसेटी मेथड (Ponseti Method)

जब घर में एक नए शिशु का जन्म होता है, तो वह पल माता-पिता के लिए दुनिया का सबसे खूबसूरत एहसास होता है। लेकिन, यदि जन्म के समय बच्चे के पैर अंदर की तरफ मुड़े हुए हों, तो माता-पिता का चिंतित होना स्वाभाविक है। इस जन्मजात स्थिति को मेडिकल भाषा में ‘क्लबफुट’ (Clubfoot) या सीटीईवी (CTEV – Congenital Talipes Equinovarus) कहा जाता है। आम बोलचाल में इसे ‘टेढ़े पैर’ की समस्या कहते हैं।

आज से कुछ दशक पहले तक क्लबफुट को ठीक करने के लिए बड़ी और जटिल सर्जरी का सहारा लिया जाता था, जिसके अपने कई नुकसान थे। लेकिन आज चिकित्सा विज्ञान और फिजियोथेरेपी के विकास के कारण, इसका इलाज बिना किसी बड़ी सर्जरी के पूरी तरह से संभव है।

इस लेख में, हम विस्तार से चर्चा करेंगे कि क्लबफुट क्या है और पोंसेटी मेथड (Ponseti Method) तथा फिजियोथेरेपी के माध्यम से इसका बिना सर्जरी के 100% सफल इलाज कैसे किया जाता है।

क्लबफुट (Clubfoot) क्या है?

क्लबफुट एक जन्मजात आर्थोपेडिक (हड्डियों और मांसपेशियों से जुड़ी) समस्या है। इसमें जन्म के समय बच्चे का एक या दोनों पैर अंदर और नीचे की तरफ मुड़े होते हैं। देखने में ऐसा लगता है जैसे पैर उल्टा हो गया हो। यह स्थिति इसलिए उत्पन्न होती है क्योंकि पैर और टखने (Ankle) को जोड़ने वाले टेंडन (Tendons – मांसपेशियों को हड्डियों से जोड़ने वाले ऊतक) सामान्य से अधिक छोटे और कड़े होते हैं।

यह समझना बहुत महत्वपूर्ण है कि क्लबफुट दर्दनाक नहीं होता है। नवजात शिशु को इससे कोई शारीरिक दर्द नहीं होता, लेकिन अगर इसका सही समय पर इलाज न किया जाए, तो भविष्य में बच्चे को सामान्य रूप से चलने-फिरने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

क्लबफुट के मुख्य कारण (Causes of Clubfoot)

हालांकि क्लबफुट के सटीक कारणों का अभी तक पूरी तरह से पता नहीं चल पाया है, लेकिन शोधकर्ताओं का मानना है कि इसके पीछे निम्नलिखित कारक जिम्मेदार हो सकते हैं:

  • आनुवंशिकी (Genetics): यदि माता-पिता या परिवार में किसी को पहले क्लबफुट की समस्या रही है, तो बच्चे में इसके होने की संभावना बढ़ जाती है।
  • गर्भावस्था के दौरान का वातावरण: गर्भावस्था के दौरान एमनियोटिक द्रव (Amniotic fluid) की कमी या कुछ संक्रमणों के कारण भी यह समस्या हो सकती है।
  • न्यूरोमस्कुलर कारण: कई बार यह स्थिति स्पाइना बिफिडा (Spina Bifida) जैसी तंत्रिका तंत्र से जुड़ी अन्य समस्याओं के साथ भी देखी जाती है।

बिना सर्जरी के इलाज क्यों बेहतर है?

पुराने समय में क्लबफुट को ठीक करने के लिए जोड़ों और टेंडन को काटकर सीधा करने की सर्जरी (Comprehensive Release Surgery) की जाती थी। हालांकि यह पैरों को सीधा तो कर देती थी, लेकिन इसके कई दीर्घकालिक नुकसान थे। सर्जरी वाले पैरों में अक्सर कठोरता (Stiffness) आ जाती थी, मांसपेशियां कमजोर हो जाती थीं और बड़े होने पर पैरों में दर्द की शिकायत आम बात थी।

इन्हीं कमियों को दूर करने के लिए बिना सर्जरी वाले और कम से कम आक्रामक (Non-invasive) उपचारों का विकास हुआ, जिनमें ‘पोंसेटी मेथड’ सबसे प्रमुख और विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त (Gold Standard) तरीका है।

पोंसेटी मेथड (Ponseti Method): क्लबफुट का सबसे प्रभावी इलाज

पोंसेटी मेथड का नाम डॉ. इग्नासियो पोंसेटी (Dr. Ignacio Ponseti) के नाम पर रखा गया है, जिन्होंने 1950 के दशक में इस तकनीक को विकसित किया था। यह बिना किसी बड़ी सर्जरी के क्लबफुट को ठीक करने का सबसे सुरक्षित, असरदार और विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा अनुशंसित तरीका है। इस विधि की सफलता दर 95% से अधिक है।

यह उपचार बच्चे के जन्म के पहले या दूसरे सप्ताह में ही शुरू कर दिया जाना चाहिए, क्योंकि नवजात शिशु के लिगामेंट्स, टेंडन और हड्डियां बहुत लचीली होती हैं और उन्हें आसानी से सही आकार में ढाला जा सकता है।

पोंसेटी मेथड की प्रक्रिया को मुख्य रूप से तीन चरणों में बांटा जाता है:

1. मैनिपुलेशन और कास्टिंग (Manipulation and Casting)

इस पहले चरण में, एक विशेषज्ञ ऑर्थोपेडिक डॉक्टर या प्रशिक्षित फिजियोथेरेपिस्ट अपने हाथों से धीरे-धीरे बच्चे के पैर को उसकी सही शारीरिक स्थिति (Anatomical position) की ओर खींचता है और घुमाता है। इसके बाद पैर को उसी स्थिति में बनाए रखने के लिए उंगलियों से लेकर जांघ तक एक प्लास्टर कास्ट (Plaster Cast) लगा दिया जाता है।

  • यह प्लास्टर हर हफ्ते बदला जाता है।
  • हर बार जब नया प्लास्टर लगाया जाता है, तो पैर को पहले से थोड़ा और अधिक सीधा किया जाता है।
  • ज्यादातर बच्चों में पैर को सही स्थिति में लाने के लिए 4 से 6 प्लास्टर (यानी 4 से 6 सप्ताह) की आवश्यकता होती है।

2. एच्लीस टेनोटॉमी (Achilles Tenotomy)

प्लास्टर के चरणों के बाद, पैर लगभग सीधा हो जाता है, लेकिन अक्सर एड़ी का टेंडन (Achilles Tendon) बहुत टाइट रहता है, जिससे एड़ी पूरी तरह से नीचे नहीं आ पाती। इसे ठीक करने के लिए एक बहुत ही मामूली सी प्रक्रिया की जाती है जिसे ‘टेनोटॉमी’ कहते हैं। इसमें लोकल एनेस्थीसिया देकर टेंडन में एक छोटा सा कट लगाया जाता है। यह कोई बड़ी सर्जरी नहीं है और इसमें टांके (Stitches) भी नहीं लगते। इसके बाद अंतिम प्लास्टर लगाया जाता है जो लगभग 3 सप्ताह तक रहता है। इस दौरान कटा हुआ टेंडन अपनी सही और लंबी लंबाई में प्राकृतिक रूप से जुड़ जाता है।

3. ब्रेसिंग (Bracing)

यह पोंसेटी मेथड का सबसे महत्वपूर्ण और अंतिम चरण है। पैर पूरी तरह से सीधे होने के बाद भी, बच्चों के पैरों में वापस अपनी पुरानी टेढ़ी स्थिति (Relapse) में जाने की बहुत अधिक प्रवृत्ति होती है। इसे रोकने के लिए बच्चे को विशेष प्रकार के जूते पहनाए जाते हैं, जो एक रॉड से जुड़े होते हैं। इसे डेंस-ब्राउन स्प्लिंट (Denis Browne Splint) या फुट एबडक्शन ब्रेस (Foot Abduction Brace) कहा जाता है।

  • शुरुआत के 3 महीनों तक बच्चे को यह ब्रेस दिन में 23 घंटे (नहाने के अलावा) पहनना होता है।
  • इसके बाद, जब तक बच्चा 4 या 5 साल का नहीं हो जाता, तब तक यह ब्रेस केवल रात को सोते समय (12-14 घंटे) पहनाया जाता है।

क्लबफुट में फिजियोथेरेपी की महत्वपूर्ण भूमिका (Role of Physiotherapy)

क्लबफुट के उपचार में फिजियोथेरेपी पोंसेटी मेथड के साथ-साथ एक बहुत बड़ा और निर्णायक रोल निभाती है। समर्पण फिजियोथेरेपी क्लिनिक (Samarpan Physiotherapy Clinic) जैसे विशेषज्ञ केंद्रों में, प्लास्टर हटने के बाद और ब्रेसिंग के दौरान पैरों की कार्यक्षमता और ताकत वापस लाने के लिए विशेष फिजियोथेरेपी प्रोग्राम डिजाइन किए जाते हैं।

फिजियोथेरेपी के मुख्य उद्देश्य और तकनीकें निम्नलिखित हैं:

1. स्ट्रेचिंग और मोबिलाइजेशन (Stretching and Mobilization)

प्लास्टर के लंबे समय तक रहने के कारण बच्चे के टखने और पैर की मांसपेशियां थोड़ी सख्त हो सकती हैं। फिजियोथेरेपिस्ट माता-पिता को कुछ बहुत ही कोमल और सुरक्षित स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज सिखाते हैं। ये एक्सरसाइज बच्चे के पैरों के लचीलेपन (Flexibility) को बनाए रखने और एच्लीस टेंडन को टाइट होने से रोकने में मदद करती हैं।

2. मांसपेशियों की ताकत बढ़ाना (Strengthening Exercises)

क्लबफुट से प्रभावित पैर की पिंडली (Calf) की मांसपेशियां अक्सर सामान्य पैर की तुलना में थोड़ी पतली और कमजोर होती हैं। फिजियोथेरेपिस्ट खेल-खेल में (Play-based therapy) बच्चे को ऐसी गतिविधियां करवाते हैं जिससे उसके पैरों की मांसपेशियां मजबूत हों। जैसे-जैसे बच्चा बड़ा होता है, उसे पंजों के बल खड़े होने, संतुलन बनाने और सही तरीके से सीढ़ियां चढ़ने-उतरने की ट्रेनिंग दी जाती है।

3. चाल का प्रशिक्षण (Gait Training)

जब बच्चा चलना शुरू करता है, तो यह सुनिश्चित करना बहुत जरूरी है कि वह अपने पैरों को सही तरीके से जमीन पर रख रहा है या नहीं। कई बार बच्चे आदत के कारण पैर को अंदर की तरफ मोड़कर चलने की कोशिश करते हैं। फिजियोथेरेपिस्ट बच्चे की चाल (Gait Pattern) का विश्लेषण करते हैं और उसे सही तरीके से चलने का प्रशिक्षण देते हैं।

4. माता-पिता का मार्गदर्शन और काउंसलिंग (Parenting Education)

क्लबफुट के इलाज में सबसे बड़ी बाधा ब्रेसिंग का सही तरीके से पालन न करना है। फिजियोथेरेपिस्ट माता-पिता को ब्रेस पहनाने का सही तरीका, त्वचा की देखभाल और ब्रेस पहनने के दौरान बच्चे को सहज महसूस कराने के तरीके बताते हैं।


माता-पिता के लिए कुछ महत्वपूर्ण टिप्स और सावधानियां

क्लबफुट के इलाज की सफलता 50% डॉक्टर और फिजियोथेरेपिस्ट पर निर्भर करती है, और 50% माता-पिता के समर्पण पर। यदि आप इस प्रक्रिया से गुजर रहे हैं, तो इन बातों का विशेष ध्यान रखें:

  1. ब्रेसिंग के नियमों का सख्ती से पालन करें: यदि डॉक्टर ने बच्चे को रात में ब्रेस पहनाने के लिए कहा है, तो इसमें एक भी दिन का नागा न करें। ब्रेस का कम उपयोग पैर के दोबारा टेढ़े होने (Relapse) का सबसे बड़ा कारण है।
  2. त्वचा की जांच करें: प्लास्टर या ब्रेस के कारण बच्चे की त्वचा पर लाल निशान, छाले या सूजन तो नहीं आ रही है, इसकी नियमित जांच करें। यदि ऐसा कुछ दिखे, तो तुरंत अपने चिकित्सक से संपर्क करें।
  3. थेरेपी को खेल बनाएं: स्ट्रेचिंग एक्सरसाइज को बच्चे की दिनचर्या में शामिल करें। जब वह खुश हो या खेल रहा हो, तब हल्के हाथों से एक्सरसाइज करवाएं।
  4. धैर्य रखें: यह एक लंबी प्रक्रिया है जो बच्चे के 4-5 साल की उम्र तक चलती है। धैर्य न खोएं, क्योंकि आपके प्रयास बच्चे को जीवन भर के लिए अपने पैरों पर खड़ा करेंगे।

निष्कर्ष (Conclusion)

क्लबफुट कोई अभिशाप या लाइलाज बीमारी नहीं है। पोंसेटी मेथड और सही फिजियोथेरेपी की मदद से आज यह संभव है कि क्लबफुट के साथ पैदा हुए बच्चे भी सामान्य बच्चों की तरह दौड़-भाग सकें, खेल सकें और एक दर्द-मुक्त, सामान्य जीवन जी सकें। इस उपचार का मूल मंत्र है—’सही समय पर शुरुआत और माता-पिता का अटूट अनुशासन’।

यदि आपके आस-पास या परिवार में किसी बच्चे को यह समस्या है, तो घबराएं नहीं। तुरंत किसी ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ या बाल-फिजियोथेरेपिस्ट से संपर्क करें। बेहतर मार्गदर्शन और उपचार के लिए आप समर्पण फिजियोथेरेपी क्लिनिक में विशेषज्ञ परामर्श ले सकते हैं। स्वास्थ्य और फिजियोथेरेपी से जुड़ी ऐसी ही और अधिक जानकारीपूर्ण और सटीक स्वास्थ्य सामग्रियों के लिए हमारी वेबसाइट physiotherapyhindi.in को पढ़ते रहें।

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