कंजिनाइटल टॉर्टिकॉलिस (Congenital Torticollis) जब नवजात शिशु की गर्दन एक तरफ झुकी हो।
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कंजिनाइटल टॉर्टिकॉलिस (Congenital Torticollis): जब नवजात शिशु की गर्दन एक तरफ झुकी हो – कारण, लक्षण और संपूर्ण इलाज

माता-पिता बनना दुनिया के सबसे सुखद अनुभवों में से एक है, लेकिन जब नवजात शिशु के स्वास्थ्य की बात आती है, तो छोटी सी बात भी चिंता का कारण बन सकती है। कई बार माता-पिता यह ध्यान देते हैं कि उनके नवजात शिशु की गर्दन हमेशा एक ही तरफ झुकी रहती है और वह दूसरी तरफ देखने में संघर्ष करता है या रोता है। चिकित्सा विज्ञान की भाषा में इस स्थिति को ‘कंजिनाइटल टॉर्टिकॉलिस’ (Congenital Torticollis) या ‘जन्मजात टॉर्टिकॉलिस’ कहा जाता है। आम बोलचाल में इसे ‘टेढ़ी गर्दन’ (Wryneck) भी कहते हैं।

यह लेख कंजिनाइटल टॉर्टिकॉलिस के हर पहलू को विस्तार से समझाने के लिए तैयार किया गया है, ताकि माता-पिता इस स्थिति को समझ सकें और बिना घबराए सही समय पर उचित कदम उठा सकें।


कंजिनाइटल टॉर्टिकॉलिस क्या है?

‘कंजिनाइटल’ का अर्थ होता है जन्मजात (जन्म के समय से मौजूद) और ‘टॉर्टिकॉलिस’ लैटिन भाषा के शब्दों से बना है, जिसका अर्थ है ‘मुड़ी हुई गर्दन’।

हमारे गले में दोनों तरफ एक बड़ी मांसपेशी होती है जिसे स्टर्नोक्लिडोमैस्टॉइड (Sternocleidomastoid – SCM) कहा जाता है। यह मांसपेशी कान के ठीक पीछे से शुरू होकर कॉलरबोन (हंसली की हड्डी) और स्टर्नम (छाती की हड्डी) तक जाती है। इस मांसपेशी का मुख्य काम सिर को झुकाना और घुमाना होता है।

जब किसी कारणवश शिशु के गले के एक तरफ की SCM मांसपेशी असामान्य रूप से छोटी, सख्त या कसी हुई (tight) हो जाती है, तो शिशु का सिर उस कसी हुई मांसपेशी की तरफ झुक जाता है और उसकी ठुड्डी (chin) विपरीत दिशा में मुड़ जाती है। इसी स्थिति को कंजिनाइटल मस्कुलर टॉर्टिकॉलिस (CMT) कहते हैं। यह कोई बहुत दुर्लभ बीमारी नहीं है; यह नवजात शिशुओं में पाई जाने वाली आम समस्याओं में से एक है और समय रहते इसका इलाज पूरी तरह संभव है।


कंजिनाइटल टॉर्टिकॉलिस के मुख्य कारण (Causes)

शिशु की गर्दन की मांसपेशी में यह कसाव क्यों आता है, इसके सटीक कारण हर मामले में अलग-अलग हो सकते हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार इसके कुछ मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

  1. गर्भ में शिशु की स्थिति (Intrauterine Positioning): यह सबसे आम कारण माना जाता है। यदि गर्भावस्था के दौरान गर्भाशय (uterus) में जगह कम हो (जैसे कि जुड़वां बच्चों के मामले में, या यदि बच्चा आकार में बड़ा हो), तो शिशु का सिर लंबे समय तक एक ही अजीब स्थिति में फंसा रह सकता है। इससे एक तरफ की गर्दन की मांसपेशी पर दबाव पड़ता है और वह ठीक से विकसित नहीं हो पाती या छोटी रह जाती है।
  2. जन्म के दौरान आघात (Birth Trauma): अगर शिशु का जन्म मुश्किल (Difficult labor) रहा हो, या जन्म के समय वह ब्रीच पोजीशन (पैर या कूल्हे पहले आना) में हो, तो उसे बाहर निकालते समय गर्दन की मांसपेशी पर खिंचाव आ सकता है। फोरसेप्स (Forceps) या वैक्यूम (Vacuum) के इस्तेमाल से भी मांसपेशी में हल्की चोट लग सकती है, जिससे वहां सूजन या स्कार टिश्यू (Scar tissue) बन जाता है जो मांसपेशी को सिकोड़ देता है।
  3. मांसपेशी में रक्त संचार की कमी: कुछ मामलों में, गर्भ में विकास के दौरान SCM मांसपेशी में रक्त का प्रवाह ठीक से नहीं हो पाता, जिसके कारण मांसपेशी के ऊतक (tissues) कठोर हो जाते हैं।
  4. आनुवंशिक या हड्डियों की बनावट (Genetics and Bone Structure): यह बहुत ही दुर्लभ है, लेकिन कभी-कभी सर्वाइकल स्पाइन (गर्दन की हड्डियों) में जन्मजात खराबी के कारण भी टॉर्टिकॉलिस हो सकता है। इसे ‘क्लिपेल-फेल सिंड्रोम’ (Klippel-Feil syndrome) कहा जाता है, जिसमें गर्दन की कुछ हड्डियां आपस में जुड़ी होती हैं।

लक्षण और पहचान (Symptoms and Identification)

कंजिनाइटल टॉर्टिकॉलिस के लक्षण हमेशा जन्म के तुरंत बाद स्पष्ट नहीं होते हैं। अक्सर माता-पिता या डॉक्टर इसे शिशु के जन्म के 2 से 4 सप्ताह बाद नोटिस करते हैं, जब शिशु अपने सिर पर थोड़ा नियंत्रण हासिल करना शुरू करता है। इसके प्रमुख लक्षण इस प्रकार हैं:

  • सिर का एक तरफ झुका होना: शिशु का सिर लगातार एक ही दिशा (दाएं या बाएं कंधे की ओर) में झुका रहता है।
  • ठुड्डी का विपरीत दिशा में होना: यदि सिर दाएं कंधे की ओर झुका है, तो शिशु की ठुड्डी (chin) बाएं कंधे की ओर मुड़ी होगी।
  • गर्दन घुमाने में परेशानी: जब आप शिशु का ध्यान दूसरी तरफ खींचने की कोशिश करते हैं, तो वह अपना सिर मोड़ने के बजाय अपनी आंखों को घुमाता है या पूरा शरीर मोड़ लेता है।
  • स्तनपान में कठिनाई: शिशु को एक तरफ के स्तन से दूध पीने में परेशानी हो सकती है क्योंकि वह उस तरफ अपना सिर आराम से घुमा नहीं पाता।
  • मांसपेशी में गांठ (Neck Lump): शिशु की गर्दन की प्रभावित मांसपेशी (SCM) पर मटर या जैतून के आकार की एक छोटी गांठ (Pseudotumor) महसूस हो सकती है। यह गांठ कैंसर नहीं होती और आमतौर पर 6 महीने के भीतर अपने आप घुल जाती है।
  • सिर का चपटा होना (Plagiocephaly): चूंकि शिशु हमेशा एक ही तरफ सिर रखकर सोता है, इसलिए उसके सिर का एक हिस्सा पीछे या साइड से चपटा हो सकता है।
  • चेहरे की विषमता (Facial Asymmetry): यदि टॉर्टिकॉलिस का इलाज न किया जाए, तो चेहरे का वह हिस्सा जो हमेशा नीचे की तरफ रहता है, थोड़ा चपटा या अलग दिख सकता है (जैसे एक आंख छोटी या गाल का आकार भिन्न)।

निदान (Diagnosis)

यदि आपको अपने शिशु में ऊपर दिए गए कोई भी लक्षण दिखते हैं, तो तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ (Pediatrician) से संपर्क करना चाहिए। डॉक्टर इसका निदान आमतौर पर शारीरिक परीक्षण (Physical Examination) के माध्यम से करते हैं।

  • शारीरिक जांच: डॉक्टर शिशु की गर्दन की गति (Range of motion) की जांच करेंगे। वे देखेंगे कि शिशु का सिर कितनी दूर तक घूम सकता है और क्या गर्दन में कोई गांठ मौजूद है।
  • एक्स-रे (X-Rays): यह सुनिश्चित करने के लिए कि टॉर्टिकॉलिस मांसपेशियों की समस्या के कारण है और गर्दन की हड्डियों (स्पाइन) में कोई जन्मजात दोष नहीं है, डॉक्टर सर्वाइकल स्पाइन का एक्स-रे करवा सकते हैं।
  • अल्ट्रासाउंड (Ultrasound): यदि गर्दन में गांठ महसूस होती है, तो उसका विस्तृत चित्र देखने के लिए अल्ट्रासाउंड किया जा सकता है।

इलाज के विकल्प (Treatment Options)

कंजिनाइटल टॉर्टिकॉलिस का सबसे बड़ा सकारात्मक पहलू यह है कि यदि इसका निदान जल्दी (जन्म के 2-3 महीने के भीतर) हो जाए, तो 90% से अधिक शिशु बिना किसी सर्जरी के पूरी तरह ठीक हो जाते हैं। इसके इलाज के मुख्य तरीके नीचे दिए गए हैं:

1. भौतिक चिकित्सा और स्ट्रेचिंग (Physiotherapy and Stretching Exercises)

यह टॉर्टिकॉलिस का प्राथमिक और सबसे प्रभावी इलाज है। डॉक्टर आपको एक बाल रोग भौतिक चिकित्सक (Pediatric Physiotherapist) के पास भेजेंगे। फिजियोथेरेपिस्ट कसी हुई मांसपेशी को धीरे-धीरे लंबा करने और विपरीत दिशा की मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए विशेष स्ट्रेचिंग व्यायाम करवाएंगे।

  • पैसिव स्ट्रेचिंग: इसमें शिशु को लेटाकर, बहुत ही सावधानी और हल्के हाथों से उसके सिर को उस दिशा में मोड़ा जाता है जहाँ वह घुमाने में कतराता है।
  • माता-पिता को भी ये व्यायाम सिखाए जाते हैं ताकि वे घर पर दिन में कई बार (डायपर बदलते समय या मालिश के दौरान) इन्हें कर सकें। ध्यान रहे, ये व्यायाम बिना विशेषज्ञ से सीखे खुद से कभी न करें, क्योंकि गलत तरीके से करने पर शिशु की गर्दन को नुकसान पहुंच सकता है।

2. घर का माहौल और पोजिशनिंग (Positioning and Environment)

माता-पिता की भूमिका टॉर्टिकॉलिस के इलाज में सबसे अहम होती है। आप शिशु के वातावरण में कुछ बदलाव करके उसे गर्दन घुमाने के लिए प्रेरित कर सकते हैं:

  • फीडिंग पोजीशन बदलें: स्तनपान या बोतल से दूध पिलाते समय शिशु को ऐसे पकड़ें कि उसे उस दिशा में मुड़ना पड़े जो उसके लिए मुश्किल है।
  • खिलौनों का सही इस्तेमाल: आवाज करने वाले या रंग-बिरंगे खिलौनों को शिशु के पालने (crib) या बिस्तर में उस तरफ रखें, जिस तरफ उसकी गर्दन कम घूमती है। इससे वह उत्सुकता से उस तरफ देखने का प्रयास करेगा।
  • पालने की दिशा: शिशु अक्सर खिड़की की रोशनी या कमरे में आ रहे लोगों की तरफ देखते हैं। उसे पालने में ऐसे लिटाएं कि उसे कमरे में देखने के लिए अपनी प्रभावित गर्दन को घुमाना पड़े।

3. टमी टाइम (Tummy Time)

शिशु के जगते समय (और निगरानी में) उसे पेट के बल लिटाना ‘टमी टाइम’ कहलाता है। टॉर्टिकॉलिस के इलाज में यह एक संजीवनी की तरह काम करता है। जब शिशु पेट के बल लेटता है, तो वह अपना सिर उठाने की कोशिश करता है। इससे उसकी गर्दन, पीठ और कंधों की मांसपेशियां मजबूत होती हैं। यदि शिशु रोता है, तो शुरुआत में इसे केवल 1-2 मिनट के लिए दिन में कई बार करें और धीरे-धीरे समय बढ़ाएं।

4. टॉट कॉलर (TOT Collar)

कुछ मामलों में, यदि शिशु 4 महीने से बड़ा है और स्ट्रेचिंग से पर्याप्त सुधार नहीं हो रहा है, तो डॉक्टर ‘ट्यूबलर ऑर्थोसिस फॉर टॉर्टिकॉलिस’ (TOT Collar) नामक एक विशेष नरम कॉलर पहनाने की सलाह दे सकते हैं। यह शिशु के सिर को सीधा रखने में मदद करता है।

5. सर्जरी (Surgical Intervention)

यदि भौतिक चिकित्सा और अन्य उपायों से 12 से 18 महीने की उम्र तक भी टॉर्टिकॉलिस ठीक नहीं होता है, या मांसपेशी बहुत अधिक कसी हुई है, तब सर्जरी पर विचार किया जाता है। सर्जरी (जिसे SCM Release Surgery कहा जाता है) में कसी हुई मांसपेशी को थोड़ा सा काट कर लंबा किया जाता है। सर्जरी के बाद शिशु को फिर से फिजियोथेरेपी की आवश्यकता होती है ताकि गर्दन की गतिशीलता पूरी तरह लौट सके।


यदि इलाज न किया जाए तो क्या होगा? (Complications if untreated)

टॉर्टिकॉलिस अपने आप ठीक होने वाली स्थिति नहीं है (हालांकि कुछ बहुत हल्के मामले समय के साथ बेहतर हो सकते हैं)। यदि इसे नजरअंदाज किया गया, तो भविष्य में बच्चे को गंभीर शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है:

  1. स्थायी विकृति: गर्दन हमेशा के लिए एक तरफ झुकी रह सकती है।
  2. चेहरे का विकास रुकना (Facial Asymmetry): चेहरे के दोनों हिस्से अलग-अलग आकार के विकसित हो सकते हैं। जबड़ा टेढ़ा हो सकता है।
  3. स्कॉलियोसिस (Scoliosis): शरीर का संतुलन बिगड़ने के कारण रीढ़ की हड्डी टेढ़ी हो सकती है।
  4. दृष्टि संबंधी समस्याएं: सिर के हमेशा एक तरफ झुके रहने से आंखों की मांसपेशियों पर असमान जोर पड़ता है, जिससे दृष्टिदोष हो सकता है।
  5. विकास में देरी (Delayed Milestones): बच्चा समय पर बैठना, रेंगना (crawling) या चलना सीखने में पिछड़ सकता है क्योंकि शरीर का गुरुत्वाकर्षण केंद्र (center of gravity) बिगड़ा रहता है।

माता-पिता के लिए मनोवैज्ञानिक पहलू और सलाह

जब माता-पिता को पता चलता है कि उनके नवजात को टॉर्टिकॉलिस है, तो उनका चिंतित होना, डरना या खुद को दोषी मानना बहुत स्वाभाविक है। कई माता-पिता सोचते हैं कि शायद उनके सोने के तरीके या गर्भावस्था के दौरान किसी गलती के कारण ऐसा हुआ है।

लेकिन यह समझना बहुत जरूरी है कि कंजिनाइटल टॉर्टिकॉलिस में माता-पिता की कोई गलती नहीं होती है। यह पूरी तरह से एक प्राकृतिक घटना है। घबराने के बजाय, संयम रखें और इलाज की प्रक्रिया पर ध्यान केंद्रित करें। फिजियोथेरेपी में कभी-कभी शिशु रोते हैं क्योंकि कसी हुई मांसपेशी को स्ट्रेच करने में उन्हें हल्की असुविधा होती है। एक माता-पिता के रूप में बच्चे को रोता हुआ देखना कठिन होता है, लेकिन याद रखें कि यह थोड़े समय का कष्ट उनके जीवन भर के स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है।


निष्कर्ष (Conclusion)

कंजिनाइटल टॉर्टिकॉलिस नवजात शिशुओं में पाई जाने वाली एक ऐसी स्थिति है जिसे लेकर शुरू में चिंता तो होती है, लेकिन इसका समाधान अत्यंत सरल और कारगर है। सही समय पर बाल रोग विशेषज्ञ से परामर्श, नियमित भौतिक चिकित्सा (Physiotherapy), और घर पर ‘टमी टाइम’ तथा सही पोजिशनिंग के माध्यम से शिशु की गर्दन को पूरी तरह से सामान्य किया जा सकता है।

शुरुआती कुछ महीने इस समस्या को ठीक करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण (Golden Period) होते हैं। इसलिए, एक जागरूक अभिभावक के रूप में अपने शिशु की हर गतिविधि पर नजर रखें और यदि आपको उसकी गर्दन के झुकाव में कोई भी असामान्यता दिखे, तो तुरंत चिकित्सीय सलाह लें। आपका धैर्य और सही मार्गदर्शन आपके शिशु को एक स्वस्थ और सामान्य जीवन की ओर ले जाएगा।

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