डबल जॉइंटेड (Double Jointed) क्या आप अपना अंगूठा कलाई से छुआ सकते हैं? ज्यादा लचीलेपन (Hypermobility) के नुकसान।
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डबल जॉइंटेड (Double Jointed): क्या आप अपना अंगूठा कलाई से छुआ सकते हैं? ज्यादा लचीलेपन (Hypermobility) के नुकसान और सही फिजियोथेरेपी

बचपन में या दोस्तों के बीच अक्सर कोई न कोई ऐसा व्यक्ति जरूर मिल जाता है जो अपने शरीर को किसी रबर की तरह मोड़ लेता है। कोई अपना अंगूठा पीछे की तरफ मोड़कर कलाई से छुआ लेता है, कोई अपनी उंगलियों को अजीबोगरीब तरीके से पीछे की ओर झुका लेता है, तो कोई बिना घुटने मोड़े आसानी से अपनी हथेलियां जमीन पर टिका देता है। आम बोलचाल में ऐसे लोगों को अक्सर ‘डबल जॉइंटेड’ (Double Jointed) कहा जाता है। लोग इस अद्भुत लचीलेपन को देखकर हैरान रह जाते हैं और इसे एक विशेष प्रतिभा या ‘सुपरपावर’ मान लेते हैं।

लेकिन मेडिकल साइंस और फिजियोथेरेपी की भाषा में इसे कोई चमत्कार नहीं, बल्कि जॉइंट हाइपरमोबिलिटी (Joint Hypermobility) कहा जाता है। देखने में भले ही यह लचीलापन आकर्षक लगे, लेकिन स्वास्थ्य के नजरिए से यह कई गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है। शरीर का जरूरत से ज्यादा लचीला होना हमेशा फायदेमंद नहीं होता।

इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि ‘डबल जॉइंटेड’ होने का असली मतलब क्या है, हाइपरमोबिलिटी क्यों होती है, इसके मुख्य नुकसान क्या हैं, और समर्पण फिजियोथेरेपी क्लिनिक के अनुभव के आधार पर इसे कैसे प्रबंधित किया जा सकता है।

Table of Contents

‘डबल जॉइंटेड’ (Double Jointed) का असली मतलब क्या है?

सबसे पहले तो इस मिथक को तोड़ना बहुत जरूरी है कि ‘डबल जॉइंटेड’ लोगों के शरीर में कोई अतिरिक्त (extra) जॉइंट या जोड़ होता है। मानव शरीर की संरचना सभी के लिए एक समान होती है; हमारे जोड़ों की संख्या भी उतनी ही होती है जितनी किसी अन्य सामान्य व्यक्ति में।

दरअसल, जब किसी व्यक्ति के जोड़ अपनी सामान्य रेंज ऑफ मोशन (Range of Motion) से बहुत ज्यादा आगे तक मुड़ जाते हैं या खुल जाते हैं, तो इस स्थिति को हाइपरमोबिलिटी (Hypermobility) कहा जाता है।

यह ज्यादा लचीलापन क्यों होता है?

हमारे जोड़ों को अपनी जगह पर स्थिर रखने का काम लिगामेंट्स (Ligaments) और कैप्सूल करते हैं। ये एक तरह के मजबूत कनेक्टिव टिश्यू (Connective Tissue) होते हैं, जो रबर बैंड की तरह काम करते हैं। सामान्य लोगों में ये टिश्यू एक सीमा के बाद जोड़ों को आगे मुड़ने से रोक देते हैं।

लेकिन हाइपरमोबिलिटी वाले लोगों में अनुवांशिक (Genetic) कारणों से इन कनेक्टिव टिश्यू में मौजूद कोलेजन (Collagen) नामक प्रोटीन की बनावट अलग होती है। उनका कोलेजन सामान्य से ज्यादा कमजोर और खिंचाव वाला होता है। इसी कारण उनके लिगामेंट्स जोड़ों को कसकर पकड़ने के बजाय उन्हें ज्यादा ढीला छोड़ देते हैं, जिससे व्यक्ति अपने अंगों को असामान्य रूप से मोड़ पाता है।

कैसे पता करें कि आपको हाइपरमोबिलिटी है? (The Beighton Score)

चिकित्सा जगत में शरीर के लचीलेपन या हाइपरमोबिलिटी को मापने के लिए एक विशेष टेस्ट का उपयोग किया जाता है, जिसे बीटन स्कोर (Beighton Score) कहते हैं। यह 9 अंकों का एक साधारण टेस्ट है। यदि आप निम्नलिखित में से कई क्रियाएं आसानी से कर सकते हैं, तो आप हाइपरमोबाइल हो सकते हैं:

  1. अंगूठे को कलाई से छुआना (Thumb to Wrist): क्या आप अपने हाथ के अंगूठे को पीछे की ओर खींचकर उसी हाथ की कलाई (Forearm) से छुआ सकते हैं? (दोनों हाथों के लिए 1-1 अंक)
  2. छोटी उंगली का मुड़ना (Little Finger Extension): क्या आप अपने हाथ की सबसे छोटी उंगली को पीछे की तरफ 90 डिग्री से ज्यादा मोड़ सकते हैं? (दोनों हाथों के लिए 1-1 अंक)
  3. कोहनियों का हाइपरएक्सटेंशन (Elbow Hyperextension): जब आप अपनी बाहों को सीधा करते हैं, तो क्या आपकी कोहनियां सीधी रेखा से 10 डिग्री से ज्यादा पीछे की ओर (उल्टी दिशा में) मुड़ जाती हैं? (दोनों हाथों के लिए 1-1 अंक)
  4. घुटनों का हाइपरएक्सटेंशन (Knee Hyperextension): सीधे खड़े होने पर क्या आपके घुटने सामान्य से ज्यादा पीछे की तरफ (Backwards) चले जाते हैं? (दोनों पैरों के लिए 1-1 अंक)
  5. हथेलियां जमीन पर टिकाना (Palms to the Floor): क्या आप सीधे खड़े होकर, बिना अपने घुटने मोड़े, अपनी दोनों हथेलियों को पूरी तरह से जमीन पर फ्लैट टिका सकते हैं? (1 अंक)

यदि किसी वयस्क का बीटन स्कोर 9 में से 4 या 5 से अधिक है, तो उसे जॉइंट हाइपरमोबिलिटी श्रेणी में रखा जाता है।

ज्यादा लचीलेपन (Hypermobility) के बड़े नुकसान और खतरे

योग और जिम्नास्टिक की दुनिया में लचीलेपन को बहुत सराहा जाता है, लेकिन जब यह लचीलापन लिगामेंट्स की कमजोरी (Hypermobility) के कारण होता है, तो यह मस्कुलोस्केलेटल सिस्टम (मांसपेशियों और हड्डियों के ढांचे) के लिए बड़ा खतरा बन जाता है। डॉ. नितेश पटेल और कई विशेषज्ञ फिजियोथेरेपिस्ट्स के अनुसार, अत्यधिक लचीलेपन के निम्नलिखित गंभीर नुकसान हो सकते हैं:

1. बार-बार चोट लगना (Frequent Sprains and Strains)

चूंकि हाइपरमोबाइल लोगों के लिगामेंट्स ढीले होते हैं, वे जोड़ों को अचानक होने वाले झटकों से नहीं बचा पाते। थोड़ा सा भी गलत कदम रखने पर टखने में मोच आना (Ankle Sprain), कलाई में दर्द होना या घुटने के लिगामेंट का खिंच जाना इनके लिए आम बात होती है। यह चोटें ठीक होने में भी सामान्य से अधिक समय लेती हैं।

2. जोड़ों का अपनी जगह से खिसकना (Dislocations and Subluxations)

यह हाइपरमोबिलिटी का सबसे खतरनाक पहलू है। जोड़ों को बांध कर रखने वाले टिश्यू के कमजोर होने के कारण, कई बार कंधे (Shoulder), घुटने की कटोरी (Patella), या उंगलियों के जोड़ अपनी जगह से खिसक जाते हैं (Dislocation) या आंशिक रूप से बाहर आकर वापस अंदर चले जाते हैं (Subluxation)। यह स्थिति बेहद दर्दनाक होती है और लंबे समय तक बनी रह सकती है।

3. पुराना दर्द और क्रॉनिक थकान (Chronic Pain and Fatigue)

जब आपके लिगामेंट्स जोड़ों को सहारा देने का काम ठीक से नहीं करते हैं, तो यह पूरी जिम्मेदारी आपके शरीर की मांसपेशियों (Muscles) पर आ जाती है। मांसपेशियों को आपके शरीर को स्थिर रखने के लिए सामान्य से दोगुना काम करना पड़ता है। इस लगातार ओवरवर्क के कारण हाइपरमोबाइल लोगों को अक्सर पीठ, गर्दन, घुटनों और कंधों में भारीपन, दर्द और हर समय थकान (Chronic Fatigue) महसूस होती है।

4. प्रोप्रियोसेप्शन (Proprioception) की कमी

प्रोप्रियोसेप्शन हमारे दिमाग की वह क्षमता है जिससे उसे आंख बंद होने पर भी यह पता रहता है कि शरीर का कौन सा अंग हवा में किस स्थिति में है। हाइपरमोबाइल लोगों में अक्सर यह क्षमता कमजोर होती है। उन्हें सही से अंदाजा नहीं होता कि उनका जोड़ कितना मुड़ चुका है। इसी वजह से उनका बैलेंस अक्सर बिगड़ता है, चीजें उनके हाथ से गिर जाती हैं, या वे चलते-चलते टकरा जाते हैं (Clumsiness)।

5. कम उम्र में गठिया या ऑस्टियोआर्थराइटिस (Early Onset Osteoarthritis)

जोड़ों के अपनी सीमा से ज्यादा मुड़ने और बार-बार गलत अलाइनमेंट (Alignment) में घिसने के कारण, जोड़ों के बीच मौजूद कार्टिलेज (Cartilage) तेजी से डैमेज होने लगता है। इसके परिणामस्वरूप, ऐसे लोगों को कम उम्र में ही ऑस्टियोआर्थराइटिस (हड्डियों का घिसना) और जोड़ों में सूजन की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

6. अन्य शारीरिक समस्याएं (Systemic Issues)

कुछ गंभीर मामलों में, जैसे हाइपरमोबिलिटी स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (HSD) या एहलर्स-डैनलोस सिंड्रोम (Ehlers-Danlos Syndrome – EDS) में, यह कमजोरी केवल जोड़ों तक सीमित नहीं रहती। चूंकि कोलेजन पूरे शरीर में होता है, इसलिए मरीजों को पाचन संबंधी समस्याएं (IBS), त्वचा का ज्यादा खिंचना, हर्निया, या चक्कर आना (POTS) जैसी दिक्कतें भी हो सकती हैं।

फिजियोथेरेपी और बचाव के उपाय (Management & Treatment)

हाइपरमोबिलिटी कोई ऐसी बीमारी नहीं है जिसे किसी दवा से ‘ठीक’ (Cure) किया जा सके, क्योंकि यह आपके शरीर की मूल संरचना का हिस्सा है। लेकिन, अहमदाबाद स्थित समर्पण फिजियोथेरेपी क्लिनिक जैसे विशेषज्ञ केंद्रों में सही मार्गदर्शन और रिहैबिलिटेशन प्रोग्राम के जरिए इसके दुष्प्रभावों को पूरी तरह से नियंत्रित किया जा सकता है और एक दर्द-मुक्त जीवन जिया जा सकता है।

यहाँ कुछ प्रमुख बचाव और उपचार के तरीके दिए गए हैं:

1. स्ट्रेचिंग से बचें, स्ट्रेंथनिंग पर ध्यान दें (Focus on Strength, Not Stretching)

हाइपरमोबाइल लोगों को योग करते समय या वार्मअप करते समय बहुत सावधान रहना चाहिए। उन्हें अपनी मांसपेशियों को और ज्यादा खींचने (Overstretching) की जरूरत नहीं है, बल्कि उन्हें मजबूत बनाने की जरूरत है। आइसोमेट्रिक (Isometric) और क्लोज्ड काइनेटिक चेन (Closed Kinetic Chain) एक्सरसाइज सबसे सुरक्षित होती हैं। वजन उठाना (सही तकनीक के साथ) जोड़ों के आसपास की मांसपेशियों (जैसे कोर, क्वाड्रिसेप्स, ग्लूट्स) को मजबूत करता है, जो ढीले लिगामेंट्स की भरपाई करते हैं।

2. जोड़ों को ‘लॉक’ न करें (Avoid Locking the Joints)

खड़े होते समय अक्सर लोग अपने घुटनों को पूरा पीछे की तरफ धकेल कर लॉक कर लेते हैं। इसी तरह काम करते समय कोहनियों को पूरा सीधा कर लेते हैं। हाइपरमोबाइल लोगों को अपने जोड़ों को हल्का सा मोड़कर (Micro-bend) रखने की आदत डालनी चाहिए ताकि भार सीधा हड्डी या लिगामेंट पर न पड़े, बल्कि मांसपेशियों पर आए।

3. प्रोप्रियोसेप्शन और बैलेंस ट्रेनिंग (Balance Training)

फिजियोथेरेपी में बैलेंस बोर्ड (Wobble board), बोसु बॉल (Bosu ball) और एक पैर पर खड़े होने वाली एक्सरसाइज कराई जाती हैं। यह नर्वस सिस्टम को प्रशिक्षित करती हैं ताकि दिमाग और जोड़ों के बीच का कनेक्शन मजबूत हो और चोट लगने का खतरा कम हो सके।

4. पार्टी ट्रिक्स करना बंद करें (Stop Party Tricks)

दोस्तों को इम्प्रेस करने के लिए अंगूठे को कलाई से छुआना या उंगलियों को उल्टा मोड़ना तुरंत बंद कर देना चाहिए। हर बार जब आप ऐसा करते हैं, आप अपने लिगामेंट्स को और ज्यादा ढीला कर रहे होते हैं और भविष्य में दर्द को न्योता दे रहे होते हैं।

5. एर्गोनॉमिक्स और सही पोस्चर (Ergonomics and Posture)

ऑफिस में काम करते समय, ड्राइव करते समय या सोते समय शरीर का पोस्चर सही होना बहुत जरूरी है। जोड़ों को सपोर्ट देने वाले कुशन, सही आर्च वाले जूते और जरूरत पड़ने पर जॉइंट सपोर्ट (Braces) का उपयोग डॉक्टर की सलाह पर किया जाना चाहिए।

क्लिनिकल परामर्श कब लें?

यदि आपका शरीर बहुत लचीला है लेकिन आपको कोई दर्द या समस्या नहीं है, तो आपको बस व्यायाम और स्ट्रेंथनिंग पर ध्यान देने की जरूरत है। लेकिन, यदि आपको बार-बार मोच आ रही है, जोड़ों से ‘कटकट’ की आवाज के साथ तेज दर्द होता है, आपके जोड़ खिसक रहे हैं, या आपको लगातार शारीरिक थकान रहती है, तो यह संकेत है कि आपकी हाइपरमोबिलिटी एक सिंड्रोम (Hypermobility Syndrome) में बदल रही है।

ऐसी स्थिति में आपको तुरंत किसी अनुभवी फिजियोथेरेपिस्ट से संपर्क करना चाहिए। डॉ. नितेश पटेल जैसे विशेषज्ञ आपके शरीर के बायोमैकेनिक्स की जांच करके आपके लिए एक कस्टमाइज्ड एक्सरसाइज और रिहैबिलिटेशन प्रोटोकॉल तैयार कर सकते हैं, जो आपके जोड़ों को सुरक्षित रखते हुए दर्द से राहत दिलाएगा।

निष्कर्ष (Conclusion)

डबल जॉइंटेड (Double Jointed) या हाइपरमोबाइल होना कोई अभिशाप नहीं है, और न ही यह कोई जादुई शक्ति है। यह केवल एक शारीरिक अवस्था है जो शरीर में संयोजी ऊतकों (Connective tissues) की अलग बनावट को दर्शाती है। यदि आप भी उनमें से हैं जो अपना अंगूठा आसानी से कलाई से छुआ लेते हैं, तो अपने इस लचीलेपन का प्रदर्शन करने से बचें। इसके बजाय, अपनी मांसपेशियों की ताकत बढ़ाने और जोड़ों की स्थिरता (Joint Stability) पर ध्यान दें। सही जीवनशैली, पोस्चर और फिजियोथेरेपी के नियमित अभ्यास से आप हाइपरमोबिलिटी के नुकसान से बच सकते हैं और एक मजबूत, स्वस्थ और सक्रिय जीवन जी सकते हैं।

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