एक्स्ट्रा-कॉर्पोरियल शॉकवेव थेरेपी (ESWT): एड़ी की हड्डी बढ़ने (Calcaneal Spur) को बिना ऑपरेशन तोड़ने की आधुनिक मशीन
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एक्स्ट्रा-कॉर्पोरियल शॉकवेव थेरेपी (ESWT): एड़ी की हड्डी बढ़ने (Calcaneal Spur) को बिना ऑपरेशन तोड़ने की आधुनिक मशीन

सुबह सोकर उठने के बाद जब आप जमीन पर अपना पहला कदम रखते हैं, तो क्या आपकी एड़ी में सुई चुभने या बिजली का करंट लगने जैसा तेज दर्द होता है? अगर हाँ, तो यह कैल्केनियल स्पर (Calcaneal Spur) यानी एड़ी की हड्डी बढ़ने का संकेत हो सकता है।

पहले के समय में जब दवाइयां, फिजियोथेरेपी और स्टेरॉयड के इंजेक्शन इस दर्द को खत्म करने में नाकाम हो जाते थे, तो मरीजों के पास केवल एक ही रास्ता बचता था—ऑपरेशन (सर्जरी)। लेकिन सर्जरी का नाम सुनते ही कई लोग डर जाते हैं। आज चिकित्सा विज्ञान ने इतनी तरक्की कर ली है कि अब बिना किसी चीर-फाड़, बिना खून बहे और बिना अस्पताल में भर्ती हुए इस समस्या का स्थायी इलाज संभव है। इस क्रांतिकारी और आधुनिक तकनीक का नाम है— एक्स्ट्रा-कॉर्पोरियल शॉकवेव थेरेपी (Extracorporeal Shockwave Therapy – ESWT)

आइए विस्तार से समझते हैं कि कैल्केनियल स्पर क्या है और यह आधुनिक ESWT मशीन इसे बिना ऑपरेशन के कैसे ठीक करती है।

कैल्केनियल स्पर (एड़ी की हड्डी बढ़ना) क्या है?

कैल्केनियल स्पर एड़ी की हड्डी (Calcaneus) के निचले हिस्से में कैल्शियम के जमा होने (Calcification) से बनी एक नुकीली हड्डी जैसी संरचना होती है। यह अक्सर एड़ी के उस हिस्से में बनती है जहाँ ‘प्लांटर फेशिया’ (Plantar Fascia) नामक ऊतक (Tissue) एड़ी की हड्डी से जुड़ता है।

जब हम लंबे समय तक खड़े रहते हैं, गलत आकार के जूते पहनते हैं, या मोटापा बढ़ जाता है, तो प्लांटर फेशिया पर अत्यधिक दबाव पड़ता है। इस लगातार खिंचाव और दबाव के कारण वहां सूजन आ जाती है (जिसे प्लांटर फेशिआइटिस कहते हैं)। शरीर इस खिंचाव को सहन करने के लिए उस जगह पर कैल्शियम जमा करने लगता है, जो धीरे-धीरे एक कांटे या हुक का आकार ले लेता है।एक्स-रे में एड़ी की हड्डी का बढ़ना (Calcaneal Spur), AI generated

एक्स-रे में एड़ी की हड्डी का बढ़ना (Calcaneal Spur). Source

इसके मुख्य कारण क्या हैं?

  • मोटापा (Obesity): शरीर का अतिरिक्त वजन सीधे पैरों और एड़ियों पर पड़ता है।
  • लंबे समय तक खड़े रहना: शिक्षक, ट्रैफिक पुलिस या फैक्ट्री वर्कर्स में यह समस्या आम है।
  • गलत जूते पहनना: बिना कुशन वाले, सख्त सोल या बहुत ऊंची हील वाले जूते पहनना।
  • फ्लैट फीट (Flat Feet) या हाई आर्च: पैरों के तलवे का आकार सामान्य न होना।
  • बढ़ती उम्र: उम्र के साथ एड़ी के नीचे का प्राकृतिक फैट पैड (Fat pad) घिसने लगता है।

एक्स्ट्रा-कॉर्पोरियल शॉकवेव थेरेपी (ESWT) क्या है?

एक्स्ट्रा-कॉर्पोरियल (Extracorporeal) का मतलब है ‘शरीर के बाहर से’, और शॉकवेव (Shockwave) का अर्थ है ‘उच्च ऊर्जा वाली ध्वनि तरंगें’। यह एक नॉन-इनवेसिव (बिना चीर-फाड़ वाली) चिकित्सा प्रक्रिया है, जिसमें एक विशेष मशीन के जरिए ध्वनि तरंगों (Acoustic Waves) को शरीर के बाहर से दर्द वाले हिस्से (एड़ी) तक पहुँचाया जाता है।

रोचक तथ्य: इस तकनीक का आविष्कार मूल रूप से किडनी स्टोन (गुर्दे की पथरी) को बिना ऑपरेशन तोड़ने के लिए किया गया था (जिसे लिथोट्रिप्सी कहते हैं)। बाद में डॉक्टरों ने पाया कि अगर इन तरंगों की तीव्रता को कम करके हड्डियों और मांसपेशियों पर इस्तेमाल किया जाए, तो यह पुरानी सूजन को खत्म करने और हड्डियों के कड़ेपन (कैल्शियम जमाव) को तोड़ने में चमत्कारी असर दिखाती है।

ESWT मशीन एड़ी की हड्डी को कैसे ठीक करती है? (काम करने का विज्ञान)

यह मशीन कोई जादू नहीं करती, बल्कि शरीर की अपनी ‘हीलिंग प्रोसेस’ (खुद को ठीक करने की क्षमता) को कई गुना तेज कर देती है। ESWT मुख्य रूप से चार चरणों में काम करती है:

  1. कैल्शियम के जमाव को तोड़ना (Decalcification): शॉकवेव थेरेपी से निकलने वाली उच्च ऊर्जा की तरंगें एड़ी में बने नुकीले कैल्केनियल स्पर (कैल्शियम डिपॉजिट) से टकराती हैं। ये तरंगें उस कठोर कैल्शियम को छोटे-छोटे कणों (Micro-fragments) में तोड़ देती हैं, जिसे बाद में शरीर का लिम्फेटिक सिस्टम (Lymphatic system) प्राकृतिक रूप से सोख कर शरीर से बाहर कर देता है।
  2. नई रक्त वाहिकाओं का निर्माण (Neovascularization): पुरानी सूजन के कारण एड़ी के उस हिस्से में खून का दौरा कम हो जाता है, जिससे वह जगह खुद को ठीक नहीं कर पाती। शॉकवेव वहां सूक्ष्म चोटें (Micro-trauma) पैदा करती है, जिससे शरीर उस हिस्से में नई खून की नलियां बनाने लगता है। खून का प्रवाह बढ़ने से वहां ऑक्सीजन और पोषक तत्व पहुंचते हैं, जो डैमेज हुए ऊतकों (Tissues) की मरम्मत करते हैं।
  3. दर्द के सिग्नल को रोकना (Substance P Reduction): ‘सब्सटेंस पी’ एक ऐसा न्यूरोट्रांसमीटर है जो दिमाग को दर्द का सिग्नल भेजता है। शॉकवेव थेरेपी इस रसायन (Chemical) के स्तर को काफी कम कर देती है, जिससे मरीज को दर्द से तुरंत और लंबे समय तक के लिए राहत मिलती है।
  4. सूजन को खत्म करना: यह थेरेपी पुरानी और जिद्दी सूजन (Chronic Inflammation) को खत्म करके शरीर की प्राकृतिक सूजन-रोधी (Anti-inflammatory) प्रक्रिया को सक्रिय करती है।

इलाज की प्रक्रिया: क्लिनिक में क्या होता है?

ESWT पूरी तरह से एक ओपीडी (OPD) प्रक्रिया है। इसके लिए आपको अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं होती। पूरी प्रक्रिया इस प्रकार होती है:

  • जांच और मार्किंग: सबसे पहले डॉक्टर एक्स-रे या अल्ट्रासाउंड की मदद से एड़ी में स्पर (हड्डी बढ़ने) की सटीक जगह का पता लगाते हैं और पेन से वहां एक निशान बना देते हैं।
  • जेल लगाना: एड़ी पर एक विशेष अल्ट्रासाउंड जेल लगाया जाता है। यह जेल शॉकवेव तरंगों को बिना किसी रुकावट के त्वचा से होते हुए सीधे हड्डी तक पहुंचने में मदद करता है।
  • तरंगें भेजना (Shockwave Application): डॉक्टर ESWT मशीन के प्रोब (हैंडल) को एड़ी पर रखते हैं और मशीन चालू करते हैं। शुरुआत में तरंगों की तीव्रता कम रखी जाती है और मरीज की सहनशीलता के अनुसार इसे धीरे-धीरे बढ़ाया जाता है। इस दौरान आपको एड़ी पर हल्की थपथपाहट (Tapping) महसूस होती है।
  • समय: एक सेशन में आमतौर पर 2000 से 3000 शॉकवेव्स दी जाती हैं, जिसमें केवल 10 से 15 मिनट का समय लगता है।
  • सेशन की संख्या: बीमारी की गंभीरता के आधार पर आमतौर पर 3 से 5 सेशन की आवश्यकता होती है। दो सेशन्स के बीच 5 से 7 दिन का गैप रखा जाता है।

पारंपरिक सर्जरी और ESWT में अंतर

अगर हम पुराने ऑपरेशन के तरीके और आज की इस आधुनिक मशीन की तुलना करें, तो शॉकवेव थेरेपी के फायदे साफ नजर आते हैं:

पैरामीटरESWT (शॉकवेव थेरेपी)पारंपरिक सर्जरी (ऑपरेशन)
चीरा या टांकेबिल्कुल नहीं (No Incision)हाँ (त्वचा को काटना पड़ता है)
एनेस्थीसिया (बेहोशी)आमतौर पर आवश्यकता नहींलोकल या जनरल एनेस्थीसिया जरूरी
रिकवरी का समयकुछ दिन (दैनिक काम तुरंत शुरू)3 से 6 सप्ताह का बेड रेस्ट
अस्पताल में भर्तीनहीं (मरीज तुरंत घर जा सकता है)1 से 2 दिन भर्ती रहना पड़ता है
संक्रमण (Infection) का खतरान के बराबरखुला घाव होने के कारण संभव है

ESWT के मुख्य फायदे (Benefits)

  1. स्टेरॉयड से बचाव: एड़ी के दर्द में अक्सर कॉर्टिकोस्टेरॉइड (Corticosteroid) के इंजेक्शन दिए जाते हैं, जो दर्द तो कम करते हैं लेकिन बार-बार लेने से एड़ी का फैट पैड गलने का खतरा रहता है। ESWT इस खतरे से बचाती है।
  2. सफलता दर (Success Rate): दुनिया भर में हुए मेडिकल रिसर्च बताते हैं कि प्लांटर फेशिआइटिस और कैल्केनियल स्पर के मामलों में ESWT की सफलता दर 75% से 85% तक है।
  3. समय की बचत: भागदौड़ भरी जिंदगी में किसी के पास 2 महीने बेड रेस्ट करने का समय नहीं है। इस थेरेपी को कराने के बाद मरीज खुद गाड़ी चलाकर या चलकर अपने घर या ऑफिस जा सकता है।
  4. स्थायी समाधान: यह केवल दर्द निवारक (Painkiller) की तरह दर्द को दबाती नहीं है, बल्कि दर्द के मूल कारण (हड्डी के जमाव और सूजन) को जड़ से खत्म करती है।

किन्हें यह थेरेपी नहीं लेनी चाहिए? (Contraindications)

हालांकि ESWT बहुत सुरक्षित है, लेकिन कुछ विशेष परिस्थितियों में डॉक्टरों द्वारा यह थेरेपी न कराने की सलाह दी जाती है:

  • गर्भवती महिलाएं: गर्भावस्था के दौरान इस थेरेपी के प्रभावों पर पर्याप्त शोध नहीं हुआ है, इसलिए इसे टालना बेहतर है।
  • रक्तस्राव विकार (Bleeding Disorders): जिन लोगों को हीमोफिलिया है या जो खून पतला करने वाली दवाएं (Blood thinners) ले रहे हैं, उन्हें यह थेरेपी नहीं लेनी चाहिए क्योंकि इससे अंदरूनी ब्लीडिंग हो सकती है।
  • पेसमेकर वाले मरीज: अगर शरीर में कोई इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस या पेसमेकर लगा है, तो शॉकवेव तरंगें उसके काम में बाधा डाल सकती हैं।
  • इंफेक्शन या ट्यूमर: अगर एड़ी के आसपास कोई घाव, बैक्टीरियल इंफेक्शन या हड्डी का कैंसर है, तो उस जगह पर ESWT का प्रयोग सख्त मना है।

संभावित दुष्प्रभाव (Side Effects) और इलाज के बाद की सावधानियां

दुष्प्रभाव: ESWT के साइड इफेक्ट्स बहुत ही मामूली और अस्थायी होते हैं। प्रक्रिया के दौरान हल्का दर्द या असुविधा हो सकती है। इलाज के बाद एड़ी पर हल्की लालिमा (Redness), हल्की सूजन या सुन्नपन महसूस हो सकता है, जो 24 से 48 घंटों में अपने आप ठीक हो जाता है।

इलाज के बाद क्या करें?

  • आराम: थेरेपी वाले दिन दौड़ना, कूदना या भारी वजन उठाने वाले व्यायाम न करें।
  • बर्फ का इस्तेमाल न करें: शॉकवेव थेरेपी जानबूझकर वहां हल्की सूजन पैदा करती है ताकि हीलिंग प्रोसेस शुरू हो। इसलिए इलाज के तुरंत बाद बर्फ की सिकाई (Ice pack) या एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाएं (जैसे ब्रूफेन) न लें, क्योंकि यह थेरेपी के असर को कम कर सकता है। दर्द होने पर डॉक्टर केवल पैरासिटामोल लेने की सलाह देते हैं।
  • जूतों में बदलाव: सिलिकॉन हील कुशन (Silicone Heel Cushion) का इस्तेमाल करें ताकि एड़ी पर दबाव कम पड़े।

निष्कर्ष

एड़ी का दर्द आपकी दिनचर्या और जीवन की गुणवत्ता को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है। अगर आप महीनों से एड़ी के दर्द (Calcaneal Spur) से जूझ रहे हैं और दवाइयां या फिजियोथेरेपी से कोई फायदा नहीं मिल रहा है, तो आपको सर्जरी के बारे में सोचने से पहले एक्स्ट्रा-कॉर्पोरियल शॉकवेव थेरेपी (ESWT) पर जरूर विचार करना चाहिए।

यह तकनीक दर्द रहित, सुरक्षित और विज्ञान द्वारा प्रमाणित है। अपने नजदीकी ऑर्थोपेडिक सर्जन (हड्डी रोग विशेषज्ञ) या स्पोर्ट्स मेडिसिन एक्सपर्ट से सलाह लें और जानें कि क्या ESWT आपके लिए सही विकल्प है। सही इलाज और थोड़ी सी सावधानी से आप दोबारा बिना दर्द के अपने कदमों पर खड़े हो सकते हैं।

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