जेस्टेशनल हाइपरटेंशन (Gestational Hypertension): गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप
गर्भावस्था के दौरान महिला के शरीर में कई शारीरिक और हार्मोनल बदलाव होते हैं। इस समय रक्तचाप में भी परिवर्तन हो सकता है। कुछ महिलाओं में गर्भावस्था के 20वें सप्ताह के बाद पहली बार उच्च रक्तचाप (High Blood Pressure) विकसित हो जाता है। जब गर्भावस्था के दौरान 20 सप्ताह के बाद नया उच्च रक्तचाप दिखाई देता है और प्री-एक्लेम्पसिया के अन्य लक्षण या संकेत मौजूद नहीं होते, तो इसे जेस्टेशनल हाइपरटेंशन (Gestational Hypertension) कहा जाता है।
यह स्थिति कई बार बिना किसी स्पष्ट लक्षण के भी हो सकती है। इसलिए गर्भावस्था में नियमित ब्लड प्रेशर जांच और प्रसवपूर्व (Antenatal) देखभाल बहुत महत्वपूर्ण है। कुछ महिलाओं में जेस्टेशनल हाइपरटेंशन आगे चलकर प्री-एक्लेम्पसिया में बदल सकता है, इसलिए डॉक्टर द्वारा नियमित निगरानी आवश्यक होती है।
जेस्टेशनल हाइपरटेंशन क्या है?
जेस्टेशनल हाइपरटेंशन का अर्थ है कि गर्भावस्था के 20 सप्ताह के बाद महिला का रक्तचाप सामान्य से बढ़ जाता है, लेकिन जांच में प्री-एक्लेम्पसिया के संकेत नहीं मिलते।
आमतौर पर सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर 140 mmHg या उससे अधिक और/या डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर 90 mmHg या उससे अधिक होने पर उच्च रक्तचाप माना जाता है। निदान के लिए डॉक्टर रक्तचाप की दोबारा जांच और आवश्यकतानुसार अन्य परीक्षण कर सकते हैं।
जेस्टेशनल हाइपरटेंशन में शुरुआत में पेशाब में प्रोटीन या शरीर के अंगों को नुकसान के संकेत नहीं होते। यदि बाद में प्रोटीन यूरिया या अन्य गंभीर विशेषताएं विकसित हो जाएं, तो स्थिति प्री-एक्लेम्पसिया की ओर संकेत कर सकती है।
जेस्टेशनल हाइपरटेंशन और प्री-एक्लेम्पसिया में अंतर
दोनों स्थितियों में गर्भावस्था के दौरान रक्तचाप बढ़ सकता है, लेकिन इनमें अंतर समझना जरूरी है।
जेस्टेशनल हाइपरटेंशन:
- आमतौर पर 20 सप्ताह के बाद शुरू होता है।
- रक्तचाप बढ़ा हुआ होता है।
- शुरुआत में प्रोटीन यूरिया या प्री-एक्लेम्पसिया के अन्य संकेत नहीं होते।
- नियमित निगरानी आवश्यक होती है।
प्री-एक्लेम्पसिया:
- आमतौर पर 20 सप्ताह के बाद विकसित होता है।
- उच्च रक्तचाप के साथ पेशाब में प्रोटीन या अन्य अंगों के प्रभावित होने के संकेत हो सकते हैं।
- तेज सिरदर्द, दृष्टि में बदलाव, ऊपरी पेट में दर्द आदि गंभीर संकेत हो सकते हैं।
इसलिए केवल ब्लड प्रेशर की एक रीडिंग के आधार पर स्वयं निदान करना उचित नहीं है।
जेस्टेशनल हाइपरटेंशन के संभावित कारण
जेस्टेशनल हाइपरटेंशन का एक निश्चित कारण हर महिला में स्पष्ट नहीं होता। गर्भावस्था के दौरान प्लेसेंटा, रक्त वाहिकाओं और शरीर में होने वाले बदलाव इसके विकास में भूमिका निभा सकते हैं।
कुछ महिलाओं में निम्न स्थितियां जोखिम बढ़ा सकती हैं:
- पहली गर्भावस्था
- पहले जेस्टेशनल हाइपरटेंशन या प्री-एक्लेम्पसिया का इतिहास
- परिवार में प्री-एक्लेम्पसिया का इतिहास
- जुड़वां या एक से अधिक बच्चों की गर्भावस्था
- अधिक वजन या मोटापा
- पहले से मौजूद उच्च रक्तचाप
- मधुमेह
- किडनी की बीमारी
- कुछ ऑटोइम्यून बीमारियां
हालांकि, जोखिम कारक मौजूद होने का अर्थ यह नहीं है कि महिला को निश्चित रूप से जेस्टेशनल हाइपरटेंशन होगा।
जेस्टेशनल हाइपरटेंशन के लक्षण
जेस्टेशनल हाइपरटेंशन की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कई महिलाओं में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होता। केवल ब्लड प्रेशर जांच से समस्या का पता चल सकता है।
कुछ महिलाओं में निम्न लक्षण दिखाई दे सकते हैं:
- सिरदर्द
- चक्कर या अस्वस्थ महसूस होना
- आंखों के सामने धुंधला दिखाई देना
- हाथ या चेहरे में असामान्य सूजन
- अचानक वजन बढ़ना
- ऊपरी पेट में दर्द
लेकिन इन लक्षणों का होना या न होना अकेले जेस्टेशनल हाइपरटेंशन की पुष्टि नहीं करता। इसलिए नियमित प्रसवपूर्व जांच जरूरी है।
कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें?
गर्भावस्था के दौरान निम्न संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए:
- बहुत तेज या लगातार सिरदर्द
- आंखों के सामने धुंधला दिखना या चमकती रोशनी दिखाई देना
- ऊपरी पेट या पसलियों के नीचे तेज दर्द
- सांस लेने में परेशानी
- चेहरे या हाथों में अचानक बहुत अधिक सूजन
- अचानक तबीयत बहुत खराब लगना
- रक्तचाप बहुत अधिक आना
- दौरा पड़ना या बेहोशी
ये संकेत गंभीर हाइपरटेंशन या प्री-एक्लेम्पसिया जैसी जटिलताओं से जुड़े हो सकते हैं और तत्काल चिकित्सा मूल्यांकन की आवश्यकता हो सकती है।
जेस्टेशनल हाइपरटेंशन की जांच
डॉक्टर स्थिति का मूल्यांकन करने के लिए कई प्रकार की जांच कर सकते हैं।
1. ब्लड प्रेशर की जांच
सबसे महत्वपूर्ण जांच रक्तचाप मापना है। सही कफ का उपयोग और उचित तरीके से माप लेना जरूरी है। यदि रीडिंग अधिक आती है, तो डॉक्टर परिस्थितियों के अनुसार दोबारा जांच कर सकते हैं।
2. यूरिन टेस्ट
पेशाब में प्रोटीन की जांच की जा सकती है। इससे प्री-एक्लेम्पसिया के मूल्यांकन में सहायता मिलती है।
3. ब्लड टेस्ट
जरूरत पड़ने पर किडनी और लिवर की कार्यक्षमता, प्लेटलेट्स तथा अन्य रक्त जांच की जा सकती हैं।
4. बच्चे की निगरानी
डॉक्टर गर्भ में बच्चे की वृद्धि और स्वास्थ्य की निगरानी के लिए अल्ट्रासाउंड, भ्रूण की हृदय गति की निगरानी और अन्य आवश्यक परीक्षण कर सकते हैं।
जांच की आवृत्ति और प्रकार महिला की गर्भावस्था की अवधि तथा रक्तचाप की गंभीरता के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
जेस्टेशनल हाइपरटेंशन का इलाज
इलाज का उद्देश्य मां और बच्चे दोनों को सुरक्षित रखना तथा रक्तचाप को नियंत्रित रखना है। उपचार महिला की स्थिति, गर्भावस्था के सप्ताह, रक्तचाप के स्तर और प्री-एक्लेम्पसिया के संकेतों पर निर्भर करता है।
नियमित निगरानी
हल्के मामलों में डॉक्टर बार-बार ब्लड प्रेशर, पेशाब और आवश्यक रक्त जांच की सलाह दे सकते हैं। बच्चे की वृद्धि और स्वास्थ्य की भी निगरानी की जाती है।
दवाएं
यदि डॉक्टर आवश्यक समझें तो गर्भावस्था में उपयोग की जाने वाली सुरक्षित एंटी-हाइपरटेंसिव दवाएं दी जा सकती हैं। दवा का चुनाव और खुराक केवल डॉक्टर द्वारा निर्धारित की जानी चाहिए।
गर्भावस्था में स्वयं से ब्लड प्रेशर की दवा शुरू या बंद न करें।
गंभीर उच्च रक्तचाप में शीघ्र उपचार महत्वपूर्ण होता है क्योंकि अनियंत्रित गंभीर हाइपरटेंशन मां और बच्चे दोनों के लिए गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है। WHO गंभीर गर्भावस्था-संबंधी उच्च रक्तचाप के समय समय पर एंटी-हाइपरटेंसिव उपचार की आवश्यकता पर जोर देता है।
प्रसव का निर्णय
कुछ महिलाओं में रक्तचाप नियंत्रित रहने पर गर्भावस्था को चिकित्सकीय निगरानी में आगे बढ़ाया जा सकता है। दूसरी ओर, यदि रक्तचाप गंभीर हो, मां या बच्चे की स्थिति प्रभावित हो या प्री-एक्लेम्पसिया जैसी जटिलता विकसित हो जाए, तो डॉक्टर प्रसव के समय के बारे में निर्णय ले सकते हैं।
इसका निर्णय प्रत्येक महिला की स्थिति के अनुसार व्यक्तिगत रूप से किया जाता है।
खान-पान और जीवनशैली
जेस्टेशनल हाइपरटेंशन में खान-पान और जीवनशैली को लेकर डॉक्टर की सलाह का पालन करना चाहिए।
- संतुलित और पौष्टिक भोजन लें।
- फल, सब्जियां, साबुत अनाज और पर्याप्त प्रोटीन को आहार में शामिल करें।
- अत्यधिक नमकीन और अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित रखें।
- पर्याप्त पानी पिएं, जब तक डॉक्टर ने तरल पदार्थ सीमित करने की सलाह न दी हो।
- डॉक्टर की अनुमति के अनुसार हल्की शारीरिक गतिविधि या व्यायाम करें।
- पर्याप्त नींद और आराम लें।
- धूम्रपान और तंबाकू से बचें।
- नियमित प्रसवपूर्व जांच करवाएं।
हालांकि सामान्य उच्च रक्तचाप में शारीरिक गतिविधि और आहार संबंधी बदलाव उपयोगी हो सकते हैं, गर्भावस्था में जेस्टेशनल हाइपरटेंशन होने पर किसी भी विशेष डाइट, व्यायाम या आराम की योजना को अपने स्त्री रोग विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार अपनाना चाहिए।
क्या जेस्टेशनल हाइपरटेंशन बच्चे को प्रभावित कर सकता है?
यदि रक्तचाप हल्का है और अच्छी तरह नियंत्रित है, तो कई महिलाओं में गर्भावस्था का परिणाम अच्छा हो सकता है। लेकिन अधिक गंभीर या अनियंत्रित स्थिति में जोखिम बढ़ सकता है।
संभावित जटिलताओं में शामिल हो सकती हैं:
- बच्चे का विकास अपेक्षा से कम होना
- समय से पहले प्रसव
- प्लेसेंटा से संबंधित समस्याएं
- मां में प्री-एक्लेम्पसिया का विकास
- गंभीर मामलों में मां या बच्चे के लिए गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं
WHO के अनुसार गर्भावस्था में हाइपरटेंसिव विकार प्रीटर्म बर्थ, भ्रूण के विकास में कमी और अन्य गंभीर मातृ एवं शिशु जटिलताओं से जुड़े हो सकते हैं।
प्रसव के बाद क्या होता है?
जेस्टेशनल हाइपरटेंशन अक्सर प्रसव के बाद धीरे-धीरे ठीक हो जाता है, लेकिन प्रसव के बाद भी कुछ समय तक रक्तचाप की निगरानी जरूरी है। कुछ महिलाओं में रक्तचाप लंबे समय तक बढ़ा रह सकता है और आगे चलकर क्रॉनिक हाइपरटेंशन के रूप में मूल्यांकन की आवश्यकता पड़ सकती है।
इसलिए बच्चे के जन्म के बाद डॉक्टर द्वारा बताई गई फॉलो-अप जांच को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
बचाव कैसे करें?
हर मामले में जेस्टेशनल हाइपरटेंशन को पूरी तरह रोकना संभव नहीं है। फिर भी कुछ कदम जोखिम कम करने और समस्या को जल्दी पहचानने में मदद कर सकते हैं:
- गर्भावस्था की शुरुआत से नियमित एंटीनेटल चेकअप करवाएं।
- प्रत्येक निर्धारित जांच में ब्लड प्रेशर की निगरानी करवाएं।
- डॉक्टर की सलाह के अनुसार यूरिन और रक्त जांच करवाएं।
- गर्भावस्था से पहले या दौरान मौजूद मधुमेह और उच्च रक्तचाप को उचित चिकित्सा देखभाल से नियंत्रित रखें।
- संतुलित भोजन और स्वस्थ वजन बनाए रखने पर ध्यान दें।
- डॉक्टर की अनुमति के अनुसार सुरक्षित शारीरिक गतिविधि करें।
- पहले प्री-एक्लेम्पसिया या जेस्टेशनल हाइपरटेंशन का इतिहास हो तो डॉक्टर को जरूर बताएं।
- उच्च जोखिम वाली महिलाओं में डॉक्टर कम-खुराक एस्पिरिन या कैल्शियम जैसी preventive therapies की सलाह दे सकते हैं; इन्हें स्वयं से शुरू नहीं करना चाहिए। WHO उच्च जोखिम वाली महिलाओं में कम-खुराक एस्पिरिन तथा कम dietary calcium वाले क्षेत्रों में calcium supplementation की सिफारिशों का उल्लेख करता है।
निष्कर्ष
जेस्टेशनल हाइपरटेंशन गर्भावस्था के 20 सप्ताह के बाद विकसित होने वाला उच्च रक्तचाप है। कई बार इसके कोई स्पष्ट लक्षण नहीं होते, इसलिए नियमित ब्लड प्रेशर जांच और एंटीनेटल केयर इसका जल्दी पता लगाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
समय पर पहचान और उचित चिकित्सकीय निगरानी से मां और बच्चे के स्वास्थ्य की रक्षा करने में मदद मिल सकती है। यदि ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ है, तेज सिरदर्द, दृष्टि में बदलाव, ऊपरी पेट में दर्द, अचानक सूजन या सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
