हेनोक-शोनलीन पुरपुरा (Henoch-Schönlein Purpura): कारण, लक्षण, जांच, उपचार और बचाव
हेनोक-शोनलीन पुरपुरा (Henoch-Schönlein Purpura या HSP) को वर्तमान चिकित्सा में IgA Vasculitis (IgA वास्कुलाइटिस) कहा जाता है। यह एक प्रकार की छोटी रक्त वाहिकाओं में सूजन (Small-vessel vasculitis) है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली से जुड़ा Immunoglobulin A (IgA) छोटी रक्त वाहिकाओं में जमा होकर सूजन पैदा कर सकता है। इसके कारण मुख्य रूप से त्वचा, जोड़ों, आंतों और किडनी प्रभावित हो सकती हैं।
यह बीमारी बच्चों में अधिक देखी जाती है, विशेषकर लगभग 4–7 वर्ष की आयु में, हालांकि वयस्क भी इससे प्रभावित हो सकते हैं। अधिकांश बच्चों में यह बीमारी कुछ सप्ताह से कुछ महीनों में ठीक हो जाती है, लेकिन किडनी से जुड़ी समस्या होने पर नियमित चिकित्सकीय निगरानी आवश्यक होती है।
हेनोक-शोनलीन पुरपुरा क्या है?
HSP/IgA Vasculitis में शरीर की छोटी रक्त वाहिकाओं में IgA से संबंधित सूजन होती है। जब रक्त वाहिकाओं की दीवारों में सूजन आती है, तो उनसे रक्त और तरल पदार्थ आसपास के ऊतकों में रिस सकता है। इसका परिणाम त्वचा पर लाल या बैंगनी रंग के उभरे हुए धब्बों के रूप में दिखाई दे सकता है।
इस बीमारी की चार प्रमुख विशेषताएं मानी जाती हैं:
- त्वचा पर लाल-बैंगनी चकत्ते या Purpura
- जोड़ों में दर्द और सूजन
- पेट दर्द तथा पाचन तंत्र से संबंधित लक्षण
- किडनी में सूजन या अन्य समस्या
इनमें त्वचा पर होने वाला पुरपुरा सबसे सामान्य लक्षण है।
हेनोक-शोनलीन पुरपुरा किसे हो सकता है?
यह बीमारी मुख्य रूप से बच्चों में होती है और बचपन में होने वाली वास्कुलाइटिस की सामान्य स्थितियों में से एक है। यह अक्सर 2–8 वर्ष की उम्र के बच्चों में देखी जाती है। वयस्कों में यह अपेक्षाकृत कम होती है, लेकिन वयस्कों में होने पर किडनी संबंधी जटिलताओं का जोखिम अधिक हो सकता है।
कई मामलों में बीमारी से पहले ऊपरी श्वसन तंत्र का संक्रमण हो सकता है। कुछ मामलों में दवाओं या अन्य प्रतिरक्षा-उत्तेजक कारणों के बाद भी यह स्थिति विकसित हो सकती है, लेकिन हर मरीज में किसी एक निश्चित कारण की पहचान नहीं हो पाती।
हेनोक-शोनलीन पुरपुरा के कारण
HSP का सटीक कारण हमेशा स्पष्ट नहीं होता। इसे मुख्य रूप से प्रतिरक्षा प्रणाली की असामान्य प्रतिक्रिया से जुड़ी बीमारी माना जाता है।
संभावित ट्रिगर में शामिल हो सकते हैं:
- वायरल या बैक्टीरियल संक्रमण
- गले या ऊपरी श्वसन तंत्र का संक्रमण
- कुछ दवाएं
- कुछ मामलों में कीड़े के काटने या अन्य प्रतिरक्षा-उत्तेजक परिस्थितियां
- दुर्लभ मामलों में अन्य संक्रमण या पर्यावरणीय कारक
हालांकि, केवल किसी संक्रमण या दवा की मौजूदगी से यह निश्चित नहीं कहा जा सकता कि वही HSP का कारण है।
हेनोक-शोनलीन पुरपुरा के प्रमुख लक्षण
1. त्वचा पर लाल या बैंगनी चकत्ते
इस बीमारी का सबसे प्रमुख लक्षण Purpura है। त्वचा पर छोटे लाल या बैंगनी धब्बे दिखाई दे सकते हैं, जो कई बार छोटे चोट के निशान जैसे लगते हैं।
ये चकत्ते अक्सर:
- पैरों पर
- पैरों के निचले हिस्से में
- नितंबों पर
- कभी-कभी हाथ, पेट या शरीर के अन्य हिस्सों पर
दिखाई दे सकते हैं।
आमतौर पर ये चकत्ते दबाने पर फीके नहीं पड़ते।
2. जोड़ों में दर्द और सूजन
घुटने और टखने HSP में अक्सर प्रभावित होते हैं। बच्चे को चलने में दर्द हो सकता है या वह पैर पर वजन डालने से बच सकता है।
कुछ मरीजों में कोहनी, कलाई या उंगलियों के छोटे जोड़ों में भी दर्द और सूजन हो सकती है।
3. पेट दर्द
आंतों की रक्त वाहिकाओं में सूजन होने पर पेट में दर्द हो सकता है। कुछ बच्चों में:
- पेट में ऐंठन
- मतली
- उल्टी
- भूख कम लगना
- मल में रक्त
जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
बहुत कम मामलों में आंत का एक हिस्सा दूसरे हिस्से में अंदर की ओर मुड़कर Intussusception जैसी गंभीर समस्या पैदा कर सकता है।
4. किडनी से संबंधित लक्षण
HSP में किडनी प्रभावित होना सबसे महत्वपूर्ण संभावित जटिलताओं में से एक है। किडनी प्रभावित होने पर पेशाब में रक्त या प्रोटीन आ सकता है।
कुछ मरीजों में:
- पेशाब का रंग लाल या भूरा होना
- पेशाब में प्रोटीन
- पैरों या चेहरे पर सूजन
- रक्तचाप बढ़ना
- किडनी की कार्यक्षमता में कमी
हो सकती है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि किडनी की समस्या हमेशा स्पष्ट लक्षणों के साथ नहीं आती। इसलिए बीमारी के दौरान और उसके बाद पेशाब की जांच तथा रक्तचाप की निगरानी महत्वपूर्ण है।
हेनोक-शोनलीन पुरपुरा का निदान
HSP का निदान मुख्य रूप से मरीज के लक्षणों और चिकित्सकीय जांच के आधार पर किया जाता है। डॉक्टर त्वचा के चकत्तों, जोड़ों की स्थिति, पेट के लक्षणों और किडनी से संबंधित संकेतों का मूल्यांकन करते हैं।
आमतौर पर निम्न जांच की जा सकती हैं:
यूरिन टेस्ट
पेशाब में रक्त और प्रोटीन की जांच की जाती है। यह जानने के लिए महत्वपूर्ण है कि किडनी प्रभावित है या नहीं।
ब्लड प्रेशर
उच्च रक्तचाप किडनी की भागीदारी का संकेत हो सकता है, इसलिए रक्तचाप नियमित रूप से मापा जाता है।
रक्त जांच
जरूरत के अनुसार किडनी फंक्शन, इलेक्ट्रोलाइट्स, रक्त कोशिकाओं और अन्य संभावित कारणों की जांच की जा सकती है।
अल्ट्रासाउंड
यदि पेट में गंभीर दर्द या आंत से जुड़ी जटिलता का संदेह हो, तो पेट का अल्ट्रासाउंड किया जा सकता है।
कुछ जटिल या अस्पष्ट मामलों में त्वचा या किडनी की बायोप्सी भी आवश्यक हो सकती है।
हेनोक-शोनलीन पुरपुरा का उपचार
HSP के लिए हर मरीज में आवश्यक रूप से कोई एक विशेष दवा नहीं होती। अधिकांश हल्के मामलों में बीमारी अपने आप ठीक हो जाती है और उपचार का उद्देश्य लक्षणों को नियंत्रित करना तथा जटिलताओं से बचाव करना होता है।
आराम और पर्याप्त तरल पदार्थ
हल्के मामलों में आराम, पर्याप्त पानी और डॉक्टर द्वारा सुझाई गई सामान्य देखभाल उपयोगी हो सकती है।
दर्द का उपचार
जोड़ों के दर्द के लिए चिकित्सक दर्द कम करने वाली दवाएं दे सकते हैं। लेकिन यदि किडनी प्रभावित होने का संदेह हो, तो Ibuprofen जैसे NSAIDs स्वयं से नहीं लेने चाहिए, क्योंकि कुछ परिस्थितियों में ये किडनी को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
कॉर्टिकोस्टेरॉइड
कुछ मरीजों में, विशेषकर गंभीर पेट दर्द या महत्वपूर्ण अंग-भागीदारी में, डॉक्टर कॉर्टिकोस्टेरॉइड का उपयोग कर सकते हैं। किडनी की गंभीर भागीदारी में भी विशेषज्ञ की देखरेख में इम्यूनोसप्रेसिव उपचार की आवश्यकता हो सकती है।
किडनी की समस्या का उपचार
यदि पेशाब में लगातार प्रोटीन, उच्च रक्तचाप या किडनी की कार्यक्षमता में कमी हो, तो नेफ्रोलॉजिस्ट की सलाह आवश्यक हो सकती है। कुछ मरीजों में ACE inhibitor या ARB जैसी दवाओं का उपयोग प्रोटीन यूरिया और रक्तचाप को नियंत्रित करने के लिए किया जा सकता है। गंभीर मामलों में अन्य उपचारों की आवश्यकता हो सकती है।
फिजियोथेरेपी की भूमिका
HSP मुख्य रूप से एक चिकित्सकीय और प्रतिरक्षा संबंधी बीमारी है, इसलिए फिजियोथेरेपी इसका प्राथमिक उपचार नहीं है। लेकिन बीमारी के दौरान जोड़ों में दर्द, सूजन या कुछ समय तक शारीरिक गतिविधि कम रहने से कमजोरी और चलने-फिरने में परेशानी हो सकती है।
ऐसी स्थिति में डॉक्टर की अनुमति के बाद फिजियोथेरेपिस्ट:
- हल्की Range of Motion exercises
- सुरक्षित joint mobility exercises
- धीरे-धीरे walking activity
- मांसपेशियों की कमजोरी के लिए उपयुक्त strengthening
- सामान्य दैनिक गतिविधियों में वापसी
में सहायता कर सकता है।
यदि बच्चे को सक्रिय सूजन, तेज दर्द, गंभीर कमजोरी या किडनी/अन्य अंगों की गंभीर समस्या हो, तो व्यायाम शुरू करने से पहले चिकित्सकीय सलाह जरूरी है।
बीमारी के दौरान किन बातों का ध्यान रखें?
माता-पिता को बच्चे की स्थिति पर विशेष नजर रखनी चाहिए। निम्न बातों पर ध्यान देना उपयोगी है:
- त्वचा के नए चकत्तों की निगरानी करें।
- पेशाब के रंग में बदलाव देखें।
- पेट दर्द बढ़ने पर डॉक्टर से संपर्क करें।
- पैरों या चेहरे पर सूजन दिखाई दे तो चिकित्सकीय सलाह लें।
- नियमित रक्तचाप और पेशाब की जांच करवाएं।
- डॉक्टर की सलाह के बिना दर्द की दवा न दें।
- बच्चे को उसकी सहनशीलता के अनुसार आराम दें।
- लक्षण कम होने के बाद भी फॉलो-अप जांच छोड़ें नहीं।
क्या HSP दोबारा हो सकता है?
हां, कुछ लोगों में HSP दोबारा हो सकता है। पुनरावृत्ति अक्सर त्वचा, जोड़ों या अन्य लक्षणों के रूप में दिखाई दे सकती है। अधिकांश मामलों में यह फिर से ठीक हो जाता है, लेकिन दोबारा लक्षण आने पर चिकित्सकीय जांच कराना आवश्यक है।
किडनी की निगरानी क्यों जरूरी है?
HSP में किडनी की समस्या कभी-कभी बीमारी की शुरुआत के समय दिखाई नहीं देती और बाद में विकसित हो सकती है। इसलिए केवल त्वचा के चकत्ते ठीक हो जाने को पूरी तरह ठीक होने का प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए।
बच्चों में सामान्य यूरिन जांच और रक्तचाप की नियमित निगरानी कम से कम शुरुआती महीनों में महत्वपूर्ण है। अलग-अलग मरीजों में फॉलो-अप की अवधि बीमारी की गंभीरता और किडनी की स्थिति के अनुसार अलग हो सकती है।
कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें?
यदि बच्चे या वयस्क में HSP के साथ निम्न में से कोई लक्षण हो तो तत्काल चिकित्सकीय सहायता लें:
- बहुत तेज या लगातार पेट दर्द
- बार-बार उल्टी
- मल में स्पष्ट रक्त
- पेशाब में रक्त
- पेशाब बहुत कम आना
- चेहरे या पैरों में अचानक सूजन
- तेज सिरदर्द या अन्य असामान्य न्यूरोलॉजिकल लक्षण
- सांस लेने में परेशानी
- बहुत अधिक कमजोरी या अस्वस्थ महसूस होना
विशेष रूप से ऐसा लाल-बैंगनी दाने वाला व्यक्ति जो बहुत बीमार महसूस कर रहा हो, उसे तुरंत चिकित्सा मूल्यांकन की आवश्यकता होती है क्योंकि हर गैर-फीका पड़ने वाला दाना HSP नहीं होता और अन्य गंभीर स्थितियां भी समान दिखाई दे सकती हैं।
निष्कर्ष
हेनोक-शोनलीन पुरपुरा (HSP), जिसे IgA Vasculitis भी कहा जाता है, मुख्य रूप से बच्चों में होने वाली छोटी रक्त वाहिकाओं की सूजन संबंधी बीमारी है। त्वचा पर लाल-बैंगनी चकत्ते, जोड़ों में दर्द या सूजन और पेट दर्द इसके प्रमुख लक्षण हैं। कुछ मरीजों में किडनी प्रभावित हो सकती है, इसलिए नियमित यूरिन टेस्ट और रक्तचाप की जांच बेहद महत्वपूर्ण है।
अधिकांश बच्चों में बीमारी का परिणाम अच्छा रहता है और वे पूरी तरह ठीक हो जाते हैं। हालांकि, गंभीर या लगातार किडनी संबंधी समस्या वाले मरीजों को विशेषज्ञ चिकित्सा और लंबे समय तक निगरानी की आवश्यकता हो सकती है। 2025 KDIGO दिशानिर्देश भी IgA Vasculitis में किडनी की भागीदारी की पहचान, जोखिम मूल्यांकन और उपचार को महत्वपूर्ण मानते हैं।
