मासिक धर्म चक्र (Menstrual Cycle) के अनुसार स्ट्रेंथ ट्रेनिंग: पीरियड्स के दौरान इंजरी से कैसे बचें?
| | | |

मासिक धर्म चक्र (Menstrual Cycle) के अनुसार स्ट्रेंथ ट्रेनिंग: पीरियड्स के दौरान इंजरी से कैसे बचें?

महिलाओं का शरीर पुरुषों की तुलना में हार्मोनल रूप से बहुत अलग तरीके से काम करता है। जहाँ पुरुषों का हार्मोनल चक्र 24 घंटे का होता है, वहीं महिलाओं का शरीर 28 से 32 दिनों के मासिक धर्म चक्र (Menstrual Cycle) से गुजरता है। फिटनेस और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग की दुनिया में अक्सर महिलाओं को भी पुरुषों वाले वर्कआउट रूटीन फॉलो करने की सलाह दी जाती है, जो हमेशा सही नहीं होता।

आपके पीरियड्स, ओव्यूलेशन (Ovulation) और अन्य चरणों के दौरान एस्ट्रोजन (Estrogen) और प्रोजेस्टेरोन (Progesterone) जैसे हार्मोन्स में भारी उतार-चढ़ाव होता है। यह बदलाव आपकी मांसपेशियों की ताकत, रिकवरी रेट और लिगामेंट्स (Ligaments) की लोच (Laxity) को सीधे तौर पर प्रभावित करता है। यदि आप अपने मासिक धर्म चक्र के अनुसार वर्कआउट नहीं करती हैं, तो आपको न केवल थकान महसूस होगी, बल्कि इंजरी (चोट) लगने का खतरा भी काफी बढ़ जाता है।

समर्पण फिजियोथेरेपी क्लिनिक (Samarpan Physiotherapy Clinic) के डॉ. नितेश पटेल (Dr. Nitesh Patel) के मार्गदर्शन में तैयार किए गए इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि मासिक धर्म चक्र के विभिन्न चरणों के अनुसार आपको अपनी स्ट्रेंथ ट्रेनिंग को कैसे डिजाइन करना चाहिए और चोटों से कैसे बचना चाहिए।


मासिक धर्म चक्र के 4 चरण और स्ट्रेंथ ट्रेनिंग (4 Phases of Menstrual Cycle and Workout)

आपके पूरे साइकिल को मुख्य रूप से चार चरणों में बांटा जा सकता है। आइए समझते हैं कि हर चरण में आपके शरीर में क्या बदलाव होते हैं और आपको किस तरह की एक्सरसाइज करनी चाहिए:

1. मेंस्ट्रुअल फेज (Menstrual Phase) – दिन 1 से 5

यह वह समय है जब आपको ब्लीडिंग होती है (पीरियड्स)। इस दौरान आपके शरीर में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन दोनों हार्मोन्स का स्तर सबसे कम होता है।

  • शरीर पर प्रभाव: ऊर्जा का स्तर कम होता है, शरीर में सूजन (Inflammation) हो सकती है, और गर्भाशय में ऐंठन (Cramps) के कारण पीठ के निचले हिस्से (Lower Back) में दर्द रहता है।
  • क्या करें: इस दौरान आपको खुद पर बहुत अधिक वजन उठाने (Heavy Lifting) का दबाव नहीं डालना चाहिए। अपनी ट्रेनिंग को हल्का रखें।
  • वर्कआउट प्लान:
    • मोबिलिटी वर्कआउट (Mobility Drills)
    • हल्का योगाभ्यास (Light Yoga) और स्ट्रेचिंग
    • एक्टिव रिकवरी (Active Recovery) जैसे कि वॉक करना या साइकिल चलाना।
    • स्ट्रेंथ ट्रेनिंग कर रही हैं तो वजन कम रखें और रेप्स (Reps) सामान्य रखें। पेल्विक फ्लोर और कोर (Core) की हल्की एक्सरसाइज पीठ दर्द में राहत दे सकती है।

2. फॉलिक्युलर फेज (Follicular Phase) – दिन 6 से 14

पीरियड्स खत्म होने के बाद का यह समय महिलाओं के लिए वर्कआउट के लिहाज से सबसे बेहतरीन माना जाता है। इस दौरान एस्ट्रोजन का स्तर धीरे-धीरे बढ़ने लगता है।

  • शरीर पर प्रभाव: एस्ट्रोजन के बढ़ने से आपकी एनर्जी वापस आ जाती है। दर्द सहने की क्षमता (Pain Tolerance) बढ़ जाती है और मांसपेशियों की रिकवरी सबसे तेज होती है।
  • क्या करें: यह वह समय है जब आप जिम में अपने “पर्सनल रिकॉर्ड (PR)” तोड़ सकती हैं। आपकी स्ट्रेंथ पीक पर होती है।
  • वर्कआउट प्लान:
    • हैवी वेट लिफ्टिंग (Heavy Strength Training)
    • हाइपरट्रॉफी (Hypertrophy – मसल बिल्डिंग) ट्रेनिंग
    • कंपाउंड मूवमेंट्स जैसे स्क्वाट्स (Squats), डेडलिफ्ट्स (Deadlifts), और बेंच प्रेस (Bench Press)।
    • हाई-इंटेंसिटी इंटरवल ट्रेनिंग (HIIT) के लिए भी यह सबसे अच्छा समय है।

3. ओव्यूलेशन फेज (Ovulation Phase) – दिन 15 से 17

यह वह समय है जब अंडाशय (Ovary) से अंडा रिलीज होता है। इस दौरान एस्ट्रोजन अपने उच्चतम स्तर (Peak) पर होता है और टेस्टोस्टेरोन में भी हल्की वृद्धि होती है।

  • शरीर पर प्रभाव: आप सबसे ज्यादा ऊर्जावान और मजबूत महसूस करेंगी। लेकिन, यहाँ एक बहुत बड़ा कैच (Catch) है। उच्च एस्ट्रोजन के कारण आपके शरीर के लिगामेंट्स और टेंडन ढीले (Laxity) हो जाते हैं।
  • इंजरी का खतरा: क्लिनिकल रिसर्च बताती है कि ओव्यूलेशन के दौरान महिलाओं में ACL Tear (घुटने के लिगामेंट की चोट) का खतरा सबसे ज्यादा होता है क्योंकि जोड़ (Joints) कम स्थिर होते हैं।
  • वर्कआउट प्लान:
    • आप भारी वजन उठा सकती हैं, लेकिन फॉर्म और तकनीक पर 100% ध्यान देना होगा।
    • अचानक दिशा बदलने वाले (Quick change of direction) व्यायाम और प्लायोमेट्रिक्स (Plyometrics – जंपिंग) करते समय बेहद सावधानी बरतें।
    • जोड़ों की स्थिरता (Joint Stability) के व्यायाम शामिल करें।

4. ल्यूटियल फेज (Luteal Phase) – दिन 18 से 28

ओव्यूलेशन के बाद प्रोजेस्टेरोन हार्मोन का स्तर बढ़ने लगता है। यदि गर्भावस्था नहीं होती है, तो साइकिल के अंत में दोनों हार्मोन तेजी से गिरने लगते हैं, जिससे PMS (Premenstrual Syndrome) के लक्षण शुरू होते हैं।

  • शरीर पर प्रभाव: प्रोजेस्टेरोन के कारण शरीर का बेसल तापमान (Basal Body Temperature) बढ़ जाता है। आपको जल्दी पसीना आएगा, सांस जल्दी फूलेगी और थकान महसूस होगी। शरीर में पानी जमा (Water Retention) होने लगता है।
  • क्या करें: इसे अपने वर्कआउट का ‘डीलोड वीक’ (Deload Week) मानें। शरीर को अत्यधिक थकाने से बचें।
  • वर्कआउट प्लान:
    • वजन (Weights) को 20-30% तक कम कर दें।
    • कम वजन के साथ ज्यादा रेप्स (High Reps, Low Weight) करें।
    • कठिन HIIT की जगह मॉडरेट कार्डियो (Moderate Intensity Steady State – MISS) करें।
    • मांसपेशियों के तनाव को कम करने के लिए फोम रोलिंग (Foam Rolling) और डीप स्ट्रेचिंग करें।

पीरियड्स और पूरे साइकिल के दौरान इंजरी से कैसे बचें? (Injury Prevention Tips)

एक फिजियोथेरेपिस्ट के नजरिए से, वर्कआउट के दौरान चोट से बचना हमेशा इलाज से बेहतर होता है। महिलाओं को अपने हार्मोनल चक्र के दौरान इन विशेष बातों का ध्यान रखना चाहिए:

1. वार्म-अप को कभी न छोड़ें (Never Skip Warm-Up) विशेषकर ओव्यूलेशन (Ovulation) और ल्यूटियल फेज के दौरान आपकी मांसपेशियों और जोड़ों को तैयार होने में अधिक समय लगता है। डायनेमिक वार्म-अप (Dynamic Warm-up) करें जिससे शरीर का तापमान बढ़े और जोड़ों में श्लेष द्रव (Synovial Fluid) का प्रवाह बेहतर हो।

2. कोर और पेल्विक फ्लोर की मजबूती (Core and Pelvic Floor Stability) आपके शरीर का संतुलन आपके कोर से आता है। पीरियड्स के दौरान जब लोअर बैक में दर्द होता है, तब एक कमजोर कोर के कारण बैक इंजरी (जैसे स्लिप डिस्क या मसल स्प्रेन) का खतरा बढ़ जाता है। ट्रांसवर्स एब्डोमिनिस (Transverse Abdominis) को सक्रिय करने वाले व्यायाम करें।

3. लिगामेंट की लोच को समझें (Beware of Ligament Laxity) जैसा कि ऊपर बताया गया है, ओव्यूलेशन के समय शरीर में ‘रिलैक्सिन’ (Relaxin) और उच्च एस्ट्रोजन के कारण जोड़ अधिक लचीले होते हैं। इस समय ओवर-स्ट्रेचिंग (Over-stretching) या भारी वजन उठाते समय झटके (Jerks) लेने से बचें। मशीन-बेस्ड वर्कआउट इस समय फ्री वेट्स (Free Weights) की तुलना में अधिक सुरक्षित हो सकते हैं।

4. फुटवियर और बायोमैकेनिक्स (Proper Footwear & Biomechanics) सही जूते पहनना न केवल आपके पैरों के लिए, बल्कि आपके घुटनों और रीढ़ की हड्डी के लिए भी महत्वपूर्ण है। यदि आपकी चाल (Gait) या फुट आर्च (Foot Arch) में समस्या है, तो थकान वाले दिनों (Luteal Phase) में गलत फॉर्म के कारण चोट लगने की संभावना बढ़ जाती है। हमेशा फ्लैट और ग्रिप वाले जूतों का इस्तेमाल भारी लिफ्टिंग के लिए करें।

5. हाइड्रेशन और न्यूट्रिशन (Hydration and Nutrition) ल्यूटियल फेज के दौरान शरीर का तापमान अधिक होता है, इसलिए आपको डिहाइड्रेशन का खतरा अधिक होता है। वर्कआउट के दौरान इलेक्ट्रोलाइट्स (Electrolytes) युक्त पानी पिएं। साथ ही, पीरियड्स के दौरान आयरन और मैग्नीशियम से भरपूर आहार लें, जो ऐंठन (Cramps) को कम करने और रिकवरी में मदद करता है।

6. अपने शरीर की सुनें (Listen to Your Body) सबसे महत्वपूर्ण बात, यदि किसी दिन आपका शरीर भारी थकान, अत्यधिक दर्द या ऐंठन का संकेत दे रहा है, तो उस दिन जिम से छुट्टी लेना कोई अपराध नहीं है। रिकवरी (Recovery) भी स्ट्रेंथ ट्रेनिंग का एक अनिवार्य हिस्सा है।


निष्कर्ष (Conclusion)

मासिक धर्म चक्र महिलाओं के स्वास्थ्य का एक महत्वपूर्ण और प्राकृतिक हिस्सा है। इसे अपनी कमजोरी मानने के बजाय, यदि आप अपने वर्कआउट रूटीन को अपने हार्मोन्स के साथ सिंक (Sync) करती हैं, तो आप बेहतर फिटनेस परिणाम प्राप्त कर सकती हैं। ‘फॉलिक्युलर फेज’ में अपने शरीर की पूरी ताकत का इस्तेमाल करें और ‘ल्यूटियल’ तथा ‘मेंस्ट्रुअल’ फेज में रिकवरी और फॉर्म पर ध्यान दें।

यदि आपको वर्कआउट करते समय किसी भी प्रकार का जोड़ों का दर्द, मांसपेशियों में खिंचाव या पुरानी चोट परेशान कर रही है, तो इसे नज़रअंदाज़ न करें। एक प्रोफेशनल फिजियोथेरेपिस्ट से कंसल्टेशन लेना हमेशा उचित होता है।

अधिक जानकारी के लिए: ऐसी ही और वैज्ञानिक व क्लिनिकल फिजियोथेरेपी जानकारी के लिए हमारी वेबसाइट physiotherapyhindi.in पर विजिट करें और हमारे यूट्यूब चैनल “फिजियोथेरेपी जानकारी हिन्दी में” को सब्सक्राइब करना न भूलें।

स्वस्थ रहें, सुरक्षित व्यायाम करें!

Similar Posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *