कंधे और गर्दन में दर्द हो तो क्या करें
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कंधे और गर्दन में दर्द हो तो क्या करें

आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी, घंटों कंप्यूटर के सामने बैठकर काम करना और मोबाइल फोन का अत्यधिक इस्तेमाल (जिसे ‘टेक्स्ट नेक’ भी कहा जाता है), कंधे और गर्दन के दर्द का मुख्य कारण बन गया है। यह दर्द न केवल हमारी रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करता है, बल्कि अगर इसे नजरअंदाज किया जाए, तो यह गंभीर रूप भी ले सकता है।

अगर आप भी कंधे और गर्दन के दर्द से परेशान हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है। सही जानकारी, फिजियोथेरेपी, कुछ आसान व्यायाम और घरेलू उपायों की मदद से इस दर्द से पूरी तरह छुटकारा पाया जा सकता है। आइए इस विषय पर विस्तार से चर्चा करते हैं।

कंधे और गर्दन में दर्द के मुख्य कारण

दर्द के इलाज से पहले उसके मूल कारण को समझना बहुत जरूरी है। इसके कुछ प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:

  • खराब पॉश्चर (Poor Posture): झुककर बैठना, लेटकर टीवी देखना या कंप्यूटर स्क्रीन का आंखों के स्तर (eye-level) पर न होना गर्दन की मांसपेशियों पर अतिरिक्त दबाव डालता है।
  • मांसपेशियों में खिंचाव (Muscle Strain): अचानक झटके से उठना, भारी वजन उठाना या सोते समय गलत तकिए का इस्तेमाल करने से मांसपेशियों में खिंचाव आ सकता है।
  • सर्वाइकल स्पोंडिलोसिस (Cervical Spondylosis): उम्र के साथ रीढ़ की हड्डी और कार्टिलेज में होने वाली टूट-फूट के कारण यह समस्या होती है। इसमें गर्दन से लेकर कंधों और हाथों तक दर्द जाता है।
  • तनाव (Stress): जब आप मानसिक रूप से तनाव में होते हैं, तो आपकी गर्दन और कंधों की मांसपेशियां अनजाने में ही सिकुड़ (tighten) जाती हैं, जिससे दर्द होने लगता है।
  • चोट या दुर्घटना (Whiplash Injury): किसी दुर्घटना या खेल के दौरान गर्दन में अचानक झटका लगने से लिगामेंट्स में चोट आ सकती है।

फिजियोथेरेपी इलाज (Physiotherapy Treatment)

अगर दर्द 3-4 दिनों में घरेलू उपायों से ठीक न हो, तो फिजियोथेरेपी सबसे सुरक्षित और प्रभावी विकल्प है। एक योग्य फिजियोथेरेपिस्ट दर्द के कारण का पता लगाकर निम्नलिखित तकनीकों का इस्तेमाल करता है:

  1. इलेक्ट्रोथेरेपी (Electrotherapy):
    • TENS (Transcutaneous Electrical Nerve Stimulation): मशीन के जरिए नसों को हल्के इलेक्ट्रिक सिग्नल दिए जाते हैं, जो दिमाग तक जाने वाले दर्द के सिग्नल को ब्लॉक कर देते हैं।
    • अल्ट्रासाउंड (Ultrasound Therapy): ध्वनि तरंगों (sound waves) का उपयोग करके मांसपेशियों की गहराई तक गर्माहट पहुंचाई जाती है, जिससे सूजन और ऐंठन (spasm) कम होती है।
  2. मैनुअल थेरेपी (Manual Therapy): थेरेपिस्ट अपने हाथों से गर्दन और कंधों की मांसपेशियों को रिलैक्स करने के लिए विशेष मसाज और मोबिलाइजेशन (Mobilization) तकनीक का इस्तेमाल करते हैं। इससे जोड़ों की जकड़न खुलती है।
  3. सर्वाइकल ट्रैक्शन (Cervical Traction): अगर नसों पर दबाव के कारण दर्द कंधों या हाथों में जा रहा है, तो ट्रैक्शन मशीन या हाथों के जरिए गर्दन को हल्का सा खींचा जाता है। यह रीढ़ की हड्डियों के बीच जगह बनाता है और नसों का दबाव कम करता है।
  4. ड्राई नीडलिंग (Dry Needling): ट्रिगर पॉइंट्स (मांसपेशियों की वह गांठें जो दर्द पैदा करती हैं) को रिलीज करने के लिए बहुत पतली सुइयों का इस्तेमाल किया जाता है।

दर्द से राहत के लिए 5 बेहतरीन व्यायाम (Exercises)

व्यायाम मांसपेशियों को मजबूत बनाता है और लचीलापन बढ़ाता है। इन व्यायामों को बहुत ही आराम से करें और दर्द बढ़ने पर तुरंत रोक दें।

1. नेक टिल्ट (Neck Tilt)

यह व्यायाम गर्दन के किनारों की मांसपेशियों को स्ट्रेच करता है।

  • सीधे बैठें या खड़े हो जाएं।
  • धीरे-धीरे अपने दाहिने कान को दाहिने कंधे की ओर झुकाएं। (कंधे को ऊपर न उठाएं)।
  • इस स्थिति में 10 से 15 सेकंड तक रुकें।
  • अब धीरे-धीरे सिर सीधा करें और यही प्रक्रिया बाईं ओर दोहराएं।
  • इसे दोनों तरफ 3-5 बार करें।

2. शोल्डर रोल (Shoulder Roll)

कंधों की जकड़न दूर करने के लिए यह सबसे आसान और प्रभावी व्यायाम है।

  • अपनी रीढ़ की हड्डी को सीधा रखते हुए बैठें।
  • अपने दोनों कंधों को एक साथ ऊपर कानों की तरफ उठाएं।
  • अब कंधों को पीछे की ओर घुमाते हुए एक सर्कल (गोला) बनाएं और नीचे लाएं।
  • इसे 10 बार आगे से पीछे (clockwise) और 10 बार पीछे से आगे (anti-clockwise) करें।

3. चिन टक (Chin Tuck)

कंप्यूटर पर काम करने वालों के लिए यह एक ‘जादुई’ व्यायाम है, जो रीढ़ की हड्डी को अलाइन (align) करता है।

  • सीधे बैठें और सामने देखें।
  • अपनी ठुड्डी (chin) को उंगली की मदद से पीछे की ओर (गले की तरफ) धकेलें, जैसे आप ‘डबल चिन’ बना रहे हों।
  • आपका सिर ऊपर या नीचे नहीं झुकना चाहिए, बस सीधा पीछे जाना चाहिए।
  • 5 सेकंड होल्ड करें और 10 बार दोहराएं।

4. स्केपुलर स्क्वीज़ (Scapular Squeeze)

यह व्यायाम कंधों के बीच की मांसपेशियों को मजबूत करता है और झुककर बैठने की आदत को सुधारता है।

  • सीधे खड़े हो जाएं और अपने हाथों को बगल में रखें।
  • अपनी छाती को थोड़ा बाहर निकालें और पीछे दोनों शोल्डर ब्लेड्स (कंधे की हड्डियों) को एक साथ सिकोड़ने (squeeze) की कोशिश करें, जैसे आप उनके बीच कोई पेन पकड़ने की कोशिश कर रहे हों।
  • 5 सेकंड तक होल्ड करें और फिर ढीला छोड़ दें। इसे 10 बार करें।

5. नेक रोटेशन (Neck Rotation)

  • सीधे बैठकर अपने सिर को धीरे-धीरे दाईं ओर घुमाएं, जहाँ तक आप आराम से देख सकें।
  • 5 सेकंड रुकें। फिर सिर को बीच में लाएं और बाईं ओर घुमाएं।
  • दोनों तरफ 5-5 बार दोहराएं।

असरदार घरेलू उपाय (Home Remedies)

अगर दर्द अभी शुरू हुआ है, तो ये घरेलू नुस्खे आपके लिए बहुत फायदेमंद साबित हो सकते हैं:

  • गर्म और ठंडी सिकाई (Hot and Cold Compress):
    • चोट लगने या अचानक दर्द उठने के शुरुआती 48 घंटों में बर्फ (Cold Compress) का इस्तेमाल करें। यह सूजन को कम करता है। बर्फ को सीधे त्वचा पर न लगाएं, हमेशा तौलिये में लपेट कर 15 मिनट तक सिकाई करें।
    • 48 घंटे के बाद गर्म सिकाई (Hot Compress) करें। आप हॉट वॉटर बैग या हीटिंग पैड का उपयोग कर सकते हैं। यह रक्त संचार (blood flow) बढ़ाता है और सिकुड़ी हुई मांसपेशियों को आराम देता है।
  • सेंधा नमक (Epsom Salt) का स्नान: सेंधा नमक में मैग्नीशियम सल्फेट होता है, जो मांसपेशियों को रिलैक्स करने में मदद करता है। नहाने के गुनगुने पानी में दो कप सेंधा नमक मिलाएं और 15-20 मिनट तक उस पानी से नहाएं या प्रभावित हिस्से की सिकाई करें।
  • सरसों के तेल और लहसुन की मालिश: सरसों के तेल में 3-4 लहसुन की कलियां डालकर तब तक गर्म करें जब तक लहसुन काला न हो जाए। तेल को हल्का गुनगुना होने दें और फिर हल्के हाथों से गर्दन और कंधों की मालिश करें। मालिश हमेशा ऊपर से नीचे या गोल घुमाते हुए करें; कभी भी जोर से न रगड़ें।
  • हल्दी वाला दूध: हल्दी में ‘करक्यूमिन’ (Curcumin) होता है, जो एक प्राकृतिक सूजन-रोधी (anti-inflammatory) तत्व है। रात को सोने से पहले एक गिलास गर्म दूध में आधा चम्मच हल्दी मिलाकर पीने से अंदरूनी दर्द और सूजन में बहुत राहत मिलती है।

बचाव के तरीके (Prevention Tips)

इलाज से बेहतर बचाव है। अपनी जीवनशैली में कुछ छोटे बदलाव करके आप भविष्य में होने वाले दर्द से बच सकते हैं:

  1. एर्गोनॉमिक वर्कस्टेशन (Ergonomic Workspace):
    • यदि आप कंप्यूटर पर काम करते हैं, तो स्क्रीन आपकी आँखों के बिल्कुल सामने होनी चाहिए, ताकि आपको अपनी गर्दन झुकानी या उठानी न पड़े।
    • कुर्सी पर बैठते समय आपकी कमर सीधी होनी चाहिए और पैर जमीन पर टिके होने चाहिए।
    • कीबोर्ड और माउस ऐसी दूरी पर हों कि आपके कंधे रिलैक्स रहें और कोहनियां 90 डिग्री के कोण पर हों।
  2. मोबाइल फोन का सही उपयोग:
    • फोन देखते समय अपनी गर्दन को नीचे झुकाने (Text Neck) से बचें। फोन को उठाकर अपनी आँखों के स्तर पर लाएं।
  3. नियमित ब्रेक लें:
    • लंबे समय तक एक ही स्थिति में न बैठें। हर 45-60 मिनट में अपनी कुर्सी से उठें, थोड़ा टहलें और अपनी गर्दन व कंधों को स्ट्रेच करें।
  4. सोने का सही तरीका:
    • पेट के बल सोने से बचें, क्योंकि इससे गर्दन मुड़ जाती है।
    • पीठ के बल या करवट लेकर सोएं।
    • बहुत मोटा या बहुत पतला तकिया इस्तेमाल न करें। मेमोरी फोम (Memory Foam) या सर्वाइकल पिलो (Cervical Pillow) का इस्तेमाल करें जो आपकी गर्दन के कर्व (घुमाव) को सपोर्ट करे।
  5. हाइड्रेटेड रहें:
    • रीढ़ की हड्डी के बीच की डिस्क (Discs) में पानी की मात्रा बहुत अधिक होती है। पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से ये डिस्क स्पंजी और स्वस्थ रहती हैं, जिससे हड्डियों के बीच रगड़ नहीं लगती।

डॉक्टर को कब दिखाएं? (When to see a doctor)

हालांकि ज्यादातर दर्द सामान्य होते हैं और कुछ दिनों में ठीक हो जाते हैं, लेकिन अगर आपको नीचे दिए गए लक्षणों में से कोई भी महसूस हो, तो तुरंत किसी आर्थोपेडिक या स्पाइन विशेषज्ञ से संपर्क करें:

  • दर्द जो हाथों या उंगलियों तक जा रहा हो।
  • हाथों, बांहों या उंगलियों में झुनझुनी (Tingling) या सुन्नपन (Numbness) महसूस होना।
  • हाथ से सामान उठाने में कमजोरी लगना।
  • दर्द के साथ-साथ चक्कर आना, उल्टी आना या सिरदर्द होना।
  • दर्द जो रात में सोने न दे या लगातार तेज होता जाए।

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