गलत फिजियोथेरेपिस्ट या बिना डिग्री वाले से इलाज कराने के गंभीर नुकसान
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सावधान! गलत या बिना डिग्री वाले फिजियोथेरेपिस्ट से इलाज के घातक परिणाम

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और डेस्क जॉब की संस्कृति ने मस्कुलोस्केलेटल (Musculoskeletal) समस्याओं को घर-घर पहुँचा दिया है। कमर दर्द, गर्दन में अकड़न या घुटनों की समस्या होने पर हम अक्सर ‘फिजियोथेरेपिस्ट’ की तलाश करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस व्यक्ति से आप अपनी नसों को दबवा रहे हैं या कसरत सीख रहे हैं, उसके पास सही डिग्री है भी या नहीं?

भारत में फिजियोथेरेपी के नाम पर ‘मसाज करने वाले’ या जिम ट्रेनर खुद को डॉक्टर बताकर प्रैक्टिस कर रहे हैं। बिना डिग्री वाले इन लोगों से इलाज कराना अपनी सेहत के साथ खिलवाड़ करने जैसा है।

1. फिजियोथेरेपिस्ट कौन होता है? (Who is a Qualified Physiotherapist?)

एक योग्य फिजियोथेरेपिस्ट वह है जिसने मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से BPT (Bachelor of Physiotherapy) की 4.5 साल की डिग्री ली हो। इसमें शरीर की रचना (Anatomy), क्रिया विज्ञान (Physiology), और बायोमैकेनिक्स का गहरा अध्ययन शामिल होता है। इसके बाद कई पेशेवर MPT (Master of Physiotherapy) भी करते हैं।

बिना इस शिक्षा के, कोई भी व्यक्ति खुद को फिजियोथेरेपिस्ट नहीं कह सकता।human anatomy showing musculoskeletal system, AI generated

2. गलत इलाज के गंभीर शारीरिक नुकसान

जब आप किसी अयोग्य व्यक्ति के पास जाते हैं, तो वह आपकी समस्या की जड़ को समझने के बजाय केवल लक्षणों को दबाने की कोशिश करता है। इसके परिणाम भयावह हो सकते हैं:

क. नसों की स्थाई क्षति (Permanent Nerve Damage)

शरीर की नसें बहुत संवेदनशील होती हैं। गलत तरीके से स्ट्रेचिंग करने या रीढ़ की हड्डी पर अनुचित दबाव डालने से नसें दब सकती हैं या कट सकती हैं। इससे शरीर के किसी हिस्से में सुन्नपन या हमेशा के लिए लकवा (Paralysis) मारने का खतरा रहता है।

ख. फ्रैक्चर और हड्डियों का खिसकना

बिना डिग्री वाले लोग अक्सर ‘हड्डी चटकाने’ (Bone Cracking) की कोशिश करते हैं। यदि उन्हें हड्डियों के घनत्व (Bone Density) या ऑस्टियोपोरोसिस जैसी स्थिति का ज्ञान न हो, तो वे इलाज के दौरान आपकी हड्डी तोड़ सकते हैं या जोड़ों को डिस्लोकेट (Dislocate) कर सकते हैं।

ग. लिगामेंट और टेंडन टियर (Ligament and Tendon Tears)

फिजियोथेरेपी में व्यायाम का एक निश्चित कोण (Angle) और तीव्रता होती है। एक अनाड़ी व्यक्ति अगर गलत दिशा में जोर लगा दे, तो आपके घुटने या कंधे के लिगामेंट फट सकते हैं, जिन्हें ठीक करने के लिए बाद में सर्जरी की जरूरत पड़ती है।knee joint showing ligament structure, AI generated

3. गलत डायग्नोसिस का खतरा (Misdiagnosis)

एक असली फिजियोथेरेपिस्ट इलाज शुरू करने से पहले मरीज का ‘क्लिनिकल असेसमेंट’ करता है। वह एक्स-रे या एमआरआई (MRI) देखकर समझता है कि दर्द का कारण क्या है।

  • उदाहरण के लिए: गर्दन का दर्द केवल मांसपेशियों की खिंचाव हो सकता है, लेकिन यह ‘सर्वाइकल डिस्क हर्नियेशन’ भी हो सकता है।
  • बिना डिग्री वाला व्यक्ति दोनों को एक ही तरह से ट्रीट करेगा, जिससे हर्नियेटेड डिस्क फट सकती है और सीधे स्पाइनल कॉर्ड पर दबाव डाल सकती है।

4. इलेक्ट्रोथेरेपी मशीनों का गलत उपयोग

फिजियोथेरेपी में IFT, TENS, अल्ट्रासाउंड और लेजर जैसी मशीनों का उपयोग होता है। इन मशीनों की फ्रीक्वेंसी और इंटेंसिटी बहुत महत्वपूर्ण होती है।

  • त्वचा का जलना: गलत तीव्रता से स्किन टिश्यू जल सकते हैं।
  • इंटरनल डैमेज: अगर किसी मरीज के शरीर में पेसमेकर या कोई मेटल इम्प्लांट है, और अनाड़ी व्यक्ति ने वहाँ करंट वाली मशीन लगा दी, तो यह जानलेवा हो सकता है।

5. आर्थिक और मानसिक तनाव

गलत व्यक्ति से इलाज कराना न केवल शरीर को नुकसान पहुँचाता है, बल्कि आपकी जेब पर भी भारी पड़ता है।

  • लंबा इलाज: वह व्यक्ति आपको हफ्तों तक बुलाएगा लेकिन आराम नहीं मिलेगा।
  • अतिरिक्त खर्च: जब स्थिति बिगड़ जाएगी, तो आपको बड़े अस्पताल में विशेषज्ञ और सर्जरी पर लाखों खर्च करने पड़ेंगे।
  • मानसिक हताशा: लंबे समय तक ठीक न होने से मरीज डिप्रेशन और क्रोनिक पेन (पुरानी बीमारी) का शिकार हो जाता है।

6. कैसे पहचानें कि फिजियोथेरेपिस्ट असली है या नकली?

इलाज शुरू कराने से पहले जागरूक बनना आपकी जिम्मेदारी है। इन बातों पर गौर करें:

  1. डिग्री की जाँच करें: क्लीनिक की दीवार पर टंगी डिग्री को ध्यान से देखें। क्या वह BPT या MPT है? ‘डिप्लोमा’ धारक या ‘सर्टिफाइड कोच’ फिजियोथेरेपिस्ट नहीं होते।
  2. रजिस्ट्रेशन नंबर: क्या वह व्यक्ति राज्य या राष्ट्रीय फिजियोथेरेपी काउंसिल से रजिस्टर्ड है?
  3. इलाज का तरीका: क्या वह सीधे मशीन लगा रहा है या पहले आपकी पूरी मेडिकल हिस्ट्री और रिपोर्ट चेक कर रहा है? एक पेशेवर हमेशा पहले फिजिकल टेस्ट करता है।
  4. दवाइयों की सलाह: फिजियोथेरेपिस्ट मुख्य रूप से व्यायाम और मशीनों से इलाज करते हैं। अगर कोई फिजियोथेरेपिस्ट आपको भारी स्टेरॉयड या एलोपैथिक दवाएं लिख रहा है, तो सतर्क हो जाएं (वे इसके लिए अधिकृत नहीं हैं)।

7. सही फिजियोथेरेपी के लाभ

एक योग्य डॉक्टर के पास जाने से आप न केवल जल्दी ठीक होते हैं, बल्कि आपकी ‘क्वालिटी ऑफ लाइफ’ सुधरती है:

  • सर्जरी की नौबत आने से पहले ही समस्या का समाधान।
  • खिलाड़ियों के लिए चोट से रिकवरी का सही रास्ता।
  • बुढ़ापे में जोड़ों की गतिशीलता (Mobility) बनाए रखना।

निष्कर्ष

शरीर एक मशीन नहीं है जिसे कोई भी खोलकर ठीक कर दे। यह जीवित ऊतकों और नसों का एक जटिल तंत्र है। 200-300 रुपये बचाने के चक्कर में या ‘घर के पास’ होने के कारण किसी झोलाछाप से मालिश करवाना आपके जीवन की सबसे बड़ी भूल साबित हो सकती है। हमेशा याद रखें, “गलत फिजियोथेरेपी, फिजियोथेरेपी न होने से कहीं ज्यादा खतरनाक है।”

अगली बार जब आप किसी फिजियोथेरेपिस्ट के पास जाएं, तो बेझिझक उनकी योग्यता के बारे में पूछें। आपकी सेहत, आपका अधिकार है।

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