ब्रोंकिएक्टेसिस (Bronchiectasis) में पोस्टुरल ड्रेनेज: फेफड़ों से बलगम निकालने के लिए शरीर को किस एंगल पर रखें?
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ब्रोंकिएक्टेसिस (Bronchiectasis) में पोस्टुरल ड्रेनेज: फेफड़ों से बलगम निकालने के लिए शरीर का सही एंगल

ब्रोंकिएक्टेसिस (Bronchiectasis) फेफड़ों की एक ऐसी क्रोनिक (लंबे समय तक चलने वाली) बीमारी है, जिसमें फेफड़ों की श्वास नलिकाएं (Airways) स्थायी रूप से चौड़ी हो जाती हैं और क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। इस क्षति के कारण फेफड़ों की खुद को साफ करने की प्राकृतिक क्षमता कमजोर पड़ जाती है, जिससे श्वास नलियों में गाढ़ा बलगम (Mucus/Sputum) जमा होने लगता है। यह जमा हुआ बलगम बैक्टीरिया के पनपने का कारण बनता है, जिससे बार-बार चेस्ट इन्फेक्शन होता है।

इस स्थिति में चेस्ट फिजियोथेरेपी (Chest Physiotherapy) और विशेष रूप से पोस्टुरल ड्रेनेज (Postural Drainage) एक जीवनरक्षक तकनीक साबित होती है। समर्पण फिजियोथेरेपी क्लिनिक के प्रमुख डॉ. नितेश पटेल के अनुसार, “दवाइयों के साथ-साथ फेफड़ों की मैकेनिकल सफाई बहुत जरूरी है। पोस्टुरल ड्रेनेज में गुरुत्वाकर्षण (Gravity) का उपयोग करके फेफड़ों के विभिन्न हिस्सों से बलगम को मुख्य श्वास नली तक लाया जाता है, जहाँ से इसे खांस कर बाहर निकाला जा सकता है।”

इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि फेफड़ों के अलग-अलग हिस्सों (Lobes) से बलगम निकालने के लिए मरीज को किस एंगल (Angle) और किस पोजीशन में लेटना चाहिए।

पोस्टुरल ड्रेनेज (Postural Drainage) क्या है और यह कैसे काम करता है?

पोस्टुरल ड्रेनेज का सीधा सा अर्थ है—शरीर को अलग-अलग पोस्चर (मुद्राओं) में रखकर ड्रेनेज (निकासी) करना। हमारे फेफड़ों को मुख्य रूप से 5 हिस्सों (Lobes) में बांटा गया है—दाएं फेफड़े में 3 (Upper, Middle, Lower) और बाएं फेफड़े में 2 (Upper, Lower)।

चूंकि ब्रोंकिएक्टेसिस में बलगम फेफड़ों के निचले या मध्य हिस्सों में गहराई में जमा हो जाता है, इसलिए साधारण खांसी से यह बाहर नहीं आता। पोस्टुरल ड्रेनेज में हम शरीर को इस तरह से झुकाते हैं (विशिष्ट एंगल्स पर) कि गुरुत्वाकर्षण बल के कारण बलगम छोटी नलियों से बहकर बड़ी श्वास नली (Trachea) में आ जाए।

ड्रेनेज शुरू करने से पहले की तैयारी

सही एंगल बनाने से पहले कुछ बुनियादी बातों का ध्यान रखना आवश्यक है:

  1. समय: यह प्रक्रिया कभी भी खाना खाने के तुरंत बाद न करें। खाना खाने के कम से कम 1.5 से 2 घंटे बाद या खाली पेट (जैसे सुबह उठते ही) इसे करना सबसे अच्छा है।
  2. हाइड्रेशन: प्रक्रिया से पहले हल्का गुनगुना पानी पिएं। इससे गाढ़ा बलगम पतला होने में मदद मिलती है।
  3. नेबुलाइजेशन (Nebulization): यदि डॉक्टर ने ब्रोंकोडायलेटर या सलाइन नेबुलाइजेशन की सलाह दी है, तो पोस्टुरल ड्रेनेज से 15-20 मिनट पहले नेबुलाइजर लें।
  4. उपकरण: आपको कुछ तकियों (Pillows) और बिस्तर के निचले हिस्से को उठाने के लिए मजबूत सपोर्ट (जैसे लकड़ी के गुटके या किताबें) की आवश्यकता होगी।

फेफड़ों से बलगम निकालने के लिए शरीर के सही एंगल (Angles for Postural Drainage)

फेफड़ों के जिस हिस्से में बलगम जमा है, उसके अनुसार शरीर का एंगल तय किया जाता है। मुख्य रूप से इसमें बिस्तर के सिरहाने की तुलना में पैरों के हिस्से को ऊपर उठाया जाता है।

1. फेफड़ों के ऊपरी हिस्से (Upper Lobes) के लिए

फेफड़ों का ऊपरी हिस्सा छाती के ऊपरी भाग और कॉलर बोन (Collar bone) के पास होता है। यहाँ से बलगम निकालने के लिए सिर को नीचे झुकाने की आवश्यकता नहीं होती।

  • एंगल और पोजीशन: इसमें मरीज को बिस्तर पर आराम से बैठना होता है (90 डिग्री एंगल) या तकिए का सहारा लेकर हल्का पीछे की ओर (लगभग 45 डिग्री एंगल) झुकना होता है।
  • प्रक्रिया: मरीज को आरामदायक स्थिति में बैठाएं। अगर बलगम आगे की तरफ है, तो मरीज को पीछे की ओर झुकाएं (Leaning back)। अगर बलगम पीछे की तरफ है, तो मरीज को आगे की ओर झुकाएं (Leaning forward) और छाती के ऊपरी हिस्से पर हल्की थपकी (Percussion) दें।

2. फेफड़ों के मध्य हिस्से (Middle Lobe & Lingula) के लिए

दाएं फेफड़े का मध्य हिस्सा (Middle Lobe) और बाएं फेफड़े का समान हिस्सा जिसे लिंगुला (Lingula) कहते हैं, छाती के बीच में होते हैं। यहाँ से ड्रेनेज के लिए शरीर को नीचे की ओर झुकाना पड़ता है।

  • सही एंगल: 15 डिग्री (15° Trendelenburg Position)
  • कैसे बनाएं यह एंगल: बिस्तर के निचले हिस्से (पैरों की तरफ) को फर्श से लगभग 14 से 16 इंच (35-40 सेमी) ऊपर उठाएं।
  • पोजीशन (दाएं फेफड़े के लिए): मरीज को अपनी बाईं करवट (Left side) लेटना है। पीठ के पीछे एक तकिया लगाकर शरीर को हल्का सा (लगभग 45 डिग्री) पीछे की ओर लुढ़काएं ताकि छाती का दायां हिस्सा ऊपर की तरफ रहे। सिर नीचे की ओर रहेगा (15 डिग्री के ढलान पर)।
  • पोजीशन (बाएं फेफड़े/लिंगुला के लिए): मरीज को अपनी दाईं करवट लेटना है और शरीर को हल्का सा पीछे की ओर घुमाना है।

3. फेफड़ों के निचले हिस्से (Lower Lobes) के लिए

ब्रोंकिएक्टेसिस में सबसे ज्यादा बलगम फेफड़ों के निचले हिस्से (Lower Lobes) में जमा होता है। इसे निकालने के लिए सबसे तेज ढलान की आवश्यकता होती है।

  • सही एंगल: 30 डिग्री (30° Trendelenburg Position)
  • कैसे बनाएं यह एंगल: बिस्तर के पैरों वाले हिस्से को फर्श से लगभग 18 से 20 इंच (45-50 सेमी) ऊपर उठाएं। (यदि बिस्तर उठाना संभव न हो, तो मरीज के कूल्हों (Hips) के नीचे 3-4 सख्त तकिए रखकर यह 30 डिग्री का एंगल बनाया जा सकता है)।
  • पोजीशन (निचले हिस्से के अलग-अलग भाग के लिए):
    • एंटीरियर बेसल (Anterior Basal – आगे का हिस्सा): ढलान वाले बिस्तर पर मरीज को सीधा (पीठ के बल) लेटना है। घुटनों के नीचे एक तकिया रखें।
    • लेटरल बेसल (Lateral Basal – साइड का हिस्सा): अगर दाएं फेफड़े के निचले हिस्से से निकालना है, तो बाईं करवट लेटें। अगर बाएं से निकालना है, तो दाईं करवट लेटें।
    • पोस्टीरियर बेसल (Posterior Basal – पीछे का हिस्सा): मरीज को पेट के बल (उल्टा) लेटना है। पेट और कूल्हों के नीचे 2 तकिए रखें ताकि कूल्हे सिर से ऊंचे (30 डिग्री एंगल पर) रहें। यह पोजीशन ब्रोंकिएक्टेसिस के मरीजों के लिए सबसे महत्वपूर्ण होती है।

ड्रेनेज को प्रभावी बनाने वाली सहायक तकनीकें (Adjunct Techniques)

केवल सही एंगल में लेटना ही काफी नहीं है; बलगम को दीवारों से छुड़ाने के लिए कुछ फिजियोथेरेपी तकनीकों का उपयोग किया जाना चाहिए:

  1. चेस्ट पर्कशन (Chest Percussion / Clapping): हाथों को कप (Cup) के आकार का बनाएं और जिस हिस्से का ड्रेनेज हो रहा है, वहाँ छाती या पीठ पर लगातार थपकी दें। ध्यान रहे, यह थपकी पसलियों पर देनी है, रीढ़ की हड्डी, किडनी या पेट पर नहीं। खाली हाथ की आवाज ‘पॉप-पॉप’ आनी चाहिए, थप्पड़ जैसी नहीं।
  2. वाइब्रेशन (Vibration): जब मरीज गहरी सांस बाहर छोड़ रहा हो, तब फिजियोथेरेपिस्ट या केयरगिवर अपने हाथों को सीधा रखकर छाती पर हल्का दबाव बनाते हुए कंपन (Vibrate) करते हैं। यह छोटे श्वास मार्गों से बलगम को मुख्य मार्ग में धकेलता है।
  3. हफिंग (Huffing) और कफिंग (Coughing): हर पोजीशन में 5 से 10 मिनट रुकने के बाद, मरीज को गहरी सांस लेनी चाहिए और मुंह खुला रखकर ज़ोर से “हाहाहा” (Huff) करना चाहिए, जैसे हम कांच पर भाप छोड़ते हैं। इसके बाद जोर से खांस कर बलगम को बाहर थूक देना चाहिए।

एक्टिव साइकिल ऑफ ब्रीदिंग तकनीक (ACBT) का प्रयोग

डॉ. नितेश पटेल सलाह देते हैं कि पोस्टुरल ड्रेनेज के एंगल्स के साथ यदि ACBT (Active Cycle of Breathing Technique) को जोड़ा जाए, तो परिणाम दोगुने अच्छे मिलते हैं। इसमें तीन चरण होते हैं:

  • ब्रीदिंग कंट्रोल: आराम से छाती/पेट से सांस लेना (रिलैक्स करने के लिए)।
  • थोरेसिक एक्सपेंशन: 3-4 गहरी सांसें लेना, जिसमें फेफड़े पूरी तरह से फूलें (इससे हवा बलगम के पीछे जाती है)।
  • हफिंग: बलगम को बाहर निकालने के लिए गले से ज़ोरदार दबाव (Huff)।

इस साइकिल को उस विशेष एंगल (15 या 30 डिग्री) में लेटे हुए करना चाहिए।

महत्वपूर्ण सावधानियां (Contraindications) – यह प्रक्रिया कब न करें?

हर मरीज के लिए सिर नीचे करने वाला एंगल (Head-down tilt) सुरक्षित नहीं होता। निम्नलिखित स्थितियों में 15 या 30 डिग्री का एंगल न बनाएं (केवल सीधे बैठकर या लेटकर ही ब्रीदिंग एक्सरसाइज करें):

  • हाई ब्लड प्रेशर (Hypertension): अनियंत्रित बीपी होने पर सिर नीचे करने से स्ट्रोक का खतरा हो सकता है।
  • एसिड रिफ्लक्स या GERD: अगर पेट का एसिड गले में आता है, तो सिर नीचे करने से एसिड फेफड़ों में जा सकता है।
  • हाल ही में हुई सर्जरी: विशेष रूप से सिर, आंख या मस्तिष्क की सर्जरी।
  • गर्भावस्था (Pregnancy): गर्भवती महिलाओं को पेट के बल लेटने या सिर नीचे करने वाले एंगल का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
  • खून की उल्टी (Hemoptysis): अगर बलगम में ताजा लाल खून आ रहा हो, तो तुरंत पर्कशन और ड्रेनेज रोक दें और डॉक्टर से संपर्क करें।

निष्कर्ष (Conclusion)

ब्रोंकिएक्टेसिस एक ऐसी स्थिति है जिसके साथ जीवन जीना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, लेकिन नियमित चेस्ट फिजियोथेरेपी और सही एंगल्स पर पोस्टुरल ड्रेनेज के जरिए फेफड़ों को साफ रखकर एक सामान्य और स्वस्थ जीवन जिया जा सकता है। याद रखें, बलगम का शरीर से बाहर निकलना इन्फेक्शन को रोकने की पहली सीढ़ी है।

यदि आप गुजरात (अहमदाबाद, सूरत या वस्त्रात जीआईडीसी) क्षेत्र में हैं, तो ब्रोंकिएक्टेसिस के प्रभावी प्रबंधन और व्यक्तिगत फिजियोथेरेपी प्लान के लिए आप समर्पण फिजियोथेरेपी क्लिनिक में डॉ. नितेश पटेल से संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा, जो मरीज दूर हैं, उनके लिए हम टेली-रिहैबिलिटेशन (Tele-rehabilitation) की सुविधा भी प्रदान करते हैं।

वीडियो के माध्यम से सीखने के लिए: पोस्टुरल ड्रेनेज के इन एंगल्स को प्रैक्टिकली कैसे सेट करना है, यह देखने के लिए हमारे यूट्यूब चैनल “फिजियोथेरेपी जानकारी हिन्दी में” को सब्सक्राइब करें और हमारी वेबसाइट physiotherapyhindi.in पर विजिट करते रहें।

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