मैस्टेक्टॉमी (स्तन कैंसर सर्जरी) के बाद कंधे के जोड़ को जाम होने (Frozen Shoulder) से रोकना
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मैस्टेक्टॉमी (स्तन कैंसर सर्जरी) के बाद कंधे के जोड़ को जाम होने (Frozen Shoulder) से रोकना: एक विस्तृत फिजियोथेरेपी गाइड

स्तन कैंसर (Breast Cancer) का उपचार एक लंबी और चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया है। मैस्टेक्टॉमी (Mastectomy) या लम्पेक्टॉमी (Lumpectomy) जैसी सर्जरी जीवन रक्षक होती हैं, लेकिन इनके बाद शरीर को ठीक होने में समय लगता है। इस रिकवरी के दौरान मरीजों को जिस सबसे आम लेकिन कष्टदायक समस्या का सामना करना पड़ता है, वह है कंधे का जाम होना या ‘फ्रोजन शोल्डर’ (Frozen Shoulder)।

सर्जरी के बाद दर्द और डर के कारण कई महिलाएं अपने हाथ और कंधे का मूवमेंट कम कर देती हैं। मूवमेंट की इस कमी, चीरे के घाव (Scar tissue), और कई बार रेडिएशन थेरेपी के कारण कंधे के जोड़ के आसपास के ऊतक (Tissues) सिकुड़ने और कड़े होने लगते हैं। यदि समय रहते सही फिजियोथेरेपी और व्यायाम शुरू न किया जाए, तो यह स्थिति एक गंभीर फ्रोजन शोल्डर (एडहेसिव कैप्सुलिटिस) का रूप ले सकती है।

इस लेख में, हम विस्तार से समझेंगे कि मैस्टेक्टॉमी के बाद कंधा क्यों जाम होता है, इसके शुरुआती लक्षण क्या हैं, और इसे रोकने के लिए कौन से सुरक्षित और प्रभावी कदम उठाए जा सकते हैं।


मैस्टेक्टॉमी के बाद कंधा जाम क्यों होता है?

सर्जरी के बाद कंधे में जकड़न के कई मुख्य कारण होते हैं:

  1. दर्द के कारण बचाव (Guarding due to Pain): सर्जरी के बाद सीने और कांख (Axilla) के आसपास दर्द होना स्वाभाविक है। इस दर्द से बचने के लिए मरीज अनजाने में अपने हाथ को शरीर से सटा कर रखते हैं। लंबे समय तक एक ही स्थिति में रहने से कंधे का जोड़ जाम होने लगता है।
  2. लिम्फ नोड हटाना (Lymph Node Dissection): स्तन कैंसर की सर्जरी के दौरान अक्सर कांख से लिम्फ नोड्स (Axillary lymph nodes) भी निकाले जाते हैं। इससे उस हिस्से की मांसपेशियां और नसें संवेदनशील हो जाती हैं और स्कार टिश्यू (घाव भरने के बाद बनने वाले कड़े ऊतक) का निर्माण होता है, जो कंधे की गति को सीमित करता है।
  3. स्कार टिश्यू (Scar Tissue): जब शरीर सर्जरी के घाव को भरता है, तो वहां स्कार टिश्यू बनता है। यह सामान्य त्वचा या मांसपेशियों जितना लचीला नहीं होता, जिसके कारण हाथ ऊपर उठाने या पीछे ले जाने में खिंचाव और दर्द महसूस होता है।
  4. रेडिएशन थेरेपी (Radiation Therapy): यदि सर्जरी के बाद रेडिएशन थेरेपी दी जाती है, तो यह त्वचा और मांसपेशियों में फाइब्रोसिस (कड़ापन) पैदा कर सकती है, जिससे जकड़न और बढ़ जाती है।

कंधे के जाम होने (Frozen Shoulder) के शुरुआती लक्षण

फ्रोजन शोल्डर अचानक नहीं होता; यह धीरे-धीरे विकसित होता है। इसके शुरुआती लक्षणों को पहचानना बहुत जरूरी है:

  • हाथ को सिर के ऊपर ले जाने में (जैसे कंघी करने में) मुश्किल होना।
  • पीठ के पीछे हाथ ले जाने में (जैसे ब्रा का हुक लगाने में) तेज दर्द होना।
  • कंधे में एक मीठा-मीठा और लगातार दर्द रहना, जो रात में या उस करवट सोने पर बढ़ जाता है।
  • सीने और कांख की त्वचा में अत्यधिक कसाव महसूस होना।

रिकवरी के चरण: कब और कैसे शुरू करें व्यायाम?

कंधे को जाम होने से बचाने का सबसे प्रभावी तरीका है—सही समय पर सही मूवमेंट। हालांकि, कोई भी व्यायाम शुरू करने से पहले अपने सर्जन या फिजियोथेरेपिस्ट से अनुमति लेना अनिवार्य है। रिकवरी को हम मुख्य रूप से तीन चरणों में बांट सकते हैं:

चरण 1: सर्जरी के तुरंत बाद (पहले 1 से 7 दिन)

इस दौरान मुख्य उद्देश्य दर्द को नियंत्रित करना और रक्त संचार को बढ़ाना है। इस समय कंधे का भारी मूवमेंट नहीं करना चाहिए।

  • डीप ब्रीदिंग (Deep Breathing): गहरी सांस लेने से सीने की मांसपेशियां फैलती हैं। दिन में 5-6 बार गहरी सांसें लें।
  • हैंड पंप (Hand Pump): अपनी मुट्ठी को बार-बार खोलें और बंद करें। इससे सूजन कम होती है।
  • कोहनी और कलाई के व्यायाम (Elbow and Wrist Exercises): अपनी कोहनी को मोड़ें और सीधा करें। कलाई को गोल-गोल घुमाएं।
  • शोल्डर श्रग्स (Shoulder Shrugs): धीरे-धीरे अपने कंधों को कानों की तरफ उचकाएं और फिर आराम से नीचे छोड़ दें।

चरण 2: सर्जिकल ड्रेन हटने के बाद (1 से 3 सप्ताह)

जब डॉक्टर आपके सर्जिकल ड्रेन (पाइप) हटा देते हैं, तब आप धीरे-धीरे कंधे की मोबिलिटी (Mobility) पर काम शुरू कर सकते हैं।

  • पेंडुलम एक्सरसाइज (Pendulum Exercise): * एक मेज के सहारे सही हाथ से झुक कर खड़े हो जाएं।
    • सर्जरी वाले हाथ को गुरुत्वाकर्षण (Gravity) के सहारे नीचे लटकने दें।
    • अब अपने शरीर को हल्का सा हिलाकर लटकते हुए हाथ को आगे-पीछे, दाएं-बाएं और छोटे गोल घेरे में घुमाएं। ध्यान रहे, जोर कंधे से नहीं, शरीर के मूवमेंट से आना चाहिए।
  • वैंड या स्टिक एक्सरसाइज (Wand/Stick Exercise):
    • दोनों हाथों में एक हल्की छड़ी (जैसे झाड़ू का डंडा या पीवीसी पाइप) पकड़ें।
    • लेटकर या बैठकर, अपने स्वस्थ हाथ की मदद से छड़ी को ऊपर की ओर धकेलें, ताकि सर्जरी वाले हाथ को बिना ज्यादा जोर लगाए ऊपर उठने में मदद मिले।

चरण 3: एडवांस्ड स्ट्रेचिंग और मजबूती (3 से 6 सप्ताह और उसके बाद)

इस चरण में आपका लक्ष्य कंधे की पूरी रेंज (Full Range of Motion) वापस पाना होता है।

  • वॉल क्लाइम्बिंग (Wall Climbing):
    • दीवार की तरफ मुंह करके खड़े हो जाएं।
    • सर्जरी वाले हाथ की उंगलियों को दीवार पर रखें और धीरे-धीरे उंगलियों की मदद से हाथ को ऊपर की तरफ ले जाएं (जैसे मकड़ी दीवार पर चढ़ती है)।
    • जब हल्का खिंचाव महसूस हो, वहां कुछ सेकंड रुकें और फिर उंगलियों की मदद से ही हाथ नीचे लाएं।
  • चेस्ट स्ट्रेच (कॉर्नर स्ट्रेच):
    • कमरे के एक कोने में खड़े हो जाएं। दोनों हाथों को सामने की दोनों दीवारों पर कंधे की ऊंचाई पर रखें।
    • धीरे-धीरे अपने सीने को कोने की तरफ आगे झुकाएं। इससे आपके सीने की मांसपेशियों (Pectorals) में अच्छा स्ट्रेच आएगा, जो सर्जरी के कारण सिकुड़ गई हैं।
  • शोल्डर ब्लेड स्क्वीज़ (Shoulder Blade Squeeze):
    • सीधे बैठें। अपनी दोनों शोल्डर ब्लेड्स (कंधे के पीछे की हड्डियों) को एक साथ पीछे की तरफ खींचें, जैसे आप उनके बीच में कोई पेन दबाने की कोशिश कर रहे हों। 5 सेकंड रोकें और छोड़ दें।

एर्गोनॉमिक्स: दैनिक जीवन और काम के दौरान सावधानियां

अक्सर क्लिनिकल प्रैक्टिस में यह देखा जाता है कि मरीज व्यायाम तो कर लेते हैं, लेकिन दिनभर उनके उठने-बैठने का तरीका (Ergonomics) गलत होता है, जिससे कंधे पर दबाव पड़ता है।

  1. सोने की सही स्थिति: सोते समय सर्जरी वाले हिस्से पर दबाव न डालें। पीठ के बल सोएं और सर्जरी वाले हाथ के नीचे एक मुलायम तकिया रखें ताकि हाथ को सहारा मिले और वह शरीर से थोड़ा ऊपर उठा रहे।
  2. कुर्सी पर बैठना: यदि आप ऑफिस का काम कर रहे हैं या लंबे समय तक बैठते हैं, तो अपनी कुर्सी के आर्मरेस्ट (Armrest) का उपयोग करें। हाथ को हवा में लटकने न दें, क्योंकि इससे कंधे की मांसपेशियों पर खिंचाव पड़ता है।
  3. वजन उठाना: जब तक डॉक्टर अनुमति न दे, सर्जरी वाले हाथ से कोई भी भारी सामान (जैसे पानी की बाल्टी, भारी बैग या बच्चे) न उठाएं।
  4. घरेलू काम: शुरुआत में ऐसे कामों से बचें जिनमें हाथ को लंबे समय तक सिर के ऊपर रखना पड़े (जैसे पंखा साफ करना या ऊंचे शेल्फ से सामान निकालना)।

लिम्फेडेमा (Lymphedema) और फ्रोजन शोल्डर के बीच का अंतर

कई बार मरीज हाथ में भारीपन या सूजन को फ्रोजन शोल्डर समझ लेते हैं, जबकि वह लिम्फेडेमा हो सकता है। लिम्फ नोड्स निकाले जाने के कारण लिम्फेटिक द्रव (Lymphatic fluid) के जमा होने से हाथ में सूजन आ जाती है, जिसे लिम्फेडेमा कहते हैं।

  • फ्रोजन शोल्डर में मुख्य समस्या दर्द और जकड़न (Stiffness) होती है।
  • लिम्फेडेमा में मुख्य समस्या सूजन (Swelling) और भारीपन होती है। यदि आपको अपने हाथ या उंगलियों में सूजन दिखाई दे, तो तुरंत अपने डॉक्टर या लिम्फेडेमा विशेषज्ञ फिजियोथेरेपिस्ट से संपर्क करें।

एक पेशेवर फिजियोथेरेपिस्ट की भूमिका

इंटरनेट या यूट्यूब वीडियो देखकर व्यायाम करना जानकारी के लिए अच्छा है, लेकिन हर मरीज की रिकवरी अलग होती है। सर्जरी का प्रकार, निकाले गए लिम्फ नोड्स की संख्या, और मरीज की उम्र के अनुसार उपचार की योजना बदल जाती है।

एक विशेषज्ञ फिजियोथेरेपिस्ट आपके कंधे का सही बायोमैकेनिकल (Biomechanical) आकलन करता है। वे न केवल आपको सही व्यायाम सिखाते हैं, बल्कि मायोफेशियल रिलीज़ (Myofascial Release) और मैनुअल थेरेपी जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग करके स्कार टिश्यू को नरम करने और जकड़न को खोलने में मदद करते हैं। दर्द ज्यादा होने पर कुछ क्लिनिकल मशीनों (जैसे TENS या लेज़र) का सुरक्षित उपयोग भी किया जा सकता है।


निष्कर्ष

मैस्टेक्टॉमी के बाद कंधे को जाम होने से बचाना पूरी तरह से संभव है। इसके लिए निरंतरता (Consistency), धैर्य और सही मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है। दर्द से घबराकर हाथ को बिल्कुल स्थिर कर लेना सबसे बड़ी गलती है। शुरुआत में हल्का दर्द और खिंचाव होना सामान्य है, लेकिन अगर दर्द असहनीय हो जाए तो व्यायाम रोक दें। अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहें, सही एर्गोनॉमिक्स अपनाएं और नियमित रूप से अपनी स्ट्रेचिंग करते रहें।

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