टेनिस एल्बो और गोल्फर एल्बो: क्रिकेट और रैकेट स्पोर्ट्स खेलने वालों के लिए दर्द निवारण
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टेनिस एल्बो और गोल्फर एल्बो: क्रिकेट और रैकेट स्पोर्ट्स खेलने वालों के लिए दर्द निवारण

खेलकूद हमारे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद जरूरी है। भारत में क्रिकेट का जुनून किसी से छिपा नहीं है, वहीं टेनिस, बैडमिंटन और स्क्वैश जैसे रैकेट स्पोर्ट्स भी फिटनेस के प्रति जागरूक लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हैं। लेकिन, इन खेलों को खेलते समय शरीर के कुछ हिस्सों पर लगातार दबाव पड़ता है, जिससे चोट लगने का खतरा बना रहता है। ऐसी ही दो सबसे आम और परेशान करने वाली चोटें हैं – टेनिस एल्बो (Tennis Elbow) और गोल्फर एल्बो (Golfer’s Elbow)

भले ही इनके नाम टेनिस और गोल्फ से जुड़े हों, लेकिन ये समस्याएँ क्रिकेटरों, बैडमिंटन खिलाड़ियों और यहां तक कि आम लोगों को भी हो सकती हैं। आइए इस लेख में विस्तार से समझते हैं कि ये बीमारियां क्या हैं, क्रिकेट और रैकेट स्पोर्ट्स खेलने वालों को ये क्यों होती हैं, और इनसे बचाव व दर्द निवारण के अचूक उपाय क्या हैं।


टेनिस एल्बो (Lateral Epicondylitis) क्या है?

टेनिस एल्बो को चिकित्सकीय भाषा में ‘लेटरल एपिकॉन्डिलाइटिस’ (Lateral Epicondylitis) कहा जाता है। यह कोहनी के बाहरी हिस्से में होने वाला एक दर्दनाक विकार है।

हमारी कोहनी के बाहरी हिस्से में एक हड्डी का उभार होता है, जिसे लेटरल एपिकॉन्डील कहते हैं। जो टेंडन (मांसपेशियों को हड्डी से जोड़ने वाले ऊतक) हमारी कलाई और उंगलियों को सीधा करने (Extension) का काम करते हैं, वे इसी उभार से जुड़े होते हैं। जब इन टेंडन्स पर बार-बार दबाव पड़ता है या उनका अति प्रयोग (Overuse) होता है, तो उनमें सूक्ष्म दरारें (Micro-tears) आ जाती हैं और सूजन पैदा हो जाती है।

मुख्य लक्षण:

  • कोहनी के बाहरी हिस्से में हल्का या तेज दर्द।
  • दर्द का कोहनी से नीचे कलाई की ओर (Forearm) फैलना।
  • किसी वस्तु को पकड़ने (Grip) में कमजोरी महसूस होना (जैसे – कॉफी का मग उठाना या दरवाजा खोलना)।
  • कलाई को पीछे की ओर मोड़ने पर दर्द का बढ़ जाना।

गोल्फर एल्बो (Medial Epicondylitis) क्या है?

गोल्फर एल्बो को ‘मिडियल एपिकॉन्डिलाइटिस’ (Medial Epicondylitis) के नाम से जाना जाता है। टेनिस एल्बो के विपरीत, यह कोहनी के अंदरूनी हिस्से को प्रभावित करता है।

कोहनी के अंदरूनी हिस्से में मौजूद हड्डी के उभार (Medial Epicondyle) से वे टेंडन जुड़े होते हैं, जो कलाई को नीचे की ओर मोड़ने (Flexion) और उंगलियों से मुट्ठी भींचने में मदद करते हैं। बार-बार कलाई को मोड़ने या झटके के साथ किसी चीज़ को खींचने/फेंकने से इन टेंडन्स में सूजन और दर्द शुरू हो जाता है।

मुख्य लक्षण:

  • कोहनी के अंदरूनी हिस्से में दर्द और संवेदनशीलता (Tenderness)।
  • दर्द का बांह के अंदरूनी हिस्से से होते हुए उंगलियों तक पहुंचना।
  • हाथ मिलाने या किसी चीज़ को मजबूती से पकड़ने में दर्द।
  • कलाई को आगे की ओर (नीचे की तरफ) मोड़ने पर तेज दर्द।

टेनिस एल्बो और गोल्फर एल्बो: एक तुलनात्मक नजर

नीचे दी गई तालिका इन दोनों स्थितियों के बीच मुख्य अंतर को स्पष्ट करती है:

विशेषताटेनिस एल्बो (Tennis Elbow)गोल्फर एल्बो (Golfer’s Elbow)
चिकित्सीय नामलेटरल एपिकॉन्डिलाइटिसमिडियल एपिकॉन्डिलाइटिस
प्रभावित क्षेत्रकोहनी का बाहरी हिस्साकोहनी का अंदरूनी हिस्सा
प्रभावित मांसपेशियांकलाई को सीधा करने वाली (Extensors)कलाई को मोड़ने वाली (Flexors)
दर्द ट्रिगर करने वाले मूवमेंटबैकहैंड शॉट मारना, कलाई को पीछे की ओर घुमानाफोरहैंड शॉट मारना, कलाई को आगे की ओर झटका देना, गेंद फेंकना
आम रोजमर्रा के काम में दिक्कतदरवाजा खोलने, तौलिया निचोड़ने मेंभारी बैग उठाने, हाथ मिलाने में

क्रिकेट और रैकेट स्पोर्ट्स खिलाड़ियों को यह क्यों होता है?

1. क्रिकेट (Cricket) में प्रभाव

क्रिकेट एक ऐसा खेल है जिसमें कलाई और कोहनी का बहुत अधिक और आक्रामक उपयोग होता है।

  • बल्लेबाजी (Batting): जब कोई बल्लेबाज आक्रामक शॉट (जैसे- कवर ड्राइव या पुल शॉट) खेलता है, तो बल्ले के हैंडल पर कलाई का बहुत ज़ोर पड़ता है। बॉटम हैंड (निचला हाथ) के ज्यादा इस्तेमाल से गोल्फर एल्बो का खतरा रहता है, जबकि टॉप हैंड (ऊपरी हाथ) के झटके से टेनिस एल्बो हो सकता है।
  • गेंदबाजी (Bowling): तेज गेंदबाजों को अपनी कलाई को ‘लॉक’ करना पड़ता है और फिर गेंद छोड़ते समय झटका (Snap) देना होता है। यह झटकेदार गतिविधि कोहनी के अंदरूनी टेंडन्स पर भारी दबाव डालती है (गोल्फर एल्बो)। स्पिनर्स को भी गेंद को स्पिन कराने के लिए उंगलियों और कलाई का अत्यधिक उपयोग करना पड़ता है।
  • फील्डिंग (Fielding): बाउंड्री लाइन से गेंद को तेजी से विकेटकीपर तक थ्रो करने की प्रक्रिया में कोहनी पर अत्यधिक तनाव (Valgus stress) पड़ता है, जो गोल्फर एल्बो का एक प्रमुख कारण है।

2. रैकेट स्पोर्ट्स (टेनिस, बैडमिंटन, स्क्वैश)

  • गलत तकनीक: टेनिस में खराब बैकहैंड तकनीक (जहां कंधे की बजाय कलाई का ज्यादा इस्तेमाल होता है) टेनिस एल्बो का सबसे बड़ा कारण है। वहीं, फोरहैंड और सर्व (Serve) में अत्यधिक ताकत लगाने से गोल्फर एल्बो हो सकता है।
  • उपकरण (Equipment): रैकेट का ग्रिप साइज अगर बहुत बड़ा या बहुत छोटा है, तो खिलाड़ी को उसे पकड़ने के लिए अतिरिक्त ताकत लगानी पड़ती है। इसके अलावा, रैकेट की स्ट्रिंग (तार) बहुत ज्यादा कसी हुई (High Tension) होने पर गेंद के टकराने का सारा कंपन (Vibration) सीधे कोहनी तक पहुंचता है।
  • बैडमिंटन के स्मैश: बैडमिंटन में लगातार स्मैश (Smash) मारने के लिए कलाई का जो ‘स्नैप’ इस्तेमाल होता है, वह कोहनी के टेंडन्स को थका देता है।

दर्द निवारण और इलाज (Treatment and Relief)

अगर आप भी इन खेलों के शौकीन हैं और कोहनी के दर्द से जूझ रहे हैं, तो इसे नजरअंदाज करना स्थिति को और बिगाड़ सकता है। इसे ठीक करने के लिए बहु-आयामी (Multi-disciplinary) दृष्टिकोण की आवश्यकता होती है:

1. प्राथमिक उपचार (R.I.C.E. Therapy)

किसी भी खेल चोट के शुरुआती चरण में R.I.C.E. विधि सबसे कारगर होती है:

  • Rest (आराम): उस गतिविधि को तुरंत रोक दें जिससे दर्द हो रहा है। टेंडन को ठीक होने के लिए समय चाहिए।
  • Ice (बर्फ): सूजन और दर्द को कम करने के लिए हर 3-4 घंटे में 15-20 मिनट के लिए कोहनी पर बर्फ की सिकाई करें। (बर्फ को सीधे त्वचा पर न लगाएं, कपड़े में लपेट कर लगाएं)।
  • Compression (संपीड़न): एल्बो स्ट्रैप या कम्प्रेशन बैंडेज का उपयोग करें। यह मांसपेशियों पर पड़ने वाले दबाव को कम करता है।
  • Elevation (ऊंचाई): लेटते समय कोहनी को तकिए के सहारे दिल के स्तर से ऊपर रखें ताकि सूजन कम हो सके।

2. दवाइयां और मेडिकल उपाय

  • NSAIDs: डॉक्टर की सलाह पर नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाएं (जैसे इबुप्रोफेन) ली जा सकती हैं।
  • स्टेरॉयड इंजेक्शन: यदि दर्द बहुत गंभीर है और कई हफ्तों तक ठीक नहीं होता है, तो डॉक्टर कोहनी में कॉर्टिकोस्टेरॉइड इंजेक्शन दे सकते हैं।
  • पीआरपी (PRP) थेरेपी: आजकल ‘प्लेटलेट रिच प्लाज्मा’ थेरेपी काफी लोकप्रिय है। इसमें मरीज का ही खून लेकर उसमें से प्लेटलेट्स अलग किए जाते हैं और चोटिल जगह पर इंजेक्ट किए जाते हैं, जो हीलिंग को तेज करता है।
  • शॉकवेव थेरेपी और सर्जरी: बहुत ही दुर्लभ और गंभीर मामलों में (जब 6-12 महीने तक कोई आराम न मिले) सर्जरी की आवश्यकता पड़ सकती है।

3. स्ट्रेचिंग और रिहैबिलिटेशन एक्सरसाइज

दर्द कम होने के बाद, मांसपेशियों को फिर से मजबूत करना जरूरी है ताकि चोट दोबारा न लगे। (ध्यान दें: ये व्यायाम दर्द रहित सीमा में ही करें)

  • रिस्ट फ्लेक्सर स्ट्रेच (Wrist Flexor Stretch): अपने हाथ को सीधा आगे की ओर फैलाएं, हथेली ऊपर की ओर रखें। दूसरे हाथ से उंगलियों को पकड़ें और नीचे की तरफ अपनी ओर खींचें। 15-30 सेकंड तक रोकें। (यह गोल्फर एल्बो में फायदेमंद है)।
  • रिस्ट एक्सटेंसर स्ट्रेच (Wrist Extensor Stretch): हाथ को सीधा आगे फैलाएं, इस बार हथेली नीचे की ओर रखें। दूसरे हाथ से उंगलियों को अपनी ओर दबाएं। (यह टेनिस एल्बो के लिए है)।
  • तौलिया निचोड़ना (Towel Twist): एक तौलिए को दोनों हाथों से पकड़ें और उसे इस तरह मरोड़ें जैसे आप पानी निचोड़ रहे हों। इसे दोनों दिशाओं में करें। यह बांह (forearm) की मांसपेशियों को मजबूत करता है।
  • इसेंट्रिक एक्सरसाइज (Eccentric Exercises): 1-2 किलो का हल्का डम्बल या पानी की बोतल लें। कलाई को मेज के किनारे पर रखें। हाथ से वजन को धीरे-धीरे नीचे की ओर ले जाएं, और फिर दूसरे हाथ की मदद से उसे वापस ऊपर लाएं।

रोकथाम (Prevention): भविष्य में चोट से कैसे बचें?

इलाज से बेहतर बचाव है। अपनी खेल दिनचर्या में कुछ बदलाव करके आप इन दर्दनाक स्थितियों से बच सकते हैं:

  1. उपकरणों में सुधार: * टेनिस/बैडमिंटन: अपने कोच या विशेषज्ञ से पूछकर सही वजन और सही ‘ग्रिप साइज’ (Grip Size) वाला रैकेट चुनें। बहुत भारी या बहुत टाइट स्ट्रिंग वाले रैकेट से बचें।
    • क्रिकेट: सही वजन का बल्ला इस्तेमाल करें। अगर बल्ला बहुत भारी है, तो शॉट खेलते समय कोहनी पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।
  2. तकनीक पर काम करें:
    • खराब फॉर्म चोट का सीधा निमंत्रण है। एक पेशेवर कोच की मदद लें और अपने स्ट्रोक्स, थ्रोइंग तकनीक और गेंदबाजी एक्शन को सुधारे।
  3. वार्म-अप और कूल-डाउन:
    • मैदान पर उतरने से पहले कम से कम 10 मिनट वार्म-अप करें। बांह, कलाई और कोहनी की डायनामिक स्ट्रेचिंग करें। खेलने के बाद स्टेटिक स्ट्रेचिंग (Static Stretching) से मांसपेशियों को रिलैक्स करें।
  4. स्ट्रेंथ ट्रेनिंग:
    • केवल खेल पर निर्भर न रहें। जिम में या घर पर अपने फोरआर्म्स (Forearms), कंधों (Shoulders) और कोर (Core) की मांसपेशियों को मजबूत करने वाले व्यायाम करें। मजबूत मांसपेशियां टेंडन्स पर पड़ने वाले झटके को खुद सह लेती हैं।
  5. ब्रेक लें:
    • अति-प्रयोग (Overuse) इन बीमारियों का मुख्य कारण है। अपने शरीर की सुनें। यदि हल्का दर्द या थकान महसूस हो रही है, तो खेलने से छुट्टी लें।

निष्कर्ष

टेनिस एल्बो और गोल्फर एल्बो, दोनों ही ऐसी स्थितियां हैं जो किसी भी खिलाड़ी के आत्मविश्वास और प्रदर्शन को बुरी तरह प्रभावित कर सकती हैं। क्रिकेट और रैकेट स्पोर्ट्स जैसे उच्च-तीव्रता वाले खेलों में लगातार बांह और कलाई का उपयोग इन चोटों के जोखिम को बढ़ाता है।

हालांकि, सही जानकारी, उचित तकनीक, और समय रहते लक्षणों को पहचान कर आप न केवल इस दर्द से राहत पा सकते हैं, बल्कि भविष्य में इन्हें होने से भी रोक सकते हैं। यदि दर्द आराम करने और बर्फ की सिकाई के बाद भी 2-3 सप्ताह से अधिक समय तक बना रहता है, तो तुरंत किसी ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ या स्पोर्ट्स फिजियोथेरेपिस्ट से संपर्क करें। स्वस्थ रहें, सुरक्षित रहें और खेल का पूरा आनंद लें!

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